Wednesday, April 15, 2015

|||||||| “ये ही सत्य हैं” ||||||| प्र०→ जीवन का उद्देश्य क्या है ? उत्तर→ जीवन का...

|||||||| “ये ही सत्य हैं” |||||||


प्र०→ जीवन का उद्देश्य क्या है ?

उत्तर→ जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!




प्र०→ जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ?

उत्तर→ जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!




प्र०→संसार में दुःख क्यों है ?

उत्तर→लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!




प्र०→ ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?

उत्तर→ ईश्वर ने संसारकी रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!




प्र०→ क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?

उत्तर→ कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में ‘ईश्वर’ कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!




प्र०→ भाग्य क्या है ?

उत्तर→हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!




प्र०→ इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?

उत्तर→ रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..

इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!




प्र०→किस चीज को गंवाकर मनुष्य

धनी बनता है ?

उत्तर→ लोभ..!!




प्र०→ कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है?

उत्तर→ अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है..!!




प्र० → किस चीज़ के खो जाने

पर दुःख नहीं होता ?

उत्तर→ क्रोध..!!




प्र०→ धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है ?

उत्तर → दया..!!




प्र०→क्या चीज़ दुसरो को नहीं देनी चाहिए ?

उत्तर→ तकलीफें, धोखा..!!




प्र०→ क्या चीज़ है, जो दूसरों से कभी भी नहीं लेनी चाहिए ?

उत्तर→ इज़्ज़त, किसी की हाय..!!




प्र०→ ऐसी चीज़ जो जीवों से सब कुछ करवा सकती है ?

उत्तर→मज़बूरी..!!




प्र०→ दुनियां की अपराजित चीज़ ?

उत्तर→ सत्य..!!




प्र०→ दुनियां में सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ ?

उत्तर→ झूठ..!!




प्र०→ करने लायक सुकून का

कार्य ?

उत्तर→ परोपकार..!!




प्र०→ दुनियां की सबसे बुरी लत ?

उत्तर→ मोह..!!




प्र०→ दुनियां का स्वर्णिम स्वप्न ?

उत्तर→ जिंदगी..!!




प्र०→ दुनियां की अपरिवर्तनशील चीज़ ?

उत्तर→ मौत..!!




प्र०→ ऐसी चीज़ जो स्वयं के भी समझ ना आये ?

उत्तर→ अपनी मूर्खता..!!




प्र०→ दुनियां में कभी भी नष्ट/ नश्वर न होने वाली चीज़ ?

उत्तर→ आत्मा और ज्ञान..!!




प्र०→ कभी न थमने


वाली चीज़ ?

उत्तर→ समय

इसलिए कर्म करो जिसके लिए ईश्वर ने तुम्हे पैदा किया।

कृवन्तो विश्वमार्यम्




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हे प्रभु हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर ले चलो हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो हमें क्रोध से शांन्ती की...

हे प्रभु

हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर ले चलो

हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो

हमें क्रोध से शांन्ती की ओर ले चलो

हमें शत्रुता से मित्रता की ओर ले चलो

हमें निराशा से आशा की ओर ले चलो

हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले चलो

हमें असंतोष से संतोष की ओर ले चलो

हमें मृत्यु से ज़िंदगी की ओर ले चलो

हमे बैचेनी से बंदगी की ओर ले चलो

हमें आतंक से विश्वास की ओर ले चलो

हमें जगत से ब्रह्माण्ड की ओर ले चलो




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Tuesday, April 14, 2015

“ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत्. तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्य स्विध्दनम्.” इस जग में...

“ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत्. तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्य स्विध्दनम्.”

इस जग में जो कुछ भी है, गतिहीन या गतिमान, हर चीज में ईश्वर का वास है, संपूर्ण प्रकृति ईश्वरमय है। इन सब का त्याग कर के सुख भोगो और पराये धन से अनुराग मत करो। ईशावास्योपनिषद




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Monday, April 13, 2015

विज्ञान तो कुरान मे है- एक मुल्ला कुमार परीक्षा देने कमरे मे पहुँचा..प्रश्नपत्र मिल गया था.मुल्ला...

विज्ञान तो कुरान मे है-

एक मुल्ला कुमार परीक्षा देने कमरे मे पहुँचा..प्रश्नपत्र मिल गया था.मुल्ला इसी वर्ष विश्वविद्यालय मे एड्मिशन लिया था.इसके पहले वह मदरसा मे पढा था..प्रश्न भूगोल का था.कुछ प्रश्न खगोल विज्ञान का था.

प्रश्न-१-पृथ्वी की परिधी कितनी है?

प्रश्न-२-सूर्य रात को क्यो नही दिखायी देता है?

प्रश्न-३-बुध ग्रह धरती से कितनी दूर है?

मुल्ला'ब्रिलियंट'था.. मुल्ला ने आगे का प्रश्न नही पढा..और जोर जोरचिल्लाने लगा कि तुम लोग हमारे अल्लाह का अपमान कर रहे हो.कुरान मे जो लिखा गया है..तुम लोग उसके विरुद्ध प्रश्न पुछ रहे हो.कहा.धरती चपटी है.ये कुरान मे लिखा है.चपटी है तो उसकी परिधी कैसे आयेगी.सूरज रात को अल्लाह के सिहासन के निचे छुप जाता है.इसलिये दिखायी नही देता है.हमारा अल्लाह सब जानता है उससे कुछ छुपा नहीँ है..बुध ग्रह नही होता है..इतने मे कक्ष निरीक्षक ने कहा अबे गधे,अक्ल के ढक्कनतब जा तू अपने मदरसे मे.ये हिन्दू विज्ञानहै..यहाँ क्या करने आया है..तेरा कुरान लिखने वाला जहा से पढा था वही से तू भी पढ ले !!




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भगवान सेकुलरों को कासमीर मे हिन्दू बना के पैदा करे.. पैदा होते ही मुल्ले उनको उठाकार दीवार पर फेंककर...

भगवान सेकुलरों को कासमीर मे हिन्दू बना के पैदा करे.. पैदा होते ही मुल्ले उनको उठाकार दीवार पर फेंककर मारे और सकुलर का अंत कर दें..,सेकुलर की गर्दन को तार से लपेटकर आपका कत्ल कर दिया जाय.. और वह सब हो..जो मुल्ले हिन्दुओं के साथ करते आ रहे हैं.. क्योंकि सेकुलर की नज़र मे वही ठीक भी होगा तब..?




