Monday, August 22, 2016

ॐ यो भूतं च भव्यम् च सर्वम् यश्चाधितिष्ठति स्वर्यस्य च केवलं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रह्मणे नमः||~~मन्त्र...

ॐ यो भूतं च भव्यम् च सर्वम् यश्चाधितिष्ठति स्वर्यस्य च केवलं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रह्मणे नमः||~~मन्त्र का पद्यानुवाद~~~~~~~~ भूत भविष्य को जाननहारा,केवल सर्व अधिष्ठाता| सुखस्वरूप हे परम् ब्रह्म, बहु बार झुकावें हम माथा||👏 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ॐ प्राणाय नमो यस्य सर्वम् इदम् वशे यो भूतः सर्वस्य ईश्वरो यस्मिन् सर्वम् प्रतिष्ठितिम्||~~~मन्त्र का पद्यानुवाद~~~~~~~जिसने सारा जगत् बनाया, जिसके वश सारा संसार| ओतप्रोत, रक्षक भू स्वामी, जगत् प्रतिष्ठित प्राणाधार| आये हैं हम शरण आपकी, विनती यह स्वीकार करो| विमल हाथ रख करके मस्तक, ले गोदी में प्यार करो||👏


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आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ? # आर्य समाज ये नहीं मानता कि श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, गौएँ चुराते...

आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, गौएँ चुराते थे, गोपियों संग रास रचाते थे, राधा संग प्रेम प्रसंग में लिप्त थे, कुब्जा दासी से समागम किए थे, ईश्वर का अवतार थे ।
बल्कि ये मानता है कि वे जन्म से लेकर ४८ वर्ष तक ब्रह्मचारी थे, केवल एक रुक्मणी से विवाह करके भी उसके साथ विष्णु पर्वत पर उपमन्यु ऋषि के आश्रम में १२ वर्ष ब्रह्मचर्य तप करके अपने समान तेजस्वी पुत्र प्रद्युम्न को पैदा किया, योगेश्वर होने से वे नित्य ईश्वरोपासना, प्राणायाम, संध्या, अग्निहोत्र आदि करते थे, अनेकों प्रकार की युद्ध कलाओं में दक्ष थे, उनका प्रीय शस्त्र सुदर्शन चक्र था, महान विचारक थे, अद्वितीय योद्धा थे, भारतवर्ष के समस्त गणराज्यों को यादवों के संघर्ष तले एक करने वाले महान राजनीतिज्ञ थे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज रामचरितमानस के आधार पर ये नहीं मानता कि हनुमान जी बंदरमुखी थे, न ये मानता है कि उन्होंने पूँछ से लंका दहन किया ।
बल्कि वाल्मिकी रामायण के आधार पर ये मानता है कि कि हनुमान जी दक्षिण भारत की क्षत्रिय शाखा जो वन में बसती है उसमें से अखंड ब्रह्मचारी, महाबली, व्याकरण के धुरंधर विद्वान, वेदों के ज्ञाता थे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज गरुड़, अग्नि, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भागवत आदि १८ नवीन पुराणों को नहीं मानता क्योंकि इनमें परस्पर विरोधाभास, देवी देवताओं के बारे में अभद्र अश्लील कथाएँ वर्णित हैं, अपने अपने देवों की स्तुति और अन्यों की निंदा है, जिन्हें व्यासकृत माना जाता है जब्की वे पक्षपातीयों के द्वारा समय समय पर रचे हुए कपोल कल्पित ग्रंथ हैं ।
बल्की ये मानता है कि चारों वेदों के चार ब्राह्मणग्रंथ ( ऐतरेय, तैत्तरीय, शतपथ, गोपथ ) को ही पुराण कहते हैं । जिनमें आश्वलायन, याज्ञवल्क्य, जैमीनि आदि ऋषियों - ऋषिकाओं का प्रमाणिक इतिहास है ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि हिंदुओं के सारे संस्कृत शास्त्र प्रमाणिक हैं ।
बल्कि ये मानता है कि केवल वेद और वेद के सिद्धांतों के अनुकूल चलने वाले ग्रंथ ( दर्शन, उपनिषद्, अरण्यक, वेदांग, रामायण, मनुस्मृति, महाभारत, कौटिल्य अर्थशास्त्र ) आदि ही प्रमाणिक हैं ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि पत्थर के लिंग पर दूध चढ़ाने से, मूर्ती के आगे माथा टेकने से, हाथ जोड़ने से, धूप अगरबत्ती करने से, मूर्ती को भोग लगाने से, कपड़े पहनाने से, ढोल बाजे बजाने से, और नाचने आदि अँधविश्वास से ईश्वर की भक्ति होती है ।
बल्कि ये मानता है कि पतंजलि ऋषि के योगशास्त्र की उपासना विधि ( यम नियम पालन, प्राणायाम, प्रणवजप, ध्यान आदि ) से ही निराकार सर्वव्यापक परमेश्वर की उपासना होती है । इसी विधी से हमारे पूर्वज ऋषि मुनि दुर्गा, राम, कृष्ण, सीता, सावित्री, शिव, हनुमान आदि उपासना किया करते थे । सो हमें भी ऐसे ही करनी चाहिए ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि तीर्थयात्राएँ करने से, गंगा स्नान से, पंडे पुजारियों को दान देने से, व्यर्थ के पाखंड करके धन, समय, ऊर्जा, आदि व्यर्थ करने से मनोकामना पूरी होती है ।
बल्कि ये मानता है कि ऋषि परम्परा के अनुसार घर में हवन ( अग्निहोत्र ) करने से ३३ कोटी ( ३३ प्रकार के ) देव { ११ रुद्र, ८ वसु, १२ आदित्य मास, इन्द्र ( विद्युत ), } की पुष्टि होती है जिससे कि वृष्टि आदि समय पर होकर औषधीयों का पोषण होता है, फल फूल शाक सब्जी अन्न आदि की वृद्धि और शुद्धता होती है , ऐसा एक यज्ञ करने से हज़ारों मनुष्यों का उपकार होता है जैसा कि गीता में भी कहा है । एक यज्ञ में ही भरपूर पुण्य मिलता है ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि मृतक का श्राद्ध करने से, पंडों का पेट भरने से, अस्थियाँ गंगा में बहाने आदि से मृत की आत्मा को शांती मिलती है ।
बल्कि ये मानता है कि व्यक्ति अपने किये कर्मों का स्वयं उत्तरदायी है, शव का दाह संस्कार ( नरमेध यज्ञ ) करने के बाद घर में वायु शुद्धि हेतु हवन करवाना चाहिये, उसके बाद मृतक की अस्थियों को जल में डालने के बजाए किसी खेत में खाद के रूप में प्रयोग करना चाहिये , इसके बाद मृतक के लिये शेष कुछ भी न करना चाहिए ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं चाहता कि करोड़ों, अरबों, खरबों का धन मंदिरों में दान देकर उसे व्यर्थ किया जाये , जिससे कि पंडे पुजारी अपनी तोंद भरने में, अपने बंगले बनाने में, अपने गले में मोटे मोटे सोने की चैन डालकर उस धन पर हराम की कमाई फ्री में खाएँ । और न ही ये चाहता है कि उस धन का ७०% भाग मस्जिदों और चर्चों पर खर्च हो ।
बल्कि ये चाहता है कि इसी अपार धन से हम वैदिक गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाएँ, वैदिक विज्ञान पर शोध हेतु प्रयोगशालाएँ खोलें । जिससे कि हमारा देश शीघ्रता से संस्कृत राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हो और वही प्रचीन आर्यवर्त देश बने, अनाथाश्रम आदि खोले जायें जिससे कि हिंदू बच्चे मदरसों और कानवेंट आदि में न जाकर मुसलमान ईसाई होने से बचें ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं चाहता कि खोखले लोकतंत्र के आधार पर राजनैतिक पारटीयाँ हिंदूओं को जाति में तोड़कर वोट लेती रहें और एक समुदाय विशेष का पोषण करती रहे और बेचार हिंदू केवल झंडा उठाकर हिंदूराष्ट्र का स्वप्न मात्र ही देखता रहे और ये हरामी नेता हिंदुओं को बरगलाकर वोट लेते रहें और शोषण करते रहें ।
बल्कि ये चाहता है कि लोकतंत्र जैसे भ्रष्टतंत्र को उखाड़कर मनुस्मृति के आधार पर राजतंत्र स्थापित किया जए और वैदिक शासन की नींव रख ( सच्चा हिंदुत्व ) स्थापित किया जा सके तांकि हमारा राजा पूरी पृथिवी को एकछत्र वैदिक गणराज्य में लाकर युधिष्ठिर, विक्रमादित्य की भांती खंडित मानवीय शासन के स्थान पर अखंडित वैदिक चक्रवर्ती राज्य स्थापित करे और राजसूय यज्ञ करे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज विवेकानंद और उसके रामकृष्ण मठ की सकुलर विचरधारा को नहीं मानता । आर्य समाज नहीं मानता कि माँस खाने वाला और दूसरों को माँस खाने का सुझाव देने वाला विवेकानंद कोई सन्यासी था, नहीं मानता कि उसने अमरीका में भाषण देने के सिवाय कभी गौरक्षा पर बात की हो, कभी धर्म परिवर्तन रोकने का प्रयास किया हो, कभी स्वतंत्रता के लिये कुछ किया हो, कभी स्त्री शिक्षा के लिये कुछ किया हो, कभी कानवेंट स्कूल के स्थान पर गुरुकुलीय शिक्षा की बात की हो, कभी किसी मौलवी या पादरी से शास्त्रार्थ करके अपने वैदिक धर्म को श्रेष्ठ सिद्ध किया हो ।
बल्कि ये मानता है कि वेद के आधार पर ब्रह्मचर्य, शाकाहार आदिका पालन और प्रचार करने वाले दयानंद जी ने ही हिंदू समाज का उद्धार किया । गौरक्षा हेतु आंदोलन किया, स्त्री शिक्षा आरंभ करवाई, धर्म परिवर्तन को रोक उलटा शुद्धि चक्र चलाया, स्वतंत्रता हेतु युवा तैयार किए, कानवेंट शिक्षा समाप्त कर वैदिक गुरूकुल खोलने का प्रयास किया, मौलवीयों पादरीयों से शास्त्रार्थ करके उनको धूल चटाई और हिंदुओं के मुर्दा शरीरों में गर्म रक्त का संचार किया ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?


