Tuesday, September 13, 2016

*🌺अपच(बदहजमी) Indigestion🌺* परिचय:- अपच रोग आमाशय या आंतों के ठीक से काम न करने के कारण होता है। इस...

*🌺अपच(बदहजमी) Indigestion🌺*

परिचय:-
अपच रोग आमाशय या आंतों के ठीक से काम न करने के कारण होता है। इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को खाया-पिया भोजन पचता नहीं है तथा उसे खट्टी डकारे आने लगती है। अपच रोग साधारण हो या बहुत अधिक यह आमाशय और आंतों की बहुत सारी बीमारियों के होने का कारण बनता है। आमाशय और आंतों की बहुत सारी बीमारियों से बचने के लिए रोगी व्यक्ति को अपच रोग का जल्दी से उपचार कराना चाहिए, नहीं तो यह बीमारी और भी रोगों को जन्म दे सकती है जैसे- जी मिचलाना, डकारें आना, उल्टी आना, हृदय में जलन, पेट में दर्द तथा मरोड़, अम्ल, मुंह में घाव होना, मसूढ़ों से खून आना आदि। यदि यह रोग बहुत अधिक हो जाता है तो रोगी को डायरिया या कब्ज जैसे रोग भी हो सकते हैं।
यदि इस रोग के होने का कारण पता लग जाए तो बीमारी के लक्षणों का उपचार हो सकता है। यदि इस रोग के होने का कारण पता न लगे तो भी इस रोग का उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से हो सकता है। इस रोग के होने का सीधा संबन्ध हमारे भोजन करने के तरीके तथा भोजन संबन्धी आदतों से होता है। यदि हम अपने भोजन करने के तरीके तथा भोजन संबन्धी आदतों में सुधार करते हैं तो यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

*अपच रोग होने का लक्षण :-*

अपच रोग से पीड़ित रोगी को भूख नहीं लगती है तथा उसके मुंह से बिना पचा भोजन बाहर आने लगता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को खट्टी-खट्टी डकारे आने लगती हैं तथा उसका जी मिचलाने लगता है और उसका कुछ भी खाने का मन नहीं करता है।
रोगी व्यक्ति के गले तथा हृदय में जलन होने लगती है और उसकी सांसों से बदबू आने लगती है तथा पेट में गैस बनने लगती है।
इस रोग से पीड़ित रोगी अगर थोड़ा सा भी खाना खा लेता है तो उसका पेट भारी होने लगता है तथा पेट और छाती में दर्द होने लगता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी उल्टियां भी होने लगती है और उसकी जीभ पर मैल जम जाता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को कब्ज भी होने लगती है तथा जब इस रोग की अवस्था अधिक गंभीर हो जाती है तो उसे डायरिया जैसे रोग जाते हैं।
इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को और भी कई प्रकार के रोग हो जाते हैं जो इस प्रकार हैं- आंतों में सूजन, जिगर की बीमारियां, एपेन्डिसाइटिस, बड़ी आंतों में सूजन, आंतों में घाव तथा गुर्दे की बीमारियां आदि।


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*अपच रोग होने का कारण :-* प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार अपच रोग उस व्यक्ति को हो जाता है जो अपनी भूख...

*अपच रोग होने का कारण :-*

प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार अपच रोग उस व्यक्ति को हो जाता है जो अपनी भूख से अधिक भोजन करता है, जल्दी-जल्दी भोजन करता है तथा खाना ठीक से चबाकर नहीं खाता है।
अपच रोग कई प्रकार के गरिष्ठ (भारी तथा दूषित भोजन), तैलीय भोजन, बासी तथा सड़े-गले खाद्य पदार्थों का भोजन में उपयोग करने के कारण होता है।
अपच रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो भोजन करने के तुरंत बाद काम में लग जाते हैं।
भय, चिंता, ईर्ष्या, क्रोध, तनाव से ग्रस्त व्यक्तियों को यह रोग जल्दी हो जाता है।
भोजन के साथ-साथ पानी पीना, चाय का अधिक सेवन करना, कॉफी, साफ्ट ड्रिंक तथा शराब आदि का अधिक सेवन करने के कारण भी अपच रोग हो जाता है।
अधिक धूम्रपान करने, सही समय पर भोजन न करने तथा काम न करने के कारण भी अपच रोग हो सकता है।
बार-बार बिना भूख लगे ही खाना खाने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
ठीक समय पर खाना न खाने अथार्त खाने खाने का कोई निश्चित समय न होने के कारण भी अपच रोग हो जाता है।
गलत तरीके से खान-पान तथा जल्दी-जल्दी खाना खाने तथा तनाव में खाना खाने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
भोजन करते समय कोई मानसिक परेशानी तथा भावनात्मक रूप से परेशान रहने के कारण भी अपच रोग हो जाता है।
कब्ज बनने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
अत्यधिक सिगरेट पीने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
जब शरीर में भोजन को जल्दी पचाने वाले एन्जाइम में कमी हो जाती है तो भी यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।

*अपच रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-*

1. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोगी के अपच रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले इसके होने के कारणों को दूर करना चाहिए। फिर इसके बाद रोगी को 1 से 3 दिनों तक रसाहार (नारियल पानी, संतरा, अनन्नास, अनार, नींबू पानी और कई प्रकार के फलों का रस) पीकर उपवास रखना चाहिए। इसके बाद कुछ दिनों तक रोगी को फलों का सेवन करना चाहिए तथा इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग ठीक हो जाता है।

2. रोगी व्यक्ति को मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य, मिठाइयों, चीनी, मैदा आदि का भोजन में उपयोग नहीं करना चाहिए तभी अपच रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

3. इस रोग से पीड़ित रोगी को बार-बार भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि भोजन करने का समय बनाना चाहिए और उसी के अनुसार भोजन करना चाहिए। रोगी व्यक्ति को भोजन उतना ही करना चाहिए जितना कि उसकी भूख हो। भूख से अधिक भोजन कभी भी नहीं करना चाहिए। रोगी व्यक्ति को भोजन कर लेने के बाद सोंफ खानी चाहिए और तुरंत पेशाब करना चाहिए और इसके बाद वज्रासन पर बैठ जाना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

4. रोगी व्यक्ति को अपनी पाचनशक्ति को बढ़ाने के लिए तुलसी के पत्तों या पुदीने के पत्ते पीसकर पानी में घोलकर पीना चाहिए।

5. रोगी व्यक्ति के रोग को ठीक करने के लिए पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए। इसके बाद रोगी को कटिस्नान कराना चाहिए। फिर रोगी को कुंजल क्रिया तथा जलनेति क्रिया करानी चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

6. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार इस रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसनों का उपयोग किया जा सकता है और ये आसन इस प्रकार हैं-

अर्धमत्स्येन्द्रासन,
उत्तानपादासन,
सुप्त पवनमुक्तासन
योगमुद्रासन,
सर्वांगासन
चक्रासन,
वज्रासन,
शवासन,
भुजंगासन

इन सभी यौगिक क्रियाओं को करने से रोगी का अपच रोग ठीक हो जाता है तथा इसके अलावा योग मुद्रा, कपालभाति, लोम अनुलोम, उज्जायी प्राणायाम करने से भी रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

1. अपच रोग से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

2. रोगी व्यक्ति को अपना उपचार कराने से पहले वसायुक्त खाद्य पदार्थ, कॉफी, चाय, शराब, धूम्रपान तथा उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को सेवन नहीं करना चाहिए।

3. इस रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट पर गर्म तथा ठण्डी सिंकाई करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप पेट में दर्द तथा गैस बनना बंद हो जाती है तथा यह रोग ठीक हो जाता है।

4. अपच रोग को ठीक करने के लिए गैस्ट्रो-हैपेटिक लपेट का इस्तेमाल करना चाहिए जिसके फलस्वरूप दर्द से आराम मिलता है और इस रोग से रोगी को आराम मिलता है।

5. पेट के अवयवों में रक्त संचार को सुधारने के लिए मिट्टी लपेट का उपयोग करना चाहिए। इसके फलस्वरूप रक्त संचार में सुधार हो जाता है और इस रोग से पीड़ित रोगी को बहुत अधिक आराम मिलता है।

6. अपच रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कम से कम 40 से 60 मिनट तक पेट पर ठंडा लपेट करना चाहिए। इसके फलस्वरूप रोगी को बहुत आराम मिलता है और रोग ठीक हो जाता है।

7. इस रोग से पीड़ित रोगी को पेट के बल लेटना चाहिए तथा पवनमुक्तासन का अभ्यास करना चाहिए। इसके फलस्वरूप रोगी को बहुत अधिक आराम मिलता है।

8. इस रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले नींबू के रस में पानी को मिलाकर दिन में कम से कम 3-4 बार पीना चाहिए तथा कम से कम 3 दिन तक उपवास रखना चाहिए और कटिस्नान करना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी व्यक्ति को अपने पेट को साफ करने के लिए पानी से एनिमा क्रिया करनी चाहिए ताकि यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाए।


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*🌺भूख बढ़ाने के असरदार उपाय*🌺 मारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती हैयदि यह...

*🌺भूख बढ़ाने के असरदार उपाय*🌺

मारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती हैयदि यह अग्निकिसी कारण से मंद पड़ जाये तो भोजन ठीक तरह से नही पचता हैभोजन के ठीक सेनही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते हैअनियमित खानपानसे वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते हैजिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जातीहैऔर अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती हैभूखलगनी बंद हो जाती हैशरीर टूटने लगता हैस्वाद बिगड जाता है..
पेट में भारीपन महसूस होने लगता है पेट खराब होने सेदिमाग खराब रहना चालू हो जाता हैअथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरातंत्र ही खराब हो जाता हैइसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिये औरतकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिये।

भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।

काला नमक चाटने से गैस खारिज होती हैऔर भूख बढती हैयह नमक पेट को भी साफ़ करता है।

हरड का चूर्ण सौंठ और गुड के साथ अथवा सेंधे नमक के साथ सेवन करने से मंदाग्नि ठीक होती है।

सेंधा नमकहींग अजवायन और त्रिफ़ला का समभाग लेकर कूट पीस कर चूर्णबना लेंइस चूर्ण के बराबर पुराना गुड लेकर सारे चूर्ण के अन्दर मिलादेंऔर छोटी छोटी गोलियां बना लेंरोजाना ताजे पानी से एक या दो गोली लेनाचालू कर देयह गोलियां खाना खाने के बाद ली जाती हैइससे खाना पचेगा भी औरभूख भी बढेगी।

हरड को नीब की निबोलियों के साथ लेने से भूख बढती हैऔर शरीर के चर्म रोगों का भी नाश होता है।

हरड गुड और सौंठ का चूर्ण बनाकर उसे थोडा थोडा मट्ठे के साथ रोजाना लेने से भूख खुल जाती है।

छाछ के रोजाना लेने से मंदाग्नि खत्म हो जाती है।

सोंठ का चूर्ण घी में मिलाकर चाटने से और गरम जल खूब पीने से भूख खूब लगती है।

रोज भोजन करने से पहले छिली हुई अदरक को सेंधा नमक लगाकर खाने से भूख बढती है।

लाल मिर्च को नीबू के रस में चालीस दिन तक खरल करके दो दो रत्ती की गोलियां बना लेंरोज एक गोली खाने से भूख बढती है।

गेंहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनवायी जायेइससे भूख बहुत बढती है।

मोठ की दाल मंदाग्नि और बुखार की नाशक है।
डेढ ग्राम सांभर नमक रोज सुबह फ़ांककर पानी पीलेंमंदाग्नि का नामोनिशान मिट जायेगा।

पके टमाटर की फ़ांके चूंसते रहने से भूख खुल जाती है।

दो छुहारों का गूदा निकाल कर तीन सौ ग्राम दूध में पका लेंछुहारोंका सत निकलने पर दूध को पी लेंइससे खाना भी पचता हैऔर भूख भी लगती है।

जीरा सोंठ अजवायन छोटी पीपल और काली मिर्च समभाग में लेंउसमे थोडीसी हींग मिला लेंफ़िर इन सबको खूब बारीक पीस कर चूर्ण बना लेंइस चूर्ण काएक चम्मच भाग छाछ मे मिलाकर रोजाना पीना चालू करेंदो सप्ताह तक लेने सेकैसी भी कब्जियत में फ़ायदा देगा।

भोजन के आधा घंटा पूर्व चुकन्दर गाजर टमाटर पत्ता गोभी पालक तथा अन्यहरी साग सब्जियां व फ़लीदार सब्जियों के मिश्रण का रस पीने से भूख बढतीहै।

सेब का सेवन करने से भूख भी बढती है और खून भी साफ़ होता है।

अजवायन चालीस ग्राम सेंधा नमक दस ग्राम दोनो को कूट पीस कर एक साफ़बोतल में रखलेंइसमे दो ग्राम चूर्ण रोजाना सवेरे फ़ांक कर ऊपर से पानी पीलेंइससे भूख भी बढेगी और वात वाली बीमारियां भी समाप्त होंगी।

एक पाव सौंफ़ पानी में भिगो देंफ़िर इस पानी में चौगुनी मिश्री मिलाकर पका लेंइस शरबत को चाटने से भूख बढती है।

पकी हुई मीठी इमली के पत्ते सेंधा नमक या काला नमक काली मिर्च और हींग का काढा बनाकर पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है।

जायफ़ल का एक ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जठराग्नि प्रबल होकर मंदाग्नि दूर होती है।

सोंफ़ सोंठ और मिश्री सभी को समान भाग लेकर ताजे पानी से रोजाना लेना चाहिये इससे पाचन शक्ति प्रबल होती है।
जवाखार और सोंठ का चूर्ण गरम पानी से लेने से मंदाग्नि दूर होती है।

लीची को भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति और भूख में बढोत्तरी होती है।
अनार भी क्षुधा वर्धक होता हैइसका सेवन करने से भूख बढती है।

नीबू का रस रोजाना पानी में मिलाकर पीने से भूख बढती है।

आधा गिलास अनन्नास का रस भोजन से पहले पीने से भूख बढती है।

तरबूज के बीज की गिरी खाने से भूख बढती है..