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Sunday, April 12, 2015

।।ओ३म्।।त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः। उत द्विषो मर्त्यस्य।। ।।सामवेद १/६।। हे प्रभो आप...

।।ओ३म्।।त्वं नो अग्ने महोभिः पाहि विश्वस्या अरातेः। उत द्विषो मर्त्यस्य।।

।।सामवेद १/६।।

हे प्रभो आप हमें अदान की भावना से और द्वेष आदि भावनाओं से अपनी तेजस्विता के द्वारा बचाओ। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। मनुष्य के सामाजिक जीवन में दो बडे दोष आजाते है। एक अदान की भावना और दुसरा द्वेष भावना। यदि मनुष्य में देने की वॄत्ति न हो तो किसीभी सामाजिक कार्य का होना सम्भव नहीं होगा। क्योंकि सारी ही सामाजिक उन्नति दान की वॄत्ति पर ही निर्भर है। जिस प्रकार अदान की वॄत्ति मानवसभ्यता की सामाजिक उन्नति के लिए घातक है उसी प्रकार द्वेष की वॄत्ति भी मानव सभ्यता की सामाजिक उन्नति के लिए घातक है।द्वेषवश मनुष्य की शक्ति अपने व मानवसमाज के उत्थान में न लगकर दुसरों के पतन में लगती है। द्वेषवश हम एक-दुसरे से प्रिती न कर वैर ठान लेते है। इसलिए हे प्रभु आपकी तेजस्विता से हमारे इन दुर्गुणों को नष्ट कर दीजिए, ताकि हम खुब दान देनेवाले तथा किसीका द्वेष न करके सुखों का सेचन करनेवाले बनें। तभी हम मानव समाज व राष्ट्र को स्वर्ग बना सकेंगे।




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"प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टांत, सिद्धांत, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद"

“प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टांत, सिद्धांत, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद”

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भारत सरकार के बाद इस देश में भूमि का सबसे बड़ा अकेला मालिक है “चर्च”। जी न्यूज़ पर चर्च के बारे में...

भारत सरकार के बाद इस देश में भूमि का सबसे बड़ा अकेला मालिक है “चर्च”।

जी न्यूज़ पर चर्च के बारे में एक सर्वेक्षण हुआ है, जिसमें बताया गया है कि भारत सरकार के बाद इस देश में भूमि का सबसे बड़ा अकेला मालिक है “चर्च"! “चर्च” के पास इस समय समूचे भारत में 52 लाख करोड़ की भू-सम्पत्ति है। इसमें से लगभग 50 प्रतिशत ज़मीन उसके पास अंग्रेजों के समय से है,लेकिन बाकी की ज़मीन तमाम केन्द्र और राज्य सरकारों ने उसे धर्मस्व कार्य हेतु “दान” में दी है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि धर्म के नाम पर सबसे अधिक रक्तपात इस्लाम और ईसाई धर्मावलम्बियों द्वारा किया गया है। ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना,सेवा करने के लिये स्कूल और अस्पताल खोलना आदि चर्च के मुख्य काम हैं, लेकिन असल में इसका मकसद ईसाईयों की संख्या में वृद्धि करना होता है। गरीब,ज़रूरतमंद,अशिक्षित लोग इनके फ़ेंके हुए झाँसे में आ जाते हैं, रही-सही कसर भारी-भरकम पैसे और नौकरी का लालच पूरी कर देता है।

“चर्च” की सत्ता और धन-सम्पत्ति के अकूत भण्डार के बारे में जब-तब कई पुस्तकों और जर्नलों में प्रकाशित होता रहता है। भारत में चर्च फ़िलहाल “गलत” कारणों से चर्चा में है l ज़ाहिर है कि “धर्मान्तरण” के मामले को लेकर। इन घटनाओं पर “पोप” भी बहुत दुखी हैं.और उन्होंने भारत में अपने प्रतिनिधियों और भारत सरकार (इसे सोनिया गाँधी पढ़े) के समक्ष चिन्ता जताई है।

पोप का दुखी होना स्वाभाविक भी है l जिस “एकमात्र सच्चे धर्म” का जन्म 2014 वर्ष पहले समूची धरती से “विभिन्न गलत अवधारणाओं को मिटाने के लिये” हुआ था,उसकी सर्वत्र थू थू हो रही है। चर्च और पोप की सत्ता जिस “प्रोफ़ेशनल” तरीके से काम करती है, उसे देखकर.बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनियाँ भी शर्मा जायें। जिस तरह विशाल कम्पनियों में “बिजनेस प्लान” बनाया जाता है,ठीक उसी तरह रोम में ईसाई धर्म के प्रचार के लिये “वार-प्लान” बनाया जाता है।यह “योजनायें” विभिन्न देशों, विभिन्न क्षेत्रों, विभिन्न धर्मों के लिये अलग-अलग.होती हैं।इन सभी योजनाओं को “गहन मार्केटिंग रिसर्च” और विश्लेषण के बाद तैयार किया जाता है।जिस प्रकार एक कम्पनी अपने अगले आने वाले 25 वर्षों का एक “प्रोजेक्शन” तैयार करती है, उसी प्रकार इसे भी तैयार किया जाता है। ऐसा बताया जाता है कि वर्तमान में ऐसी 1590 योजनायें चल रही हैं जो कि सन्.2025 तक बढ़कर 3000 हो जायेंगी।सन् 2025 के “प्रोजेक्शन” के अनुसार बढ़ोतरी इस प्रकार की जाना है (यानी कि टारगेट यह दिया गया है) वर्तमान 35,500 ईसाई.संस्थायें बढ़कर 63,000, धर्म परिवर्तन के मामले 35 लाख से बढ़कर 53 लाख, 4,100 विभिन्न मिशनरी संस्थायें बढ़कर 6,000,,,, 56 लाख धर्म सेवकों की संख्या बढ़ाकर 65 लाख (पूरे यूरोप की समूची सेना से भी

ज्यादा संख्या) किया जाना है।वर्तमान में चर्च की कुल सम्पत्ति (भारत में)13,71,000 करोड़ है (जिसमें खाली पड़ी ज़मीन शामिल नहीं है)। यह राशि भारत के GDP का 60% से भी ज्यादा है,इसे भी बढ़ाकर 2025 तक 40,00,000 करोड़ किया जाना है !!




