🌟🌟🌟कर्ज 🌟🌟🌟
बुधिया मृत्यु शय्या पर था I टोला भर में बातें हो रही थी I “ प्राण अटके हैं ,दान पुन होखे के चाहीं !! ”
पंडित जी भी बोले –“ बिटवा , माई बाप का कर्ज होत है औलाद पर , वैतरणी पार करा इनका मुक्ति दिलाय दियो !! ”
किसना अच्छे से जानत रहा एका मतलब !!
बोला - “ पंडित जी , भगवान आउर हमरे बापू , दुनो जानत हैं हमरी दसा ! इतना भरोसा हैं हमका कि दुनो कबहु नाही चाहिबे ,हम एक कर्ज ले दूसरा कर्ज उतारी !! ”
सायद बापू आउर भगवान दुनो संतुष्ट होइ गए इ उत्तर सुन !!
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