Monday, July 27, 2015

अग्नि के छ: गुण– अग्नि मे छ: गुण है!पहला ,इसकी गति सदा ऊपर की ओर होगी,निम्न दिशाओ मे कभी...

अग्नि के छ: गुण–
अग्नि मे छ: गुण है!पहला ,इसकी गति सदा ऊपर की ओर होगी,निम्न दिशाओ मे कभी नही!दूसरा,अग्नि के साथ प्रकाश का अविछेद संबंध है!तीसरा,अग्नि मे उषनता है!प्राणधारी शरीर मे जब तक अग्नि की उषनता उचित मात्रा मे रहती है,वह जीवित रहता है,जिस समय मंद होती है,शरीर ठंडा हो जाता है!चौथा,अग्नि प्रसाडर और विस्तारशील है!जब अग्नि प्रज्वलित होगी,तो वायु मे गति और कम्पन आ जायेगा!इसलिए,प्रचन्ड अग्नि-कान्ड़ होने पर आन्धी चलनी शुरू हो जाती है!पांचवा,अग्नि सर्व ग्राही है!इसमे जो कुछ भी डालो,सब भस्म कर डालती है!प्लेग इत्यादि रोगो के किटानु नष्ट करने के लिये अग्नि सर्वोत्तम साधन है!छठा,अग्नि के साथ संयोग होने से अल्प वस्तु मे भी शक्ति का समावेश हो जाता है!एक लाल मिर्च को अग्नि मे डाल दो,तो दूर तक बैठे लोगो को भी खाँसी आनी शुरू हो जाएगी!इसीलिए,अग्नि मे डाला गया थोडा-सा घी भी दूर तक रोगनाशक,दुर्गन्ध-निवारक और सुगंध-प्रसारक हो जाता है!
अग्निहोत्र द्वारा यजमान मे नवजीवन—

अग्नि कुंड सम्मुख बैठे यजमान और अन्य उपस्थित व्यक्तियो को अग्नि से ये छ: शिक्षाए लेनी चाहिए!पहली ,वे जीवन मेसदा ऊपरकी ओर बढने वाले हो!दूसरी,उनका जीवन ज्यान व भक्ति से प्रकाशित हो!तीसरी,उनके जीवन मे तेजस्विता हो,उनके ओज के सम्मुख पाप कभी ठहर न सके!चौथी,वे अपने चारो ओर संसार मे सद्गुणो का विस्तार करनेवालेहो! पांचवी,वे सब ओर श्रेषठ विचारो और गुणो को अपने मे समा लेनेवाले हो,और छठी शिक्षा यजमान और यजवेदी पर उपस्थित अन्य व्यक्ति यह ले कि साथ संयोग होने से जिस प्रकार स्वस्थ वस्तु भी सशक्त हो जाती है,उसी प्रकार उनमे इतना आत्मबल हो की वे अपना सम्पर्क मे आनेवाले किसी भी व्यक्ति को धार्मिक और सयनिषठ बना सके!


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Thursday, July 23, 2015

દેવાયત પંડિત દા'ડા દાખવે, સુણી લ્યોને દેવળદે સતીનાર, આપણા ગુરૂએ આગમ ભાખિયા, જુઠડાં નહિ રે...

દેવાયત પંડિત દા'ડા દાખવે, સુણી લ્યોને દેવળદે સતીનાર,

આપણા ગુરૂએ આગમ ભાખિયા, જુઠડાં નહિ રે લગાર,

લખ્યા રે ભાખ્યા રે સોઈ દિન આવશે.


પહેલા પહેલા પવન ફરુકશે, નદીએ નહિ હોય નીર,

ઓતર થકી રે સાયબો આવશે, મુખે હનમો વીર.


ધરતી માથે રે હેમર હાલશે, સુના નગર મોઝાર,

લખમી લુંટાશે લોકો તણી, નહિ એની રાવ ફરિયાદ.


પોરો રે આવ્યો સંતો પાપનો, ધરતી માંગે છે ભોગ,

કેટલાક ખડગે સંહારશે, કેટલાક મરશે રોગ.


ખોટા પુસ્તક ખોટા પાનિયા, ખોટા કાજીના કુરાન,

અસલજાદી ચુડો પહેરશે, એવા આગમના એંધાણ.


કાંકરીએ તળાવે તંબુ તાણશે, સો સો ગામની સીમ,

રૂડી દીસે રળિયામણી, ભેળા અરજણ ભીમ.


જતિ, સતી અને સાબરમતી, ત્યાં હોશે શુરાના સંગ્રામ,

ઓતરખંડેથી સાયબો આવશે, આવે મારા જુગનો જીવન.


કાયમ કાળીંગાને મારશે, નકળંક ધરશે નામ,

કળિયુગ ઉથાપી સતજુગ થાપશે, નકળંક ધરશે નામ,

દેવાયત પંડિત એમ બોલ્યા, ઈ છે આગમનાં એંધાણ


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Monday, July 20, 2015

६ श्रावण 21 जुलाई 15 😶 “ज्ञानी भक्त और विषयासक्त ! ” 🌞 🔥🔥 ओ३म् यो अस्मै...

६ श्रावण 21 जुलाई 15

😶 “ज्ञानी भक्त और विषयासक्त ! ” 🌞

🔥🔥 ओ३म् यो अस्मै घ्रंस उत वा य ऊधनि सोमं सुनोति भवति द्युमाँ अह। 🔥🔥
🍃🍂 अपाप शक्रस्ततनुष्टिमूहति तनूशुभ्रं मघवा य: कवासख:।। 🍂🍃
ऋ० ५ । ३४ । ३

शब्दार्थ:- जो दिन होवे या रात सदैव ही जो इस परमेश्वर के लिए ज्ञानपूर्वक भक्ति में रहता है, यजन करता है वह निश्चय से तेजस्वी हो जाता है और इसके विपरीत विषयों में दिनों-दिन फँसते जानेवाले को, स्वार्थरत, अजयनशील को, शरीर की सजावट-बनावट में लगे रहने वाले को और जो बुरी संगत में रहने वाला है, जिसके कि यार-दोस्त कुत्सित-कर्मा लोग हैं, उस पुरुष को भी सर्वशक्तिमान ऐश्वर्य वाला इंद्रदेव मिटा देता है, विनाश कर देता है।

