🌹सत्य की राह🌹
पाखंड का अंत करने वाले आर्यसमाज …
एक बार पौराणिक पंडित जी ने आर्यसमाजी बालक से कहा की हे आर्य जी आज श्राद्ध का दिन है और पितरो के लिये खीर बनानी है. आप जाइये पितरो की खीर के लिये दुध ले आइये.. मित्र आर्य बालक उस समय 9 वर्ष के ही थे..
आर्य बालक जी दुध का बरतन लेकर चल पडे… चलते चलते आगे एक गाय मरी हुई पडी थी.. आर्य बालक ने आस पास से घास को उखाड कर गाय के पास डाल दिया और वही पर बैठ गये.. दुध का बरतन भी पास ही रख लिया… जब काफी देर हो गयी तो
पौराणिक जी ने सोचा.. पितरो को छिकाने का टाइम हो गया है.. आर्य बालक अभी तक नही आया.. तो पौराणिक पंडित जी खुद चल पडे दुध लेने..चले जा रहे थे तो आगे देखा की आर्य बालक एक मरी हुई गाय के पास बरतन रखे बैठे है…पौराणिक पंडित जी बोले अरे बालक तु दुध लेने नही गया.. बालक बोला पंडित जी ये गाय पहले घास खायेगी तभी तो दुध देगी.. पंडित जी बोले अरे ये गाये तो मरी हुई है ये घास कैसे खायेगी??
आर्य बालक बोला पंडित जी ये गाय तो आज मरी है.. जब आज मरी गाय घास नही खा सकती.. तो आपके 100 साल पहले मरे पितर खीर कैसे खायेगे.?
अतः जो जीवित है उनकी सेवा करो!!
जिंदा बाप कोई ना पूजे।मरे बाद सब पूजवाये।।
मुठी भर चावल लेकर।कौवे को बाप बनाये।।
अंधविस्वास मिटाओ।
आत्मविश्वास जगाओ |.. प्रवीण आर्य—-
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