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मेरी संस्कृत खुदा की जबान है! प्रस्तुति: फरहाना ताज उर्फ मधु भाईजान युसूफ आशा है आप स्वस्थ...

मेरी संस्कृत खुदा की जबान है!

प्रस्तुति: फरहाना ताज उर्फ मधु

भाईजान युसूफ

आशा है आप स्वस्थ होंगे।

आपका ई-मेल पढ़कर मुझे एक बार फिर फेसबुक

के माध्यम से आपके सवाल का जवाब देना

ही होगा। आपने लिखा कि क्यों खुदा की

जबान अरबी छोड़कर शैतानों की जबान

संस्कृत पढ़ने लगी?

मैं आपको बता दूं कि संस्कृत अल्लाह की

पाक जबान है।

उदाहरण के तौर पर संस्कृत का हस्ति शब्द

लें, जो कि उर्दू आदि सभी इस्लामी

भाषाओं में हस्ती शब्द एक शक्तिशाली

व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत होता है।

तुम अरबी को खुदा की जबान बताते हो,

लेकिन…




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सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी परम दयालु परम कृपाल ईश्वर के होते हुए। पाखण्डी बाबाओ,...

सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वान्तर्यामी परम दयालु परम कृपाल ईश्वर के होते हुए। पाखण्डी बाबाओ, अवतारो,पीरों,फकीरों,तान्त्रिकों को महत्व देना अज्ञानता है,मूर्खता है।

ईश्वर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसी दलाल की आवश्यकता नहीं है ।पूर्ण पुरुषार्थ के उपरान्त आत्मकल्याण और जनकल्याण हेतु की गई प्रार्थना को ईश्वर स्वीकार करते हैं ।




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हमारा ऋग्वेद हमें बाँटकर खाने को कहता है ! हम जो अनाज खेतो में पैदा करते है उसका बटवारा तो देखिए 1,...

हमारा ऋग्वेद हमें बाँटकर खाने को कहता है !

हम जो अनाज खेतो में पैदा करते है उसका बटवारा तो देखिए

1, जमीन से चार अंगूल भूमि का,

2, गेहूँ के बाली के नीचे का पशूओ का,

3, पहले पेड़ की पहली बाली अग्नि की,

4, बाली से गेहूँ अलग करने पर मूठ्ठी भर दाना पंछियों का,

5, गेहूँ का आटा बनाने पर मूठ्ठी भर आटा चीटियों का फिर आटा गूथने के बात

6, चुटकी भर गूंथा आटा मछलियों का,

7, फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की और

8, पहली थाली घर के बूजूर्गो की और फिर हमारी और

9, आखरी रोटी कूत्ते की

ये हमे सिखाता है हमारा धर्म




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जितने भी लोग महाभारत को काल्पनिक बताते हैं…. उनके मुंह पर पर एक जोरदार तमाचा है आज का यह...

जितने भी लोग महाभारत को काल्पनिक बताते हैं…. उनके मुंह पर पर एक जोरदार तमाचा है आज का यह पोस्ट……

महाभारत के बाद से आधुनिक काल तक के सभी राजाओं का विवरण क्रमवार तरीके से नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है…!

आपको यह जानकर एक बहुत ही आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी होगी कि महाभारत युद्ध के पश्चात् राजा युधिष्ठिर की 30 पीढ़ियों ने 1770 वर्ष 11 माह 10 दिन तक राज्य किया था…..

जिसका पूरा विवरण इस प्रकार है-

क्र… शासक का नाम………………………वर्ष….माह.. दिन

1. राजा युधिष्ठिर (Raja Yudhisthir)….. 36…. 08…. 25

2 राजा परीक्षित (Raja Parikshit)…….. 60…. 00….. 00

3 राजा जनमेजय (Raja Janmejay)…. 84…. 07…… 23

4 अश्वमेध (Ashwamedh )…………….. 82…..08….. 22

5 द्वैतीयरम (Dwateeyram )…………… 88…. 02……08

6 क्षत्रमाल (Kshatramal)………………. 81…. 11….. 27

7 चित्ररथ (Chitrarath)…………………. 75……03…..18

8 दुष्टशैल्य (Dushtashailya)……………75…..10…….24

9 राजा उग्रसेन (Raja Ugrasain)……… 78…..07…….21

10 राजा शूरसेन (Raja Shoorsain)…….78….07……..21

11 भुवनपति (Bhuwanpati)…………….69….05…….05

12 रणजीत (Ranjeet)…………………….65….10……04

13 श्रक्षक (Shrakshak)…………………..64…..07……04

14 सुखदेव (Sukhdev)……………………62….00…….24

15 नरहरिदेव (Narharidev)……………..51…..10…….02

16 शुचिरथ (Suchirath)…………………42……11…….02

17 शूरसेन द्वितीय (Shoorsain II)……..58…..10…….08

18 पर्वतसेन (Parvatsain )………………55…..08…….10

19 मेधावी (Medhawi)……………………52…..10……10

20 सोनचीर (Soncheer)…………………50…..08…….21

21 भीमदेव (Bheemdev)………………..47……09…….20

22 नरहिरदेव द्वितीय (Nraharidev II)…45…..11…….23

23 पूरनमाल (Pooranmal)………………44…..08…….07

24 कर्दवी (Kardavi)………………………44…..10……..08

25 अलामामिक (Alamamik)……………50….11……..08

26 उदयपाल (Udaipal)…………………..38….09……..00

27 दुवानमल (Duwanmal)………………40….10…….26

28 दामात (Damaat)……………………..32….00…….00

29 भीमपाल (Bheempal)……………….58….05……..08

30 क्षेमक (Kshemak)……………………48….11……..21

इसके बाद ….क्षेमक के प्रधानमन्त्री विश्व ने क्षेमक का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 14 पीढ़ियों ने 500 वर्ष 3 माह 17 दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 विश्व (Vishwa)……………………. 17 3 29

