Thursday, September 24, 2015

🌹🌹🌹ओउम्🌷🌷🌷 भूपेश आर्य~8954572491 🌻आर्य शब्द तर्क की कसोटी पर:-🌻 हमारा सबसे पुराना व गौणिक नाम आर्य...

🌹🌹🌹ओउम्🌷🌷🌷 भूपेश आर्य~8954572491 🌻आर्य शब्द तर्क की कसोटी पर:-🌻 हमारा सबसे पुराना व गौणिक नाम आर्य है।जिसका अर्थ है श्रेष्ठ,सभ्य,भला,साधु,सज्जन,विद्वान,धार्मिक,कर्तव्यपरायण,शान्त चित्त,उदार चित्त,परोपकारी,सर्व हितकारी,न्याय मार्गावलम्बी,सत्यधर्म प्रचारक,चरित्रवान,एक निराकार न्यायकारी,सर्व शक्तिमान,ईश्वर का उपासक,सन्मार्गी आदि । ये लक्षण जिस व्यक्ति में पाये जायें वह व्यक्ति विश्व के किसी भी भू-खण्ड में रहता हो वह व्यक्ति आर्य है। लेकिन दु:ख है कि जनमानस में कुछ अल्पज्ञ व तथाकथित पढे लिखे लोग भी आर्य शब्द सुनकर भडककर चौंक व चिढ पडते हैं और असंगत ज्ञान,बुद्धि तर्क की दीवार खडी करने का प्रयास करने लगते हैं।राम ने रामायण में अपने को आर्य कहा व श्रीक्रष्ण जी ने अपने को महाभारत में आर्य कहा,हिन्दू नहीं। आर्य नाम मानव के लिए सर्वश्रेष्ठ,गौरवपूर्ण उपाधि व कर्मों की उत्क्रष्टता का परिचायक है। 🌹अब देखिये आर्य शब्द के प्रमाण स्रष्टि की समकालीन पुस्तक ऋग्वेद में- 👏१.क्रणवन्तो विश्वमार्यम। अर्थ-सारे संसार को आर्य बनाओ। मनुस्म्रति में- 👏२.मद्द मांसा पराधेषु गाम्या पौरा: न लिप्तका:। आर्या ते च निमद्दन्ते सदार्यावर्त्त वासिन:।। अर्थ-वे ग्राम व नगरवासी जो मद्द,मांस और अपराधों में लिप्त न हो तथा सदा से आर्यावर्त्त के निवासी हैं वे ‘आर्य’ कहे जाते हैं। बाल्मीकि रामायण में- 👏३.सर्वदा मिगत: सदिश: समुद्र इव सिन्धुभि:। आर्य सर्व समश्चैव व सदैव प्रिय दर्शन:।। अर्थ-जिस तरह नदियां समुद्र के पास जाती हैं उसी तरह जो सज्जनों के लिए सुलभ हैं वें आर्य हैं जो सब पर समद्रष्टि रखते हैं हमेशा प्रसन्नचित्त रहते हैं। महाभारत में- 👏४.न वैर मुद्दीपयति प्रशान्त।न दर्पयासे हति नास्तिमेति। न दुगेतोपीति करोव्य कार्य।तमार्य शीलं परमाहुरार्या।।(उद्दोग पर्व) अर्थ-जो अकारण किसी से वैर नहीं रखते तथा गरीब होने पर भी कुकर्म नहीं करते उन शील पुरुषों को 'आर्य’ कहते हैं। वशिष्ठ स्म्रति में- कर्त्तव्यमाचरन काम कर्त्तव्य माचरन। तिष्ठति प्रक्रताचारे य: स आर्यं स्म्रत:।। अर्थ-जो रंग,रुप,स्वभाव,शिष्टता,धर्म,कर्म,ज्ञान और आचार-विचार तथा शील स्वभाव में श्रेष्ठ हो उसे 'आर्य’ कहते हैं। निरुक्त में यास्काचार्य जी लिखते हैं- 👏६.आर्य ईश्वर पुत्र हैं। विदुर नीति में- 👏७.