Monday, November 23, 2015

🌻🌻🌻🌻🌻ओ३म्🌻🌻🌻🌻 भूपेश आर्य 🌷दिव्य ओषधियां🌷 🌼आरोग्याम्बु-एक लीटर पानी को ओटाने से 250 ग्राम रह जाये...

🌻🌻🌻🌻🌻ओ३म्🌻🌻🌻🌻

भूपेश आर्य

🌷दिव्य ओषधियां🌷

🌼आरोग्याम्बु-एक लीटर पानी को ओटाने से 250 ग्राम रह जाये तो उसे आरोग्याम्बु कहते हैं।इसे पीने से खांसी,दमा और कफ के रोग दूर होते हैं।बुखार शीघ्र उतर जाता है।भूख लगाता है।खायी वस्तु तुरन्त पच जाती है।बवासीर,पाण्डुरोग,वायुगोला और हाथ पांवों की सूजन को दूर करता है।
इस प्रकार के जल का सदा प्रयोग किया जाये तो रोग उत्पन्न ही नहीं होते।

🌼भूंई आंवला १० ग्राम को घोट पीसकर पानी में मिलाकर पिला दें।पीलिया तीन दिन में ही निर्मूल हो जाता है।
कुछ दिन सेवन करने से पथरी भी गलकर निकल जाती है।

🌼पीलिया-जवान आदमी को 3 ग्राम चूना बिना बुझा केले की पकी फली में रखकर खिला दें।ऊपर से और केले खायें।इससे पाण्डु रोग जाता रहता है।बच्चों को 1 ग्राम दें।

🌼असगन्ध और विधारा दोनों को समभाग लेकर चूर्ण बना ल़े।फिर दोनों के बराबर मिश्री मिला लें।३-६ ग्राम चूर्ण प्रतिदिन दूध या पानी के साथ खिलायें।यह चूर्ण शरीर को सशक्त बनाता है।इसके निरन्तर प्रयोग से बुढ़ापा,चेहरे और शरीर की झुर्रियां,गठिया और दर्द की शिकायत जाती रहती है।
बाल शीघ्र सफेद नह़ी होते।स्त्री पुरुष सबके लिए एकसमान लाभकारी है।

🌼बाल काले-काले तिल २५० ग्राम,गुड़ २५० ग्राम-दोनों को अच्छी प्रकार कूट ल़ें।५० ग्राम प्रतिदिन खायें।३ मास तक निरन्तर सेवन करें।इसके सेवन से शरीर म़े शक्ति आयेगी,बल बढ़ेगा,बहुमूत्र दूर होगा,केश काले होंगे।

२.इन्द्रायण के बीजों के तेल कीशिर पर नित्य मालिश करने से बइल भौरे के समान काले हो जाते हैं।

🌼लहसुन का रस पिलाने से कैंसर नष्ट होता है।

🌼गर्भवती के वमन-गर्भवती के वमन जब किसी भी ओषधि से बन्द न होते हों तो बेर की गुठली को फोडकर उसकी मिंगी निकालकर पानी के साथ निगलवा दें।वमन तुरन्त बन्द हो जायेंगी।

🌼गर्भ से बच्चा निकालना-जिस स्त्री को प्रसव पीड़ा हो रही हो,उसे भैंस का गोबर ६ ग्राम,और शहद १२ ग्राम -दोनों को पानी म़े मिलाकर पिला दें।बच्चा जीवित अथवा मृत तुरन्त बाहर आ जायेगा।

🌼डिपथीरिया व कैंसर-डीकामाली(नाड़ीहिंगु) २५ ग्राम लेकर कूट पीसकर कपड़छन करके शीशी में भर लें।बस दवा तैयार है।

कोई भी पान लेकर उसे अच्छी प्रकार धोकर कपड़े से पौंछ ले।अब इस बिना लगे हुए पान पर पिंगला हुख शुद्ध घी अंगुली से चुपड़ दें।और दो ग्राम उक्त दवा का चूर्ण(डीकामाली) बुरक दें।पान का बीड़ा बनाकर रोगी को दें।उससे कहें कि जी कड़ा करके पान को चबाते जाओ और रस को निगलते जाओ।जब रोगी रस को चूस ले तो पान के बीड़े को भी निगलवा दें।इस एक ही बीड़े से ५० प्रतिशत पीड़ा समाप्त हो जाती है।३-३ घण्टे के पश्चात् दो बीड़े और खिला दें।३ बीड़ों से डिपथीरिया समाप्त हो जाता है।आवश्यकता हो तो चौथा भी दे सकते हैं।

दवा क्या है,अमृत है।रोगी एक ही दिन में स्वस्थ हो जाता है।डिपथीरिया के सारे उपद्रव शांत हो जाते हैं।

यही प्रयोग कैंसर का भी अचूक इलाज है।प्रतिदिन ४-४ बीड़े खिलाओ और कैंसर जैसे भयंकर रोग से मुक्ति पाओ।हां,इलाज लम्बा चलेगा।३ से ६ मास तक निरन्तर प्रयोग करें।लाभ १ मास में ही आरम्भ हो जायेगा।


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