2 पुरसेनी (Purseni)…………………42 8 21

3 वीरसेनी (Veerseni)……………… 52 10 07

4 अंगशायी (Anangshayi)……….. 47 08 23

5 हरिजित (Harijit)……………….. 35 09 17

6 परमसेनी (Paramseni)…………. 44 02 23

7 सुखपाताल (Sukhpatal)……… 30 02 21

8 काद्रुत (Kadrut)………………. 42 09 24

9 सज्ज (Sajj)……………………32 02 14

10 आम्रचूड़ (Amarchud)……… 27 03 16

11 अमिपाल (Amipal) ………….2211 25

12 दशरथ (Dashrath)…………… 25 04 12

13 वीरसाल (Veersaal)……………31 08 11

14 वीरसालसेन (Veersaalsen)…….47 0 14

इसके उपरांत…राजा वीरसालसेन के प्रधानमन्त्री वीरमाह ने वीरसालसेन का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 16 पीढ़ियों ने 445 वर्ष 5 माह 3 दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 राजा वीरमाह (Raja Veermaha)……… 35 10 8

2 अजितसिंह (Ajitsingh)…………………. 27 7 19

3 सर्वदत्त (Sarvadatta)……………………..28 3 10

4 भुवनपति (Bhuwanpati)……………….15 4 10

5 वीरसेन (Veersen)……………………….21 2 13

6 महिपाल (Mahipal)……………………….40 8 7

7 शत्रुशाल (Shatrushaal)…………………26 4 3

8 संघराज (Sanghraj)……………………17 2 10

9 तेजपाल (Tejpal)…………………….28 11 10

10 मानिकचंद (Manikchand)…………37 7 21

11 कामसेनी (Kamseni)………………42 5 10

12 शत्रुमर्दन (Shatrumardan)……….8 11 13

13 जीवनलोक (Jeevanlok)………….28 9 17

14 हरिराव (Harirao)………………….26 10 29

15 वीरसेन द्वितीय (Veersen II)……..35 2 20

16 आदित्यकेतु (Adityaketu)……….23 11 13

ततपश्चात् प्रयाग के राजा धनधर ने आदित्यकेतु का वध करके उसके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी 9 पीढ़ी ने 374 वर्ष 11 माह 26 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण इस प्रकार है ..

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 राजा धनधर (Raja Dhandhar)………..23 11 13

2 महर्षि (Maharshi)………………………….41 2 29

3 संरछि (Sanrachhi)……………………….50 10 19

4 महायुध (Mahayudha)…………………….30 3 8

5 दुर्नाथ (Durnath)………………………….28 5 25

6 जीवनराज (Jeevanraj)…………………..45 2 5

7 रुद्रसेन (Rudrasen)……………………..47 4 28

8 आरिलक (Aarilak)……………………..52 10 8

9 राजपाल (Rajpal)…………………………36 0 0

उसके बाद …सामन्त महानपाल ने राजपाल का वध करके 14 वर्ष तक राज्य किया। अवन्तिका (वर्तमान उज्जैन) के विक्रमादित्य ने महानपाल का वध करके 93 वर्ष तक राज्य किया। विक्रमादित्य का वध समुद्रपाल ने किया और उसकी 16 पीढ़ियों ने 372 वर्ष 4 माह 27 दिन तक राज्य किया !

जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 समुद्रपाल (Samudrapal)………….54 2 20

2 चन्द्रपाल (Chandrapal)…………….365 4

3 सहपाल (Sahaypal)……………….11 4 11

4 देवपाल (Devpal)…………………27 1 28

5 नरसिंहपाल (Narsighpal)………18 0 20

6 सामपाल (Sampal)……………27 1 17

7 रघुपाल (Raghupal)………..22 3 25

8 गोविन्दपाल (Govindpal)……..27 1 17

9 अमृतपाल (Amratpal)………36 10 13

10 बालिपाल (Balipal)………12 5 27

11 महिपाल (Mahipal)………..13 8 4

12 हरिपाल (Haripal)……….14 8 4

13 सीसपाल (Seespal)…….11 10 13

14 मदनपाल (Madanpal)……17 10 19

15 कर्मपाल (Karmpal)……..16 2 2

16 विक्रमपाल (Vikrampal)…..24 11 13

टिप : कुछ ग्रंथों में सीसपाल के स्थान पर भीमपाल का उल्लेख मिलता है, सम्भव है कि उसके दो नाम रहे हों।

इसके उपरांत …..विक्रमपाल ने पश्चिम में स्थित राजा मालकचन्द बोहरा के राज्य पर आक्रमण कर दिया जिसमे मालकचन्द बोहरा की विजय हुई और विक्रमपाल मारा गया। मालकचन्द बोहरा की 10 पीढ़ियों ने 191 वर्ष 1 माह 16 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 मालकचन्द (Malukhchand) 54 2 10

2 विक्रमचन्द (Vikramchand) 12 7 12

3 मानकचन्द (Manakchand) 10 0 5

4 रामचन्द (Ramchand) 13 11 8

5 हरिचंद (Harichand) 14 9 24

6 कल्याणचन्द (Kalyanchand) 10 5 4

7 भीमचन्द (Bhimchand) 16 2 9

8 लोवचन्द (Lovchand) 26 3 22

9 गोविन्दचन्द (Govindchand) 31 7 12

10 रानी पद्मावती (Rani Padmavati) 1 0 0

रानी पद्मावती गोविन्दचन्द की पत्नी थीं। कोई सन्तान न होने के कारण पद्मावती ने हरिप्रेम वैरागी को सिंहासनारूढ़ किया जिसकी पीढ़ियों ने 50 वर्ष 0 माह 12 दिन तक राज्य किया !

जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 हरिप्रेम (Hariprem) 7 5 16

2 गोविन्दप्रेम (Govindprem) 20 2 8

3 गोपालप्रेम (Gopalprem) 15 7 28

4 महाबाहु (Mahabahu) 6 8 29

इसके बाद…….राजा महाबाहु ने सन्यास ले लिया । इस पर बंगाल के अधिसेन ने उसके राज्य पर आक्रमण कर अधिकार जमा लिया। अधिसेन की 12 पीढ़ियों ने 152 वर्ष 11 माह 2 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 अधिसेन (Adhisen) 18 5 21

