Sunday, July 5, 2015

🌞 ओ३म् 🌞  नमस्ते जी, सुप्रभातम्  वेदामृतम् विभूतिरस्तु सूनृता ।(ऋग्वेद १/३०/५) हमारा ऐश्वर्य ,...

🌞 ओ३म् 🌞
 नमस्ते जी, सुप्रभातम् 

वेदामृतम्

विभूतिरस्तु सूनृता ।(ऋग्वेद १/३०/५)

हमारा ऐश्वर्य , संपत्ति मीठी हो ।

हमें ऐश्वर्य की प्राप्ति, उपयोग तथा उपभोग इस प्रकार करना चाहिए जिससे वह किसी के दु:ख का हेतु न बने ।
 सुभाषितम् 

॥ मानसिक तप ॥
मन:प्रसाद: सोम्यत्वं, मौनमात्मविनिग्रह : । भावसंशुद्धिरित्येतत् , तपो मानसमुच्यते ॥
(महाभारत भीष्मपर्व ४१/१६)

मन की प्रसन्नता, शान्तस्वभाव, उत्तम चिन्तन -मनन, मन को वश में रखना और विचारों की पवित्रता, यह सब मानसिक तप कहा जाता है ।


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