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गंभीरतासे पढ़े , सुपथ पर चलना है तो पढ़े …… यह ह्रदय पुंज जल रहा है इसलिए ज़रा शौच कर...

गंभीरतासे पढ़े , सुपथ पर चलना है तो पढ़े …… यह ह्रदय पुंज जल रहा है इसलिए ज़रा शौच कर पढ़े ……..💥💥💥💥💥💥💥💥💥
—***★★★॥ओ३म्॥★★★***—

*प्रिय मित्रो !*

भारत में प्रतिदिन सैंकडो परिवार अपने धर्म को छोड़कर भिन्न-भिन्न मतों में चले जाते है जिसे हम सामान्य बोलचाल की भाषा में धर्म परिवर्तन करना कहते है ।
क्या आप जानते है सबसे ज्यादा कौन जा रहे हैं विभिन्न मतों में ?
वैसे ये बात किसी से छुपी नही है फिर भी जो नही जानते उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि इनमें सबसे ज्यादा संख्या है सनातनी हिन्दुओं की ????
क्या आप जानते है इसका क्या कारण है ? ???

इसका सबसे बड़ा कारण है अपने धर्म के बारे में जानकारी न होना ।

अपने धर्म के बारे में जानकारी न होने के कारण व्यक्ति किसी के भी बहकावे में आ जाता है और इसी बात का फ़ायदा मुस्लिम व् ईसाई उठा रहे है और लोगों को बहका रहे है।
क्या अजीब बात है न,

हम राधे राधे जपते रहे और केरल, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल , मिज़ोरम में धर्मान्तरण ने हदें पार कर दी।

हम जय श्री राम और मंदिर वहीँ बनाएंगे के नारे लगाते रह गए उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश और हैदराबाद से भटके हज़ारों नहीं लाखों युवक इस्लाम या इस्लामिक स्टेट सीरिया से जा मिले।

हम गंगा नदी में अपने पाप धोते रहे और बच्चे हमारे नास्तिक बन गए।

हमने हर सांस में बस ये उम्मीद की, के ईश्वर अवतार लेंगे और हम सबका कल्याण करेंगे और उन्होंने हमारे आदर्शों को धर्मग्रंथों के आधार पर ही मिट्टी में मिला दिया।

*हमने पत्थरों को तो पूजा ये सोचकर के वो भगवान् है पर साथ ही साथ उनके पीर पैगम्बरों की मज़ारों और चर्च आदि में भी दान किया, और उन्होंने इसी धन से धर्मान्तरण की दुकानें खोल ली*।

हमने कभी अपने धर्मग्रंथों को पढ़कर न देखा और उन्होंने इस पर रिसर्च कर उनमे पैगम्बरों को दिखा दिया, हमने श्री राम श्री कृष्ण को आदर्श माना और उन्होंने इनको मांस भक्षक साबित कर दिया।
किसी और की नहीं गलती स्वयं की है, हमने सोच रखा है के धर्म मतलब :–

1. गंगा में स्नान करना, अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करना, पंडों से कर्मकाण्ड करवाना आदि।

2. आस्था के नाम पर पाखण्ड करना, जैसे लाल किताब, ज्योतिष, भविष्यफल, शनि आदि ग्रहों का प्रभाव, लाल हरी चटनी खाकर जीवन में सुख लाना, भूत पिशाच आदि पर विश्वास आदि।

3. लाखों करोड़ों लोगों का ये सोचना के मात्र राम कथा और कृष्णा कथाओं में बैठने से उनको मुक्ति मिल जाएगी।

4. करोड़ों का खून चूसकर कमाए काले धन का कुछ हिस्सा मंदिर आदि में दान कर, जगराते और भंडारे आदि करवाकर ये सोचना के ईश्वर उनकी काली कमाई को माफ़ कर देगा।

5. ईश्वर के नाम पर किसी को भी पूज लेना, पत्थर, मजार, पीर, चर्च आदि।

6. भगवा पहने हर आदमी को संत समझ लेना।
इस लिस्ट को पूरा लिखें तो whatsap hang हो सकता है, विचार करें जिस देश में अाध्यात्मिक गुरुओं की बाढ़ सी आई हुई हो वहाँ 6 -7 साल की बच्चियो से बलात्कार हो जाता है और हम कहते हैं ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए करता है, सोचिये और विश्लेषण कीजिये हमारे देश और धर्म को कौन बचाएगा, ये राम कथा और कृष्ण कथा करने वाले मेहन्दी लगाकर बाल बढाकर मंचों पर नाचने वाले नपुंसक बाबा या साईं बाबा जो स्वयं सल्फा गांजा और मांस भक्षण करता था, जो लाल चटनी हरी चटनी और भैरों पर शराब का प्रसाद चढाने की बात करता है या वो जो स्वयं को निरंकारी और राधा स्वामी बताकर गुरुडम का झूठा खेल खेल रहे हैं, वो बचाएंगे जो लाल किताब में आपका भविष्य निर्धारित कर देते है या वो जो करोड़ों रुपये लगाकर अक्षरधाम मंदिर बनवा देते है पर वेदशाला , धर्मशाला , गौशाला , वैध शाला , नहीं बना सकते।

विचार करिये।

*अगर आप वास्तव में ही अपने धर्म के बारे में कुछ जानना चाहते है तो आर्यसमाज को जानें, महर्षि दयानन्द कृत कालजयी धर्ममार्गदर्शिका “सत्यार्थप्रकाश” पढ़ें।*

वेदों और वैदिक ग्रंथों का नियमित पठन पाठन कीजिये , बच्चों में उत्तम संस्कार डालिये, पाखण्ड और पाखंडियों से दूर रहिये, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब हमारी ही सन्ताने हमें धर्म परिवर्तन पर मजबूर कर देंगी।
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आज नाथुराम गोडसे की जन्म तिथि है ! वर्षों बाद किसी एक कवि ने दबे सच को फिर से उजागर करने की...