2 विल्वसेन (Vilavalsen) 12 4 2

3 केशवसेन (Keshavsen) 15 7 12

4 माधवसेन (Madhavsen) 12 4 2

5 मयूरसेन (Mayursen) 20 11 27

6 भीमसेन (Bhimsen) 5 10 9

7 कल्याणसेन (Kalyansen) 4 8 21

8 हरिसेन (Harisen) 12 0 25

9 क्षेमसेन (Kshemsen) 8 11 15

10 नारायणसेन (Narayansen) 2 2 29

11 लक्ष्मीसेन (Lakshmisen) 26 10 0

12 दामोदरसेन (Damodarsen) 11 5 19

लेकिन जब ….दामोदरसेन ने उमराव दीपसिंह को प्रताड़ित किया तो दीपसिंह ने सेना की सहायता से दामोदरसेन का वध करके राज्य पर अधिकार कर लिया तथा उसकी 6 पीढ़ियों ने 107 वर्ष 6 माह 22 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 दीपसिंह (Deepsingh) 17 1 26

2 राजसिंह (Rajsingh) 14 5 0

3 रणसिंह (Ransingh) 9 8 11

4 नरसिंह (Narsingh) 45 0 15

5 हरिसिंह (Harisingh) 13 2 29

6 जीवनसिंह (Jeevansingh) 8 0 1

पृथ्वीराज चौहान ने जीवनसिंह पर आक्रमण करके तथा उसका वध करके राज्य पर अधिकार प्राप्त कर लिया। पृथ्वीराज चौहान की 5 पीढ़ियों ने 86 वर्ष 0 माह 20 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।

क्र. शासक का नाम वर्ष माह दिन

1 पृथ्वीराज (Prathviraj) 12 2 19

2 अभयपाल (Abhayapal) 14 5 17

3 दुर्जनपाल (Durjanpal) 11 4 14

4 उदयपाल (Udayapal) 11 7 3

5 यशपाल (Yashpal) 36 4 27

विक्रम संवत 1249 (1193 AD) में मोहम्मद गोरी ने यशपाल पर आक्रमण कर उसे प्रयाग के कारागार में डाल दिया और उसके राज्य को अधिकार में ले लिया।

उपरोक्त जानकारी ा स्रोत स्वामी दयानन्द सरस्वती के सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ, चित्तौड़गढ़ राजस्थान से प्रकाशित पत्रिका हरिशचन्द्रिका और मोहनचन्द्रिका के विक्रम संवत1939 के अंक और कुछ अन्य संस्कृत ग्रंथों को बताया गया है।




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मित्रों, आर्य समाज के छठे नियम में महर्षि गुरुवर देव दयानंद सरस्वती जी ने कहा है कि समाज की उन्नति...

मित्रों, आर्य समाज के छठे नियम में महर्षि गुरुवर देव दयानंद सरस्वती जी ने कहा है कि समाज की उन्नति करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना। विचार करने योग्य बात यह है कि स्वामी जी ने समाज की उन्नति में ही राष्ट्र की उन्नति बताई है जब समाज उन्नत होगा तभी राष्ट्र उन्नत होगा और समाज कब उन्नत होगा जब हमारा गृहस्थ जीवन उन्नत होगा। गृहस्थ जीवन को किस प्रकार उन्नत और सुखमय बनाया जा सकता है इस विषय पर आपके सामने विचार रख रहा हूँ मित्रों गृहस्थ जीवन की शुरुआत वर वधू के पाणिग्रहण संस्कार के साथ होती है पाणिग्रहण संस्कार में सर्वप्रथम वरमाला का कार्यक्रम होता है जिसमें वर वधू एक दूसरे को माला पहनाते है वधु पहले वर को माला पहनाती है और वर बाद में वधु को माला पहनाते है क्या आपने कभी विचार किया है ऐसा क्यों होता है वधु ही पहले क्यों माला पहनाती है वर क्यों नहीं। मैं आपको बताता हूं मित्रों हमारी आर्य संस्कृति में वधु को ही वर चुनने का अधिकार है वर को वधु चुनने का नहीं। इसलिए पहले वधु माला डालकर वर का चुनाव करती है है ना कितनी महान हमारी संस्कृति जिसमें बेटियों को कितना उंचा सम्मान दिया गया है मैं निवेदन कर रहा था कि माला का एक नाम हार भी है हार फूलों का भी होता है और मोतियों का भी परंतु यहाँ हम जिस वरमाला की बात कर रहे हैं वह फूलों का हार होता है हार का एक अर्थ हार जाना या हार मान लेना भी होता है वरमाला के समय जब वर शीश झुकाता और वधू उसको वरमाला पहनाती है तब वर यह मनन करे कि हे देवी मैंने आपसे हार मान ली और मैं अपना शीश आपके सामने झुकाता हूँ और इसी प्रकार बाद में वधु मनन करे कि हे पतिदेव मैंने भी आपसे हार मान ली और मैं भी आपके सामने शीश झुकाती हूँ और वर वधू के गले में वरमाला डाल देता है मित्रों अगर इसी प्रकार एक दूसरे को मान देते हुए, वृद्ध जनों, माता पिता का सम्मान करते हुए वर वधू गृहस्थ जीवन को निभायें तो वह वरमाला जयमाला बन जाती है उनका गृहस्थ जीवन स्वर्ग बन जाता है उन्नत बन जाता है जब गृहस्थ उन्नत होगा तभी समाज उन्नत होगा और जब समाज उन्नत होगा तभी राष्ट्र उन्नत होगा। मित्रों इसलिए हम सभी को वेदों के बताए मार्ग पर चलते हुए अपने गृहस्थ जीवन को व्यतीत करना चाहिए। आप सभी के साथ गृहस्थ जीवन के बारे में थोड़ी सी चर्चा की उम्मीद करता हूं आप सभी इन बातों को अपने जीवन में धारण कर अपने गृहस्थ जीवन को सुखमय व उन्नत बनायेंगे। इति ओइम समः




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Saturday, April 11, 2015

तथा कथित धर्मनिरपेक्छ लोग देश के बड़े दुश्मन हैं। जहां जहां इस्लाम वहाँ वहाँ कत्लेआम और अशांति। हम...

तथा कथित धर्मनिरपेक्छ लोग देश के बड़े दुश्मन हैं। जहां जहां इस्लाम वहाँ वहाँ कत्लेआम और अशांति। हम अनेकों वर्ष इस्लामिक शाषण अपने देश में झेल चुके हैं फिर भी भ्रम में रहते हैं। पहले तो इन्होंने अल्पसंख्यक रहते हुए शाषण किया था, अब कुछ वर्षों के बाद ये बहुसंख्यक होने वाले हैं। उस भयानक दृश्य की आज ही हमारे समाज को कल्पना कर लेनी चाहिए। संभलने के लिए बहुत कम समय बचा है।




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राजीव दीक्षित जी के कुछ साधारण लेकिन महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बाते , अधिक से अधिक फैलाएं...