विनय:- मैं इन दो प्रकार के आदमियों में से कौन-सा हूँ? क्या मुझे दिन-रात भगवान् के भजन में मस्त रहने में मज़ा आता है? क्या मैं चौबीस घण्टे उसके भजन में लीन रहता हूँ। चौबीस घण्टे न सही, क्या मैं दिन-रात में से एक घण्टा भी भगवान् के प्रति अपना हार्दिक प्रेमरस पहुँचाने में बिताता हूँ? अथवा मैं ‘ततनुष्टि’ हूँ? दिन-रात विषयों में फँसा रहता हूँ? न खत्म होनेवाले विषयों की तृप्ति में लगा रहता हूँ? स्वार्थ के लिए धन कमाने की फ़िक्र में और धन के लिए दूसरों के क्लेशों की कुछ परवाह न करके और धोखा-फरेब भी करके उनके चूसने कि नाना नयी-नयी तरकीबें सोचने और करने की फ़िक्र में तो कहीं मेरे दिन-रात नहीं बीतते हैं? क्या अपने शरीर की शोभा बढ़ाने, सँवारने में ही जीवन के अमूल्य समय के प्रतिदिन कई घण्टे मैं नहीं खो रहा हूँ? क्या मैंने अपने अन्दर के मानसिक शरीर को भी बलवान्, स्वच्छ और सुन्दर (पवित्र) करने का भी यत्न किया है? इसके लिए समय दिया है? मेरे साथी-संगी कैसे लोग हैं? कहीं मेरे इर्द-गिर्द बुरे आचरण वाले लोग तो इकट्ठे नहीं हो गये हैं? कहीं मैं कुत्सित कर्म करने वाले दुष्ट मनुष्यों से मिलने-जुलने में आनन्द तो नहीं पाता हूँ? ओह, उस सर्वशक्तिमान्-इंद्र के नियम अटल हैं, मैं जैसा करूँगा वैसा ही मुझे भरना पड़ेगा। मैं तेजस्वी बनूँगा या मेरा विनाश होगा? भगवान् तो दिन-रात सोम-सवन करने वालों को तेजस्वी बना रहा है और विषय-ग्रस्त पुरुषों का नाश कर रहा है।
🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
ओ३म् का झंडा 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
……………..ऊँचा रहे

🐚🐚🐚 वैदिक विनय से 🐚🐚🐚


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Monday, July 13, 2015

—~~~***★ ओ३म् ★***~~~— ★ चमार जाति का गौरवशाली इतिहास ★ –~~**★ कौन हैं ये...

—~~~***★ ओ३म् ★***~~~—
★ चमार जाति का गौरवशाली इतिहास ★
–~~**★ कौन हैं ये लोग★**~~–
—~~~***★॥ १०८ ॥ ★***~~~—
सिकन्दर लोदी (1489-1517) के शासनकाल से पहले पूरे भारतीय इतिहास में ‘चमार’ नाम की किसी जाति का उल्लेख नहीं मिलता | आज जिन्हें हम चमार जाति से संबोधित करते हैं और जिनके साथ छूआछूत का व्यवहार करते हैं, दरअसल वह वीर चंवर वंश के क्षत्रिय हैं | जिन्हें सिकन्दर लोदी ने चमार घोषित करके अपमानित करने की चेष्टा की |
भारत के सबसे विश्वसनीय इतिहास लेखकों में से एक विद्वान कर्नल टाड को माना जाता है जिन्होनें अपनी पुस्तक द हिस्ट्री आफ राजस्थान में चंवर वंश के बारे में विस्तार से लिखा है |
प्रख्यात लेखक डॅा विजय सोनकर शास्त्री ने भी गहन शोध के बाद इनके स्वर्णिम अतीत को विस्तार से बताने वाली पुस्तक हिन्दू चर्ममारी जाति एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास" लिखी | महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस राजवंश का उल्लेख है | डॉ शास्त्री के अनुसार प्राचीनकाल में न तो चमार कोई शब्द था और न ही इस नाम की कोई जाति ही थी |
अर्वनाइजेशन’ की लेखिका डॉ हमीदा खातून लिखती हैं मध्यकालीन इस्लामी शासन से पूर्व भारत में चर्म एवं सफाई कर्म के लिए किसी विशेष जाति का एक भी उल्लेख नहीं मिलता है | हिंदू चमड़े को निषिद्ध व हेय समझते थे | लेकिन भारत में मुस्लिम शासकों के आने के बाद इसके उत्पादन के भारी प्रयास किए गये थे |
डॅा विजय सोनकर शास्त्री के अनुसार तुर्क आक्रमणकारियों के काल में चंवर राजवंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था और इसके प्रतापी राजा चंवरसेन थे | इस क्षत्रिय वंश के राज परिवार का वैवाहिक संबंध बाप्पा रावल वंश के साथ था | राणा सांगा व उनकी पत्नी झाली रानी ने चंवरवंश से संबंध रखने वाले संत रैदासजी को अपना गुरु बनाकर उनको मेवाड़ के राजगुरु की उपाधि दी थी और उनसे चित्तौड़ के किले में रहने की प्रार्थना की थी |
संत रविदास चित्तौड़ किले में कई महीने रहे थे | उनके महान व्यक्तित्व एवं उपदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें गुरू माना और उनके अनुयायी बने | उसी का परिणाम है आज भी विशेषकर पश्चिम भारत में बड़ी संख्या में रविदासी हैं | राजस्थान में चमार जाति का बर्ताव आज भी लगभग राजपूतों जैसा ही है । औरतें लम्बा घूंघट रखती हैं आदमी ज़्यादातर मूंछे और पगड़ी रखते हैं |
संत रविदास की प्रसिद्धी इतनी बढ़ने लगी कि इस्लामिक शासन घबड़ा गया सिकन्दर लोदी ने मुल्ला सदना फकीर को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा वह जानता था की यदि रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में इस्लाम मतावलंबी हो जायेगे लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गयी स्वयं मुल्ला सदना फकीर शास्त्रार्थ में पराजित हो कोई उत्तर न दे सका और उनकी भक्ति से प्रभावित होकर अपना नाम रामदास रखकर उनका भक्त वैष्णव (हिन्दू) हो गया | दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी आगबबूला हो उठा एवं उसने संत रैदास को कैद कर लिया और इनके अनुयायियों को चमार यानी अछूत चंडाल घोषित कर दिया | उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जुती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए | लेकिन उन्होंने कहा :-
–~~~***★★★★★***~~~–
वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान,
फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान.
वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार,
तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार   (रैदास रामायण)
–~~~***★★★★★***~~~–
संत रैदास पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिउत्तर में चंवर वंश के क्षत्रियों ने दिल्ली को घेर लिया | इससे भयभीत हो सिकन्दर लोदी को संत रैदास को छोड़ना पड़ा था | संत रैदास का यह दोहा देखिए :-

