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★★★★★ हार्दिक नमस्ते ★★★★★
★★★ सभी के लिए प्रभु-प्रसाद ★★★
*********आर्यों का विज्ञान***********
*****व ए. ओ. ह्यूम की अज्ञानता******
आर्यों का विज्ञान व ए.ओ. ह्यूम की अज्ञानता १० आषाढ़ शुदि १९३२ वि. को अपने एक प्रवचन में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने कहा था कि “प्राचीन काल में दरिद्रों के घर में भी विमान थे । उपरिचर नामक राजा सदा हवा मे ही फिरा करता था , पहले के लोगों को विमान रचने की कला ,विद्या भली प्रकार से विदित थी । पहले के लोग विमान आदि के द्वारा लड़ाई लड़ते थे । मैंने भी एक विमान-रचना का पुस्तक देखा है । भला आप सोचे कि उस व्यवस्था और विज्ञान के सन्मुख आज इस रेलगाड़ी की प्रतिष्ठा ही क्या हो सकती है। ”ए. ओ. ह्यूम जिन्होंने बाद में भारतीय कांग्रेस की स्थापना की , उन्होने स्वामी जी का उपहास करते हुए कहा , ‘व्यक्ति का उड़ना गुब्बारों तक ही सीमित रह सकता हैं , यान बनाकर तो केवल सपनों में ही उड़ा जा सकता है लेकिन जब विमान का आविष्कार हुआ तो ए. ओ. ह्यूम ने बाद में उदयपुर में स्वामी श्रद्धानंद जी ( स्वामी दयानन्द जब देह त्याग चुके थे और स्वामी श्रद्धानंद उनके उत्तराधिकारी समझे जाते थे , इसलिए क्षमा उनसे मांगी गयी ) से अपने उपहास के लिए क्षमा मांगी थी ।
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साभार :-स्वामी दयानन्द–अनुज जैन,
पृष्ठ १४२*
ऋषि दयानन्द निर्वाण शताब्दी १९८३ स्मारिका – संपादक क्षितीश वेदलंकार, पृष्ठ- ७३
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★ प्रेषक -आर्य ओमप्रकाश सिंह राघव ★
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★ शुद्ध सम्बुद्ध बनें - सत्यार्थप्रकाश पढ़ें ★
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★गुड्डे-गुड़िया-खेल सदृश मूर्तिपूजा त्याज्य है★
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