🌺गृहस्थ जीवन व्यवहार विचार 🌺 👉जो मनुष्य नियमो को उत्तम ढंग से पालन करता हुआ श्रेष्ठ कर्मो को करता है; वो जनता का नेतृत्व करता है; और उनकी रक्षा व् पालन का विचार करता है। अतः सत्य का पालन करते हुए श्रेष्ठ कर्मो को करना चाहिए; ऐसा करने पर उच्च अधिकार प्राप्त होते है। 👉जीवन में किसी बात की अति न करो। संतुलित जीवन जिओ। अहिंसा का पालन करो। किसी को सताओ नही। हत्या न करो। पशुओं की बलि देना ठीक नही है। भाई-चारे का जीवन अपनाओ। प्रेम का व्यवहार करो। पवित्रता से जीवन बिताओ। सत्य का पालन करो। घृणा को घृणा से नही ; बल्कि प्रेम से जीतों। प्रेम से घृणा समाप्त हो जाती है। दुसरों के दुःख को देखकर प्रसन्न होना अच्छा काम नही है। ——-राजिंदर वैदिक
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