बादशाह ने वचन उचारा | मत प्यारा इसलाम हमारा ||
खंडन करै उसे रविदासा  | उसे करौ प्राण कौ नाशा ||
जब तक राम नाम रट लावे | दाना पानी यह नहींपावे ||
जब इसलाम धर्म स्वीकारे | मुख से कलमा आपा उचारै ||
पढे नमाज जभी चितलाई | दाना पानी तब यह पाई ||

समस्या तो यह है कि आपने और हमने संत रविदास के दोहों को ही नहीं पढ़ा, जिसमें उस समय के समाज का चित्रण है जो बादशाह सिकंदर लोदी के अत्याचार, इस्लाम में जबरदस्ती धर्मांतरण और इसका विरोध करने वाले हिंदू ब्राहमणों व क्षत्रियों को निम्न कर्म में धकेलने की ओर संकेत करता है |
चंवर वंश के वीर क्षत्रिय जिन्हें सिकंदर लोदी ने 'चमार’ बनाया और हमारे-आपके हिंदू पुरखों ने उन्हें अछूत बना कर इस्लामी बर्बरता का हाथ मजबूत किया | इस समाज ने पददलित और अपमानित होना स्वीकार किया, लेकिन विधर्मी होना स्वीकार नहीं किया आज भी यह समाज हिन्दू धर्म का आधार बनकर खड़ा है |
आज भारत में 23 करोड़ मुसलमान हैं और लगभग 35 करोड़ अनुसूचित जातियों के लोग हैं | जरा सोचिये इन लोगों ने भी मुगल अत्याचारों के आगे हार मान ली होती और मुसलमान बन गये होते तो आज भारत में मुस्लिम जनसंख्या 50 करोड़ के पार होती और आज भारत एक मुस्लिम राष्ट्र बन चुका होता | यहाँ भी जेहाद का बोलबाला होता और ईराक, सीरिया, सोमालिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आदि देशों की तरह बम-धमाके, मार-काट और खून-खराबे का माहौल होता | हम हिन्दू या तो मार डाले जाते या फिर धर्मान्तरित कर दिये जाते या फिर हमें काफिर के रूप में अत्यंत ही गलीज जिन्दगी मिलती |
धन्य हैं हमारे ये भाई जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी अत्याचार और अपमान सहकर भी हिन्दुत्व का गौरव बचाये रखा और स्वयं अपमानित और गरीब रहकर भी हर प्रकार से भारतवासियों की सेवा की |
—~~~***★ ओ३म् ★***~~~— ★
–~~~***★ ॥ १०८ ॥ ★***~~~–


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Sunday, July 12, 2015

“तेजोअसि तेजो मयि धेहि! वीर्य मसि वीर्य मयि धेहि!! बलमसि बाम मयि धेहि! ओजोअस्य ओजो मयि...

“तेजोअसि तेजो मयि धेहि! वीर्य मसि वीर्य मयि धेहि!!
बलमसि बाम मयि धेहि! ओजोअस्य ओजो मयि धेहि!!
मन्युरसी मन्युं मयि धेहि!सहोअसि सहो मयि धेहि!! (यजुर्वेद १९/९)
भावार्थ—हे परमेश्वर! तू तेज स्वरुप है मुझे तेज दे! तू वीर्यवान है, मुझे पराक्रम दे! तू बलवान है मुझे बल दे! तू ओजस्वी है मुझे भी ओजस्वी बना! तू दुष्टो को भस्म करता है, मुझे भी वह शक्ति दे! साथ ही तू सहनशील है, मुझे भी सहनशील बना!


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एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते...

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा….

अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।

जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला।

किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।

ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।

ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया।

ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराना घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था,ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया।

किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी… इस बीच
ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में
ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर
चली गई और जैसे ही उसने घड़े
को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।

ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।

अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में देखा तो जाकर उसका कारण पूंछा।

सारा वृतांत सुनकर अर्जुन को बड़ी हताशा हुई और मन ही मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।

अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।

तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु
मेरी दी मुद्राए और माणिक
भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से
इसका क्या होगा” ?

यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस
ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।

रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि “दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ? प्रभु की यह कैसी लीला है ”?

ऐसा विचार करता हुआ वह
चला जा रहा था उसकी दृष्टि एक मछुवारे पर पड़ी, उसने देखा कि मछुवारे के जाल में एक
मछली फँसी है, और वह छूटने के लिए तड़प रही है ।

ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी। उसने सोचा"इन दो पैसो से पेट की आग तो बुझेगी नहीं।क्यों? न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये"।

यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। कमंडल में जल भरा और मछली को नदी में छोड़ने चल पड़ा।

तभी मछली के मुख से कुछ निकला।उस निर्धन ब्राह्मण ने देखा ,वह वही माणिक था जो उसने घड़े में छुपाया था।

ब्राहमण प्रसन्नता के मारे चिल्लाने लगा “मिल गया, मिल गया ”..!!!

तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहाँ से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।

उसने ब्राह्मण को चिल्लाते हुए सुना “ मिल गया मिल गया ” लुटेरा भयभीत हो गया। उसने सोंचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया है और इसीलिए चिल्ला रहा है, अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा।

इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा। और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी।

यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।

अर्जुन बोले,प्रभु यह कैसी लीला है? जो कार्य थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक नहीं कर सका वह आपके दो पैसो ने कर दिखाया।

श्री कृष्णा ने कहा “अर्जुन यह अपनी सोंच का अंतर है, जब तुमने उस निर्धन को थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक दिया तब उसने मात्र अपने सुख के विषय में सोचा। किन्तु जब मैनें उसको दो पैसे दिए। तब उसने दूसरे के दुःख के विषय में सोचा। इसलिए हे अर्जुन-सत्य तो यह है कि, जब आप दूसरो के दुःख के विषय में सोंचते है, जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं, और तब ईश्वर आपके साथ होते हैं।
🙏🙏🙏 पण्डित भावेश दवे बैंगलोर🙏9591122273


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स्वर्णिम भारत मंच (SBM) नीरज सोनी पेट तेरा भर सकती है आटे से बनी दो रोटिया फिर क्यों खाता है तू...