आज नाथुराम गोडसे की जन्म तिथि है ! वर्षों बाद किसी एक कवि ने दबे सच को फिर से उजागर करने की कोशिश की है ! आप सभी साहित्य प्रेमी पाठकों के लिए कवि की मूल कविता नीचे विस्तार से लिखी गयी है !
ये कविता आज सुबह से सोशल मीडिया पर भारी संख्या में share की जा रही हैं !
🙏🙏🇮🇳🙏🙏
_______________________

माना गांधी ने कष्ट सहे थे अपनी पूरी निष्ठा से ।
और भारत प्रख्यात हुआ है उनकी अमर प्रतिष्ठा से ॥

किन्तु अहिंसा सत्य कभी अपनों पर ही ठन जाता है ।
घी और शहद अमृत हैं, पर मिलकर के विष बन जाता है।

अपने सारे निर्णय हम पर थोप रहे थे गांधी जी ।
तुष्टिकरण के खुनी खंजर घोंप रहे थे गांधी जी ॥

महाक्रांति का हर नायक तो उनके लिए खिलौना था ।
उनके हठ के आगे जम्बूदीप भी बौना था ॥

इसीलिये भारत अखण्ड अखण्ड भारत का दौर गया ।
भारत से पंजाब, सिंध, रावलपिंडी, लाहौर गया ॥

तब जाकर के सफल हुये जालिम जिन्ना के मंसूबे ।
गांधी जी अपनी जिद में पुरे भारत को ले डूबे ॥

भारत के इतिहासकार थे चाटुकार दरबारों में ।
अपना सब कुछ बेच चुके थे नेहरू के परिवारों में ॥

भारत का सच लिख पाना था उनके बस की बात नहीं ।
वैसे भी सूरज को लिख पाना जुगनू की औकात नहीं ॥

आजादी का श्रेय नहीं है गांधी के आंदोलन को ।
इन यज्ञों का हव्य बनाया। शेखर ने पिस्टल गन को ॥

जो जिन्ना जैसे राक्षस से। मिलने जुलने जाते थे ।
जिनके कपड़े लन्दन, पेरिस, दुबई, धुलने जाते थे ॥

कायरता का नशा दिया है गांधी के पैमाने ने ।
भारत को बर्बाद किया। नेहरू के राजघराने ने ॥

हिन्दू अरमानों की जलती एक चिता थे गांधी जी ।
कौरव का साथ निभाने वाले भीष्म पिता थे गांधी जी ॥

अपनी शर्तों पर इरविन तक को भी झुकवा सकते थे ।
भगत सिंह की फांसी को दो पल में ही रुकवा सकते थे

मन्दिर में पढ़कर कुरान वो विश्व विजेता बने रहे ।
ऐसा करके मुस्लिम जन मानस के नेता बने रहे ॥

एक नवल गौरव गढ़ने की हिम्मत तो करते बापू जी ।
मस्जिद में गीता पढ़ने की हिम्मत तो करते बापू जी ॥

रेलों में, हिन्दू काट-काट कर भेज रहे थे पाकिस्तानी ।
टोपी के लिए दुखी थे वे। पर चोटी की एक नहीं मानी ॥

मानों फूलों के प्रति ममता खतम हो गई माली में ।
गांधी जी दंगों में बैठे थे छिपकर नोहा खाली में ॥

तीन दिवस में श्री राम का धीरज संयम टूट गया ।
सौवीं गाली सुन, कान्हा का चक्र हाथ से छूट गया ॥

गांधी जी की पाक परस्ती पर जब भारत लाचार हुआ ।
तब जाकर नाथू, बापू वध को मज़बूर हुआ ॥

गये सभा में गांधी जी करने अंतिम प्रणाम ।
ऐसी गोली मारी गांधी को याद आ गए श्री राम ॥

मूक अहिंसा के कारण ही भारत का आँचल फट जाता ।
गांधी जीवित होते तो फिर देश, दुबारा बंट जाता ॥

थक गए हैं हम प्रखर सत्य की अर्थी को ढोते ढोते ।
कितना अच्छा होता जो नेता जी राष्ट्रपिता होते ॥

नाथू को फाँसी लटकाकर गांधी जो को न्याय मिला ।
और मेरी भारत माँ को बंटवारे का अध्याय मिला ॥

लेकिन जब भी कोई भीष्म कौरव का साथ निभाएगा ।
तब तब कोई अर्जुन रण में उन पर तीर चलाएगा ॥

अगर गोडसे की गोली उतरी न होती सीने में ।
तो हर हिन्दू पढ़ता नमाज फिर मक्का और मदीने में ॥

भारत की बिखरी भूमि अब तलक समाहित नहीं हुई ।
नाथू की रखी अस्थि अब तलक प्रवाहित नहीं हुई ॥

इससे पहले अस्थिकलश को सिंधु सागर की लहरें सींचे ।
पूरा पाक समाहित कर लो इस भगवा झंडे के नीचें ॥
_______________________

(भारत के
इस सत्य इतिहास को प्रसारित करने के लिए शेयर अवश्य करें)


🇮🇳🙏🙏🙏


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नमस्ते मित्रो, आज आर्य समाज को गुरूदत्त विद्यार्थी जैसे आर्य समाज के दीवानों की आवश्यकता है...

नमस्ते मित्रो,
आज आर्य समाज को गुरूदत्त विद्यार्थी जैसे आर्य समाज के दीवानों की आवश्यकता है जिन्होनें अपना जीवन महर्षि दयानंद सरस्वती के सपनों को साकार करने के लिए बलिदान कर दिया ।आज देश का वातावरण हमारे देश के नेताओं ने जितना विषैला कर दिया है मुझे आर्य समाज के सिवाय कोई ऐसी संस्था नजर नहीं आती जो इसका शुद्धिकरण कर सके ।परंतु इसके लिए आर्य समाज को युवा शक्ति की आवश्यकता है अपना स्वंय का एक राजनीतिक संगठन खडा करने की आवश्यकता है क्योंकि आज देश में कोई भी परिवर्तन लाने के लिए राजनीतिक शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है हम आर्यों की यह बहुत बडी कमजोरी रही कि हमने आज तक अपना कोई राजनीतिक संगठन खडा नहीं किया और आज दुर्दशा यह है कि हमारे ज्यादातर आर्य नेता दूसरे राजनीतिक दलों के पिछलग्गू बन रहे है यदि हम युवा शक्ति को आर्य समाज के साथ जोडकर देश में अभूतपूर्व परिवर्तन करना चाहते है तो आर्य समाज को अपना एक राजनीतिक संगठन खडा करना ही होगा क्योंकि हम युवाओं को सिर्फ यज्ञ हवनों तक सीमित कर नहीं रख सकते । यज्ञ हवनों का कार्य आर्य समाज मुख्य संगठन देखे और राजनितीक संगठन की कमान आर्य समाज के युवाओं के हाथों में हो , जिस प्रकार राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ कर रहा है हमें उनसे सीखने की आवश्यकता है कि किस प्रकार 1925 में बने एक संगठन ने आज देश की सत्ता पर कब्जा किया हुआ है हम आर्यों को आज अपने सामर्थय से यह कार्य करना है क्योंकि आर्य समाज की केन्द्रिय प्रतिनिधि सभा और सार्वदेसिक सभा में बैठे हमारे आर्य नेताओं को आर्य समाज के आम कार्यकर्ताओं के विचार कभी सुने ही नहीं है मुझे ऐसे आर्य समाज के दीवानों की आवश्यकता है जो सप्ताह में कम से कम 3 दिन इस के लिए दे सकें अपने क्षेत्र में इस कार्य योजना को क्रयान्वित करने के लिए । सम्पर्क करें - हरेन्द्र आर्य,पलवल ( हरियाणा)121102
दूरभाष : 07027077886,
09911497886


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ओ३म् *🌷ओ३म् का जाप सर्वश्रेष्ठ🌷* ओ३म् का जाप स्मरण शक्ति को तीव्र करता है,इसलिए वेदाध्ययन में...