बील का फ़ल या जूस भी भूख बढाने वाला होता है।

इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खाने से भूख भी बढती हैऔर खाना भी हजम होता है।

सिरका सोंठ काला नमक भुना सुहागा और फ़ूला हींग समभाग मे लेकर मिला लेंरोजाना खाने के बाद भूख बढती है।

सूखा पुदीना बडी इलायची सोंठ सौंफ़ गुलाब के फ़ूल धनिया सफ़ेद जीराअनारदाना आलूबुखारा और हरड समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लेंमंदाग्निअवश्य दूर हो जायेगी।

एक ग्राम लाल मिर्च को अदरक और नीबू के रस में खरल कर लेंफ़िर इसकीकाली मिर्च के बराबर की गोलिया बना लेंयह गोली चूसने से भूख बढती है।


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*🌺भूख ना लगना(मंदाग्नी) Dyspepsia*🌺 परिचय: हमारे द्वारा किया जाने वाला भोजन जब आमाशय में जाता है तो...

*🌺भूख ना लगना(मंदाग्नी) Dyspepsia*🌺

परिचय: हमारे द्वारा किया जाने वाला भोजन जब आमाशय में जाता है तो वह वहां जाकर आमाशय की अग्नि द्वारा ही पकता है। भोजन को जो अन्दर पचाकर रस बनाता है उसे जठराग्नि कहते हैं। शरीर में भोजन इसी के द्वारा पचता है परन्तु जब जठराग्नि कमजोर हो जाती है और भोजन को पचाने में असमर्थ हो जाती है तो व्यक्ति के अन्दर भूख का नाश हो जाता है अर्थात व्यक्ति को भूख नहीं लगती और शरीर में खून की कमी हो जाती है। इससे रोगी में सिर का दर्द, सिर का भारी होना तथा खून की कमी होने जैसे रोग उत्पन्न होने लगते हैं। इस रोग के कारण शरीर सूख जाता है तथा चेहरे पर उदासी व चमक में कमी आ जाती है।

कारण- इस रोग के उत्पन्न होने के अनेक कारण होते हैं। इस रोग को उत्पन्न होने का कारण अधिक मिर्च-मसाले वाला भोजन करना, अनियमित भोजन करना, कोई कार्य न करना, भोजन करने के बाद बैठना, कब्ज बनाने वाले भोजन का सेवन करना आदि है। कभी-कभी यह रोग अधिक वीर्य रस्खलन के कारण भी हो जाता है।

जल चिकित्सा द्वारा रोग का उपचार- मन्दाग्नि को दूर करने के लिए 1 दिन का उपवास रखना चाहिए। आंतों को साफ करना चाहिए और फिर उपवास करना चाहिए। इस रोग को दूर करने के लिए वीर्य की रक्षा करें।


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काम के हैं ये हेल्थ टिप्स अगर आपके बाल ड्राई हैं, तो हफ्ते में एक बार बालों पर गर्म तेल की मसाज व...

काम के हैं ये हेल्थ टिप्स

अगर आपके बाल ड्राई हैं, तो हफ्ते में एक बार बालों पर गर्म तेल की मसाज व भाप दें। गर्म तेल बालों को ड्राई होने से रोकेगा और उन्हें मुलायम बनाएगा। 

मेहंदी को कलर आने तक ही बालों पर लगाकर रखें और फिर तुरंत धो दें। मेहंदी जितनी देर बालों में लगी रहती है, उतनी देर बालों की नमी सोखती है। 

ड्राई बालों पर ब्राशिंग स्कैल्प पर दबाकर करने से तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होती है, जिससे बालों की ड्राईनेस कम होती है। 

गाजर के जूस में शहद व नमक डालकर पीने से आंखों की कम हुई रोशनी लौट आती है। 

किडनी स्टोन से दूर रहने के लिए नियमित तौर पर तरबूज ड्रिंक का सेवन करें। 

चुकंदर में आयर्न की मात्रा अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से चेहरे पर ग्लो आता है। 

दिल के रोगियों के लिए करेला ड्रिंक बेहद फायदेमंद है। यह ब्लड को स्वच्छ बनाए रखता है।


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#Poor_Hindus केरल की वामपंथी सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है, जिसके बाद केरल के सभी...

#Poor_Hindus

केरल की वामपंथी सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है, जिसके बाद केरल के सभी मंदिरों में जो भी नियुक्तियाँ होंगी वह PSC (Public Service Commission) की परीक्षा के जरिये होंगी…

मंदिरों की संपत्ति और प्रशासनिक नियंत्रण को पूरी तरह अपने हाथ में रखने की दिशा में यह एक और कदम है… इससे पहले पिछली काँग्रेस सरकार ने मंदिरों के रखरखाव और प्रबंधन करने वाले “देवस्वाम बोर्ड” की शक्तियों को कम करने हेतु एक विधेयक लाया था… यानी कदम-दर-कदम पद्मनाभ, गुरुवायूर, त्रावणकोर सहित केरल के लगभग 3000 से अधिक मंदिर, उनका प्रबंधन, रखरखाव और उनकी संपत्ति पूरी तरह से सरकारों के अधीन हो जाएगी…

जैसा कि सभी जानते हैं, सरकार का नियंत्रण केवल और केवल मंदिरों पर ही होता है, मस्जिदों अथवा चर्च पर नहीं. मंदिरों की दानपेटी से पैसा लेकर दूसरे कामों में लगाया जाता है, ट्रस्टी बोर्ड में कई बार “गैर-हिन्दू” भरे जाते हैं… जबकि मस्जिदों और चर्च को सरकारी अनुदान सहित बिना किसी सरकारी दखलंदाजी के मौज करने की पूरी छूट है….

(नोट :- प्रत्येक राजनैतिक दल अपने वोट बैंक को खुश करने अथवा विरोधी वोट बैंक को हताश करने के लिए कदम उठाने में लगा हुआ है…- सिवाय भाजपा के… क्योंकि भाजपा को यह मुगालता हो गया है कि उसे जो 31% वोट मिला है, वह “केवल विकास” के लिए मिला है…)

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(P)Secularuim !!! - My Foot…


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साधुओं की एक सेना थी जो हर विद्या मे निपुण थी इसे चिमटाधारी साधुओं की सेना भी कहते थे । जब जन्मभूमि...

