Monday, October 12, 2015

🌹🌹🌹🌹🌹ओ३म्🌹🌹🌹🌹 भूपेश आर्य~8954572491 भाते न हिन्द के हैं सेव सन्तरे अंगूर। तुमको पसंद अरब कीसूखी...

🌹🌹🌹🌹🌹ओ३म्🌹🌹🌹🌹

भूपेश आर्य~8954572491

भाते न हिन्द के हैं सेव सन्तरे अंगूर।
तुमको पसंद अरब कीसूखी हुई खजूर।।
तुमको पसंद है न जमुन-गंग की धारा।
बस आब्ए-जमजम ही फकत तुमको है प्यारा।।

घोडा व हाथी की तो सवारी नहीं प्यारी।
तुमको पसंद ऊंट की बेडोल सवारी।।
तुमको पसंद है न हिन्द के ये हरे खेत।
तुमको पसंद अरब की सूखी वो गर्म रेत।।
उल्फत वतन की ऐ मियाँ!
तुम भूल गये हो।
तुम भूल गये हो मियाँ!
तुम भूल गये हो।।

खा-खा के जिनके खेतों का
तुम अन्न हो पले।
देखे हैं मीठे सपने जिसके
आसमां तले।।
धूली में जिसकी लोटे,
व घुटनों के बल चले।
नदियों में जिसके तैर किये
खूब चोंचले।।

गायों का जिसके दूध पी
आनन्द से उछले।
हर तरह बढाये तुम्हारे जिसने होंसले।।
उस हिन्द का अहसाँ मियाँ!
तुम भूल गये हो।।
अपने को बताते हो मुसलमान तुम सभी।
रह हिन्द में कहते न
खुद को हिन्दी तुम कभी।।

ईरान का निवासी कहता
है ईरानी।
चीनी कहाता चीन का जापाँ का जापानी।।
अरबी कहाता अरब का और मिस्र का मिस्री।
काबुल का काबुली है तैसे हिन्द का हिन्दी।।

इस बात को बिल्कुल मियाँ!तुम भूल गये हो।
तुम भूल गये हो मियाँ!
तुम भूल गये हो।।
पुरखा तुम्हारे थे न अरब के ईरान के।
बाशिन्दे वे भी थे इसी हिन्दोस्तान के।।
था कर्म हिन्दी,धर्म हिन्दी,
हिन्दी भेष था।
सम्बन्ध सब प्रकार हिन्द से विषेश था।।

थे नाम जिनके रामसिंह और चन्द्रसेन।
अब नाम रख लिये सनाउल्ला जफर हुसेन।।
अपनी हकीकत अय मियाँ!
तुम भूल गये हो।।
खिदमत ‘प्रकाश’ मुल्क की करना सवाब है।
गद्दारी करना कुफ्र,सितम है अजाब है।।

हाँ! याद वो मशहूर हमें कौमी गान है।
सारे जहाँ से आला ये हिन्दोस्तान है।।
इसकी ही शान में तो हमारी भी शान है।
धन-माल ही क्या इस पै तो कुर्बान जान है।।

जज्बात ये बिल्कुल मियाँ!तुम भूल गये हो।
तुम भूल गये हो मियाँ!तुम भूल गये हो।
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