स्वर्णिम भारत मंच (SBM)
नीरज सोनी

पेट तेरा भर सकती है आटे से बनी दो रोटिया फिर क्यों खाता है तू बन्दे बेजुबा की बोटिया
शाकाहार सबसे बड़ा पुण्य है जैन धर्म में जीव हत्या को सबसे बड़ा पाप माना है l
ऐसा कोई धर्म नहीं जिसमे किसी निर्दोष बेजुबा की हत्या करना या मांस का सेवन बताया गया हो . हिन्दू धर्म में तो ये एकदम वर्जित है , ऐसा करने से सात पीढ़ी पाप के भागीदार होते है किसी एक के किये हुए बुरे कर्मो का फल सबको भोगना पड़ता है . दुनिया में किसी भी धर्म में मांस के सेवन को नहीं कहा गया है चाहे वो मुस्लिम धर्म हो या क्रिस्चन सब धर्मो में अहिंसा का उल्लेख मिलता है, लेकिन फिर भी खुद से स्वार्थ के लिए बेजुबा जानवर की मारा जाता है उसे अपने पेट में जगह देते है .. अरे मुर्ख प्राणी मुर्दों की जगह तो श्मशान है अगर कोई मर जाता है (चाहे वो कितना भीप्रिय रहा हो उसके बिना रह नहीं पाए) लेकिन मरने के बाद उसकी जगह सिर्फ शमशान ही होना है क्या कभी आपने सुना है के किसी ने अपने मरे हुए प्रिय जो घर में जगह दी हो या कबी किसी ने मरने के बाद किसी को घर पर रखा है … नहीं बिलकुल नहीं ,, घर पर भी केवल जिन्दा लोगो को रहने का हक़ है मरने के बाद तो उसे जल्दी से जल्दी वहा से निकालने की तेयारी शुरु हो जाती है और जब उसे निकला नहीं जाता घर पर चूल्हा नहीं जलता उसके अंतिम संस्कार के बाद नहा धोकर कुछ कहते है .ये नियम हमारा बनाया हुआ नहीं है प्रकति का ये नियम है उसके वावजूद कुछ लोग मरे हुए हुए जानवर को घर लाकर खाते है अब इसे उनकी नादानी कहोगे या पागलपन ये सोचना आपको है समाज को बचाना है आने वाले पीढ़ी को संस्कार वान बनाओ उनका जीवन ख़राब मत करो सोचिये ज़रा ..


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Friday, July 10, 2015

आषाढ़ कृ. ९ 10 जुलाई 15 😶 “धन का प्रयोग! ” 🌞 🔥🔥ओ३म् पृणीयादित्राधमानाय तव्यान्...

आषाढ़ कृ. ९ 10 जुलाई 15

😶 “धन का प्रयोग! ” 🌞

🔥🔥ओ३म् पृणीयादित्राधमानाय तव्यान् द्रीघीयांसमनु पश्येत पन्थाम् । ओ हि वर्तन्ते रथ्येव चक्रान्यमन्यमुप तिष्ठन्त राय: ।। 🍂🍃
ऋ० १० । ११७ । ५

शब्दार्थ:- धन से बढ़े हुए समृद्ध पुरुष को चाहिए कि वह माँगनेवाले सत्पात्र को दान देवे ही , सुकृत मार्ग को दीर्घतम देखे। इस लम्बे मार्ग में धन-सम्पतियाँ निश्चय से रथ-चक्रों की भाँति ऊपर-नीचे घूमती रहती हैं, बदलती रहती हैं और एक को छोड़कर दूसरे के पास जाती रहती हैं।

विनय:- धन को जाते हुए कितनी देर लगती है? व्यापार में घाटा हो जाता है, चोर-लुटेरे धन लूट ले जाते हैं, बैंक टूट जाते हैं, घर जल जाता है आदि सैकड़ों प्रकार से लक्ष्मी मनुष्य को क्षणभर में छोड़कर चली जाती है। वह मनुष्य कितना मूर्ख है जो यह समझता है कि बस, यदि मैं दूसरों को धन दान नहीं करूँगा तो और किसी तरह मेरा धन मुझसे जुदा नहीं हो सकेगा। अरे, धन तो जब समय आएगा तो एक पलभर में तुझे कंगाल बनाकर कहीं चला जाएगा। इसलिए
हे धनी पुरुष!
यदि इस समय तेरे शुभकर्मों के भोग से तेरे पास धन-सम्पत्ति आई हुई है तो तू इसे यथोचित-दान में देने में कभी संकोच मत कर। सच्चा दान करना, सचमुच जगत्पति भगवान् को उधार देना है जो बड़े भारी दिव्य सूद के साथ फिर वापस मिलता है। जो जितना त्याग करता है वह उससे न जाने कितना गुणा अधिक प्रतिफल पाता है, यह ईश्वरीय नियम है। यदि इस संसार की गति को हम ज़रा भी ध्यान के साथ देखें तो पता लगेगा कि धन-सम्पत्ति इतनी अस्थिर है कि यह रथचक्र की भाँति घूमती फिरती है-आज इसके पास है तो कल दूसरे के पास है, पर हम अति क्षुद्र दृष्टि वाले हैं और इसीलिए इस ‘आज’ में ही इतने ग्रस्त हैं कि हम 'कल’ को देखते हुए भी देखते नहीं हैं। यदि हम मार्ग को विस्तृत दृष्टि से देखें तो इन धनागमों और धननाशों को अत्यंत तुच्छ बात समझें। यदि संसार में प्रतिक्षण चलायमान, घूमते हुए, इस धन-चक्र को देखे, इस बहते हुए धनप्रवाह को देखेँ, तो हमें धन जमा करने का ज़रा भी मोह न रहे।

🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
ओ३म् का झंडा 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
……………..ऊँचा रहे

🐚🐚🐚 वैदिक विनय से 🐚🐚🐚


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🌻वेदामृतम्🌻 व्रतं कृणुत ।(यजुर्वेद ४/११) मनुष्य को शुभ कर्म करने का व्रत (नियम) लेना चाहिए । 🌹🌹...