साधुओं की एक सेना थी जो हर विद्या मे
निपुण थी इसे
चिमटाधारी साधुओं
की सेना भी कहते थे । जब
जन्मभूमि पर जबांज खाँ ने आक्रमण किया तो हिंदुओं के
साथ चिमटाधारी साधुओं
की सेना की सेना मिल
गयी और उर्वशी कुंड नामक जगह पर
जाबाज़
खाँ की सेना से सात दिनों तक भीषण युद्ध
किया ।
चिमटाधारी साधुओं के चिमटे के मार से
मुगलों की सेना भाग खड़ी हुई। इस
प्रकार चबूतरे पर
स्थित मंदिर की रक्षा हो गयी । जाबाज़
खाँ की पराजित सेना को देखकर औरंगजेब बहुत
क्रोधित
हुआ और उसने जाबाज़ खाँ को हटाकर एक अन्य
सिपहसालार सैय्यद हसन अली को 50 हजार
सैनिकों की सेना और तोपखाने के साथ
अयोध्या की ओर
भेजा और साथ मे ये आदेश
दिया की अबकी बार
जन्मभूमि को बर्बाद करके वापस आना है ,यह समय सन्
1680 का था । बाबा वैष्णव दास ने सिक्खों के
गुरु गुरुगोविंद सिंह से युद्ध मे सहयोग के लिए पत्र के
माध्यम संदेश भेजा । पत्र पाकर गुरु गुरुगोविंद सिंह
सेना समेत तत्काल अयोध्या आ गए और ब्रहमकुंड पर
अपना डेरा डाला । ब्रहमकुंड वही जगह
जहां आजकल
गुरुगोविंद सिंह की स्मृति मे
सिक्खों का गुरुद्वारा बना हुआ है। बाबा वैष्णव दास
एवं सिक्खों के गुरुगोविंद सिंह रामलला की रक्षा हेतु
एकसाथ रणभूमि में कूद पड़े ।इन वीरों कें सुनियोजित
हमलों से मुगलो की सेना के पाँव उखड़ गये सैय्यद
हसन
अली भी युद्ध मे मारा गया। औरंगजेब
हिंदुओं की इस
प्रतिक्रिया से स्तब्ध रह गया था और इस युद्ध के बाद
4 साल तक उसने अयोध्या पर हमला करने
की हिम्मत
नहीं की। औरंगजेब ने सन् 1664 मे
एक बार फिर
श्री राम जन्मभूमि पर आक्रमण किया । इस
भीषण हमले में शाही फौज ने लगभग
10 हजार से
ज्यादा हिंदुओं की हत्या कर
दी नागरिकों तक
को नहीं छोड़ा। जन्मभूमि हिन्दुओं के रक्त से लाल
हो गयी। जन्मभूमि के अंदर नवकोण के एक कंदर्प
कूप नाम
का कुआं था, सभी मारे गए हिंदुओं
की लाशें मुगलों ने उसमे
फेककर चारों ओर चहारदीवारी उठा कर
उसे घेर दिया।
आज भी कंदर्पकूप “गज शहीदा” के
नाम से प्रसिद्ध है,और
जन्मभूमि के पूर्वी द्वार पर स्थित है।
शाही सेना ने
जन्मभूमि का चबूतरा खोद डाला बहुत दिनो तक वह
चबूतरा गड्ढे के रूप मे वहाँ स्थित था । औरंगजेब के क्रूर
अत्याचारो की मारी हिन्दू जनता अब उस
गड्ढे पर
ही श्री रामनवमी के दिन
भक्तिभाव से अक्षत,पुष्प और
जल चढाती रहती थी. नबाब
सहादत अली के समय 1763
ईस्वी में जन्मभूमि के रक्षार्थ अमेठी के
राजा गुरुदत्त
सिंह और पिपरपुर के
राजकुमार सिंह के नेतृत्व मे बाबरी ढांचे पर पुनः पाँच
आक्रमण किये गये जिसमें हर बार हिन्दुओं
की लाशें
अयोध्या में गिरती रहीं। लखनऊ गजेटियर
मे कर्नल हंट
लिखता है की
“ लगातार हिंदुओं के हमले से ऊबकर नबाब ने हिंदुओं और
मुसलमानो को एक साथ नमाज पढ़ने और भजन करने
की इजाजत दे दी पर सच्चा मुसलमान
होने के नाते उसने
काफिरों को जमीन नहीं सौंपी।
“लखनऊ गजेटियर पृष्ठ
62” नासिरुद्दीन हैदर के समय मे
मकरही के राजा के
नेतृत्व में जन्मभूमि को पुनः अपने रूप मे लाने के लिए
हिंदुओं के तीन आक्रमण हुये जिसमें
बड़ी संख्या में हिन्दू
मारे गये। परन्तु तीसरे आक्रमण में डटकर
नबाबी सेना का सामना हुआ 8वें दिन हिंदुओं
की शक्ति क्षीण होने
लगी ,जन्मभूमि के मैदान मे हिन्दुओं
और मुसलमानो की लाशों का ढेर लग गया । इस संग्राम
मे भीती,हंसवर,,मकर
ही,खजुरहट,दीयरा
अमेठी के
राजा गुरुदत्त सिंह आदि सम्मलित थे। हारती हुई
हिन्दू
सेना के साथ वीर चिमटाधारी साधुओं
की सेना आ
मिली और इस युद्ध मे शाही सेना के
चिथड़े उड गये और उसे
रौंदते हुए हिंदुओं ने जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया।
मगर हर बार की तरह कुछ दिनो के बाद विशाल
शाही सेना ने पुनः जन्मभूमि पर अधिकार कर
लिया और
हजारों हिन्दुओं को मार डाला गया। जन्मभूमि में
हिन्दुओं का रक्त प्रवाहित होने लगा। नावाब
वाजिदअली शाह के समय के समय मे पुनः हिंदुओं ने
जन्मभूमि के उद्धारार्थ आक्रमण किया । फैजाबाद
गजेटियर में कनिंघम ने लिखा
“इस संग्राम मे बहुत ही भयंकर खूनखराबा हुआ
।दो दिन
और रात होने वाले इस भयंकर युद्ध में सैकड़ों हिन्दुओं के
मारे जाने के बावजूद हिन्दुओं नें राम जन्मभूमि पर
कब्जा कर लिया। क्रुद्ध हिंदुओं की भीड़
ने कब्रें तोड़
फोड़ कर बर्बाद कर डाली मस्जिदों को मिसमार करने
लगे और पूरी ताकत से मुसलमानों को मार-मार कर
अयोध्या से खदेड़ना शुरू किया।मगर हिन्दू भीड़ ने
मुसलमान स्त्रियों और बच्चों को कोई
हानि नहीं पहुचाई।
अयोध्या मे प्रलय मचा हुआ था ।
इतिहासकार कनिंघम लिखता है की ये
अयोध्या का सबसे
बड़ा हिन्दू मुस्लिम बलवा था।
हिंदुओं ने अपना सपना पूरा किया और औरंगजेब
द्वारा विध्वंस किए गए चबूतरे को फिर वापस
बनाया । चबूतरे पर तीन फीट
ऊँची खस की टाट से एक
छोटा सा मंदिर बनवा लिया ॥जिसमे
पुनः रामलला की स्थापना की गयी।
कुछ
जेहादी मुल्लाओं को ये बात स्वीकार
नहीं हुई और
कालांतर में जन्मभूमि फिर हिन्दुओं के हाथों से निकल
गयी। सन 1857 की क्रांति मे बहादुर
शाह जफर के समय
में बाबा रामचरण दास ने एक मौलवी आमिर
अली के साथ
जन्मभूमि के उद्धार का प्रयास किया पर 18 मार्च सन
1858 को कुबेर टीला स्थित एक
इमली के पेड़ मे
दोनों को एक साथ अंग्रेज़ो ने फांसी पर लटका दिया ।
जब अंग्रेज़ो ने ये देखा कि ये पेड़ भी देशभक्तों एवं
रामभक्तों के लिए एक स्मारक के रूप मे विकसित
हो रहा है तब उन्होने इस पेड़ को कटवा कर इस
आखिरी निशानी को भी मिटा दिया…
इस प्रकार अंग्रेज़ो की कुटिल नीति के
कारण
रामजन्मभूमि के उद्धार का यह एकमात्र प्रयास विफल
हो गया … अन्तिम बलिदान …
३० अक्टूबर १९९० को हजारों रामभक्तों ने वोट-बैंक के
लालची मुलायम सिंह यादव के
द्वारा खड़ी की गईं अनेक
बाधाओं को पार कर अयोध्या में प्रवेश किया और
विवादित ढांचे के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया। लेकिन
२ नवम्बर १९९० को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
ने
कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें
सैकड़ों रामभक्तों ने अपने जीवन
की आहुतियां दीं।
सरकार ने
मृतकों की असली संख्या छिपायी परन्तु
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सरयू तट
रामभक्तों की लाशों से पट गया था। ४ अप्रैल १९९१
को कारसेवकों के हत्यारे, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन
मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने
इस्तीफा दिया।
लाखों राम भक्त ६ दिसम्बर को कारसेवा हेतु
अयोध्या पहुंचे और राम जन्मस्थान पर बाबर के
सेनापति द्वार बनाए गए अपमान के प्रतीक
मस्जिदनुमा ढांचे को ध्वस्त कर दिया। परन्तु हिन्दू
समाज के अन्दर व्याप्त घोर संगठनहीनता एवं
नपुंसकता के कारण आज भी हिन्दुओं के सबसे बड़े
आराध्य
भगवान श्रीराम एक फटे हुए तम्बू में विराजमान हैं।
जिस जन्मभूमि के उद्धार के लिए हमारे पूर्वजों ने
अपना रक्त पानी की तरह बहाया। आज
वही हिन्दू
बेशर्मी से इसे "एक विवादित स्थल” कहता है।
सदियों से हिन्दुओं के साथ रहने वाले मुसलमानों ने आज
भी जन्मभूमि पर
अपना दावा नहीं छोड़ा है।
वो यहाँ किसी भी हाल में मन्दिर
नहीं बनने देना चाहते
हैं ताकि हिन्दू हमेशा कुढ़ता रहे और उन्हें
नीचा दिखाया जा सके।
जिस कौम ने अपने
ही भाईयों की भावना को नहीं समझा वो सोचते
हैं
हिन्दू उनकी भावनाओं को समझे। आज तक
किसी भी मुस्लिम संगठन ने जन्मभूमि के
उद्धार के लिए
आवाज नहीं उठायी, प्रदर्शन
नहीं किया और सरकार
पर दबाव नहीं बनाया आज भी वे
बाबरी-विध्वंस
की तारीख 6 दिसम्बर को काला दिन मानते
हैं। और
मूर्ख हिन्दू समझता है कि राम
जन्मभूमि राजनीतिज्ञों और मुकदमों के कारण
उलझा हुआ
है।
ये लेख पढ़कर जिन हिन्दुओं को शर्म
नहीं आयी वो कृपया अपने घरों में राम
का नाम
ना लें…अपने रिश्तेदारों से कह दें कि उनके मरने के बाद
कोई “राम नाम” का नारा भी नहीं लगाएं।
विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल के कार्यकर्ता एक दिन श्रीराम
जन्मभूमि का उद्धार कर वहाँ मन्दिर अवश्य बनाएंगे।
चाहे अभी और कितना ही बलिदान
क्यों ना देना पड़े।
कृपया आगे फॉरवर्ड करे
आपका बहुत आभारी रहूँगा


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मूल कर्तव्य और वेद का राष्ट्र संगठन, भाग-2 Like Post: Tweet इस वेद मन्त्र का प्रतिपाद्य विषय...

मूल कर्तव्य और वेद का राष्ट्र संगठन, भाग-2

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इस वेद मन्त्र का प्रतिपाद्य विषय ‘समान संकल्प’ है। सारे राष्ट्रवासियों का एक संकल्प हो जाना बहुत बड़ी बात है। जिस परिवार का भी 'एक संकल्प’ हो जाता है उसके विषय में भी देखा जाता है कि वह दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करता है। इसलिए एक शिव संकल्प से भर जाना सारे राष्ट्रवासियों का परम कत्र्तव्य है, जब देश पराधीन हो रहा था तो उस समय सारे राष्ट्र में 'एक संकल्प’ का ही तो अभाव था। जब वह 'एक संकल्प’ इस बात को लेकर बनने लगा कि अब अंग्रेजों को भारत से भगाना ही है तो अंग्रेजों को भारत छोडऩा ही पड़ गया। इसलिए एक 'शिव संकल्प’ से बँध जाना भी सभी राष्ट्रवासियों का परम कत्र्तव्य है।


4. चौथा वेद मन्त्र है :-

समानी प्रथा सहवोअन्नभाग समाने योक्त्रे सहवो युनज्मि।

समयञ्चो अग्निं सपर्यतारा नाभिमिवा मित:।

(यजु. 3-30-6)


“हे मनुष्यो! तुम्हारे जल पीने का स्थान एक हो और तुम्हारे अन्न का भाग भी साथ-साथ हो। मैं तुम सबको एक ही जुए में साथ-साथ जोड़ता हूँ। तुम सब मिलाकर ईश्वर की पूजा करो, जैसे पहिए के आरे केन्द्र स्थान में जुड़े रहते हैं, वैसे ही तुम भी अपने समाज में एक दूसरे के साथ मिलकर रहो।”


इस वेद मन्त्र का प्रतिपाद्य विषय हमारे द्वारा देश में 'सामाजिक समरसता’ की स्थापना करना है। वेद का सभी राष्ट्रवासियों से आग्रह है कि वो देश में सामाजिक समरसता की स्थापना के लिए अपने-अपने स्थान पर सक्रिय हों। बिना सामाजिक समरसता के कोई भी राष्ट्र उन्नति नही कर सकता। आज हमारी अवन्नति का कारण सामाजिक विषमताऐं हैं। सामाजिक समरसता का देश में नितान्त अभाव है। लोग अपने-अपने स्तर के अनुसार अलग-अलग कॉलोनियां बसाते जा रहे हैं। उनमें एक ही स्तर के लोग रहेंगे। दूसरों के लिए वहां प्रवेश तक निषिद्घ है। खाने-पीने और रहने-सहने के स्थान अलग-अलग हैं। इसलिए 'सामाजिक समरसता’ हमारे लिए मृग मरीचिका बन गयी है। वेद कहता है कि सामाजिक समरसता की स्थापना कर समाज में आत्मीय भाव का विकास करो। इसे अपना जीवन व्रत बना लो।


5. पाँचवां वेद मन्त्र है :-

सहृदयं सामनस्यम् विद्वेषं कृणोमि व:।

अन्यो अन्यभाभिह्र्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या।।

(अथर्व. 3-30-1)


“हे मनुष्यो! तुम लोग हृदय के भाव प्रेमपूर्ण, मन में शुभ विचार और परस्पर निर्वैरता अपने मन में स्थिर करो। तुममें से हर एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से प्रेमपूर्ण बर्ताव करे जिस प्रकार कि नवजात बछड़े से उसकी गौ माता प्यार करती है।”

'नि:स्वार्थ प्रेमपूर्ण व्यवहार’ इस वेद मन्त्र का प्रतिपाद्य विषय है। वेद का आदेश है कि उत्तम राष्ट्र सृजन के लिए परस्पर प्रेमपूर्ण व्यवहार को अपने राष्ट्रीय चरित्र का एक आवश्यक अंग बना लो। इस प्रकार के व्यवहार से समस्त राष्ट्रवासी आपस में निर्वैरता और अहिंसा भाव से भर जायेंगे। गाँधीजी देश में लोकप्रिय इसलिए हुए कि उन्होंने नि:स्वार्थ प्रेम, अहिंसा और बन्धुत्व की बातें कीं। यह अलग बात है कि गाँधीजी की इन बातों को देश के एक वर्ग ने नही माना और गाँधी जी लोकप्रिय होकर अपने उद्देश्य में भी असफ ल सिद्घ हुए। क्योंकि एक वर्ग का संकल्प घृणा के आधार पर राष्ट्र का विभाजन कराना बन गया। गाँधीजी किसी एक वर्ग की इस घृणा को प्रेम में परिवत्र्तित नहीं कर पाये। इसलिए राष्ट्र का विभाजन हो गया। ये मंत्र हमें यह बताता है कि सभी राष्ट्रवासियों को परस्पर प्रेमपूर्ण बत्र्ताव करना चाहिए अन्यथा घृणा पाँव पसार लेगी और उसका परिणाम होगा विभाजन और केवल विभाजन।

(लेखक की पुस्तक 'वेद महर्षि दयानंद और भारतीय संविधान’ से)

Tags:    वेद   राष्ट्र संगठन   


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एक दूसरे के सैन्य अड्डों का प्रयोग कर सकेंगें अमेरिका और भारत, हुआ करार… - चीन के पर कतरने की...

एक दूसरे के सैन्य अड्डों का प्रयोग कर सकेंगें अमेरिका और भारत, हुआ करार…
-
चीन के पर कतरने की रणनीति पर एक कदम और आगे बढे अमेरिका और भारत….
अभी कल ही बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सुर में रेंका था ड्रेगन…. पाक चीन काडिडोर में अडबंगा लगाने पर भारत को परिणाम भुगतने की धमकी दी थी….
और आज उसे मुहतोड़ जबाब मिल गया…
-
चीन अब भी यह समझ नहीं पाया है कि भारत से कांग्रेसी कुशासन समाप्त हो चुका है….और नरेंद्र मोदी भारत की बागडोर संभाले हुए हैं….जिनकी आदत है कि… *वो मारते कम ..घसीटते ज्यादा हैं*…
😀😀😀😀😂😎


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★ सरकार से प्रश्न ??????? अगर 3 बार मुख्य मंत्री बनने के बाद अभी भी मायावती जी दलित हैं और 66 साल...