ओ३म्

*🌷ओ३म् का जाप सर्वश्रेष्ठ🌷*

ओ३म् का जाप स्मरण शक्ति को तीव्र करता है,इसलिए वेदाध्ययन में मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का प्रयोग किया जाता है।
मनुस्मृति में आया है कि ब्रह्मचारी को मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का उच्चारण करना चाहिए।

क्योंकि आदि में ओ३म् शब्द का उच्चारण न करने से अध्ययन धीरे धीरे नष्ट हो जाता है तथा अन्त में ओ३म् शब्द न कहने से वह स्थिर नहीं रहता है। २/७४ ।।

कठोपनिषद में नचिकेता की कथा आती है।नचिकेता ने यम ऋषि से पूछा- हे ऋषि,मुझे यह बताइये कि संसार में सार वस्तु क्या है?
इस पर ऋषि ने उत्तर दिया,सब वेद जिस नाम के संबंध में वर्णन करते हैं,सभी तपस्वी जिसके विषय में कहते हैं,जिसकी प्राप्ति की इच्छा करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं,उस नाम के संबंध में मैं तुझे संक्षेप में बताता हूं-वह ओ३म् नाम(शब्द) ही परमात्मा का श्रेष्ठतम नाम है।
यजुर्वेद में आया है कि मृत्यु को जीतने और मोक्ष को प्राप्त करने के लिए ओ३म् के अतिरिक्त और कोई भी मार्ग नहीं है। यमाचार्य ने तो नचिकेता को ओ३म् का महत्व बताते हुए यहां तक कह दिया है कि यह ओ३म् अक्षर निश्चय ब्रह्म है।यह ही अक्षर ब्रह्म के सब नामों में श्रेष्ठतम है।
इस अक्षर को जान लेने के बाद जापक जो इच्छा करता है उसकी वह इच्छा निश्चयपूर्ण हो जाती है।। कठोपनिषद २/१६ ।।

ऋग्वेद ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा है-हे वीर प्रभो,आपकी मित्रता कठिनाई से नष्ट होने वाली है।अर्थात आपकी मित्रता स्थाई तथा विश्वसनीय है।
आप गाय चाहने वाले के लिए गाय हैं(देने वाले हैं) तथा घोडा चाहने वाले के लिए घोडा है ।।६/४५/२६ ।।

इस प्रकार ओ३म् के जापक को सभी उचित वस्तुएँ सुलभ हो जाती हैं।
प्रश्नोपनिषद् में तो पिप्पलाद ऋषि ने यहां तक कह दिया है कि जो निरन्तर इस तीन मात्राओं वाले ओ३म् अक्षर के द्वारा परब्रह्म का ध्यान करता है वह तेज में सूर्य के समान सम्पन्न हो जाता है ।।५/५ ।।

छान्दोग्य उपनिषद् के अनुसार देवता भी इस अविनाशी ,अमर तथा अभय ओ३म् अक्षर का सहारा लेकर अमर तथा अभय हो गये ।।२/४/४ ।।

गीता में श्रीकृष्ण इस ओ३म् अक्षर का महत्व बताते हुए अर्जुन से कहते हैं- इस एकाक्षर ब्रह्म स्वरुप ओ३म् का स्मरण करता हुआ जो मनुष्य इस शरीर का परित्याग करता है वह परमगति(मोक्ष) को प्राप्त होता है ।।८/१३ ।।

मुण्डकोपनिषद् ओ३म् की महिमा के वर्णन में कहता है-ओ३म् का जाप करने से ह्रदयग्रन्थि (सूक्ष्म शरीर) टूट जाती है।सब प्रकार के संशय नष्ट हो जाते हैं।उसके सब कर्म क्षीण हो जाते हैं।उस इन्द्रियातीत ओ३म् के दर्शन करने मात्र से ही ।। २/२८ ।।

कठोपनिषद में आगे कहा है-ओ३म् अनित्यों में एक नित्य है।अनेकों में वही एक है।श्रेष्ठ कामनाओं का वही एक पूरक है।जो धीर पुरुष इस ओ३म् को अपनी आत्मा में देखते हैं केवल उन्हें ही परम शान्ति प्राप्त होती है,अन्यों को नहीं ।।५/१३ ।।

आत्मा में विराजमान इस परमात्मा को धीर पुरुष परा विद्या से साक्षात्कार किया करते हैं;क्योंकि यह ओ३म् इन्द्रियातीत है।
वह नित्य,विभु,सर्वव्यापक,सूक्ष्म,अव्यय तथा सब प्राणियों का कारण है।
वह गोत्र,वंश,आंख,कान,हाथ,पांव से रहित है।
वह संसार की बीज शक्ति है।वह अशरीर है।वह नाडी आदि बन्धनों से जकडा नहीं है।वह मलरहित है।
पाप उसको बांध नहीं सकते।कोई स्थान उससे रिक्त नहीं।
उसका कोई उत्पादक नहीं है।
वह सवयं अपना स्वामी है।उसने अपनी सनातन प्रजाओं के लिए पदार्थों का ठीक ठीक रीति से विधान बनाया है। यजु: ४०/८ ।


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नमस्ते मित्रो, महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने आर्य समाज का निर्माण करते हुए आर्य समाज के छठे नियम में...

नमस्ते मित्रो,
महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने आर्य समाज का निर्माण करते हुए आर्य समाज के छठे नियम में कहा कि संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नती करना । यहां पर महर्षि दयानंद सरस्वती जी का सामाजिक उन्नती से अभिप्राय यह था कि जब आर्य समाज के लोग मासिक बैठक में एकत्रित हों तो वह समाज के अंदर की कुरितियों , बुराइयों,समस्याओं पर चर्चा करें । उनके समाधान के लिए कार्य योजना बनायें और उसे क्रयान्वित करें । जिससे संसार के लोगों में आर्य समाज के प्रति आकर्षण उत्पन्न हो,वह आर्य समाज के बारे में जानना चाहें , आर्य समाज के साथ जुडना चाहें । लेकिन दुर्भाग्य है कि हम आर्य समाज के लोगों ने अपने आपको सिर्फ यज्ञ तक सीमित कर लिया है यज्ञ पर्यावरण की शुद्धि के लिए आवश्यक है परंतु उससे भी आवश्यक है समाज का शुद्धिकरण करना । आज आर्य समाज के लोगों को महर्षि दयानंद सरस्वती जी के सामाजिक उन्नती के लक्ष्य को ध्यान में ऱखकर कार्य करने की आवश्यकता है क्योंकि आज समाज में जितना अंध विश्वास और गुरूडम फैला हुआ है यह आर्य समाज की निष्किर्यता का परिणाम है हम किसी और संस्था से समाज के शुद्धिकरण की आशा नहीं कर सकते । आज हमें संसार पटल पर आर्य समाज को प्रतिबिंबित करने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि हम आर्य समाज के यज्ञ हवनों से बाहर निकल कर समाज में व्याप्त कुरितियों, बुराइयों ,समस्याओं के समाधान के लिए कार्य योजना बनायें और उसे क्रयान्वित करें । ओ३म
निवेदक: हरेन्द्र आर्य धतीर


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ऐतिहसिक पोस्ट :-आखिर क्या कारण है जो कुछ लोग गोडसे को हीरो और गाँधी को विलेन मानते है कुछ तथ्य पेश...

