🌞 ओ३म् 🌞
नमस्ते जी, सुप्रभातम्
वेदामृतम्
सर्वं परिक्रोशं जहि । (ऋग्वेद १/३०/७)
सब विलाप (रोना) चिन्ता आदि को मार भगादो ।
मनुष्य को चिन्ता, शोक, आदि का त्याग करके पुरूषार्थ करना चाहिए ।
सुभाषितम्
॥ शारीरिक तप ॥
देव-द्विज -गुरु-प्राज्ञ-पूजनं शौचमार्जवम् । ब्रह्मचर्यमहिंसा च , शारीरं तप उच्यते ॥
(महाभारत भीष्मपर्व ४१/१४)
दिव्यगुणी जन, द्विज, आचार्य पिता-माता आदि और विद्वज्जन इनकी सेवा तथा सत्कार करना, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा इन सबका अनुष्ठान शारीरिक तप कहा जाता है ।
🌞 आज का पंचांग🌞
तिथि………प्रतिपदा ५-४५ तक
क्षयतिथि ……..द्वितीया
वार…………..शुक्रवार
नक्षत्र ………उत्तराषाढा
योग………….इन्द्र
(समय मान जयपुर का है)
सूर्योदय ———– ५-४१
सूर्यास्त ———–१९-२०
चन्द्रोदय ———-२०-२४
चन्द्रास्त ———-६-४६
सूर्य राशि ———-मिथुन
चन्द्र राशि———-धनु
सृष्टि संवत् -१,९६,०८,५३,११६
कलियुगाब्द……………५११६
विक्रमी संवत्…………..२०७२
अयन……………..उत्तरायण
ऋतु……………………ग्रीष्म
मास पूर्णिमांत——-आषाढ
(अधिक मास)
विक्रमी संवत् (गुजरात)-२०७१
मास अमांत( गुजरात)…..आषाढ
पक्ष………………… कृष्ण
आंग्ल मतानुसार
३ जुलाई सन् २०१५ ईस्वी ।
आज का दिनों आपके लिए मंगलमय एवं शुभ हो।
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