🌻वेदामृतम्🌻

व्रतं कृणुत ।(यजुर्वेद ४/११)

मनुष्य को शुभ कर्म करने का व्रत (नियम) लेना चाहिए ।

🌹🌹 सुभाषितम् 🌹

॥ मोक्ष - (मुक्ति) ॥

वेदाभ्यासस्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां च संयम: । अहिंसा गुरुसेवा च , नि:श्रेयसकरम्परम् ॥
(मनुस्मृति १२/८३)

वेदों का अभ्यास , तपस्या, ज्ञान, इन्द्रियों का संयम, अहिंसा और आचार्य, माता - पिता आदि गुरुजनों की सेवा ये मोक्ष प्राप्ति कराने वाले श्रेष्ठ साधन हैं ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🌞 आज का पंचांग🌞

तिथि………..नवमी
वार…………..शुक्रवार
नक्षत्र ……….अश्विनी
योग…………सुकर्मा

(समय मान जयपुर का है)
सूर्योदय ———– ५-४३
सूर्यास्त ———–१९-२०
चन्द्रोदय ———-२५-३६
चन्द्रास्त ———-१४-०१
सूर्य राशि ———-मिथुन
चन्द्र राशि———मेष

सृष्टि संवत् -१,९६,०८,५३,११६
कलियुगाब्द……………५११६
विक्रमी संवत्…………..२०७२
अयन……………..उत्तरायण
ऋतु……………………ग्रीष्म
मास पूर्णिमांत——-आषाढ
(अधिक मास)
विक्रमी संवत् (गुजरात)-२०७१
मास अमांत( गुजरात)…..आषाढ
पक्ष………………… कृष्ण

आंग्ल मतानुसार १० जुलाई सन् २०१५ ईस्वी ।

🌻आज का दिन आपके लिए मंगलमय एवं शुभ हो । 🌻


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Thursday, July 9, 2015

दीर्घजीवन का एक उपाय संगीत व वेदगान - पण्डित रघुनन्दन...

दीर्घजीवन का एक उपाय संगीत व वेदगान

- पण्डित रघुनन्दन शर्मा
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“संगीत के सदृश चित्त को प्रसन्न करनेवाली और कोई वस्तु संसार में नहीं है और न प्रसन्नता के समान - आनन्द के समान - जीवनदान देनेवाली कोई औषधि भी है ।

अतएव दीर्घजीवन देनेवाले संगीत का अभ्यास करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है ।

आर्यों ने अपने प्रत्येक कार्य में जो वेदों के सस्वर पाठ का क्रम रखा है, उसका यही कारण है ।

आर्य लोग दिन भर किसी न किसी वैदिक यज्ञ के अनुष्ठान में रहते थे और कोई न कोई वेदमन्त्र गाया ही करते थे ।

परन्तु आजकल विद्वानों ने स्वर-ज्ञान को खो दिया है, इसलिए वेदों का पाठ इतना आनन्द नहीं देता जितना संगीत के साथ देता था ।

इसलिए दीर्घजीवन चाहनेवाले प्रत्येक आर्य को उचित है कि वह परमात्मा की स्तुति, प्रार्थना और उपासना से सम्बन्ध रखनेवाले वेदमन्त्रों को सदैव स्वरों के साथ कायदे से (अर्थात् स्वरविज्ञान के नियम अनुसार) गाने का अभ्यास करे ।

वैदिक ज्ञान से हृदय को आनन्द और मस्तिष्क को उच्च ज्ञान प्राप्त होगा, जिससे उसको अपने समस्त कामों को नियमपूर्वक करने की सूचना मिलती रहेगी और वह दीर्घजीवन के उपायों से कभी विचलित न होगा ।”


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आहार ही औषधी 🍏🍑 🌽foods that heal 🍋🍐 भोजन द्वारा स्वास्थ्य🍒 (1)-केला: 🍌 ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता...

आहार ही औषधी 🍏🍑

🌽foods that heal
🍋🍐 भोजन द्वारा स्वास्थ्य🍒

(1)-केला: 🍌
ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।

(2)-जामुन: 🌑
केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक।

(3)-सेवफ़ल: 
हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है.

(4)-चुकंदर:-🍐
वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है।

(5)-पत्ता गोभी: 🍏
बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है।

(6)-गाजर:- 
नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है।

(7)- फ़ूल गोभी:-🍈
हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।

(8)-लहसुन:
कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है

(9)-नींबू:
त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है।

(10)-अंगूर:🍇
रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है।

(11)-आम:🍋
केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है।

(12)-प्याज: 🍑
फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।

(14)-अलसी के बीज:
मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है।

(15)-संतरा:🍈
हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है

(16)-टमाटर: 
कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा ।

(17)-पानी: 
गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है।

(18)-अखरोट: 
मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है, कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।

(19)-तरबूज:
स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है।

(20)-अंकुरित गेहूं: 
बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है।

(21)-चावल:
किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।

(22)-आलू बुखारा:🍒
हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।

(23)-पाईनएपल:🍍
अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थि क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है।

(24)-जौ,जई: 🌽
कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।

(25)-अंजीर:
रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है।

(26)-शकरकंद:🍠
आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है


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ध्रुव सत्य है, की १९४७ का बटवारा इस बात पर ही हुआ था की हमे एक ऐसे काफ़िर के साथ नहीं रहेना जो हम से...