ऐतिहसिक पोस्ट :-आखिर क्या कारण है जो कुछ लोग गोडसे को हीरो और गाँधी को विलेन मानते है कुछ तथ्य पेश है-
अगर रोना चाहे तो बिलकुल पढे :-
क्या थी विभाजन की पीड़ा ?
विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?
विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों दृष्टिकोण ?
क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की … मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की?
क्या थी गोडसे की विवशता ?
क्या गोडसे नही जानते थे की आम आदमी को मरने में और एक राष्ट्रपिता को मरने में क्या अंतर है ?
क्या होगा परिवार का ?
कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को और मित्रों को ?
क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?
क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को … पुणे के ब्राह्मणों के साथ ?
क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?
क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l
यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी का कर्ज….
आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ….
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए lरेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,,” आज़ादी का तोहफा ” रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई
थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की… भयानक बदबू……
सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हमला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी … बलात्कार किये बिना…..?
जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी….
डॉक्टर ने पूछा क्यों ???
उन महिलाओं ने जवाब दिया… हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?
हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं…उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे.
“आज़ादी का तोहफा”
जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l
1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा गाँधी जी का आग्रह था…क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l
विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे….और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए…..पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा….एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए… क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में
दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं…
जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि… तुम हिन्दू हो….
4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं….ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ??
यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?
कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर … कितना महान … जिसने बिना तलवार उठाये … 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया
2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l
10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l
20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद
ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो …
परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं …वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल
विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र …
आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि … परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l
और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए… क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया… या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l
परन्तु ऐसा नही हुआ …. यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी … यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था … मोहनदास करमचन्द गाँधी के अनुसार l
नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l
पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे …
उन्होंने फिर से मांग की … की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l
1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l
2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए …. कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए….
2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो … (NH – 1)
3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …
4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)
5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l
30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा
तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय भी नहीं था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l
हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने प्राणों की आहुति दी हो …. जिसको की वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l
यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?
किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?
उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों, उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर पड़ेगा ?
घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ …. जाने कितने जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों को प्रताड़ित किया गया l
परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l
10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गए l
सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे … फिर कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ….
सवाल उठता है की … क्या उन अहिंसक आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी वध होने वाला है ?
जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित केस की पूरी सुनवाई की… 35 तारीखें पडीं l
अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा पनदिर नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित किया l पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों में कुछ नहीं बोले … सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित जी ने अपने शब्द कहे “”
गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दे दी।
नाथूराम गोडसे ने न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –
1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।
3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति (1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।
11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया।
14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर दिया।
न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे. डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-
“नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता कि नथूराम निर्दोष है।”
तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा है। यह स्थिति कब बदलेगी?
प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने तो गोली नहीं मारी थी … उन्हें क्यों मृत्युदंड दिया गया ?
नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में कहा था…
यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ
– नाथूराम गोडसे


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रामदेव बाबा का काफ़ी लोग मज़ाक़ उड़ाते हैं एवं उनपर कटाक्ष भरे भाव में विनोद भी करते है। लेकिन क्या...

रामदेव बाबा का काफ़ी लोग मज़ाक़ उड़ाते हैं एवं उनपर कटाक्ष भरे भाव में विनोद भी करते है।

लेकिन क्या किसी ने आजतक यह सोचा है की भगवाधारी संत जिसने out of the box सोचकर एक *Paradigm Shift* किया। और एक कल्पना को Innovation में परिवर्तित कर अपने Objective और Target दोनो को प्राप्त किया।

ये जितने भी अंग्रेज़ी के शब्दों का मैंने यहा पर उल्लेख किया है, ये वो सारे शब्द है जो *मनेजमेंट की पढ़ाई* में सिखाए जाते है और जो सिखते हैं वे केवल और केवल पावरपोईंट में ही दिखते है।

क्या हमने कभी सोचा है की इतना ज्ञान लेकर और फ़र्राटेदार अंग्रेज़ी बोलकर हम एक चने का पैकेट भी अपने नाम से बेचने की क्षमता रखते है?

उस व्यक्ति ने केवल *गुरुकुल के ज्ञान* के आधार पर इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया की आज तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनिया सदमे में है। और *पतंजलि के उत्पाद भी गुणवत्ता* से भरपूर हैं।

तो अगली बार जब बाबा रामदेव का उपहास करो तो पहले अपने गीरेबान में ज़रूर झाँकिये की हमारी स्वयं की जीवन की उपलब्धि क्या है?

⛳ ॐ: ⛳
🇮🇳 वंदे मातरम् 🇮🇳


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*सत्यार्थ प्रकाश छठा समुल्लास* भाग ६ _किस-किस को क्या-क्या अधिकार देना योग्य है—_ *अमात्ये दण्ड...

*सत्यार्थ प्रकाश छठा समुल्लास*
भाग ६

_किस-किस को क्या-क्या अधिकार देना योग्य है—_

*अमात्ये दण्ड आयत्तो दण्डे वैनयिकी क्रिया। *
*नृपतौ कोशराष्ट्रे च दूते सन्धिविपर्ययौ॥1॥ *

*दूत एव हि सन्धत्ते भिनत्त्येव च संहतान्। *
*दूतस्तत्कुरुते कर्म भिद्यन्ते येन वा न वा॥2॥ *

*बुद्ध्वा च सर्वं तत्त्वेन परराजचिकीर्षितम्। *
*तथा प्रयत्नमातिष्ठेद् यथात्मानं न पीडयेत्॥3॥ *

*धनुर्दुर्गं महीदुर्गमब्दुर्गं वार्क्षमेव वा। *
*नृदुर्गं गिरिदुर्गं वा समाश्रित्य वसेत् पुरम्॥4॥ *

*एकः शतं योधयति प्राकारस्थो धनुर्धरः। *
*शतं दशसहस्राणि तस्माद् दुर्गं विधीयते॥5॥ *

*तत्स्यादायुधसम्पन्नं धनधान्येन वाहनैः। *
*ब्राह्मणैः शिल्पिभिर्यन्त्रैर्यवसेनोदकेन च॥6॥ *

*तस्य मध्ये सुपर्याप्तं कारयेद् गृहमात्मनः। *
*गुप्तं सर्वर्त्तुकं शुभ्रं जलवृक्षसमन्वितम्॥7॥ *

*तदध्यास्योद्वहेद्भार्यां सवर्णां लक्षणान्विताम्। *
*कुले महति सम्भूतां हृद्यां रूपगुणान्विताम्॥8॥ *

*पुरोहितं प्रकुर्वीत वृणुयादेव चर्त्विजम्। *
*तेऽस्य गृह्याणि कर्माणि कुर्युर्वैतानिकानि च॥9॥मनु॰॥*
 
अमात्य को दण्डाधिकार, दण्ड में विनय क्रिया अर्थात् जिस से अन्यायरूप दण्ड न होने पावे, राजा के आधीन कोश और राजकार्य तथा सभा के आधीन सब कार्य और दूत के आधीन किसी से मेल वा विरोध करना अधिकार देवे॥1॥ 

