🌻🌹🌻🌹🌻🌹ओ३म्🌻🌹🌻🌹🌻🌹
भूपेश आर्य
जो व्यक्ति आत्मा का दर्शन किये बिना और ईश्वर को पाये बिना इस शरीर से जायेगा,उसका जीवन-गीत अधूरा रह जायेगा।
महर्षि याज्ञवल्क्य जब वन को जाने लगे तो गार्गी ने पूछा,“महाराज ! आप जानते हो तो कृपा करके यह बताओ कि मनुष्य का कल्याण कैसे होता है?”
याज्ञवल्क्य ने कहा, “गार्गी!
मनुष्य का जीवन एक यज्ञ है।इस यज्ञ में जो व्यक्ति केवल सामग्री को ही इकट्ठा करता रहता है और सब कुछ एकत्रित करके भी ब्रह्म का आवाहन नहीं करता,सब कुछ उसके समर्पण नहीं करता,तब तक वह यज्ञ पूर्ण नहीं होता और जो यज्ञ को पूर्ण किये बिना चला जाये उसका कल्याण नहीं होता।
क्योंकि उस एक पूर्ण ब्रह्म के अतिरिक्त शेष सब कुछ नष्ट होने वाला है।
केवल वह ब्रह्म ही अमर है,वही सदा रहता है।
इसके अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं-
वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्ण तमस: परस्तात।
तमेव विदित्वातिमृत्युमेतिनान्य: पन्था विद्यतेअयनाय ।। (यजु० ३१/१८ ।।)
उस परमात्मा को जाने बिना अन्य कोई मार्ग नहीं है।
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