ध्रुव सत्य है, की १९४७ का बटवारा इस बात पर ही हुआ था की हमे एक ऐसे काफ़िर के साथ नहीं रहेना जो हम से अलग है. जबकि सत्य यह है के आप उस घर में आक्रमणकारी बनकर, शरणार्थी बनकर आये थे आश्रय पाया या जबरदस्ती राज किया और फिर एक दिन आपने ही उनके साथ रहेने से इनकार कर दिया.
उस देश के असली वारिसो की नसले बर्बाद की, 
उसके घर को रक्तरंजित और खेत खलियान को लहू लूहान किया, 
उसके सभी पवित्र स्थानों (मंदिरों) को अपवित्र किया और अंत में उसी पर तोहमत मारते हुए एक बहुत ही उपजाऊ देश का हिस्सा धर्म के नाम पर मांग लिया.
दे भी दिया गया ! उसने अपनी दोनों भुजाये काट कर धर्म की नफरत को रोकने की पूरी कोशिश करते हुए अपना गोश्त देकर आपकी यह मांग भी पूरी कर दी. जो देश बाँटने के बाद सीमा के उसपार नहीं जा सकते थे उनको इस भारत देश के वासियो ने आपको छोटा भाई और शरणार्थी मान कर सर आखों पर बैठाया और विशेष दर्जा भी दिया, अलाप्संख्यक का. हिन्दू अपनी माँ, बहिन की लुटी असिमिता को भी भूल गए, उसके वीर पुरखो, दसो गुरुओ के बलिदान को भी भूल गए. फिर भी इस देश में बचे इस असहानफरामोश कौम ने उसी के लहू से स्नान करना जारी रखा.
वो जो ले लिया गया उसका तो जिक्र ही नहीं जो अभी है उसपर फिर से वो ही धोंसपट्टी, मेरा लाल गोपाल अभी भी मस्जिदों में कैद है, राम लल्ला अभी भी पुलिस के सायें में है. बाबा विश्वनाथ अभी भी बंधक है. हर शहर और गाँव में अभी भी वो ही दुरभिसंधि जो आज से ६० साल पहेले थी. अभी भी उसकी गौ माता का कलेजा चीर कर गोश्त को खाया और लहू को पीया जा रहा है. अभी भी हिन्दू लडकियों के साथ बलात्कार कर लव जिहाद किया जा रहा है. बाबा अमरनाथ पर जाना आज भी उतना ही कठिन जितना ६० साल पहेले जैसे औरंगजेब को जजिया दिया जाता है अब कश्मीर सकरार को. देश के हिन्दू को आज भी उतना अधिकार नहीं की वो अपनी माँ सरस्वती और दुर्गा के नंगे चित्रों पर विरोध दर्ज ही करा सके. आज भी गाजी और पीर पर ही अगरबत्ती जल रही है. आज भी मस्जिदों को ही संगरक्षण मिल रहा है.
आज आप धर्मनिरपेक्ष, मुसलमान और भारत सरकार हिन्दुओ के साथ न्याय करना चाहेंगी की नहीं? पकिस्तान और बंगलादेश से १९४७ में जो हिन्दू आया था वो अमूमन सक्षम था जिसका बंगलादेश और पकिस्तान के बड़े बड़े नगरो में बहुत ही अच्छा और बड़ा कारोबार था. जिसका नहीं था उसका तो वहीँ पर खतना कर दिया गया. और जो हिंदुस्तान आया उसने यहाँ आकर अपने दम पर हिंदुस्तान में अपना स्थान बनाया. परन्तु आपको फिर से इस देश ने बटवारा करने के इनाम के तौर पर अलाप्संख्यक का विशेष दर्जा दिया जो कालांतर में आपको सभी संसाधनों पर प्रथम स्थान पाने का हकदार बना गया. आज आपको हिन्दुस्तान में इतनी इज्जत और रुतबे के साथ रखा जा रहा है की पकिस्तान के मुसलमान के जीभ में पानी भर आता है और वो वहा से अपनी नौटंकी यहाँ आकर फिल्मो में, टीवी में और संगीत में पैसा कमा कमा कर जाते है. 
और आपने हिंदुस्तान के अपने शरण दाताओं को बदले में क्या दिया?
यदि हिन्दुस्तान में एक भी इस कौम का सच्चा बच्चा है तो बताए की तुमने हिंदुस्तान के हिन्दुओ को क्या दिया ?
८०० साल तुमने उनकी असिमिता और भावनाओ से खेला, आज दो देश लेने के बाद भी बदले में उनको वापस क्या किया ?
इसको असाहन फरामोशी नहीं कहेंगे तो क्या कहंगे आप ?


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पहले देखें ,पढ़ें और समझें —कृपया पूरा पढ़ें ————— आज किस भी नई...

पहले देखें ,पढ़ें और समझें —कृपया पूरा पढ़ें
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आज किस भी नई हिन्दू दंपत्ति से पूछो ,क्यों जी शादी हो गयी अब तो फुटबॉल टीम होगी,तो जवाब होगा 
उनहुंक सिर्फ 1 होगा/होगी ज्यादा से ज्यादा 2 ,1 ही होगी ,वैसे ये अच्छी बात है 
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कड़वा सच—हिन्दू दंपत्ति आप सब 1 बच्चा करो,मुस्लिम दंपत्ति 3-4 औसतन कर रहा है,ओवैसी के खुद 6 बच्चे है
30 सालों में आपका 1 बच्चा 30 साल का हो जायेगा,उस समय मुस्लिम जनसँख्या 50% पार हो जायेगी
आपका 1 बच्चा खतरे में पड़ जायेगा,तो आज आपका 1 संतान को आप खतरे में पड़ने के लिए जन्म दे रहे हो
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क्या इतिहास से सीख नहीं लेते आप,आस पास घटनाओं से सीख नहीं लेते,मलेशिया में 50% मुस्लिम जनसँख्या होते ही उसे
इस्लामी देश बना दिया गया,अब वहां दूसरे धर्म के लोगो का जीना मुश्किल है।
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क्या आपको 1947 याद नहीं 30% होते ही आपके भाईचारे वाले भाइयों ने देश के टुकड़े कर डाले,30 लाख से अधिक हिन्दुओ की हत्या हुई 6 लाख से अधिक बलात्कार हुए 
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क्या आपको वर्तमान भारत के हालात पता नहीं,30% के लगभग या अधिक मुस्लिम जनसँख्या वाले राज्य उदहारण,कश्मीर,बंगाल,केरल,असम यहाँ के हालात आपको नहीं मालुम,हिन्दू महिलाओ का शोषण,हिन्दुओ पे हमले आम बात है,यहाँ तो हिन्दू लगभग ख़त्म होने के कागार पर है 10 सालों में ही 
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चलिए कुछ और जगहों पर नजर डालते है उदहारण इराक,सीरिया,नाइजिरिया,यहाँ दूसरे धर्म वालो का क़त्ल,बलात्कार आम बात है ,मुस्लिम जनसँख्या अधिक होते ही शरिया की मांग,इस्लामी देश बनाने की मांग,
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अब इस्लामी देश बन जायेगा तो क्या होगा,वो आपको दिख नहीं रहा पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में हिन्दुओ की हालात
हिन्दू महिला का अपहरण,बलात्कार हत्या लूट ये तो सब जैसे क़ानूनी है 
मार खा के हिन्दू भारत में आता है,पर जब आपका भारत 30 सालों में 50% से अधिक मुस्लिम वाला देश होगा
तो आप मार खा के कहाँ जायेंगे,समुन्दर में डूब मरेंगे या आज के बांग्लादेश तथा पाकिस्तान में जैसी हिन्दुओ की हालात है
वैसे में जीना चाहेँगे।
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कड़वा सच—–आपकी ये उदारता,सेकुलरिज्म 1 बच्चा जी ,ये सब आपके उसी 1 बच्चे के लिए खतरा होंगी और आपका 1 बच्चा वो कभी आगे बचेगा नहीं ये उदाहरणों से प्रमाणित होता है।
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एक और चीज प्यारे सिख,जैन,बौद्ध इत्यादि मित्रों से ,मित्रो देश में फ़िलहाल हिन्दू बहुसंख्यक है इसलिए आप भी सुरक्षित हैं,पढ़ते है,व्यपार करते है इत्यादि,अन्यथा पहले सिख,जैन इत्यादि पाकिस्तान में भी थे आप भी हिन्दू धर्म तथा उसकी सुरक्षा में योगदान दें इसमें अपकी ही सुरक्षा है,क्योंकि हिन्दू समाज भाईचारे और प्रेम की गरंटी है
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अब थोडा सा भी दिमाग पर जोर पड़ा,या कुछ मित्रो को ये खतरा पहले से पता है वो शेयर जरूर ही करें
ताकि सोये हुए तथा मस्ती काट रहे प्यारे हिन्दुओ की आँख खुलने या जागरूकता की उम्मीद हो सके
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सच ये है जहाँ जहाँ हिन्दू घटा,वहां वहां हिन्दू कटा,सैनिको की हत्या हुई,देश बंटा
शेयर जरूर करे इस प्यारे देश को बचाएँ।