दूत उस को कहते हैं जो फूट में मेल और मिले हुए दुष्टों को फोड़ तोड़ देवे। दूत वह कर्म करे जिस से शत्रुओं में फूट पड़े॥2॥ 

वह सभापति और सब सभासद् वा दूत आदि यथार्थ से दूसरे विरोधी राजा के राज्य का अभिप्राय जान के वैसा यत्न करे कि जिस से अपने को पीड़ा न हो॥3॥ 

इसलिये सुन्दर जङ्गल, धन धान्ययुक्त देश में *(धनुर्दुर्गम्)* धनुर्धारी पुरुषों से गहन *(महीदुर्गम्)* मट्टी से किया हुआ *(अब्दुर्गम्)* जल से घेरा हुआ *(वार्क्षम्)* अर्थात् चारों ओर वन *(नृदुर्गम्)* चारों ओर सेना रहे *(गिरिदुर्गम्)* अर्थात् चारों ओर पहाड़ों के बीच में कोट बना के इस के मध्य में नगर बनावे॥4॥ 

और नगर के चारों ओर (प्राकार) प्रकोट बनावे, क्योंकि उस में स्थित हुआ एक वीर धनुर्धारी शस्त्रयुक्त पुरुष सौ के साथ और सौ दश हजार के साथ युद्ध कर कर सकते हैं इसलिये अवश्य दुर्ग का बनाना उचित है॥5॥ 

वह दुर्ग शस्त्रास्त्र, धन, धान्य, वाहन, ब्राह्मण जो पढ़ाने उपदेश करने हारे हों (शिल्पी) कारीगर, यन्त्र, नाना प्रकार की कला, (यवसेन ) चारा घास और जल आदि से सम्पन्न अर्थात् परिपूर्ण हो॥6॥ 

उस के मध्य में जल वृक्ष पुष्पादिक सब प्रकार से रक्षित सब ऋतुओं में सुखकारक श्वेतवर्ण अपने लिये घर जिस में सब राजकार्य का निर्वाह हो वैसा बनवावे॥7॥ 

इतना अर्थात् ब्रह्मचर्य से विद्या पढ़ के यहां तक राजकाम करके पश्चात् सौन्दर्य रूप गुणयुक्त हृदय को अतिप्रिय बड़े उत्तम कुल में उत्पन्न सुन्दर लक्षणयुक्त अपने क्षत्रियकुल की कन्या जो कि अपने सदृश विद्यादि गुण कर्म स्वभाव में हो उस एक ही स्त्री के साथ विवाह करे दूसरी सब स्त्रियों को अगम्य समझ कर दृष्टि से भी न देखे॥8॥ 

पुरोहित और ऋत्विज् का स्वीकार इसलिये करे कि वे अग्निहोत्र और पक्षेष्टि आदि सब राजघर के कर्म किया करें और आप सर्वदा राजकार्य में तत्पर रहै अर्थात् यही राजा का सन्ध्योपासनादि  कर्म है जो रात  दिन राजकार्य में प्रवृत्त  रहना और कोई राजकाम बिगड़ने न देना॥9॥ 

*क्रमश :*


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🌹ओ३म्🌹 श्लोक येषां न विद्या न तपो न दानं । न ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मृत्युलोके भुवि भार...

🌹ओ३म्🌹
श्लोक
येषां न विद्या न तपो न दानं ।
न ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः।
ते मृत्युलोके भुवि भार भूताः ।
मनुष्यरूपेण मृगाशचरनति।।
भावार्थ ।

ये विद्या जिसके काम की नही है ।
न तप है । न दान है ।न ज्ञान है ।
न शील है ।न गुण है । न धर्म है ।
वे भार के रूप है ।मनुष्य के शरीर मे पशु की तरह विचरण करते है 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
भावना आर्या मथुरा 🌺🌺


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मूक पशु भैंसों की हत्या रोकने पर महर्षि दयानन्द और उदयपुर नरेश महाराणा सज्जन सिंह के बीच वार्तालाप...

मूक पशु भैंसों की हत्या रोकने पर महर्षि दयानन्द और उदयपुर नरेश महाराणा सज्जन सिंह के बीच वार्तालाप और उसका शुभ परिणाम’

ओ३म्

स्वामी दयानन्द जी सितम्बर, 1882 में मेवाड़ उदयपुर के महाराजा महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि थे। नवरात्र के अवसर पर वहां भैंसों का वध रोकने की एक घटना घटी। इसका वर्णन महर्षि के 10 से अधिक प्रमुख जीवनीकारों ने अपने-अपने ग्रन्थों में किया है। हम यहां मास्टर लक्ष्मण आर्य द्वारा महर्षि दयानन्द के उर्दू जीवन चरित में प्रस्तुत घटना को प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु कृत हिन्दी अनुवाद से प्रस्तुत कर रहें हैं: “स्वामी जी मूक पशुओं के वकील बने—जब विजयादशमी पर्व आया तो स्वामी जी बग्घी पर बैठकर दशहरा देखने गये तो नवरात्र पर्व पर बलि के लिए भैंसें बहुत मारे जा रहे थे। इस पर स्वामी जी ने उदयपुर के राजदरबार से एक तार्किक विवाद किया। एक अभियोग के रुप में कहा कि भैंसों ने हमें वकील किया है। आप राजा हैं। हम आपके सामने इनका केस (अभियोग) करते हैं। पुरातन प्रथाओं के नए–नए रूप दिखाते हुए अन्त में स्वामी जी ने उन्हें समझा दिया कि भैंसों के मारने से पाप के अतिरिक्त कुछ भी लाभ नहीं। यह अत्यन्त क्रूरता है, अन्याय है। तत्पश्चात् स्वामी जी ने उन्हें इससे रोका। तब महाराणा जी (उदयपुर नरेश महाराणा सज्जन सिंह) ने स्वीकार किया और कहा कि हम अविलम्ब तो बन्द नहीं कर सकते, न ऐसा करना उचित है। लोग क्रुद्ध होंगे। तब स्वामी जी ने कहा, अच्छा शनैः शनैः घटा दो। तदनुसार वहीं सूची बनाई गई। राणा जी ने प्रतिज्ञा की कि मैं धीरे–धीरे इसे घटाने का प्रयास करूंगा।”

दयानन्द जी गायों के समान भेंस, बकरी, भेड़ इत्यादि सभी उपकारी पशुओं की सुरक्षा व संवर्धन के पक्ष में तथा उनकी हत्या कर मांसाहार के विरुद्ध थे। वह कहते थे कि पशुओं की हत्या वा मांसाहार से मनुष्य का स्वभाव हिंसक बन जाता है और वह योग विद्या के लिए पात्र वा योग्य नहीं रहता। योग विद्या का मुख्य लक्ष्य ईश्वर की प्राप्ति और उसका साक्षात्कार है जिसके लिए योगी को बहुत कम मात्रा में शुद्ध शाकाहारी भोजन ही लेना होता है। मांसाहार करने वालों को अपने इन कर्मों का फल ईश्वर की व्यवस्था से कालांतर में भोगना ही होता है।

“अवश्यमेव ही भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम।“

मनुष्य को मनुष्य मननशील होने के कारण व सत्य व असत्य को विचार कर सत्य का ग्रहण और असत्य का परित्याग करने के कारण कहते हैं। स्वामी दयानंद द्वारा दी गई मनुष्य की परिभाषा भी पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत है:

‘मनुष्य उसी को कहना कि जो मननशील होकर स्वात्मवत् अन्यों के सुख–दुःख और हानि–लाभ को समझे। अन्यायकारी बलवान् से भी न डरे और धर्मात्मा निर्बल से भी डरता रहे। इतना ही नहीं किन्तु अपने सर्व सामर्थ्य से धर्मात्माओं, की चाहे वे महा अनाथ, निर्बल और गुणरहित क्यों न हों, उनकी रक्षा, उन्नति, प्रियाचरण और अधर्मी चाहे चक्रवर्ती, सनाथ, महाबलवान् और गुणवान् भी हो तथापि उसका नाश, अवनति और अप्रियाचरण सदा किया करे अर्थात् जहां तक हो सके वहां तक अन्यायकारियों के बल की हानि और न्यायकारियों के बल की उन्नति सर्वथा किया करे। इस काम में चाहे उसको कितना ही दारुण दुःख हो, चाहे प्राण भी भले ही जावें, परन्तु इस मनुष्यपनरुप धर्म से पृथक कभी न होंवे।’

स्वामी जी ने इन पंक्तियों में जो कहा है, उसका उन्होंने अपने जीवन में सदैव पूर्णतः पालन किया और विरोधियों के षडयन्त्र का शिकार होकर दीपावली 30 अक्तूबर, 1883 ई. को अपना जीवन बलिदान कर दिया। हम आशा करते हैं कि पाठक इससे उचित शिक्षा ग्रहण करेंगे।

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।।ओ३म्।। देवयज्ञ/अग्निहोत्र/हवन एक प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया जब सभी वाष्पशील पदार्थ वातावरण में दूर...

।।ओ३म्।।
देवयज्ञ/अग्निहोत्र/हवन
एक प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया

जब सभी वाष्पशील पदार्थ वातावरण में दूर तक फैल जाते हैं, तब यह प्रक्रिया प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया कहलाती है, जो सूर्य की किरणों की उपस्थिति में होती है। ऋषि-मुनियों ने इसी कारण यज्ञ को बाहर खुले में अर्थात् धूप में करने को प्राथमिकता दी है। इस प्रकार धूम्रीकरण से उत्पन्न उत्पाद ऑक्सीकरण, अपचयन व प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया में जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड के अपचयन के बाद फॉर्मेल्डिहाइड का निर्माण होता है, जिसे निम्नलिखित रासायनिक क्रिया से दर्शाया गया है-

CO2+H2O —> HCHO+O2

जैसा कि विदित है, फॉरमैल्डिहाइड वातावरण में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है, इसी प्रकार यज्ञ से उत्पन्न हुए अन्य पदार्थ, जैसे फॉर्मिक अम्ल व एसिटिक अम्ल भी अच्छे रोगाणुरोधक का कार्य करते हैं। प्रकाश रासायनिक प्रक्रिया के अन्तर्गत कार्बन डाइऑक्साइड की सान्द्रता में कमी व ऑक्सीजन की सान्द्रता में वृद्धि होती है, यही कारण है कि यज्ञ करने से वातावरण शुद्ध हो जाता है।


वैदिक धर्म और यज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं को जानने हेतु सम्पर्क करे और सहयोग करे

*राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा*
(वेद विद्या को जन जन तक पहुँचाने को सङ्कल्पबद्ध)


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वेदों में आदेश है कि ये भूमि मैंने आर्यो(यानि श्रेष्ठ , सनातन धर्म को मानने वाले) को दी है। ये ही...

वेदों में आदेश है कि ये भूमि मैंने आर्यो(यानि श्रेष्ठ , सनातन धर्म को मानने वाले) को दी है। ये ही मेरे पुत्र है। एक कुपुत्र (अनार्य)को तो हर पिता अपनी चल अचल संपत्ति से बेदखल कर देता है। इसलिए हे आर्यो(सनातनियों) ईश्वर हमें वेदों में आज्ञा देता है कि इन अनार्यों को ख़त्म कर दो। न की केवल राष्ट्र से बल्कि पूरे विश्व में ही इनका अस्तित्व नहीं होना चाहिए। ये केवल हम सनातनियों की ही भूमि है और केवल हम सनातनी ही इस परमपिता परमेश्वर के पुत्र है। देखिये अपना इतिहास उठाकर हमारे श्रेष्ठ पूर्वज यानि आर्यों ने किस तरह से समय समय पर इन अधर्मियों से अपनी भूमि को साफ किया। और पुनः धर्म की स्थापना की। जय हो ऐसे आर्यपुत्र मर्यादापुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी और योगिराज श्री कृष्ण और महा वीर बज्र अंग श्री हनुमान जी की🙏🏻🙏🏻🙏🏻😊😊😊😊⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳


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*||ओ३म्||* बालकों को माता सदा उत्तम शिक्षा करे, जिससे सन्तान सभ्य हों और किसी अङ्ग से कुचेष्टा न...

*||ओ३म्||*

बालकों को माता सदा उत्तम शिक्षा करे, जिससे सन्तान सभ्य हों और किसी अङ्ग से कुचेष्टा न करने पावें। जब बोलने लगें तब उसकी माता बालक की जिह्वा जिस प्रकार कोमल होकर स्पष्ट उच्चारण कर सके वैसा उपाय करे कि जो जिस वर्ण का स्थान, प्रयत्न अर्थात् जैसे ‘प’ इसका ओष्ठ स्थान और स्पृष्ट प्रयत्न दोनों ओष्ठों को मिलाकर बोलना; ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत अक्षरों को ठीक-ठीक बोल सकना। मधुर, गम्भीर, सुन्दर स्वर, अक्षर, मात्र, पद, वाक्य, संहिता अवसान भिन्न-भिन्न श्रवण होवे। जब वह कुछ-कुछ बोलने और समझने लगे तब सुन्दर वाणी और बड़े, छोटे, मान्य, पिता, माता, राजा, विद्वान् आदि से भाषण, उनसे वर्त्तमान और उनके पास बैठने आदि की भी शिक्षा करें जिस से कहीं उन का अयोग्य व्यवहार न हो के सर्वत्र प्रतिष्ठा हुआ करे। जैसे सन्तान जितेन्द्रिय, विद्याप्रिय और सत्संग में रुचि करें वैसा प्रयत्न करते रहें। व्यर्थ क्रीडा, रोदन, हास्य, लड़ाई, हर्ष, शोक, किसी पदार्थ में लोलुपता, ईर्ष्या, द्वेषादि न करें। उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से वीर्य की क्षीणता, नपुंसकता होती और हस्त में दुर्गन्ध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करें। सदा सत्यभाषण शौर्य, धैर्य, प्रसन्नवदन आदि गुणों की प्राप्ति जिस प्रकार हो, करावें।

राष्ट्रीय ग्रन्थ
सत्यार्थ प्रकाश


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सिंधु तुमने मेडल जीता देश झूम कर नाचा है तुमने भ्रूण हत्यारों के चेहरे पे जड़ा तमाचा है आज ख़ुशी...

सिंधु तुमने मेडल जीता

देश झूम कर नाचा है

तुमने भ्रूण हत्यारों के

चेहरे पे जड़ा तमाचा है

आज ख़ुशी से नाच रहे 

सिंधु-सिंधु चिल्लाते हो

अपने घर में बेटी जन्मे

फिर क्यों मुँह लटकाते हो?

रियो में अब तक भारत ने

दो मेडल ही पाया है……

और ये दोनों मेडल भी

बेटियों ने ही लाया है…

आज इन्हीं बेटियों के आगे

जनमानस नतमस्तक है..

आज इन्हीं के कारण ही 

भारत का ऊँचा मस्तक है

आज ख़ुशी से झूम रहे हो

अच्छी बात है झूमो-गाओ

लेकिन घर में बेटी जन्मे 

तब भी इतनी खुशी मनाओ

बेटियाँ कम नहीं किसी से

शक्ति का अवतार हैं……

इनको जो सम्मान न दे

उसका जीना धिक्कार है


Salute to Sakshi n PV Sindhu


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रतन टाटा ने एक स्कूल में भाषण के दौरान 10 बातें बताई 🍁 जो विद्यार्थियों को नहीं सिखाई जाती 💱 १...