★ सरकार से प्रश्न ???????

अगर 3 बार मुख्य मंत्री बनने के बाद अभी भी मायावती जी दलित हैं और 66 साल तक आरक्षण का लाभ लेकर भी वह समाज दलित है तो जरूर #आरक्षण की वर्तमान प्रणाली में दोष है ।

सैकडों IAS , IPS , PCS और लाखों श्रेष्ठ उम्मीदवार के अधिकार हडपने के बाद भी दलित , अब तक दलित हैं ।

कई मंत्री, सैकड़ों विधायक व सांसद होने के बाद भी अब तक दलित दलित हैं … तो समस्या मानसिकता में है ।

क्या आपने कभी सोचा कि जिस आरक्षण व्यवस्था का प्रावधान आज़ादी के बाद भारत सरकार ने किया था , उस वर्ष यदि किसी 18 वर्ष के व्यक्ति ने यदि आरक्षण का लाभ लिया होगा तो 2017 में उसकी पांचवीं पीढ़ी आरक्षण का लाभ लेने जा रही है।

क्या आपको लगता है कि बाबू जगजीवन राम जो कि इंदिरागांधी के काल में केंद्रीय मंत्री रहे उनके परिवार की मीरा कुमार या किसी अन्य को आरक्षण दिया जाना चाहिए ????

पी एल पूनिया जो कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं उनके परिवार के किसी सदस्य को आरक्षण की दरकार है????

वर्ष 1902 में शाहू जी महाराज ने अपनी रियासत में पहला आरक्षण का प्रावधान किया था। 1908 एवं 1909 में अंग्रेजी हुकूमत ने “मिंटो मार्ले ” कानून बना कर भारत में आरक्षण की व्यवस्था लागु की थी।

लेकिन वर्ष 2015 में यानि की 106 साल बाद भी अगर समस्या का निदान नहीं हो पाया है तो ज़रूर सिस्टम में कोई कमी है।

1950 से ही पब्लिक रिप्रजेंटेशन एक्ट के द्वारा हर पांच साल में आरक्षित वर्ग से लगभग 131 सांसद लोकसभा में पहुंचते है, क्या आपको लगता है कि वर्तमान चुनाव प्रणाली में कोई गरीब चुनाव लड़ सकता है ????

बसपा जो की आरक्षण का पुरज़ोर समर्थन करती है एक एक विधायक से टिकट आवंटन के लिए मीडिया मे छपीं खबरों के अनुसार करोड़ों रुपये लेती है,क्या इन लोगों को वाकई आरक्षण की ज़रुरत है????

सरकारें निशुल्क किताबें बाँट रहीं हैं , सरकारी विद्यालयों में फीस न के बराबर है, इंजिनीरिंग तक की पढाई में वजीफे बांटे जा रहे हैं और इन सबके बादआरक्षण और फिर पदोनन्ति के लिए आरक्षण पर आरक्षण।

हर कदम पर सरकारें समाज में विद्वेष पैदा करके इसे विभक्त किये जा रही हैं।

क्या सरकारें जितना पैसा इन साधनों पर खर्चकर रही हैं , उसमे यदि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा पूर्णताः निशुल्क करके अनिवार्य कर दें । विशेषकर उनके लिए जो वर्तमान में आरक्षित वर्ग है और जिसके परिवार ने अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं लिया है तथाउनके लिए उत्कृष्ट किस्म की कोचिंग खोल दें या वर्तमान कोचिंग चलाने वालों को ऐसे विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सब्सिडी दे दे ।

निःशुल्क पढाई और कोचिंग आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के सभी अभ्यर्थियों को दी जाये ।

क्या यह समाधान नहीं हो सकता ????? तत्पश्चात विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भी निशुल्क कर दें और अंत में योग्यता के आधार पर चयन करें तो कहीं से बहुत बोझ नहीं बढ़ेगा और जातिवाद को बढ़ावा भी नहीं मिलेगा ।

परन्तु समाज में फैलता हुआ यह विद्वेष का ज़हर कहीं तो रुकेगा।

समाज , वर्ग और जाति इस आधार पर देश बँट रहा है और देश का विकाश बाधित हो रहा है । इसके लिए दोषी कौन ??? सरकार या कोई और ???

#आरक्षण के लेने और देने के नाम देश के हजारों करोड़ की संपत्ति बर्बाद हो रहा है । इसका दोषी कौन ??? सरकार या कोई और ????

#आरक्षण के कारण GENERAL CATEGORY पर सभी तरह से दवाब बढ़ता जा रहा है ।

सरकार की #आरक्षण नीति के कारण देश में GENERAL CATEGORY में एकता बढ़ती जा रही है जो आगे चलकर #दलित और #मुसलमान के बाद यह वर्ग का वोट बैंक की कीमत बढ़ जायेगी ।

अगर सरकार इसी तरह #आरक्षण पर #आरक्षण , बढती रही तो 21वीं सदी का भारत तीन वर्गों में बटा मिलेगा ।

1 – मुसलमान

2 – दलित और

3 – GENERAL CATEGORY

इस तरह देश को बाँटने में सिर्फ और सिर्फ सरकार दोषी है ।

#न्यायपालिका से अनुरोध है कि सरकार की #आरक्षण नीति की समीक्षा करें वर्ना देश की एकता और अखंडता को खतरा बढ़ गया है ।

जय हिंद जय भारत । वंदेमातरम


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Beautiful story बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी… जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे...

Beautiful story
बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी…

जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था…

चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था…

हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा…

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था…

फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा…

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है।
चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी…

वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना, क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता…
बढ़ई पेड़ नहीं काटता…
पेड़ उसका दाना नहीं देता…
महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया…

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि वो राजा को गिराने को तैयार नहीं…

राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं…
बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं…
पेड़ दाना देने को राजी नहीं।
हाथी बिगड़ गया…
उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..
तू इतनी सी बात के लिए मुझे महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ…
चींटी ने चिड़िया से कहा, “चल भाग यहां से…बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली।

अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया…उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं…पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ…

*चींटी डर गई…भाग कर वो हाथी के पास गई…हाथी भागता हुआ महावत के पास पहुंचा…महावत राजा के पास कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको गिरा दूंगा….राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया…उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा…बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा…बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो…मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा…*

आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा…आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी… हर सेर को सवा सेर मिल सकता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं…आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा… *यकीन कीजिए…हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं…* हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..!! 💐💐🙏🏻 बड़े सपनो को पाने वाले हर व्यक्ति को *सफलता* और *असफलता* के कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है

*पहले लोग मजाक उड़ाएंगे*
*फिर लोग साथ छोड़ेंगे*
*फिर विरोध करेंगे*

रख *हौंसला* वो मंज़र भी आयेगा,प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..! *थक कर* ना बैठ, ऐ मंजिल के *मुसाफ़िर*
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा।


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प्रोफ़ेसर की सीख प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त से मिलने उसकी दुकान...

प्रोफ़ेसर की सीख

प्रोफ़ेसर साहब बड़े दिनों बाद आज शाम को घर लौटते वक़्त अपने दोस्त से मिलने उसकी दुकान पर गए।

इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था…दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया और बैठ कर गप्पें मारने लगे।

चाय-वाय पीने के कुछ देर बाद प्रोफ़ेसर बोले, “यार एक बात बता, पहले मैं जब भी आता था तो तेरी दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और हम बड़ी मुश्किल से बात कर पाते थे। लेकिन आज बस इक्का-दुक्का ग्राहक ही दिख रहे हैं और तेरा स्टाफ भी पहले से कम हो गया है…”

दोस्त मजाकिया लहजे में बोला, “अरे कुछ नहीं, हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं…आज धंधा ढीला है…कल फिर जोर पकड़ लेगा!”

इस पर प्रोफ़ेसर साहब कुछ गंभीर होते हुए बोले, “देख भाई, चीजों को इतना हलके में मत ले…मैं देख रहा हूँ कि इसी रोड पर कपड़े की तीन-चार और दुकाने खुल गयी हैं, कम्पटीशन बहुत बढ़ गया है…और ऊपर से…”

प्रोफ़ेसर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही, दोस्त उनकी बात काटते हुए बोला, “अरे ये दुकाने आती-जाती रहती हैं, इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता।”

प्रोफ़ेसर साहब कॉलेज टाइम से ही अपने दोस्त को जानते थे और वो समझ गए कि ऐसे समझाने पर वो उनकी बात नहीं समझेगा।

इसके बाद उन्होंने अगले रविवार, बंदी के दिन; दोस्त को चाय पे बुलाया।

दोस्त, तय समय पर उनके घर पहुँच गया।

कुछ गपशप के बाद प्रोफ़ेसर साहब उसे अपने घर में बनी एक प्राइवेट लैब में ले गए और बोले, “देख यार! आज मैं तुझे एक बड़ा ही इंटरस्टिंग एक्सपेरिमेंट दिखता हूँ..”

प्रोफ़ेसर साहब ने एक जार में गरम पानी लिया और उसमे एक मेंढक डाल दिया। पानी से सम्पर्क में आते ही मेंढक खतरा भांप गया और कूद कर बाहर भाग गया।

इसके बाद प्रोफ़ेसर साहब ने जार से गरम पानी फेंक कर उसमे ठंडा पानी भर दिया, और एक बार फिर मेंढक को उसमे डाल दिया। इस बार मेंढक आराम से उसमे तैरने लगा।

तभी प्रोफ़ेसर साहब ने एक अजीब सा काम किया, उन्होंने जार उठा कर एक गैस बर्नर पर रख दिया और बड़ी ही धीमी आंच पर पानी गरम करने लगे।

कुछ ही देर में पानी गरम होने लगा। मेंढक को ये बात कुछ अजीब लगी पर उसने खुद को इस तापमान के हिसाब से एडजस्ट कर लिया…इस बीच बर्नर जलता रहा और पानी और भी गरम होता गया….पर हर बार मेढक पानी के टेम्परेचर के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता और आराम से पड़ा रहता….लेकिन उसकी भी सहने की एक क्षमता थी! जब पानी काफी गरम हो गया और खौलने को आया तब मेंढक को अपनी जान पर मंडराते खतरे का आभास हुआ…और उसने पूरी ताकत से बाहर छलांग लगाने की कोशिष की….पर बार-बार खुद को बदलते तापमान में ढालने में उसकी काफी उर्जा लग चुकी थी और अब खुद को बचाने के लिए न ही उसके पास शक्ति थी और न ही समय…देखते-देखते पानी उबलने लगा और मेंढक की मौत हो गयी।

एक्सपेरिमेंट देखने के बाद दोस्त बोला-

यार तूने तो मेंढक की जान ही ले ली…खैर, ये सब तू मुझे क्यों दिखा रहा है?

प्रोफ़ेसर बोले, “ मेंढक की जान मैंने नहीं ली…उसने खुद अपनी जान ली है। अगर वो बिगड़ते हुए माहौल में बार-बार खुद को एडजस्ट नहीं करता बल्कि उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वो आसानी से अपनी जान बचा सकता था। और ये सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूँ क्योंकि कहीं न कहीं तू भी इस मेढक की तरह बिहेव कर रहा है।

तेरा अच्छा-ख़ासा बिजनेस है पर तू चेंज हो रही मार्केट कंडीशनस की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, और बस ये सोच कर एडजस्ट करता जा रहा है कि आगे सब अपने आप ठीक हो जाएगा…पर याद रख अगर तू आज ही हो रहे बदलाव के ऐकौर्डिंग खुद को नहीं चेंज करेगा तो हो सकता है इस मेंढक की तरह कल को संभलने के लिए तेरे पास ना एनर्जी हो और ना ही समय!”

प्रोफ़ेसर की सीख ने दोस्त की आँखें खोल दीं, उसने प्रोफ़ेसर साहब को गले लगा लिया और वादा किया कि एक बार फिर वो मार्केट लीडर बन कर दिखायेगा।

दोस्तों, प्रोफ़ेसर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस-पास हो रहे बदलाव की तरफ ध्यान नहीं देते। लोग जिन skills के कारण job लिए चुने जाते हैं बस उसी पर अटके रहते हैं खुद को update नहीं करते…और जब company में layoffs होते हैं तो उन्हें ही सबसे पहले निकाला जाता है…लोग जिस ढर्रे पर 10 साल पहले business कर रहे होते हैं बस उसी को पकड़कर बैठे रहते हैं और देखते-देखते नए players सारा market capture कर लेते हैं!

यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से relate कर पा रहे हैं तो संभल जाइए और इस कहानी से सीख लेते हुए proactive बनिए और आस-पास हो रहे बदलावों के प्रति सतर्क रहिये, ताकि बदलाव की बड़ी से बड़ी आंधी भी आपकी जड़ों की हिला न पाएं!