आर्य कर्मणि रज्यन्ते भूति कर्माणि कुर्वते। हितं च नामा सूचन्ति पण्डिता भरतर्षभ।।। अर्थ-भरत कुल भूषण! पण्डित जन्य जो श्रेष्ठ कर्म कर्मों मे रुचि रखते हैं,उन्नति के कार्य करते हैं तथा भलाई करने वालों में दोष नहीं निकालते हैं वही 'आर्य’ हैं। गीता में- 👏८.अनार्य जुष्टम स्वर्गम् कीर्तिं करमर्जुन।(अध्याय २ श्लोक २) अर्थ-हे अर्जुन तुझे इस असमय में यह अनार्यों का सा मोह किस हेतु प्राप्त हुआ क्योंकि न तो यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरित है और न स्वर्ग को देने वाला है तथा न कीर्ति की और ही ले जाने वाला है। नीतिकार के शब्दों में- 👏१०.प्राय: कन्दुपातेनोत्पतत्यार्य: पतन्नपि। तथा त्वनार्ष पतति म्रत्पिण्ड पतनं यथा।। अर्थ-आर्य पाप से च्युत होने पर भी गेन्द के गिरने के समान शीघ्र ऊपर उठ जाता है अर्थात् पतन से अपने आपको बचा लेता है, अनार्य पतित होता है तो मिट्टी के ढेले के गिरने के समान फिर कभी नहीं उठता। धम्म पद में- 👏१२.अरियत्पेवेदिते धम्मे सदा रमती पण्डितो। अर्थ-पण्डित जन सदा आर्यों के बतलाये धर्म में ही रमण करता है। पाणिनि सूत्र में- 👏१३.आर्यो ब्राह्मण कुमारयो:। ब्राह्मणों में 'आर्य’ ही श्रेष्ठ है। काशी विश्वनाथ मन्दिर के मुख्य द्वार पर- 👏१४.आर्य धर्मेतराणो प्रवेशो निषिद्ध:। अर्थ-आर्य धर्म से इतर(अलग) लोगों का प्रवेश वर्जित है। आर्यों के सम्वत् में- 👏१५.जम्बू दीपे भरतखण्डे आर्यावर्ते अमुक देशान्तर्गते। ऐसा वाक्य बोलकर हमारे पौराणिक भाई भी संकल्प पढते हैं अर्थात् यह आर्यों का देश 'आर्यावर्त’ है। राष्ट्र कवि “मैथिलीशरण गुप्त” जी अपनी पुस्तक भारत भारती में लिखते हैं- 👏यह पुण्य भूमि प्रसिद्ध है, इसके निवासी आर्य हैं। विद्दा,कला,कौशल में, सबके प्रथम आचार्य हैं।। आभाष ईश्वर जीव का, केवल्य तक किसने किया। सुन लो प्रति ध्वनि हो रही, यह कार्य आर्यों ने किया।। कवि “नरदेव” जी के शब्दों में देखिये- 👏उदय अस्त लौ राज्य किया था,आर्य वीर नरेशों ने। कन्याओं का दान किया था,आकर यहां भुवनेशों ने।। सेल्यूकस की हेलन लाली,चन्द्र गुप्त की थी घर वाली। अमरीका ईरान काँपते,ऐसे थे क्षत्रीय बलशाली।। इसलिये- अब तो जाग मेरी आर्य जाति,बीता बहुत जमाना। अगर आंख नहीं खोली तो,लुट जाये सभी खजाना।। अरबों वर्ष सकल धरती पर,ध्वज तेरा लहराया। चक्रवर्ती उदय अस्त लौ,राज्य तेरा कहलाया।। अमरीका,ईरान,चीन को,तूने कभी पाठ पढाया। कर दी कन्या दान तुझे,अपना दामाद बनाया।। आज वही चाहते हैं तेरा,नामो निशां मिटाना। अब तो जाग मेरी आर्य जाति,बीता बहुत जमाना।। ~~~~~इति ओउम्~~~~~~


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