रतन टाटा ने एक स्कूल में भाषण के दौरान 10 बातें बताई 🍁
जो विद्यार्थियों को नहीं सिखाई जाती

💱 १ जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है इसकी आदत बना लो.

💱 २ लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह नहीं करते इसलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ.

💱 ३ कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 आंकड़े वाली पगार की मत सोचो, एक रात में कोई वाइस प्रेसिडेंट नहीं बनता. इसके लिए अपार मेहनत करनी पड़ती है.

💱 ४ अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.

💱 ५ तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है किसी को दोष मत दो इस गलती से सीखो और आगे बढ़ो.

💱 ६ तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने निरस और ऊबाऊ नही थे जितना तुम्हें अभी लग रहा है तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.

💱 ७ सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में देखने मिलता है. कुछ स्कूलों में तो पास होने तक परीक्षा दी जा सकती है लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं वहां हारने वाले को मौका नहीं मिलता.

💱 ८ – जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी नहीं मिलती. आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता. यह सब आपको खुद करना होता है.

💱 ९ – tv का जीवन सही नहीं होता और जीवन tv के सीरियल नहीं होते. सही जीवन में आराम नहीं होता सिर्फ काम और सिर्फ काम होता है .

💱 १०– लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ. एक समय ऐसा आएगा कि तुम्हें उसके नीचे काम करना पड़ेगा.

“विश्वास ” किसी पर इतना करो कि वो तुम्हे फंसाते समय खुद को दोषी समझें
🍁✌
“ प्रेम ” किसी से इतना करो कि उसके मन में तुम्हें खोने का डर बना रहे
एक सत्य…

क्या आपने कभी ये विचार किया कि..

लग्जरी क्लास कार
(Jaguar, Hummer, BMW,
Audi, Ferrari Etc.)
का किसी TV चैनल पर
कभी कोई विज्ञापन क्यों
नही दिखाया जाता ??
.
.
.

कारण यह कि उन कार कंपनी वालों को ये पता है कि…
..
..
..
..
ऐसी कार लेने वाले व्यक्ति के पास TV के सामने बैठने का फालतू समय नहीं होता..
😊😊😊😊


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*भारत ने पोखरण में किया ग्‍लाइड बम का सफल परीक्षण* राजस्‍थान के पोखरण में भारत ने ग्लाइड बम का सफल...

*भारत ने पोखरण में किया ग्‍लाइड बम का सफल परीक्षण*


राजस्‍थान के पोखरण में भारत ने ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया गया है। इसको सुखोई से फायर किया गया। इसका नाम गुरुथमा है और इसकी रेंज 100 किमी है।
जयपुर (जेएनएन)। राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया गया। गरुड़ और गुरुथमा नाम के ग्लाइड बम को एयर फोर्स के फाइटर जेट सुखोई से दागा गया। गुरुथमा की रेंज 100 किलोमीटर है। इन्हें साल के अंत तक एयरफोर्स में शामिल किया जाएगा। पाकिस्तान का 100 किलोमीटर का इलाका इनकी जद में होगा।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इन्हें पुणे, हैदराबाद की लैब में तैयार किया है। पिछले साल उड़ीसा के चांदीपुर रेंज में समुद्र के अंदर इनका टेस्ट किया गया था। एक हजार किलोग्राम वजनी गरुथमा ने सौ किलोमीटर दूर के टारगेट को अपना निशाना बनाया। वहीं, गरुड़ ने तीस किलोमीटर तक निशाना लगाया। इन ग्लाइड बमों से आसानी से दुश्मनों के ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

इसका सबसे पहले जर्मनी ने इस्तेमाल किया था। इसके बाद ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और रूस ने भी इन्हें विकसित किया। जानकारी के अनुसार, बम का परीक्षण दो दिन पूर्व किया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।


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🔺 *नेहरु ने क्यों किया था बैन इस गीत को : संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से।* 54 वर्ष...

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*नेहरु ने क्यों किया था बैन इस गीत को : संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से।*


54 वर्ष पूर्व (1958) महान राष्ट्रभक्त कवि प्रदीप ने खरे शब्दों में सीधी चेतावनी देते हुए इस अमर गीत की रचना की थी. तत्कालीन नेहरु सरकार को यह चेतावनी रास नहीं आयी थी. अतः गीत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
1965 में पाक के नापाक हमले से आँखें खुली तो गीत से भी प्रतिबन्ध हटा था. सुनिए और सोचिये की आज भी कितना प्रासंगिक है यह गीत.
इसे फैलाइए… इस उम्मीद को… इस मुहब्बत को….. इस बेबाक़ी को…! –
फिल्म : तलाक (1958)
गायक : मन्ना डे
बिगुल बज रहा आजादी का, गगन गूंजता नारों से
मिला रही है आज हिंद की मिट्टी नजर सितारों से
एक बात कहनी है लेकिन, आज देश के प्यारो से
जनता से, नेताओ से, फौजों की खड़ी कतारों से
कहनी है इक बात हमें इस देश के पहरोदारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
झांक रहे हैं अपने दुश्मन अपनी ही दीवारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
ए भारत माता के बेटों, सुनो समय की बोली को
फैलाती जो फूट यहाँ पर, दूर करो उस टोली को
कभी न जलने देना फिर से, भेद भाव की होली को
जो गांधी को चीर गयी थी, याद करो उस गोली को
सारी बस्ती जल जाती है, मुट्ठी भर अंगारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
जागो तुमको बापू की जागीर की रक्षा करनी है
जागो लाखों लोगों की तक़दीर की रक्षा करनी है
अभी बनी है जो उस तस्वीर की रक्षा करनी है
होशियार तुमको अपने, कश्मीर की रक्षा करनी है
आती है आवाज यही, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से…
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳


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Sunday, August 21, 2016

છંદ - હિકર્ણ પ્રચંડ દંડ બાહુ ચંડ યોગ નિંદ્રા ભૈરવી ભુજંગ કેશ કુંડલાય કંઠલા મનોહરી નિકંદ કામ ક્રોધ...

છંદ - હિકર્ણ પ્રચંડ દંડ બાહુ ચંડ યોગ નિંદ્રા ભૈરવી ભુજંગ કેશ કુંડલાય કંઠલા મનોહરી નિકંદ કામ ક્રોધ દૈત્ય અસુરકાલ મર્દની નમોસ્તુ માત હિંગલાજ નીરમલા નિરંજની રક્ત સિંગ આસની સાવધાન શંકરી કુઠાર ખડગ ખપ્ર ધાર કર દલન મહેશ્વરી નીશંભ શુંભ રક્તબીજ દૈત તેજ ગંજની નમોસ્તુ માત હિંગલાજ નીરમલા નિરંજની જવાહીર રત્ન બેલ કેલ સર્વ કર્મ લોલની વ્યાલ ભાલ ચંદ્ર કેત પુષ્પ માલ મેખની ચંડ મુંડ ગર્જની સુનાદ બિંદ વાસની નમોસ્તુ માત હિંગલાજ નીરમલા નિરંજની ગજેન્દ્ર ચાલ કાલ ધૂમ સેતુ ચાલ લોલની ઉદાર તેજ તીમ્ર નાસ સુશોભે એષ્ક શંકરી અનાથ સિદ્ધ સાધ્ય લોક સપ્તદ્વીપ બિરાજની નમોસ્તુ માત હિંગલાજ નીરમલા નિરંજની શૈલ શિખર રાજની જોગ જુગત કારની ચંડ મુંડ ચૂર કર સહસ્ર ભુજ દાયની વિકરાલ કેશ વેશ ભૂત અંત રૂપ દામની નમોસ્તુ માત હિંગલાજ નીરમલા નિરંજની


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