राजीव दीक्षित जी के कुछ साधारण लेकिन महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बाते , अधिक से अधिक फैलाएं …..


1) हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये।

किसी ऋषि ने कहा है कि

“खाने को पियो और पीने को खाओ”


2) खाने के 40 मिनट पहले और 60-90

मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये ।


3)सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।


4) खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।


5) भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।


6) हमेशा बैठ कर खाना खाये और पानी पिये। अगर संभव हो तो सुखासन, सिद्धासन मे बैठ कर ही खाना खाये।


7) फ्रीज़ मे रखा हुआ भोजन न करें या उसे साधारण तापमान में आने पर ही खाये दुबारा कभी भी गर्म ना करे ।


8) गूँथ कर रखे हुये आटे की रोटी कभी न खाये, जैसे- कुछ लोग सुबह में ही आटा गूँथ कर रख देते है और शाम को उसी से बनी हुई चपाती खा लेते है जो स्वास्थ के लिए हानिकारक है। ताजा बनाए ताजा खाये।


9) खाना खाने के तुरंत बाद पेशाब जरूर करे ऐसा करने से डायबिटज होने की समभावना कम होती हैं।


10) मौसम पर आने वाले फल, और सब्जियाँ ही उत्तम है इसलिए बिना मौसम वाली सब्जियाँ या फल न खाये।


11) सुबह मे पेट भर भोजन करें। जबकि रात मे बहुत हल्का भोजन करें।


12) रात को खीरा, दही और कोई भी वात उत्पन्न करने वाली चीज न खाये।


13) दही के साथ उड़द की दाल न खाये। जैसे- दही और उड़द की दाल का बना हुआ भल्ला।


14) दूध के साथ नमक या नमक की बनी कोई भी चीज न खाये। क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के प्रतिकूल प्रभाव डालती है।


15) दूध से बनी कोई भी दो चीजे एक साथ न खाये।


16) कोई भी खट्टी चीज दूध के साथ न खाये सिर्फ एक खा सकते है आँवला। खट्टे आम का शेक न पिये केवल मीठे पके हुए आम का ही शेक पीये ।


17) कभी भी घी और शहद का उपयोग एक साथ न करे! क्योंकि दोनों मिलकर विष बनाते है।


18) खाना भूख से कम ही खाये। जीने के लिए खाना खाये न कि खाने के लिए जीये।


19) रिफाइण्ड तेल जहर हैं आप हमेशा कच्ची घाणी का सरसो, तिल या मूगंफली का तेल ही उपयोग करे और जीवन मे हाटॅ टेक व जोडो के दर्द से बचे ।


20) तला, और मसालेयुक्त खाना खाने से बचे। अगर ज्यादा ही मन हो तो सुबह मे खाये रात मे कभी भी नहीं।


21) खाने मे गुड या मिस्री का प्रयोग करें, चीनी के प्रयोग स बचें।


22) नमक का अधिक सेवन न करें। आयोडिन युक्त समुद्री नमक का उपयोग बिल्कुल भी नही करे! सेधां, काला या डली वाला नमक इस्तेमाल करें।


23) मेदा, नमक और चीनी ये तीनों सफ़ेद जहर है इनके प्रयोग से बचें।


24) हमेशा साधारण पानी से नहाएँ और पहले सर पर पानी डाले फिर पेरो पर और अगर गरम से नहाओ तो हमेशा पहले पैरो पर फिर सर पर पानी डालना चाहिये।


25) हमेशा पीठ को सीधी रख कर बेठे।


26) सर्दियों मे होंठ के फटने से बचने के लिए नहाने से पहले नाभि मे सरसों के तेल लगाये । जबरदस्त लाभ मिलता है।


27) शाम के खाने के बाद 2 घंटे तक न सोये। 5 से 10 मिनट वज्रासन मे बैठे 1000 कदम वाक जरूर करें।


28) खाना हमेशा ऐसी जगह पकाया जाये जहां वायु और सूर्य दोनों का स्पर्श खाने को मिल सके।


29) कूकर मे खाना न पकाए बल्कि किसी खुले बर्तन मे बनाए, क्योकि कूकर मे खाना उबलता है और खुले बर्तन के अन्दर खाना पकता हैं इससे खाने प्रोटीन मात्रा 93 प्रतिशत होती है और कूकर मे मात्र 13 प्रतिशत रहती है ।


30) एल्यूमिनियम के बर्तनो का प्रयोग खाना बनाने और खाने दोनों के लिए कभी भी न करें!पीतल, कासां, मिट्टी के बर्तन का ही उपयोग करें।


31) खाने को कम से कम 32 बार चबाये।


32) रोज टूथब्रश का प्रयोग न करें इससे मसूड़े कमजोर होते है। दंतमंजन का प्रयोग कर सकते है।


33) अपनी दोनों नासिकाओ मे देशी गाय के घी को हल्का गुनगुना करके 1-1 बुंद रात मे डालने से दिमाग तंदरुस्त रहता है। नजला जुकाम, सिर दर्द, माइगृेन, नींद नहीं आना, तनाव आदि समस्या का समाधान होता हैं ।


34) हमेशा मीठा, नमकीन से पहले खाना चाहिए ।


35) बार-बार नहीं खाना चाहिये एक बार बैठ कर भरपेट या उससे थोड़ा कम खाना चाहिये।


36) हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये। नकारात्मक सोचने से भी बीमारियाँ आती है।i


( राजीव दीक्षित:स्वदेशी ग्राम

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राजीव भाई के विचारों को जन जन तक फैलाएं।

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वन्दे मातरम्


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सभी मित्रो के लिए कुछ आवश्यक सन्देश है, आप सभी से अनुरोध है की निचे दिए दिशा निर्देशो का पालन करे।


1- आप अपने whatsapp, facebook और twitter अकाउंट से celebrities, नेता या जाने माने लोगो के पेज को ऐड या लाइक करिये, और वहा पर राजीव भाई का प्रचार करे। दूसरे ग्रुप के लोगो को राजीव भाई का प्रचारक बनाइये।