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ईद उल जुहा विशेष कुरबानी या हत्या की ट्रेनिंग या joy of slaughter! मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं ....

ईद उल जुहा विशेष

कुरबानी या हत्या
की ट्रेनिंग या joy of slaughter!


मुसलमान कई त्यौहार मानते हैं . जिनमें “ईदुज्जुहा "प्रसिद्ध
और प्रिय त्योहर माना जाता है . भारत में इसे
"बकरीद ” भी कहते हैं
.अरबी में ईदुज्जुहा का अर्थ बलिदान
( Sacrifice ) नहीं बल्कि “ पशुवध का आनंद
”( Joy of slaughter ) हैं.क्योंकि इसमें लाखों जानवरों का
क़त्ल होता है .मुसलमानों का दावा है कि यह त्यौहार
नबी इब्राहीम की अल्लाह
के प्रति निष्ठा, भक्ति और उनके लडके इस्माइल की
कुर्बानी को याद करने के लिए मनाया जाता है .और
मुहम्मद साहब उसी इस्माइल के वंशज थे .चूँकि
इब्राहीम की कथा इस्लाम से पहले
की है और इब्राहीम के बारे में जो
सही जानकारी बाइबिल , कुरान और
हदीसों से मिलती वह इस प्रकार है .
1-इब्राहीम का परिचय
इब्राहीम ﺇﺑﺮﺍﻫﻴﻢ का काल लगभग 2000 साल ई
० पू से 1500 ई० पूर्व माना जाता है . इसके पिता का नाम
मुसलमान “ आजर ﺁﺫﺭ ” और यहूदी “तेराह
Terah”( תָּרַח )बताते है .इब्राहीम “ ऊर ”
शहर में पैदा हुआ था . जो हारान प्रान्त में था . वहां से
इब्राहीम कनान प्रान्त में जाकर बस गया था .और
उसके साथ उसकी बहिन ( पत्नी ) और
भतीजा लूत भी आगये थे .इब्राहिम को
एक गुलाम लड़की “ हाजरा ” मिली
थी . जिस से उसने इस्माइल नामक लड़का पैदा किया
था .जिसे मुहम्मद का पूर्वज माना जाता है .
इब्राहीम और सारह से जो लड़का हुआ था उसका
नाम “इसहाक ” था .मुसलमान इनको नबी मानते हैं
.यहूदी इसे अबराहाम( אַבְרָהָם ) कहते हैं .
जिसका अर्थ है जातियों का बाप .मुसलमान इब्राहीम
को एक ,सदाचारी ,सत्यनिष्ठ ,और अल्लाह का परम
भक्त नबी कहते हैं .लेकिन वास्तविकता यह है कि,
1-इब्राहीम का देशत्याग
जब इब्राहीम अपने हारान देश को छोड़ कर कनान
जाने लगा ,तो उसके साथ , लूत ,साराह अपनी सम्पति
भी ले गया और वहीँ बस गया “ बाईबिल
.उत्पत्ति 12 :3 से 5
2-इब्राहीम झूठा और स्वार्थी था
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया , इब्राहीम झूठ
बोलते थे .उनके प्रसिद्ध तीन झूठ इस प्रकार हैं
,एक मैं बीमार हूँ , दूसरा मैंने मूर्तियाँ
नहीं तोड़ी . यह दोनो झूठ अल्लाह के
लिए बोले थे . और तीसरा झूठ सराह के बारे में था ,
कि यह मेरी बहिन है .
” ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻣُﺤَﻤَّﺪُ ﺑْﻦُ ﻣَﺤْﺒُﻮﺏٍ، ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺣَﻤَّﺎﺩُ ﺑْﻦُ ﺯَﻳْﺪٍ، ﻋَﻦْ
ﺃَﻳُّﻮﺏَ، ﻋَﻦْ ﻣُﺤَﻤَّﺪٍ، ﻋَﻦْ ﺃَﺑِﻲ ﻫُﺮَﻳْﺮَﺓَ ـ ﺭﺿﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻨﻪ ـ
ﻗَﺎﻝَ ﻟَﻢْ ﻳَﻜْﺬِﺏْ ﺇِﺑْﺮَﺍﻫِﻴﻢُ ـ ﻋَﻠَﻴْﻪِ ﺍﻟﺴَّﻼَﻡُ ـ ﺇِﻻَّ ﺛَﻼَﺙَ ﻛَﺬَﺑَﺎﺕٍ
ﺛِﻨْﺘَﻴْﻦِ ﻣِﻨْﻬُﻦَّ ﻓِﻲ ﺫَﺍﺕِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻋَﺰَّ ﻭَﺟَﻞَّ، ﻗَﻮْﻟُﻬُﻬَﺎﺟَﺮَ ﻓَﺄَﺗَﺘْﻪُ،
ﻭَﻫُﻮَ ﻗَﺎﺋِﻢٌ ﻳُﺼَﻠِّﻲ ، “
Sahih Al- Bukhari, Vol.4, Bk 55-Hadith No 578,
Translation by Dr. Muhsan Khan
इब्राहीम के तीन झूठ यह हैं ,
1-जब इब्राहीम ने चुपचाप देवताओं की
मूर्तियाँ तोड़ दी ,और लोगों ने पूछा बताओ क्या यह
काम तुमने किया है .तो इब्राहीम बोला मैंने
नहीं यह तो सबसे बड़े देवता का काम है "सूरा -
अम्बिया 21 :62 से 63
2-जब लोगों ने इब्राहीम के पूछा कि तुम्हारा अल्लाह
यानी दुनिया के स्वामी के बारे में क्या विचार
है ,इब्राहीम आकाश के तारों को देखता रहा , और
बोला मैं तो बीमार हूँ "सूरा -अस सफ्फात 37 :87 से
89
3-इब्राहीम ने साराह के बारे में कहा बेशक यह
मेरी बहिन है , और मेरे बाप की
बेटी है ,लेकिन मेरी सगी माँ
की बेटी नहीं है .इसलिए
अब यह मेरी पत्नी बन
गयी है ” बाइबिल .उत्पत्ति 20 :13
3-इब्राहीम पर लानत
जो भी अपनी बहिन के साथ सहवास
करे उस पर लानत , चाहे वह उसकी
सगी बहिन हो या सौतेली .तो सब ऐसे
व्यक्ति पर लानत करें और कहें आमीन ’
बाइबिल .व्यवस्था 27 :22
तुम पर हराम हैं , तुम्हारी बहिनें “ सूरा -निसा
4 :23
4-इब्राहीम का पापी परिवार
इब्राहीम के काबिले में लड़कों के साथ कुकर्म करने
का रिवाज था और उसका भतीजा लूत भी
ऐसा था . इस कुकर्म को लूत के नाम से "लावातत” कहा जाता है
.इनकी लीला दखिये ,
एक दिन कुछ सुन्दर लडके लूत से मिलने आये ,तो उन्हें देख
कर लोग आगये .इस से लूत चिंतित हो गया .और उन लोगों को
रोकना कठिन होने लगा .क्योंकि वहां के लोग लड़कों के साथ
कुकर्म “ Sodomy” करते थे . लूत ने उन लोगों से कहा इन
लड़कों को छोडो यह मेरी बेटियां हैं यह इस काम के
लिए अधिक उपयोगी हैं .लेकिन लोग बोले तू जानता है
कि हमें क्या पसंद है “सूरा -हूद 11 :77 और 78
जिस तरह इब्राहीम ने अपनी बहिन से
सहवास किया था उसका भतीजा लूत भी
महा पापी था .यह बाइबिल बताती है .
"एक रात लूत की लड़कियों ने तय किया कि आज हम
अपने पिता को खूब शराब पिलायेंगे .और उसके साथ सहवास करेंगे
.पहले एक लड़की बाप के साथ सोयी ,
फिर बारी बारी से सभी बाप के
साथ सोयीं .इस तरह सभी अपने बाप से
गर्भवती हुयीं "बाईबिल -उत्पत्ति
19 :30 से 36
5-इब्राहीम की रखैल हाजरा
इब्राहीम सदाचारी नहीं था
,यह जानकर शैतान ने एक लड़की हाजरा
इब्राहीम के पास भेज दी थी
.इस से इब्राहीम ने सहवास किया था .
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है , शैतान ने ही
हाजरा को इब्राहीम के पास इसलिए भेजा था कि वह
उसे दासी के रूप में स्वीकार कर लें .और
जब वह इब्राहीम के पास गयी तो
इब्राहीम बोला . अल्लाह ने मुझे एक
लड़की दासी भेज दी है .
” ﻭﻗﺎﻝ: ’ ﻟﻘﺪ ﺑﻌﺚ ﺍﻟﻠﻪ ﻟﻲ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ . ﺍﺻﻄﺤﺎﺑﻬﺎ ﺇﻟﻰ
ﺇﺑﺮﺍﻫﻴﻢ ﻭﻫﺎﺟﺮ ﺗﻌﻄﻲ ﻟﻬﺎ .“ ﺟﺎﺀ ﺫﻟﻚ ﻋﺎﺩﺕ ﻹﺑﺮﺍﻫﻴﻢ
ﻭﻗﺎﻝ: ” ﺍﻟﻠﻪ ﺃﻋﻄﺎﻧﺎ ﻓﺘﺎﺓ ﺍﻟﺮﻗﻴﻖ ﻟﻠﺨﺪﻣﺔ “
Sahih al-Bukhari, Volume 3, Book 34, Number
420
6-इस्माइल की झूठी पैदायश
चूँकि उस समय काफी बूढ़ा हो चूका था , और
उसकी पत्नी सारह बाँझ थी
,इसलिए इब्राहीम और हाजरा ने मिलकर एक साजिश
रची और कहीं से एक ताजा बच्चा लोगों
को दिखा दिया , कि यह बच्चा हाजरा ने पैदा किया है .और इब्राहिम
ने उस बच्चे का नाम इस्माइल रखा था .
एक दिन इब्राहीम तड़के भोर में उठा ,और अँधेरे में
हाजरा को तैयार किया .और उसे एक बच्चा दिया .फिर हाजरा ने उस
बच्चे को झाड़ियों में छुपा दिया .और हाजरा इस तरह से चिल्लाने
लगी जैसे बच्चा जनने की
पीड़ा हो रही हो .और जब बच्चे के रोने
की आवाज लोगों ने सुनी तो लोगों ने समझा
हाजरा ने बच्चे को जन्म दिया है "बाइबिल .उत्पत्ति 21 :14 से
17
7-अरब हराम की औलाद हैं
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि पहले तो हाजरा सारह के
पास गयी .फिर इब्राहीम के पास
चली गयी .उस समय
इब्राहीम काम कर रहे थे .उन्होंने सारह से इशारे से
पूछा कि यह किस लिए आयी है . साराह ने कहा यह
तुम्हारी दासी है .और सेवा
करेगी .अबू हुरैरा ने कहा इस बातको सुनते
ही रसूल ने मौजूद सभी श्रोताओं से कहा
, सुन लो सभी अरब उसी हाजरा
की संतानें हो ”
“ ﺛﻢ ﺍﻟﻘﻰ ﺭﺟﺎﻝ ﻫﺎﺟﺮ ﻛﺨﺎﺩﻣﺔ ﺑﻨﺖ ﻟﺴﺎﺭﺓ. ﺟﺎﺀ ﺳﺎﺭﺓ
ﺍﻟﻈﻬﺮ ‏(ﻹﺑﺮﺍﻫﻴﻢ ‏) ، ﻓﻲ ﺣﻴﻦ ﻛﺎﻥ ﻳﺼﻠﻲ. ﺇﺑﺮﺍﻫﻴﻢ ﻭﻫﻮ
ﻳﺸﻴﺮ ﺑﻴﺪﻩ، ﺳﺄﻝ : ” ﻣﺎ ﺍﻟﺬﻱ ﺣﺪﺙ؟ “ ﺃﺟﺎﺑﺖ، ” ﻭﺍﻟﻠﻪ
ﻣﺪﻟﻞ ﺍﻟﻤﺆﺍﻣﺮﺓ ﺍﻟﺸﺮﻳﺮﺓ ﻟﻠﻜﺎﻓﺮ ‏( ﺃﻭ ﺷﺨﺺ ﻏﻴﺮ
ﺃﺧﻼﻗﻲ ‏) ﻭﺃﻋﻄﺎﻧﻲ ﻫﺎﺟﺮ ﻟﻠﺨﺪﻣﺔ “. ‏(ﺃﺑﻮ ﻫﺮﻳﺮﺓ ﺛﻢ
ﺧﺎﻃﺐ ﻣﺴﺘﻤﻌﻴﻪ ﻗﺎﺋﻼ: ” ﻫﺬﺍ ‏( ﺣﺠﺮ ‏) ﻛﺎﻥ ﺃﻣﻚ ﻳﺎ ﺑﻨﻲ
ﻣﺎ ﻫﻮ ﺑﻴﻦ ﺳﻤﺎ ‏(ﺃﻱ ﺍﻟﻌﺮﺏ، ﻣﻦ ﻧﺴﻞ ﺇﺳﻤﺎﻋﻴﻞ، ﺍﺑﻦ
ﻫﺎﺟﺮ ).“
Bukhari-Volume 4-Book 55: Prophets-Hadith
578
Eng Reference : Sahih al-Bukhari 3358
चूँकि मुहम्मद साहब खुद को भी
इब्राहीम के नाजायज ,पुत्र और शैतान द्वारा
भेजी गई औरत हाजरा के लडके इस्माइल का वंशज
मानते थे .और खुद को इब्राहीम कि तरह रसूल
साबित करना चाहते थे .इसलिए उन्होंने इसके लिए
इब्राहीम द्वारा की इस्माइल
की क़ुरबानी की
कहानी का सहारा लिया .
8-क़ुरबानी का सपना
इब्राहीम के पूर्वज अंधविश्वासी थे और
सपने की बातों को सही समझ लेते थे
.बाइबिल और कुरान में ऐसे कई उदहारण मिलते हैं ,जैसे
"यूसुफ ने पिता से कहा कि रात को मैंने एक सपना देखा कि ग्यारह
तारे .सूरज और चाँद मुझे सिजदा कर रहे हैं , यह उन कर पिता
ने कहा तुम इस सपने की बात अपने भाइयों से
नहीं कहना .ऐसा न हो वह कोई साजिश रचें ” सूरा-
यूसुफ 12 :4 -5
ऐसा ही सपना इब्राहीम ने देखा ,और
सच मान बैठा ,कुरान में लिखा है
जब इब्राहीम का लड़का चलने फिरने योग्य था , तो
इब्राहीम ने उस से कहा बेटा मैंने सपने में देखा कि
जसे मैं तुझे जिबह कर रहा हूँ ,बोल तेरा क्या विचार है “
सूरा -अस सफ्फात 37 :102
(अरबी में "इन्नी उज्बिहुक ﺍﻧّﻲ
ﺍُﺫﺑﺤﻚ ” तेरी गर्दन पर छुरी फिरा
रहा हूँ )
9-अल्लाह ने क़ुरबानी रोकी
जब इब्राहीम ने अपने बेटे का गला काटने के लिए
छुरी हाथ में उठायी ,तो एक फ़रिश्ता
पुकारा ,हे इब्राहीम तुम लडके की तरफ
हाथ नहीं बढ़ाना .हमें यकीं हो गया कि तू
ईश्वर से डरता है .बाइबिल -उत्पत्ति 22 :10 से 12
हमने कहा हे इब्राहीम तूने तो सपने को सच कर
दिया .यह तो मेरी परीक्षा थी
.और फिर हमने एक महान क़ुरबानी कर
दी “सूरा 37 :105 से 107
( नोट - इन आयतों में कहीं पर किसी
जानवर का उल्लेख नहीं है ,और न मैंढे का नाम
है)
10- गाय की कुर्बानी
जब अल्लाह ने मूसा से कहा कि एक गाय को जिबह करो ,तो लोग
बोले क्या तू हमें अपमानित कर रहा है .लेकिन जब लोग मूसा के
कहने पर गाय जिबह कर रहे थे तब भी उनके दिल
काँप रहे थे . सूरा -बकरा 2 :67 और 71
गाय की क़ुरबानी ( ह्त्या ) का एक
वीडियो देखिये
http://www.youtube.com/watch?
v=rgrB9X_mINU&feature=related
(नोट -इस आयत की तफ़सीर में लिखा है
,उस समय मिस्र में किब्ती ( Coptic ) लोग रहते
थे जो गाय की पूजा करते थे .इसी लिए
अल्लाह ने उनकी आस्था पर प्रहार करने और
उनका दिल दुखाने के लिए गाय की कुर्बानी
का हुक्म दिया था .जिसे रसूल ने भी
सही मान लिया था .
(हिन्दी कुरान .पेज 137 टिप्पणी
संख्या 24 मक्तबा अल हसनात रामपुर )
इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है ,कि 1 .
इब्राहीम को झूठ बोलने की आदत
थी .और सगी बहिन से शादी
करके महापाप किया था , और बाइबिल के मुताबिक यह काम लानत
के योग्य है .2 .यातो इब्राहीम ने सपने में लड़के
की क़ुरबानी की
होगी या शैतान के द्वारा भेजी हाजरा के
फर्जी पुत्र की क़ुरबानी
की होगी .3 .इस झूठी
कहानी को सही मान कर जानवरों का
क़त्ल करना उचित नहीं है .4 .अल्लाह
इब्राहीम और लूत जैसे पापियों को ही
रसूल बनाता है .5 .सारे अरब के लोग इसलिए अपराधी
होते हैं क्योंकि वह इब्राहीम के उस नाजायज लडके
इस्माइल वंशज हैं ,जिसे शैतान ने भेजा था .6 .क्या
इब्राहीम के बाद मुसलमानों में ऐसा
एकभी अल्लाह भक्त पैदा हुआ , जो अपने लडके
को कुर्बान कर देता .यहूदी और ईसाई
भी इब्राहीम को मानते हैं लेकिन
कुर्बानी का त्यौहार नहीं मनाते.
महम्मद साहब ने ईदुज्जुहा की परंपरा मुसलमानों को
ह्त्या की ट्रेनिग देने के लिए की
थी !
No-200/71
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कंद-मूल खाने वालों से मांसाहारी डरते थे। पोरस जैसे शूर-वीर को नमन सिकंदर करते थे॥ चौदह वर्षों तक...

