Wednesday, November 4, 2015

🌹🌹🌹🌹🌹ओ३म्🌹🌹🌹 🌻हम क्या चाहते हैं🌻 वेद का प्रचार घर घर में करना चाहिये। हर नगर में आर्य मन्दिर बनना...

🌹🌹🌹🌹🌹ओ३म्🌹🌹🌹

🌻हम क्या चाहते हैं🌻

वेद का प्रचार घर घर में करना चाहिये।
हर नगर में आर्य मन्दिर बनना चाहिये।।

कम से कम एक वेद पुस्तक पास होना चाहिये।
सबके घर में सत्यार्थ प्रकाश होना चाहिये।।
यज्ञ का स्थान घर में खास होना चाहिये।
दुर्गंध बिमारियों का नाश होना चाहिये।।
यज्ञ हवन परिवार सारे को सिखाना चाहिये-।।१।।

सोलह और पच्चीस वर्ष रहें बाल ब्रह्मचारी सभी।
संस्कृत और शुद्ध भाषा सीखें नर नारी सभी।
वेद और मनु को पढे यहां राज कर्मचारी सभी।।
राज कर्मचारी शिखा और हो सूत्र धारी सभी।
राज्य में ये विधान भी मनु का चलाना चाहिये-।।२।।

कोई अनपढ ना रहे ये हर जगह ऐलान हो।
पक्षी और पशु राज्य में निर्दोष ना कुर्बान हो।।
नस्ल पशुओं की बढावें देश का उत्थान हो।
और ध्वनि विस्तार पर बेकार ना कोई गान हो।।
ऋषियों का और वीरों का जीवन सुनाना चाहिये-।।३।।

और सिनेमा घर के आगे ना बुरी तस्वीर हो।
वीर रस के गान हो और धार्मिक तकरीर हो।।
राज्य न्यायालयों में हर दम छनता नीर क्षीर हो।
नष्ट पापिस्तान हो और भारत में कश्मीर हो।।
जालिमों को दण्ड सदा देना दिलाना चाहिये-।।४।।

भारत में अश्वपति सा न्यायकारी राज्य हो।
सुल्फा और सिगरेट बीडी ना कोई हुक्केबाज हो।
समानी प्रपा सह वोन्नभाग: घर घर सुख का साज हो।
ब्रह्मचारी देश रक्षक के ही सर का ताज हो।।
सादा जीवन सबका ये फैशन छुडाना चाहिये-।।५।।

सीता जैसी देवियों से देश ये आबाद हों।
सांगा और प्रताप शिवा नलवा सी औलाद हों।।
मनुष्य कम गऊओं का घर घर प्रात: सांय नाद हों।।
दूध दही मक्खन व घी खाने में आना चाहिये-।।६।।

खेत कम हों और वन जंगल तो बेशूमार हों।
दूसरे देशों से लेने देने के व्यापार हों।
ब्लैक रिश्वत छल कपट के बंद सब बाजार हों।।
मन वचन और कर्म से सच्चे सभी नर नार हों।
एक घंटा हर कोई सत्संग में जाना चाहिये-।।७।।

कर्म करते हों सभी कोई भी ठाली न रहे।
अन्न ओर धन हो किसी के घर कंगाली ना रहे।
भोजन और वस्त्र बिना कोई हाली पाली ना रहे।।
चांदी के हों पात्र फूटा लोटा थाली ना रहे।
आर्य हों देश में कोई कुचाली ना रहे।
सबके दरवाजे खुलें हों ताला ताली ना रहे।।
“भीष्म” ऋषियों का हमें फिर से जमाना चाहिये-।।८।।
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