2- इस ग्रुप में दिए लिंक्स को अधिक से अधिक लाइक/ऐड कीजिये और दूसरे लोगों में इसे फैलाइये।


3- उन pages की जानकारी दे जहाँ जहाँ आपने राजीव भाई के pages को प्रमोट किया गया है या किया जा सकता है।


4- आप जहाँ भी लिंक या पोस्ट शेयर कर रह है हम सब को बताईये ताकि हम सब उस पोस्ट, लिंक इत्यादि को like करे शेयर करे। ताकि प्रचार प्रसार को अधिक बल मिल सके।


5- जितना जल्द हो सके हम सब एक दूसरे को profile में add कर ले ताकि एक दूसरे की profile पे शेयर होने वाले पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कर सके।


राजीव भाई को हर घर हर मोबाइल में फैलाना है, INDIA को वापस भारत बनाना है।।




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शिक्षा प्राप्त कर नित नए नए आविष्कारों से विविध प्रकार के कलात्मक उपकरण बनाये जिससे ईश्वर द्वारा...

शिक्षा प्राप्त कर नित नए नए आविष्कारों से विविध प्रकार के कलात्मक उपकरण बनाये जिससे ईश्वर द्वारा प्रदत पदार्थों को विविध रूप देकर उनका उपयोग कर जीवन सुखमय बना सके

जैसे भोजन पकाने के लिए अग्नि का उपयोग होता है, अब इसी अग्नि को अन्य रूप में कैसे उपयोग लिया जाता है या उनके लिए क्या क्या उपकरण होते है, कुछ इसी प्रकार के विविध प्रकार के उपकरणों के निर्माण के लिए इस मन्त्र में बताया गया है

यजुर्वेद ४-१८(4-18)

तस्या॑स्ते स॒त्यस॑वसः प्रस॒वे त॒न्वो॑ य॒न्त्रम॑शीय॒ स्वाहा॑ । शु॒क्रम॑सि च॒न्द्रम॑स्य॒मृत॑मसि वैश्वदे॒वम॑सि ॥४-१८॥

भावार्थ:- मनुष्यो को चाहिये कि ईश्वर की उत्पन्न की हुई इस सृष्टि में विद्या से कलायन्त्रों को सिद्ध करके अग्नि आदि पदार्थों से अच्छे प्रकार पदार्थों का ग्रहण कर सब सुखों को प्राप्त करें।।

वेद प्रचार की इस मुहीम में आपकी आहुति जरुरी है इसलिए इन स्लाइड्स को अधिक से अधिक शेयर कर लोगों को वेदों से अवगत कराए

चारों वेद हिंदी english और अन्य वैदिक साहित्यों के लिए आप ही की वेबसाइट www.aryamantavya.in

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🌟🌟🌟कर्ज 🌟🌟🌟 बुधिया मृत्यु शय्या पर था I टोला भर में बातें हो रही थी I “ प्राण अटके हैं ,दान...

🌟🌟🌟कर्ज 🌟🌟🌟


बुधिया मृत्यु शय्या पर था I टोला भर में बातें हो रही थी I “ प्राण अटके हैं ,दान पुन होखे के चाहीं !! ”

पंडित जी भी बोले –“ बिटवा , माई बाप का कर्ज होत है औलाद पर , वैतरणी पार करा इनका मुक्ति दिलाय दियो !! ”

किसना अच्छे से जानत रहा एका मतलब !!

बोला - “ पंडित जी , भगवान आउर हमरे बापू , दुनो जानत हैं हमरी दसा ! इतना भरोसा हैं हमका कि दुनो कबहु नाही चाहिबे ,हम एक कर्ज ले दूसरा कर्ज उतारी !! ”

सायद बापू आउर भगवान दुनो संतुष्ट होइ गए इ उत्तर सुन !!




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क़ुतुब मीनार का इतिहास और सच:- 1191 A.D. में मोहम्मद गौरी ने दिल्ली पर आक्रमण किया , तराइनके मैदान...