कंद-मूल खाने वालों से मांसाहारी डरते थे।
पोरस जैसे शूर-वीर को नमन सिकंदर करते थे॥

चौदह वर्षों तक खूंखारी वन में जिसका धाम था।
राक्षसों का वध करने वाला शाकाहारी राम था॥

चाहते तो खा सकते थे वो मांस पशु के ढेरो में।
लेकिन उनको प्यार मिला शबरी के जूठे बेरो में॥

चक्र सुदर्शन धारी थे हर दुर्जन पर भारी थे।
वैदिक धर्म पालन करने वाले कृष्ण शाकाहारी थे॥

शाकाहार के मन्त्र को महाराणा ने मन में ध्याया था।
जंगल जाकर प्रताप ने घास की रोटी को खाया था॥

सपने जिसने देखे थे वैदिक धर्म के प्रचार के।
दयानंद जैसे महामानव थे वाचक शाकाहार के॥

उठो जरा तुम पढ़ कर देखो अपने गौरवमयी इतिहास को।
क्यों तुमने अपना लिया ईसा मूसा के खाने खास को ?

दया की आँखे खोल कर देखो निरीह पशु के करुण क्रंदन को।
इंसानों का जिस्म बना है शाकाहारी भोजन को॥

अंग लाश के खा जाए क्या फ़िर भी वो इंसान है?
पेट तुम्हारा मुर्दाघर है या कोई कब्रिस्तान है?

आँखे कितना रोती हैं जब उंगली अपनी जलती है।
सोचो उस तड़पन की हद जब जिस्म पे आरी चलती है॥

बेबसता तुम पशु की देखो बचने के आसार नही।
जीते जी तन काटा जाए उस पीडा का पार नही॥

खाने से पहले बिरयानी चीख जीव की सुन लेते।
करुणा के वश होकर तुम भी गिरी गिरनार को चुन लेते॥

मांसाहार त्यागो … शाकाहारी बनो !


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Monday, September 12, 2016

शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन मे (2 बार) जल में थल में और गगन मेl अंतरिक्ष में अग्नि पवन मे। औषधी...

शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन मे (2 बार)
जल में थल में और गगन मेl
अंतरिक्ष में अग्नि पवन मे। औषधी वनस्पति वन उपवन में।
सकल विश्व में जड़ चेतन में।
शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन मे ।(2 बार)

ब्राह्मण के उपदेश वचन में।
क्षत्रिय के द्वारा हो रण में। वैश्य जनों के होवे धन में। और शुद्र के हो तन-तन में।
शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन मे।(2 बार)

शांति राष्ट्र निर्माण सृजन में।
नगर ग्राम में और भवन में।
जीव मात्र के तन में मन में।
और प्रकृति के हो कण कण में।
शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन मे ।(3 बार)


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*खतरनाक सत्य* “अगर आप रास्ते पे चल रहे है और आपको वहां पड़ी हुई दो पत्थर की मुर्तिया मिले 1)...

*खतरनाक सत्य*
“अगर आप रास्ते पे चल रहे है और आपको वहां पड़ी हुई दो पत्थर की मुर्तिया मिले
1) भगवान राम की
और
2)रावण की
और आपको एक मूर्ति उठाने का कहा जाए तो अवश्य आप राम की मूर्ति उठा कर घर लेके जाओगे।
क्यों की राम सत्य , निष्ठा,
सकारात्मकता के प्रतिक हे और रावण नकारात्मकता का प्रतिक हे।
फिरसे आप रास्ते पे चल रहे हो और दो मुर्तिया मिले
राम और रावण की
पर अगर "राम की मूर्ति पत्थर” की और “रावण की सोने "की हो
और एक मूर्ति उठाने को कहा जाए तो आप राम की मूर्ति छोड़ कर रावण की सोने की मूर्तिही उठाओगे
.
.
.
.
.
.
.
मतलब
हम सत्य और असत्य,
सकारात्मक और नकारात्मक
अपनी सुविधा और लाभ के अनुसार तय करते हे।
☺☺☺☺
99% प्रतिशत लोग भगवान को सिर्फ लाभ और डर की वजह से पूजते है.
🌹☺🌹
.
.
.
.
.
.और इस बात से वह 99% प्रतिशत लोग भी सहमत होंगे मगर शेअर नही करेंगे क्योंकी …..
.
.
,
.
.
एक ही डर
"लोग क्या कहेंगे”.
😄😄😁😁
लोग क्या सोचेंगे ? ? ?
25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि “लोग क्या सोचेंगे ? ? ”
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि “ लोग क्या सोचेंगे ! ! ”
50 साल के बाद पता चलता है कि “ हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! ! ! ” 😃😃
Life is beautiful, enjoy it everyday.👍👍
Sabse Bada ROG…
Kya Kahenge LOG…


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Sunday, September 11, 2016

आप में से अधिकांश लोग चौंक जाएँगे ये सुनकर की ‘खान’ शब्द का टाइटल अमुस्लिम (Non Muslim) है! ‘खान’...

आप में से अधिकांश लोग चौंक जाएँगे ये सुनकर की ‘खान’ शब्द का टाइटल अमुस्लिम (Non Muslim) है!

‘खान’ यह तुर्क-मंगोल नाम इस्लाम पूर्व से ही प्रचलित है . आज भी मंगोलिया (भारत में उसे ‘मुघलिया’ के भ्रष्ट नाम से जानते है) एक बुद्ध धर्म को मानने वाला राष्ट्र है . यहा पर कोई भी मुस्लिम नही है . आज भी चीन, जापान, कोरिया और मंगोलिया में खान नाम पाया जाता है . चीन का एक मंगोल राजा, जिसका नाम कुबलाई खान था, वो जो बुद्ध और वेदिक धर्म का अनुयायी था . कुबलाई खान के एक शिला लेख में ‘ओम नमो भगवते’ घोष के अक्षर पाए गए है . चेंगिज खान भी एक ऐसा वीर योद्धा था, जिसने इस्लाम को लगभग समाप्त कर दिया था .

चेंगिज खान और उसकी मंगोल सेना (मुघल सेना) ऐसे अमुस्लिम थे, जिन्होंने पहली बार मुस्लिम भूमि में घुस कर, मुस्लिम खलीफा अल मुस्तासिम बगदाद को मारा था . इतिहास बताता है की अरब और फारसी मुस्लिमो ने लगातार २५० वर्ष (१०५० से १२५८) मध्य एशिया पर जिहादी आक्रमण करके तुर्क और मंगोल समूहों को छल-बल से मुस्लिम बनाने के लिए उन पर घोर अत्याचार किये (ठीक वैसे ही जैसे मुस्लिम बनाये जाने पर इन मुघल और तुर्को ने भारत और हिन्दुओ पर किये उन्हें मुस्लिम बनाने के लिए) .

इस बात से कुपित होकर मुस्लिम के विरोध में, मंगोलों ने चेंगिज खान के नेतृत्व में एक महाभयंकर, प्रति-आक्रमण मुस्लिम जगत पर किया . जिस में मंगोल सेना ने लगभग ५,०००,०००० मुस्लिमो का क़त्ल किया और बगदाद की मस्जिदों को मंगोलों (मुघलो) ने ध्वस्त करके कुरान को घोड़े की टापों के नीचे मसल दिया था .

