🌷🌷🌷🌷🌷ओ३म्🌷🌷🌷🌷
भूपेश आर्य
🌻बाल काला करना:-
मालकांगनी के बीज (छिलका उतार दें) २५० ग्राम लेकर बोतल में भर लें और दृढ़ कार्क लगा दें।१० दानें प्रतिदिन पानी से निगल लें।निरन्तर एक वर्ष तक प्रयोग करें।
इन बीजों के सेवन से बुद्दि तीव्र होती है।चेहरा लाल हो जाता है।बाल पुनः काले होने लगते हैं।
पथ्य-चने की दाल या मूंग की दाल जिसम़े खूब घी ड़ाला गया हो सेवन करें।
गेहू या बेसन की रोटी खाएं।
मेथी का साग भी खा सकते हैं।मिठाई में जलेबी खा सकते है।
गर्म वस्तुओं से बचें।
🌻बांझपन-1.मासिकधर्म से शुद्ध होने के पश्चात् नागकेसर का चूर्ण ६ ग्राम को गाय के ताजा दूध के साथ कुछ समय तक निरन्तर सेवन करने से गर्भ अवश्य रहता है।
2.जीयापोते का एक पत्ता एक रंग की बछड़े वाली गाय के दूध में उबालकर ऋतु-स्नान के पश्चात् ५वें दिन से सात दिन तक सेवन करने से बाँझ स्त्री भी गर्भवती होती है।यह सन्तान प्राप्ति की अद्वितीय ओषधि है।इसके बीजों की माला पहनने से गर्भस्राव,गर्भपात और गर्भाशय के रोग दूर होते हैं।
🌻पेट के रोग-पेट के रोगों के लिए हरड़ अमृत है।२ छोटी हरड़ प्रतिदिन चूसें।अथवा पीली हरड़ २ ग्राम प्रतिदिन चूसें।
🌻पुराने सिरदर्द की दवा-
धतूरे के दो बीज एक सप्ताह तक प्रतिदिन पानी के साथ निगलें।यह पुराने सिरदर्द को दूर करता है।
🌻पीलिया-६० ग्राम मूली के पत्तों का रस निकालकर इसमें १० ग्राम चीनी मिला लें।प्रातः बिना कुछ खाये पिये इस रस को पिलावें।पीलिया को नष्ट करने के लिए रामबाण दवा है।
एक सप्ताह में पीलिया रोग नष्ट हो जाता है।
पथ्य:-दो मास तक हल्दी,नमक और दूध का सेवन न करें।
🌻पुत्र उत्पन्न करने के लिए:-गर्भ स्थापित हो जाने पर 45 से 60 दिन के बीच में पीली सरसों 10 ग्राम को एक कपड़े की पोटली में बाँधकर गर्भवती स्त्री की कमर में बाँध दिया जाये तो पुत्र ही उत्पन्न होता है।
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