क़ुतुब मीनार का इतिहास और सच:-


1191 A.D. में मोहम्मद गौरी ने दिल्ली पर आक्रमण किया , तराइनके मैदान में पृथ्वी राज चौहान के साथ युद्ध में गौरी बुरी तरह पराजित हुआ, 1192 में गौरी ने दुबारा आक्रमण में पृथ्वीराज को हरा दिया , कुतुबुद्दीन, गौरी का सेनापति था1206 में गौरी ने कुतुबुद्दीन को अपना नायब नियुक्त किया और जब 1206 A.D,में मोहम्मद गौरी की मृत्यु हुई tab वह गद्दी पर बैठा , अनेक विरोधियों को समाप्त करने में उसे लाहौर में ही दो वर्ष लग गए1210 A.D. लाहौर में पोलो खेलते हुए घोड़े से गिरकर उसकी मौत हो गयीअब इतिहास के पन्नों में लिख दिया गया है कि कुतुबुद्दीन ने क़ुतुब मीनार ,कुवैतुल इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद भी बनवाईअब कुछ प्रश्न …….अब कुतुबुद्दीन ने क़ुतुब मीनार बनाई, लेकिन कब ?क्या कुतुबुद्दीन ने अपने राज्य काल 1206 से 1210 मीनार का निर्माण करा सकता था ? जबकि पहले के दो वर्ष उसने लाहौर में विरोधियों को समाप्त करने में बिताये और 1210 में भी मरने के पहले भी वह लाहौर में था?……शायद नहींकुछ ने लिखा कि इसे 1193AD में बनाना शुरू किया यह भी कि कुतुबुद्दीन ने सिर्फ एक ही मंजिल बनायींउसके ऊपर तीन मंजिलें उसके परवर्ती बादशाह इल्तुतमिश नेबनाई और उसके ऊपर कि शेष मंजिलें बाद में बनीयदि 1193 में कुतुबुद्दीन ने मीनार बनवाना शुरू किया होता तो उसका नाम बादशाह गौरी के नाम पर “गौरी मीनार “या ऐसा ही कुछ होता न कि सेनापति कुतुबुद्दीन के नाम पर क़ुतुब मीनारउसने लिखवाया कि उस परिसर में बने 27 मंदिरों को गिरा कर उनके मलबे से मीनार बनवाई ,अब क्या किसी भवन के मलबे से कोई क़ुतुब मीनार जैसा उत्कृष्ट कलापूर्ण भवन बनाया जा सकता है जिसका हर पत्थर स्थानानुसार अलग अलग नाप का पूर्व निर्धारित होता है ?कुछ लोगो ने लिखा कि नमाज़ समयअजान देने के लिए यह मीनार बनीपर क्या उतनी ऊंचाई से किसी किआवाज़ निचे तक आ भी सकती है ?उपरोक्त सभी बातें झूठ का पुलिंदा लगती है इनमें कुछ भी तर्क की कसौटी पर सच्चा नहीं लगतासच तो यह है की जिस स्थान में क़ुतुब परिसर है वह मेहरौली कहा जाता है, मेहरौली वराहमिहिर के नाम पर बसाया गया था जो सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में एक , और खगोलशास्त्री थे उन्होंने इसपरिसर में मीनार यानि स्तम्भ के चारों ओर नक्षत्रों के अध्ययन के लिए २७ कलापूर्ण परिपथों का निर्माण करवाया थाइन परिपथों के स्तंभों पर सूक्ष्म कारीगरी के साथ देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी उकेरी गयीं थीं जो नष्ट किये जाने के बाद भी कहीं कहीं दिख जाती हैंकुछ संस्कृत भाषा के अंश दीवारों और बीथिकाओं के स्तंभों पर उकेरे हुए मिल जायेंगे जो मिटाए गए होने के बावजूद पढ़े जा सकते हैंमीनार , चारों ओर के निर्माण का ही भाग लगता है,अलग से बनवाया हुआ नहीं लगता, इसमे मूल रूप में सात मंजिलें थीं सातवीं मंजिल पर ” ब्रम्हाजी की हाथ में वेद लिए हुए “मूर्ति थी जो तोड़ डाली गयीं थी ,छठी मंजिल पर विष्णु जी की मूर्ति के साथ कुछ निर्माण थेवे भी हटा दिए गए होंगे ,अब केवल पाँच मंजिलें ही शेष हैइसका नाम विष्णु ध्वज /विष्णुस्तम्भ या ध्रुव स्तम्भ प्रचलन में थे ,इन सब का सबसे बड़ा प्रमाण उसीपरिसर में खड़ा लौह स्तम्भ है जिस पर खुदा हुआ ब्राम्ही भाषा का लेख जिसे झुठलाया नहीं जा सकता ,लिखा है की यह स्तम्भ जिसे गरुड़ ध्वज कहा गया है ,सम्राट चन्द्र गुप्त विक्रमादित्य (राज्य काल 380-414 ईसवीं) द्वारा स्थापित किया गया था और यह लौह स्तम्भ आज भी विज्ञानं के लिए आश्चर्य की बात है कि आज तक इसमें जंग नहीं लगा .उसी महानसम्राट के दरबार में महान गणितज्ञ आर्य भट्ट,खगोल शास्त्री एवं भवन निर्माणविशेषज्ञ वराह मिहिर ,वैद्य राज ब्रम्हगुप्त आदि हुए ऐसे राजा के राज्य काल को जिसमे लौह स्तम्भ स्थापित हुआ तो क्या जंगल में अकेला स्तम्भ बना होगा निश्चय ही आसपास अन्य निर्माण हुए होंगे जिसमे एक भगवन विष्णु का मंदिर था उसी मंदिर के पार्श्व में विशालस्तम्भ विष्णुध्वज जिसमे सत्ताईस झरोखे जो सत्ताईस नक्षत्रो व खगोलीय अध्ययन के लिए बनाए गए निश्चय ही वराह मिहिर के निर्देशन में बनाये गएइस प्रकार कुतब मीनार के निर्माण का श्रेय सम्राट चन्द्र गुप्त विक्रमादित्य के राज्य कल में खगोल शाष्त्री वराहमिहिर को जाता हैकुतुबुद्दीन ने सिर्फ इतना किया कि भगवान विष्णु के मंदिर को विध्वंस किया उसे कुवातुल इस्लाम मस्जिद कह दिया ,विष्णु ध्वज (स्तम्भ ) के हिन्दू संकेतों को छुपाकर उन पर अरबी के शब्द लिखा दिए और क़ुतुब मीनार बन गया…


जय हिन्द! जय भारत!




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शिक्षा प्राप्त कर नित नए नए आविष्कारों से विविध प्रकार के कलात्मक उपकरण बनाये जिससे ईश्वर द्वारा...

शिक्षा प्राप्त कर नित नए नए आविष्कारों से विविध प्रकार के कलात्मक उपकरण बनाये जिससे ईश्वर द्वारा प्रदत पदार्थों को विविध रूप देकर उनका उपयोग कर जीवन सुखमय बना सके

जैसे भोजन पकाने के लिए अग्नि का उपयोग होता है, अब इसी अग्नि को अन्य रूप में कैसे उपयोग लिया जाता है या उनके लिए क्या क्या उपकरण होते है, कुछ इसी प्रकार के विविध प्रकार के उपकरणों के निर्माण के लिए इस मन्त्र में बताया गया है

यजुर्वेद ४-१८(4-18)

तस्या॑स्ते स॒त्यस॑वसः प्रस॒वे त॒न्वो॑ य॒न्त्रम॑शीय॒ स्वाहा॑ । शु॒क्रम॑सि च॒न्द्रम॑स्य॒मृत॑मसि वैश्वदे॒वम॑सि ॥४-१८॥

भावार्थ:- मनुष्यो को चाहिये कि ईश्वर की उत्पन्न की हुई इस सृष्टि में विद्या से कलायन्त्रों को सिद्ध करके अग्नि आदि पदार्थों से अच्छे प्रकार पदार्थों का ग्रहण कर सब सुखों को प्राप्त करें।।

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न कालो दण्डमुद्यम्य शिर: कॄन्तति कस्यचित्। कालस्य बलमेतावत् विपरीतार्थदर्शनम्।। -...

न कालो दण्डमुद्यम्य शिर: कॄन्तति कस्यचित्।

कालस्य बलमेतावत् विपरीतार्थदर्शनम्।।

- महाभारत


अर्थात-

काल किसी का शस्त्र से शिरच्छेद

नही करता पर वह बुद्धिभेद करता है,

जिससे मनुष्य को गलत रास्ता ही सही लगता है, और वह अपने विनाश की ओर बढ़ता है। यह बुद्धिभेद ही काल का बल है।

सु प्रभात आपका मंगल हो




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