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* दमा में ….तेजपात ,पीपल,अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्र में लेकर चटनी पीस लीजिए।१-१ चम्मच...

* दमा में ….तेजपात ,पीपल,अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्र में लेकर चटनी पीस लीजिए।१-१ चम्मच चटनी रोज खाएं ४० दिनों तक। फायदा सुनिश्चित है।


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– 20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं,...

– 20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं | जी हाँ मिठाई भी ।।

–डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है ।
और एक ख़ास बात । चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।

–मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।

अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–

> 1 – गेंहू 100 gm.
> 2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
> 3 - जौ 100 gm.
> 4 - कलुन्जी 100 gm.

–( निर्माण विधि )

उपरोक्त सभी सामग्री को ५ कप पानी में रखें । आग पर इन्हें १० मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।

–( उपयोग विधि )

सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं …और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।
जिस किसी के पेरेंट्स को प्रॉब्लम हो उपयोग करे और आगे फॉरवर्ड करे साभार -


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Wednesday, July 8, 2015

आषाढ़ कृ.८ 9 जुलाई 15 😶 “अकेले मत भोगो! ” 🌞 ओ३म् मोघमन्नं विन्दते अप्रचेता: सत्यं...

आषाढ़ कृ.८ 9 जुलाई 15

😶 “अकेले मत भोगो! ” 🌞

ओ३म् मोघमन्नं विन्दते अप्रचेता: सत्यं ब्रवीमि वध इत् स तस्य। नार्यमणं पुष्यति नो सखायं केवलाघो भवति केवलादी ।। 
ऋ० १० । ११७ । ६ 
शब्दार्थ :- दुर्बुद्धि मनुष्य व्यर्थ ही भोग-सामग्री को पाता है।सच कहता हूँ कि वह भोग-सामग्री उस मनुष्य के लिए मृत्युरूप ही होती है-उसका नाश करने वाली ही होती है। ऐसा दुर्बुद्धि न तो यज्ञ द्वारा अर्यमादि देवों की पुष्टि करता है और न ही मनुष्य-साथियों की पुष्टि करता है। सचमुच वह अकेला खाने-भोग करनेवाला मनुष्य केवल पाप को ही भोगने वाला होता है।

विनय:- हे इंद्र !
संसार में धनी दिखने वाले दुर्बुद्धि (पापबुद्धि) मनुष्य के पास जो अन्न-भंडार और नाना भोग-सामग्री दिखाई देती है, क्या वह भोग-सामग्री है? अरे,वह सब भोग-विलास का सामान तो उनकी ‘मौत’ है। वे भोग-वस्तुऍ नहीं हैं, किन्तु उनको खा जाने वाले ये इतने उनके भोक्ता हैं, भक्षक हैं। 
हे मनुष्य!
तुम्हे इस विचित्र बात पर विशवास नहीं होता होगा, किन्तु मैं सच कहता हूँ, सच कहता हूँ और फिर सच कहता हूँ कि पापी, दुर्बुद्धि पुरुष के पास एकत्र हुआ सब सांसारिक भोग का सामान उसकी मृत्यु का सामान है, इसमें ज़रा भी संदेह नहीं है, क्यूंकि वह पुरुष अपने इस धन-ऐश्वर्य द्वारा केवल अपने देह को ही पोषित करता है। न तो वह उस द्वारा अपने अन्य मनुष्य-भाइयों को पोषित करके अपने स्वाभाविक यज्ञ-धर्म को पालता है, न ही वह अर्यमादि देवों के लिए आहुति देकर आधिदैविक आदि जगत् के साथ अपना सम्बन्ध स्थापित रखता है। मनुष्यों! याद रखो कि अकेला भोगनेवाला, औरों को बिना खिलाये स्वयमेव अकेला भोगने वाला मनुष्य, केवल पाप को ही भोगता है। जबकि चारों ओर असंख्य पुरुष एक समय भी भरपेट भोजन न पा सकने वाले, भूखे-नंगे, झोपड़ों में पड़े हों तो उनके बीच में जो हलुवा-पूरी खाने वाला, महल में रहने वाला, पलंग पर सोने वाला 'अप्रचेता:’ पुरुष है उससे तुम क्यों ईर्ष्या करते हो? तुम्हें बेशक वह मज़े में हलुवा-पूरी खाता हुआ नज़र आता है, पर ज़रा सूक्ष्मता से देखो तो वह बेचारा तो केवल अपने पाप को भोग रहा होता है, वह केवल शुद्ध पाप का भागी होता है और इस अयज्ञ के भारी पाप-बोझ को वह अकेला ही उठाता है; इसमें उसका कोई और साथी नहीं होता। “केवलाघो भवति केवलादि” यह संसार का परम सत्य है। इसे कभी मत भूलो! (शरीर, मन और आत्मा तीनों को पुष्ट करनेवाले) सच्चे भोजन में और(शीघ्र ही विनाश को पहुँचा देने वाले) पापमय भोजन में भेद करो! पाप से सना हुआ हलुवा-पूरी खाने की अपेक्षा रुखा-सुखा खाना या भूखा रहना हज़ारों गुणा श्रेष्ठ है।। पहले प्रकार का भोजन मौत है; दूसरा अमृत है।

ओ३म् का झंडा 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
……………..ऊँचा रहे

 वैदिक विनय से


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चाँद मियाँ ( उर्फ़ साँईं बाबा ), ख्वाजा गरीब नवाज़,  अमीर खुसरो,  निजामुद्दीन औलिया,  हाजी अली,  मामा...