चंगेज खान का पोता “हलाकू खान” एक कट्टर बौद्ध था . हलाकु ख़ान की पत्नी दोक़ुज़ ख़ातून एक नेस्टोरियाई ईसाई थी . हलाकु ने आगे चलकर एक बड़ा साम्राज्य स्थापित किया था , हलाकू के इलख़ानी साम्राज्य में बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म को बढ़ावा दिया जाता था .

नवम्बर १२५७ में हलाकु की मंगोल फ़ौज ने बग़दाद की तरफ़ कूच किया जहाँ से ख़लीफ़ा अपना इस्लामी राज चलता था . चंगेज खान और हलाकू खान ने मध्य एशिया के इस्लामी देशो को बर्बरता से कुचला लेकिन उसने भारत पर कभी बुरी नजर नहीं डाली . भारत की सनातन पद्धतियों को भी मंगोलों ने अपने जन जीवन में शामिल किया था . चंगेज खान की समाधि पर लगा हुआ त्रिशूल, भगवान् शिव को समर्पित है .


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*औरत* वो “औरत” दौड़ कर रसोई तक, दूध बिखरने से पहले बचा लेती है। समेटने के कामयाब मामूली...

*औरत*

वो “औरत” दौड़ कर रसोई तक,
दूध बिखरने से पहले बचा लेती है।

समेटने के कामयाब मामूली लम्हो में,
बिखरे “ख्वाबों” का गम भुला देती है।

वक़्त रहते रोटी जलने से बचा लेती,
कितनी “हसरतों” की राख उड़ा देती है।

एक कप टूटने से पहले सम्हालती,
टूटे “हौसलो” को मर्ज़ी से गिरा देती है।

कपड़ो के दाग छुड़ा लेती सलीके से,
ताज़ा जख्मों के हरे दाग भुला देती है।

कैद करती “अरमान” भूलने की खातिर,
रसोई के एयर टाइट डब्बों में सजा लेती है।

कमजोर लम्हों के अफ़सोस की स्याही,
दिल की दिवार से बेबस मिटा लेती है।

मेज़ कुर्सियों से “गर्द” साफ़ करती,
कुछ ख्वाबों पर “धूल” चढ़ा लेती है।

सबके सांचे में ढालते अपनी जिंदगी,
“हुनर” बर्तन धोते सिंक में बहा देती है।

कपड़ो की तह में लपेट खामोशी से,
अलमारी में कई “शौक” दबा देती है।

कुछ अज़ीज़ चेहरों की आसानी की खातिर,
अपने मकसद आले में रख भुला देती है।

घर भर को उन्मुक्त गगन में उड़ता देखने को,
अपने सपनों के पंख कतर लेती है।

हाँ !
हर घर में एक *औरत* है,
जो बिखरने से पहले सम्हाल लेती है।

सभी औरतों को समर्पित 🙏 वन्दन


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सरसों के तेल को शरीर के लिए बहुत उपयोगी व रामबाण माना जाता हैं।सरसों के तेल को यदि आप सही तरीके से...

सरसों के तेल को शरीर के लिए बहुत उपयोगी व रामबाण माना जाता हैं।सरसों के तेल को यदि आप सही तरीके से उपयोग करते है तो आपको किसी और दवाई की भी जरूरत नहीं होगी, क्योंकि सरसों के तेल में दर्दनाशक गुण होता है, जैसे कान का दर्द सताए तो दो बूंद गुनगुना सरसों का तेल कान में टपकाएं, चाहे तो इसमें दो चार कलियां लहसुन की भी मिला सकते हैं। यदि गठिया से परेशान हों तो सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द में बहुत राहत मिलती है। यदि कमर दर्द हो तो सरसों के तेल में थोड़ी हींग, अजवाइन और लहसुन मिलाकर गर्म कर लें और उसे कमर पर लगाएं, पिंडलियों का दर्द हो तो सरसों के तेल को गुनगुना करके मालिश करना चाहिए। सरसों का तेल दिल को चुस्त-दुरुस्त रखता है। आज हम आपको स्किन,बाल और हेल्थ से जुड़े फायदों के बारे में बता रहे हैं।

1. अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए:- सरसों के बीज में सेलेनियम एंड मैग्नीशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इन दोनों में एंटी-इन्फ्लामेटरी होता है। सरसों के तेल को रोजाना खाने से अस्थमा,सर्दी और ब्रेस्ट में होने वाली दिक्कतों में बहुत लाभ मिलता है।


2 एंटी-एजिंग होना:- सरसों में कैरोटिन्स, जियक्साथिंस एंड ल्यूटिन,विटामिन ए,सी और के की मात्रा भरपूर होती है। इन सभी विटामिन होने के कारण यह एंटीऑक्सीडेंट भी है जो बढ़ती उम्र में होने वाली निशान, झुर्रियां और रिंकल को दूर करने में मदद करता है।
3. भूख को बढ़ाना:- एक अच्छी हेल्थ की पहचान तभी होती है जब आपको खुलकर भूख लगती है। इसके लिए आपका स्वास्थ्य भी अच्छा होना चाहिए। इसके लिए सरसों का तेल बेस्ट है। सरसों का तेल पेट में गैस्ट्रिक जूस की तरह हमारे ऐपिटाइजर के रूप में काम करता है,जिससे भूख बढ़ने लगती है। इसलिए आज से ही खाने में सरसों के तेल का इस्तेमाल करना शुरू करें। और आपका जितना मन करे उससे भी अधिक खाने की कोशिश और हेल्दी रहें।


4. कैंसर की रोकथाम के लिए:- सरसों के तेल में ग्लुकोजिलोलेट होता है, जो कैंसर विरोधी गुण होने की वजह से कैंसर ट्यूमर(गांठ) होने से बचाता है। सरसों में अधिक लाभकारी गुण होने की कारण से ग्लुकोजिलोलेट और कोरोरेकटल कैंसर से बचाने का काम करता है।
5.वजन कम करना:- सरसों के बीज में बी-कॉम्पलेक्स विटामिन जैसे-फोलेट, थियामाइन, नियासिन, रिबोफ्लाविन होता है। सरसों का तेल हमारी बॉडी के मेटाबॉल्जिम को बढ़ाता है,जिससे वजन कम करने में आसानी होती है।


6.टैन स्किन और डार्क सपॉट को कम करना:- सरसों के तेल से गर्मियों में होने वाली स्किन टैन और आंखों पर पड़ने वाले डार्क सर्कल को कम करने में मदद करता है। इसके लिए आप सरसों के तेल में बेसन, दही और कुछ बूंदे नींबू की मिलाकर चेहरे पर लगाएं। फेस मास्क को 10 से 15 मिनट चेहरे पर लगा कर रखे, उसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। इस मास्क को हफ्ते में दो या तीन बार लगाएं। जिससे टैन स्किन और डार्क सपॉट को कम करने में मदद करता है।
7.स्किन का लाइट करना:- सरसों के तेल में नारियल के तेल को मिलाकर फेस की 5 से 6 मिनट सर्कल में चहेरे की मसाज करें। मसाज करने के बाद वाइप से या गीली रूई से चेहरे को साफ करें। इस मसाज से चेहरे का ब्लड़ सर्कुलेशन बढ़ता है और स्किन का कलर भी लाइट होता है। जिससे आपका चेहरा निखार जायेगा।
8.प्राकृतिक सनस्क्रीन के रूप में:- सरसों के तेल में विटामिन की मात्रा अधिक
होने की कारण से चेहरे के लिए प्राकृतिक सनस्क्रीन का कार्य करता है। हल्का तेल और विटामिन ई होने की वजह से बाहरी धूप और अल्ट्रावॉयलेट रेज और प्रदूषण से बचाता है। विटामिन ई एजिंग और झुर्रियों को कम करता है।
9.रैशेज (फुन्सी) और इन्फेक्शन को कम करना:- सरसों का तेल एंटी-बैक्टीरिया और एंटी-फंगल होने की वजह से रैशेज और स्किन से जुड़ी समस्याओं के लिए बहुत लाभदायक होता है। यदि आप रोजाना खाने या चहेरे पर सरसों का तेल यूज करते है तो यह स्किन में होने वाली ड्रायनेस,डलनेस और जलन को खत्म करता है। सरसों के तेल से बॉडी मसाज करने से चमक और स्किन साफ हो जाती है। शरीर में मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन और इन्फेक्शन के लिेए भी काफी फायदेमंद है।
10.बालों की ग्रोथ के लिए:- सरसों के तेल से सिर में मसाज करने से बालों की ग्रोथ तो होती है साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। सरसों के तेल में विटामिन और मिनरल्स होते है, इससे बालों को पोषण मिलता है। सरसों के तेल में बीटा-कैरोटिन की मात्रा ज्यादा होती है जो विटामिन में कन्वर्ट होता है और बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है। सरसों के तेल में आयरन, फैटी एसिड, कैल्सियम और मैग्नीशियम जैसी गुण होते है जो बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं।


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Saturday, September 10, 2016

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ओ३म् विभ्राजञ्ज्योतिषा स्व३रगच्छो रोचनंदिवः |देवास्त इंद्र सख्याय येमिरे...

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ओ३म् विभ्राजञ्ज्योतिषा स्व३रगच्छो रोचनंदिवः |देवास्त इंद्र सख्याय येमिरे ||~~सामवेद~उ0~३~२~२२~३~~~~मन्त्र का पद्यानुवाद~~~~~~~~~~~~~~~~~ ज्योतिस्वरूप जगत् जगदीश्वर, जगमग द्यु सब लोक सितारे| भरते हो सबमें प्रकाश तुम, निज आनंद भरे भंडारे| सभी देव विद्वान् भक्तजन, तुझसे आनंद पाते हैं| बनकर तेरे मित्र विमल हे, तुझको ही पाजाते हैं||👏


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कोठरी मन की सदा रख साफ़ बन्दे , कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे , तुम बुलाते हो यदि उन्हें भावना से...

कोठरी मन की सदा रख साफ़ बन्दे ,
कौन जाने कब स्वयं प्रभु आन बैठे ,

तुम बुलाते हो यदि उन्हें भावना से ,
कौन जाने कब निमंत्रण मान बैठे ,

दर्द यदि कभी उभरे मन में तुम्हारे ,
खर्च मत करना बिना सोचे विचारे ,

दर्द से रिश्ता सदा प्रभु का रहा है ,
नाम करुणा सिंधु ही उसका रहा है ,

एक भी आँसू ना कर बर्बाद बन्दे ,
कौन जाने कब समुन्दर मांग बैठे ।


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Friday, September 9, 2016

सेकुलरिज्म छोड़ोगे नहीं, एकता आएगी नहीं तो क्या नरसंहार कराओगे ! कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के...

सेकुलरिज्म छोड़ोगे नहीं, एकता आएगी नहीं तो क्या नरसंहार कराओगे !

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन में इस्लामिक देश पाकिस्तान के समर्थन में उतर आये। उनके तो समर्थन में 56 देश हैं।

हिंदुओं के समर्थन में हिन्दू देश कहाँ से लाएंगे ?
कभी 23 देश थे वे तो मुस्लिमो ने छीन लिए।

ऊपर से भारत में मुस्लिम संख्या दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश के बाद दूसरे नंबर पर है वे भी साथ खड़े हैं अपने भाई जानों के साथ, खुद भारत के अधिकतर हिन्दू धर्म और राष्ट्र रक्षा में साथ नहीं, फिर देश बचाएगा कोन? ये मुट्ठी भर हिन्दू और 13 लाख की भारत की सेना ?

