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–~~***★ [] ओ३म् [] ★***~~–
~~~~~******★******~~~~~
खुदा का मुख्य नाम “ओ३म् ” है
—~~~~~*****★*****~~~~~—
यदि कोई विद्वान हो तो इसे गलत साबित
करने का चुनौती स्वीकार करे
★लाजपतराय अग्रवाल वैदिक शात्रार्थ योद्धा★
कुरान मे सीधे शब्दों मे न
कहकर घुमा-फिरा कर ओ३म् का
उल्लेख किया गया है ताकि लोग कुरान को
वैदिक धर्म का नकल न बताने लगे।
जो भाषा विद्वानों के समझने
की बात है।
देखिये कुरान मे लिखा है
बिस्मिल्लाहि..….अलिफ लाम मीम
(कु. पारा १ सूरे बकर आ. १ )
शुरु करता हूँ अल्लाह
के नाम से जो नियाहत दयावान
और मेहरबान है।
-~~***★ समीक्षा ★***~~-
इस आयत के फुटनोट
मे कुरान के हिन्दी टीकाकार
मौ० अहमद बसीर एम. ए. लिखते हैं कि
अलिफ लाफ मीम
इनका क्या
अर्थ है ?
इसका
-~**★अर्थ खुदा को ही मालुम है ★**~-
हमारा कहना है कि यदि इन तीनों अक्षरों का ज्ञान मुसलमानों को नहीं तो इसका अर्थ यह है कि वे कुरान को समझने की योग्यता नहीं रखते हैं। हम यहाँ यह रहस्य खोल देते है। अरबी व्याकरण के अनुसार लाम अक्षर ’ वाउ’ मे बदल जाता है। तब अलिफ लाम मीम मिलकर अलीफ वाउ मीम बन जाते हैं। अलिफ + वायु , मिलकर ‘ओ’ का उच्चारण होगा और अन्त मे मीम मिला देने से अलिफ + वाउ + मीम अर्थात ओ३म् बन जावेगा -~*★जो कि ईश्वर का मुख्य नाम है।★*~-
कुरान का लेखक कुरान शुरु करने पर सर्वप्रथम ईश्वर को स्मरण करता हुआ कहता है कि “शुरु करता हूँ अल्लाह के नाम से जो नियाहत दयावान और मेहरबान है"… प्रश्न होता है कि दयावान मेहरबान अल्लाह का वह कौन सा नाम है जिसे लेकर कुरान शुरु किया गया था ? कुरान उत्तर देता है। “अलिफ" “लाम" “मीम" अर्थात
-~**★ ओ३म् ★**~-
इस प्रकार कुरान के लेखक ने चाहे वह अल्लाह हो या मुहम्मद हो ,सर्वप्रथम ओ३म् नाम से ईश्वर का स्मरण किये थे। कुरान मे कई स्थानों पर इसका उल्लेख है परन्तु वह है सिपारे या सूरत के शुरु में ही। यदि कुरान मे सीधे शब्दों मे ★ओ३म् ★ लिख दिया जाता तो लोग कुरान को हिन्दू धर्म का नकल बताने लगते अत: कुछ घुमा-फिरा कर ★ओ३म् ★ का उल्लेख उसमें किया गया है जो
भाषा विद्वानों के समझने की बात है।
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-*★ “कुरान की विचारणीय बातें "★*-
–~~***★से साभार★***~~–
लेखक - श्री लाजपत राय अग्रवाल वैदिक
-~~***★शास्त्रार्थ योद्धा★***~~-
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