🌞 ओ३म् 🌞
नमस्ते जी, सुप्रभातम्
वेदामृतम्
देवा देवानामपि यन्ति पाथ : । (ऋग्वेद ३/८/९)
विद्वानों के मार्ग पर विद्वान् ही चलते हैं ।
सुभाषितम्
॥ व्यायाम ॥
स च शीते वसन्ते च , तेषां पथ्यतम : स्मृत: । सर्वेष्वृतुष्वहरह: , पुम्भिरात्महितैषिभि : ॥ (सुश्रुत चिकित्सा २४/४६)
सर्दी की ऋतु में और वसन्त ऋतु में तो व्यायाम अत्यन्त ही हितकारक है । अपना कल्याण चाहने वाले मनुष्यों को सभी ऋतुओं में प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए ।
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