Thursday, October 22, 2015

🍂🍂दशहरा उत्सव🌹 की आपको बहुत बहुत बधाई🍀🍁 ५ कार्तिक 22 अक्टूबर 2015 😶 “...

🍂🍂दशहरा उत्सव🌹 की आपको बहुत बहुत बधाई🍀🍁

५ कार्तिक 22 अक्टूबर 2015

😶 “ सहनशक्ति की महती महिमा ! ” 🌞

🔥🔥 ओ३म् अहमस्मि सहमान उत्तरो नाम भूम्याम् । 🔥🔥
🍃🍂 अभीषाडस्मि विश्वाषाडाशामाशां विषासहि: ।। 🍂🍃

अथर्व० १२ । १ । ५४

ऋषि:- अथर्वा: ।। देवता- भूमि: ।। छन्द:- अनुष्टुप्।।

शब्दार्थ- मैं सहन करनेवाला हूँ, इस भूमि पर उत्कृष्टतर प्रसिद्ध हूँ। मुक़ाबले में आये हुए को सहने वाला हूँ, सब-कुछ सहने वाला हूँ, प्रत्येक दिशा में, प्रत्येक इच्छापूर्ति के लिए सब कुछ विशेषतया बार-बार सह सकने वाला हूँ।

विनय:- मैं सहनशक्ति में अदम्य हूँ। मैं सह-सहकर सबको हरा दूँगा, सबको पराभूत कर दूँगा। अपनी भूमि माता के लिए ऐसी क्या वस्तु है जिसे मैं सह नहीं लूँगा! मैं इस भूमि पर ‘उत्तर’ होकर उत्पत्र हुआ हूँ, उत्कृष्टतर मनुष्य-योनि पाकर उत्पत्र हुआ हूँ। मुझे अपने मनुष्यत्व का अभिमान है। मैं मनुष्य होकर कभी सहन करने में कैसे हार खा सकता हूँ? मैं तो भूमिमाता का मुख उज्ज्वल करने के लिए असह्य-से-असह्य कठिनाइयों और मुसीबतों को सह डालूँगा। मेरे मुकाबले में जो कोई आएगा उसे मैं अपनी सहनशक्ति द्वारा वशीभूत कर लूँगा, अपने सामने नमा लूँगा। मेरे अभिमुख कोई भी प्रतिद्वन्द्वी खड़ा नहीं रह सकता। मैं उत्तर हूँ। मैं सब कुछ सह लूँगा। मैं भूमिमाता का पुत्र हूँ, मैं तो जिस दिशा में पैर रखूँगा उसे ही अपनी सहनशक्ति द्वारा अपने सामने झुका लूँगा; जिस आशा या इच्छा से निकलूँगा उसे ही अपने इस अमोध अस्त्र द्वारा अधिगत कर लूँगा, मैं अभिषाड् हूँ, मैं विश्वाषाड् हूँ।

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ओ३म् का झंडा 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
……………..ऊँचा रहे

🐚🐚🐚 वैदिक विनय से 🐚🐚🐚


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