चाँद मियाँ ( उर्फ़ साँईं बाबा ),
ख्वाजा गरीब नवाज़, 
अमीर खुसरो, 
निजामुद्दीन औलिया, 
हाजी अली, 
मामा - भांजा की मज़ार, 
आदि - आदि की दरगाह पर जाकर मन्नत मांगने वाले सनातन धर्मी हिन्दू लोगों के लिए विशेष :-

पूरे देश में स्थान स्थान पर बनी कब्रों, मजारों या दरगाहों पर हर वीरवार को जाकर शीश झुकाने व मन्नत करने वालों से कुछ प्रश्न :-

१. क्या एक कब्र जिसमें मुर्दे की लाश मिट्टी में बदल चुकी है वो किसी की मनोकामना पूरी कर सकती हैं ?

२. ज्यादातर कब्र या मजार उन मुसलमानों की हैं जो हमारे पूर्वजो से लड़ते हुए मारे गए थे, उनकी कब्रों पर जाकर मन्नत मांगना क्या उन वीर पूर्वजों का अपमान नहीं हैं जिन्होंने अपने प्राण धर्म की रक्षा करते हुए बलि वेदी पर समर्पित कर दिये थे ?

३. क्या हिन्दुओं के भगवान श्री राम जी, श्री कृष्ण अथवा देवी - देवता शक्तिहीन हो चुकें हैं जो मुसलमानों की कब्रों पर सर पटकने के लिए जाना आवश्यक है ?

४. जब गीता में श्री कृष्ण जी महाराज ने कहाँ है कि कर्म करने से ही सफलता प्राप्त होती हैं तो मजारों में दुआ मांगने से क्या हासिल होगा ?

यान्ति देवव्रता देवान्
पितृन्यान्ति पितृव्रताः
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्तमद्याजिनोऽपिमाम

अर्थात, श्रीमदभगवत गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भूत प्रेत, मुर्दा, पितृ (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र,मजार अथवा समाधि) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत- प्रेत व पितृ की योनी में ही विचरण करते हैं व उसे ही प्राप्त करते हैं l

५. भला किसी मुस्लिम देश में वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, हरी सिंह नलवा, बंदा बहादुर, गुरु गोबिंद सिंह, भगवन बुद्ध, महावीर स्वामी, स्वामी विवेकानंद आदि वीरों की स्मृति में कोई स्मारक आदि बनाकर उन्हें पूजा जाता हैं ? तो भला हमारे ही देश पर आक्रमण करने वालों की कब्र पर हम क्यों शीश झुकाते हैं ?

६. क्या संसार में इससे बड़ी मूर्खता का प्रमाण आपको कहीं मिल सकता है ?

७. हिन्दू कौन सी ऐसी अध्यात्मिक प्रगति मुसलमानों की कब्रों की पूजा कर प्राप्त कर रहे हैं जो वेदों-उपनिषदों-पुराणों-स्मृतियों आदि में कहीं नहीं कही गयीं हैं ?

८. कब्र, मजार पूजा को हिन्दू मुस्लिम सेकुलरता की निशानी बताना हिन्दुओं 
को अँधेरे में रखना नहीं तो क्या हैं ? सेक्युलरता तो ये तब हो न, जब मुस्लिम भी वहाँ शीश झुकाएं ।
नोट - सूफी समाज इस्लाम की मुख्यधारा का हिस्सा नहीं है, अर्थात वे उन्हें मुस्लिम नहीं मानते ।

आशा है आप इस लेख को पढ़ कर आपकी बुद्धि में कुछ प्रकाश हुआ होगा 
अगर आप आर्य राजा श्री राम और श्री कृष्ण जी महाराज की संतान हैं तो तत्काल इस मुर्खता पूर्ण अंधविश्वास को छोड़ दें और अन्य हिन्दुओं को भी इस बारे में बता कर उनका अंधविश्वास दूर करें व आप अपने धर्म को जानिए l इस अज्ञानता के चक्र में से बाहर निकलिए l

विशेष : - पृथ्वी राज चौहान की समाधि पर कंधार, अफगानिस्तान में अभी हाल ही तक भी जूते चप्पल मारे जाते थे । जब तक एक हिन्दू वीर ने बड़ी चतुराई से उनकी अस्थियां वहां से भारत भेज कर माँ गंगा को अर्पण नहीं कर दीं । परंतु आज भी वे लोग उस बिना अस्थियों वाली कब्र पर अपने जूते - चप्पल ही झाड़ कर मोहम्मद गौरी की मज़ार में जाते हैं ।


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वेदामृतम् देवो व: सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्म्मणे । (यजुर्वेद १/१) उत्तम प्रेरणा देने वाला...

वेदामृतम्

देवो व: सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठतमाय कर्म्मणे । (यजुर्वेद १/१)

उत्तम प्रेरणा देने वाला परमात्मा तुम्हें अधिक श्रेष्ठ कर्म करने के लिए प्रेरणा प्रदान करे ।

 सुभाषितम् 

॥ स्वाध्याय ॥

यथा यथा हि पुरुष : , शास्त्रं समधिगच्छति । तथा तथा विजानाति, विज्ञानं चास्य रोचते ॥ 
(मनुस्मृति ४/२०)

जैसे - जैसे मनुष्य शास्त्र का सम्यक् प्रकार से स्वाध्याय करता जाता है, वैसे वैसे ही वह अनेक पदार्थों को विशेष रूप से जानता जाता है और उसकी विवेक युक्त ज्ञान में रुचि बढती जाती है ।

🌞 आज का पंचांग🌞

तिथि………..अष्टमी
वार…………..गुरुवार
नक्षत्र ……….रेवती
योग…………अतिगन्ड

(समय मान जयपुर का है) 
सूर्योदय ———– ५-४३
सूर्यास्त ———–१९-२०
चन्द्रोदय ———-२४-५१
चन्द्रास्त ———-१३-०१
सूर्य राशि ———-मिथुन
चन्द्र राशि———मीन

सृष्टि संवत् -१,९६,०८,५३,११६
कलियुगाब्द……………५११६
विक्रमी संवत्…………..२०७२
अयन……………..उत्तरायण
ऋतु……………………ग्रीष्म
मास पूर्णिमांत——-आषाढ 
(अधिक मास) 
विक्रमी संवत् (गुजरात)-२०७१
मास अमांत( गुजरात)…..आषाढ
पक्ष………………… कृष्ण

आंग्ल मतानुसार ९ जुलाई सन् २०१५ ईस्वी ।

आज का दिन आपके लिए मंगलमय एवं शुभ हो ।


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Yogi ka atmacharitra

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