Tuesday, September 22, 2015

🌻🌻🌻ओउम्🌻🌻🌻 ——-भूपेश आर्य——– वेद में भी ईश्वर को निराकार बताया...

🌻🌻🌻ओउम्🌻🌻🌻 ——-भूपेश आर्य——– वेद में भी ईश्वर को निराकार बताया है।देखिये- प्रमाण- स: पर्यगाच्छुक्रम कायम्।(यजुर्वेद अ. ४०। मं. ८) अर्थात वह ईश्वर,सर्वव्यापक,अत्यन्त बलवान,(अकायम) शरीर रहित है अर्थात निराकार है। २. अज एकपात्(यजुर्वेद ३४/५३) अर्थात ईश्वर सदा ही अजन्मा रहता है। ३.अजंनक्षां दाधार प्रथ्वी तस्तम्भद्दां मन्त्रेभि: सत्यै।(ऋग्वेद १/६७/३) अर्थात अजन्मा ईश्वर प्रथ्वी को धारण करता है।विस्त्रत अन्तरिक्ष तथा द्दोलोक को गिरने से रोकता है। ४.ब्रह्म वा अज (शतपथ ब्राह्मण ६/४/४/१५) अर्थात निश्चय ही ब्रह्म अजन्मा है। ६.अजं ध्रुवं (श्वेता० उपनि० २/१५) अर्थात ईश्वर अजन्मा अचल है। ७.सम्बन्धानुपपत्तेश्च (वेदान्त २/२/३८) अर्थात यदि ईश्वर को शरीरधारी माना जाए तो एकदेशी होने से सम्पूर्ण जगत के साथ उसका सम्बन्ध नहीं हो सकता। ८.विप्रतिषेधाच्य ( वेदान्त २/२/४५) अर्थात साकार और निराकार का परस्पर में विरोध होने से निराकार ईश्वर साकार नहीं हो सकता। ९.क्लेश कर्म विपाकाशयैरपराम्यष्ट: पुरुष विषेश ईश्वर: । अर्थात क्लेश,कर्म,कर्मफल और कर्मफलों की वासना से रहित है,वह ईश्वर है।


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