इस्राइल से युद्ध हुआ था सीरिया का तो मित्रों पाकिस्तान तक से सेना लड़ने गयी थी मुसलमानों की मदद के लिए इस्राइल से और सारे 55 मुस्लिम देशों ने हथियार, खाना,दवाइयाँ,सैनिक भेजे थे दुनिया के एकमात्र यहूदी देश इस्राइल को दुनिया से मिटाने और उस भूमि पर इस्लाम का झंडा गाड़ने।

पर उस धर्म का नाम यहूदी है उन्होंने एक यहूदी सैनिक की मौत के बदले युद्ध में 1000 मुसलमान सैनिक मार कर युद्ध में 55 इस्लामिक देशों को 5 दिन में ही घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

आज ये 56 मुस्लिम देश भारत के विरुद्ध एक हो गए हैं जैसे हिन्दू राज्य विजयनगर के विरुद्ध मुसलमानों के 5 राज्य हुए थे

और इतिहास से उस महान, शक्तिशाली, सम्रद्ध,मन्दिरों और गौ से भरे राज्य को समूल समाप्त कर दिया

3 महीने तक तो कत्लेआम और नरसंहार चला था हिंदुओं का युद्ध हारने के बाद विजयनगर खण्डरों का नगर बन गया था
जहाँ कभी भारत का सबसे बड़ा हिन्दू साम्राज्य खड़ा था,

जागोगे तुम नहीं, इतिहास से सबक तुम लोगे नही,
एकता तुम में आएगी नही, जनसंख्या तुम बढ़ाओगे नही,
सेक्युलर नपुंसकता तुम छोड़ोगे नही,

इसिलए तुम्हारा इतिहास फिर से दोहराने के लिए तैयार खड़ा है हिंदुओं।
काल तुम्हारी प्रतीक्षा प्रतीक्षा कर रहा है हिंदुओं अपने में सामने के लिए क्योकि तुम यहूदी नहीं हिंदू हो हिंदू जिससे एकता नहीं हिंदू कुछ करने निकले तो तो सबसे पहले हिंदू नाम वाले सेक्युलर ही अपनी टांग अड़ाकर पंचायती करने लगते हैं और सेकुलरिज्म नामक ढिंढोरा पीट खुद को महान समझते हैं
जबकि सच ये है की पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान इंडोनेशिया समेत 23 आज के देश हिंदू ही थे
सेकुलरिज्म से सब खत्म हो गए


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🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾 *गाजियावाद में हमारे अखिलेश भईया ने हज हाऊस का उदघाटन...

🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾🇧🇾
*गाजियावाद में हमारे अखिलेश भईया ने हज हाऊस का उदघाटन किया………….* *इस हज हाऊस का बजट 1300 करोड़ था.* *यह एशिया के सबसे सुन्दर हज हाऊस में से एक है..*
*मै एक आम नागरिक होने के नाते अखिलेश भईया,उनके समर्थक,एंव सभी सपाईयो से ये पूछना चाहता हुँ और ये उन्की जिम्मेदारी भी है कि वो मुझे और सभी उत्तर परदेश वासी को इसका जवाब पूरी ईमानदारी के साथ दे….*
1) 🇧🇾क्या सपा सरकार ने इतनी लागत से किसी मन्दिर का निरमाण भी कराया है अगर नही तो क्यो…?
2) 🇧🇾इतनी लागत से बने इस हज हाऊस का यूपी राज्य के विकास में कितना योगदान है…?
3) 🇧🇾अगर इतना पैसा किसी और योजना मे लगता तो क्या राज्य का विकास नही होता…?
4) 🇧🇾यह सरकारी खजाने से खरज कि गई रकम है या किसी की निजी खजाने से…?
5) 🇧🇾इसके रख रखाव के लिए रकखे जाने वाले करमचारी के वेतन पर हर महीने लाखों खरच होने वाली रकम सरकारी खजाने से दी जायेगी या निजी खजाने से…?
6) 🇧🇾अगर यह रकम सरकारी खजाने से खरच की गई है,और हर महीने की जायेगी तो मेरे अखिलेश भईया ये पैसा हम आम जनता की मेहनत का वो एक हिस्सा है जो हम टैक्स के रूप में सरकार को देते है यह किसी के बाप का पैसा नही है कि जहाँ मन किया वहाँ खरज किया….
7) 🇧🇾अगर यहाँ सरकारी पैसा लगा है तो क्या यह पैसै की बरबादी नही है….
8) 🇧🇾अगर यहाँ सरकारी पैसा लगा है और ये पैसे की बरबादी भी नही है तो क्या यह हम हिन्दुओ के साथ पक्षपात नही है….?
9) 🇧🇾अगर ये पक्षपात है तो क्या हम हिन्दुओ को मान लेना चाहिये कि सपा बस मुसि्लम सरकार है…?
10) 🇧🇾यह सभी को दिखता हुआ सरकार का एक पक्षपात पूण रवैया है तो फिर सपा सरकार हम हिन्दुओ से किस आधार पर वोट की उम्मीद करती है या हम हिन्दू किस आधार पर सपा को वोट दें….?

यह 10 सवाल मेरे उन हिन्दू भाईयो की आँखे खोलने के लिए काफी है जो तन,मन,धन से 🇧🇾सपा सरकार के साथ है अगर अभी भी उनकी आँखे नही खुली तो या तो वो अपने निजी हित के लिए साथ है उन्हे धर्म और समाज से कोई मतलब नही है या फिर उनको जन्मजात अधां मान लिया जाऐ….
🇧🇾❌🇧🇾❌🇧🇾❌🇧🇾❌🇧🇾❌🇧🇾

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Thursday, September 8, 2016

ऐसे संदेशों की आवश्यकता नहीं है|धन्यवाद| जला सकें तो वैदिक बल्व हर गली में जलाएं और प्रकाश फैलाएं |...

ऐसे संदेशों की आवश्यकता नहीं है|धन्यवाद| जला सकें तो वैदिक बल्व हर गली में जलाएं और प्रकाश फैलाएं | यह गुरुकुल है गुरूजी ने बड़ा वैदिक बल्ब लगाया हुआ है जो नित्य रोशनी कर रहा है| सादर सप्रेम नमस्ते🙏🙏🙏


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*पुराणे कुछ कह रही है…* क्या पौराणिक सुनेगें ? क्या सुनकर विचारेगें ?? और क्या विचार कर...

*पुराणे कुछ कह रही है…* क्या पौराणिक सुनेगें ? क्या सुनकर विचारेगें ?? और क्या विचार कर स्वीकारेगें ???

यूं तो हमेशा आर्य समाजी बन्धु पुराणों के खिलाफ ही लिखते है | लिखने का कारण कोई द्वेष नहीं अपितु अपने प्रिय बन्धुओं को वेद मार्गी बनाना है |

वेद मार्गी बनने से हिन्दु भाई विशेषकर पौराणिक संगठित होगे जिससे एक ईश्वर की उपासना करेगें तो नित्य नये भगवानों के बनने पर रोक लग सकेगें |

वैसे तो पुराणे वेदानुकूल इतनी ही है जितना *आटे में नमक* पर नमक का भी अपना महत्तव तो है ही | आज में अपने पौराणिक बन्धु को वहीं पुराणों का वेदानुकूल नमक चखाना चाहता हुँ |

पहले पहल थोड़ा कड़वा या कहे बकबका सा लग सकता है पर मुझे आशा है कि सत्य के ग्राहक इसे चख लेगें |

पौराणिक समाज प्रायः ईश्वर को जन्मा अर्थात् समय समय पर अवतार लेने वाला मानता है परन्तु जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु भी निश्चित् है और जो जन्म मृत्यु वाला है वो ईश्वर कैसा ?

पौराणिकों की इस मिथ्या मान्यता पर लिंग पुराण अ० २ का श्लोक २० चोट करता हुआ ईश्वर का *अजन्मा* बता रहा है…

*“प्रधानपुरूषोतीतं प्रल्योत्त्पत्तिवर्जितम् ||”*

अर्थात्
परमात्मा प्रकृति और जीव से परे तथा *उत्तपत्ति और विनाश* से रहित है ||

पौराणिक समाज जहाँ ईश्वर को जन्मा के साथ साकार भी मानते है वहाँ उनके लिए विष्णु पुराण ४.१.८४ का श्लोक बड़े महत्तव का है…

*“कलामुहूर्तादिमयश्च कालो न यद्विभूतेः परिणामहेतुः | अजन्मानाशस्य सैदकमूर्तेरनामरूपस्य सनातनस्य ||”*

अर्थात्
कला, मुहूर्त्त आदिमय काल भी जिसकी विभूति के परिणाम का कारण नहीं हो सकता, *जिसका जन्म और मरण नहीं होता*, जो सनातन और सर्वदा एक रूप है तथा *जो नाम रूप से रहित* है ||

शिवपुराण वासुसंहिता अ० ४ का श्लोक ८७ भी पौराणिको की साकार मान्यता पर चोट करता हुआ कहता है कि…

*“अचक्षुरपि यः पश्यत्यकर्णोSपि श्रृणोति यः | सर्वं वेत्ति न वेत्तास्य तमाहुः पुरूषः परम् ||*

अर्थात्
बिना आँखों के भी वह देखता है, बिना कानों के भी सुनता है, वह सबको जानता है, उसको पूर्णतः जाननेवाला कोई नहीं है, उसको परम पुरूष कहा जाता है |

आप ऊपर देख चुके है कि पुराणों ने भी ईश्वर को निराकार स्वीकार कर लिया है | और जो निराकार है उसकी प्रतिमा या मूर्ति कैसी ? ऐसे जो ईश्वर को मूर्ति मानकर पूजते है और उसको तीर्थ स्थानो में खोजते है ऐसे लोगो को श्रीमद्भागवत १०.८४.१३ में *गधा* कहा गया है…

*"यस्यात्मबुध्दिः कुणपे त्रिधातुके स्वधी कलत्रादिषु भौम इज्यधीः | यत्तीर्थबुध्दिः सलिले न कर्हिचिज् जनेष्वभिजेषु स एव गोखरः ||”*

अर्थात्
वात पित कफ़ तीनों मलों से बने हुए शरीर में जो आत्मा बुध्दि, स्त्री आदि में स्वबुध्दि, *पृथ्वी से बनी हुई मूर्तियों में जो पूज्य बुध्दि और पानी में तीर्थ बुध्दि कभी भी करता है* वह *गधा* है ||

देवीभागवत पुराण शाक्तों का मूल ग्रन्थ है | मूर्ति पूजा और तीर्थ के सम्बन्ध में देवी भागवत पुराण ९.७.५२ बहुत महत्त्पूर्ण बात कहता है कि…

*“न ह्यम्मयानि तीर्थानि न देवा मृच्छिलामयः | ते पुनन्त्युरू कालेन, विष्णुभक्ताः क्षणादिह ||”*

अर्थात्
*पानी के तीर्थ नहीं होते, मिट्टी और पत्थरों के देवता नहीं होते, वे किसी काल में पवित्र नहीं करते,* प्रभु भक्त को इस संसार में क्षणभर में पवित्र कर देते हैं ||

ऊपर हमने पुराणों के कुछ ऐसे श्लोक रखे जो वेदानुकूल है और *वेद ईश्वरवाणी होने से परम प्रमाण है* अतः पौराणिक बन्धुओं को गम्भीरता से विचार करना चाहिए |

और जो अब भी अपनी अपनी ही करेगा उन पौराणिक पण्डितों के लिए भागवत महात्म्य अ० १ श्लोक ७५ जो फ़रमाता है वो वाकई गम्भीर है…

*“पण्डितास्तु कलत्रेण रमन्ते महिषा इव | पुत्रस्योत्पादने दक्षा अदक्षा मुक्तिसाधने ||*

अर्थात्
पंडितों की यह दशा है कि वे अपना स्त्रियों के साथ *भैसों की तरह रमण करते हैं,* उनमें सन्तान पैदा करने की ही कुशलता पाया जाती है, *मुक्ति साधन में सर्वथा अकुशल हैं ||*

इस लेख को लिखने का मेरा उद्देश्य किसी भी भावना को ठेस पहुचाना नहीं है अपितु *वैदिक मान्यताओं* का दर्शन कराना है जिसे *आर्य समाज* भी मानता है |

पौराणिकों का आर्य समाज को अपना शत्रु मानना स्वयं अपने साथ छल करना है | आर्य समाजी की ईश्वर भक्ति, और राष्ट्र भक्ति पर संशय नहीं किया जा सकता |

कृप्या अपके किसी भी टिका टिप्पणी या आक्षेप या सुक्षाव के लिए नीचे दिए Fb Page पर आपका स्वागत है |

इति ओ३म् …!!!
पाखण्ड खंडन… वैदिक मण्डण… रिटर्न…

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आज का चिन्तन, 02-09-2016 💐 जीवन में पद से ज्यादा महत्व पथ का है। इसलिए पदच्युत...

आज का चिन्तन,
02-09-2016
💐 जीवन में पद से ज्यादा महत्व पथ का है। इसलिए पदच्युत हो जाना मगर भूलकर भी कभी पथच्युत मत हो जाना। पथच्युत हो जाना अर्थात उस पथ का त्याग कर देना जो हमें सत्य और नीति के मार्ग से जीवन की ऊंचाईयों तक ले जाता है।
💐 पथच्युत होने का अर्थ है, जीवन की असीम संभावनाओं की ओर बढ़ते हुए क़दमों का विषय- वासनाओं की दलदल में फँस जाना। महान लक्ष्य के अभाव में जीना केवल प्रभु द्वारा प्राप्त इस मनुष्य देह का निरादर ही है और कुछ नहीं।
💐 महानता के द्वार का रास्ता मानवता से होकर ही गुजरता है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्मं और उपासना है। मानवता रुपी पथ का परित्याग ही तो पथच्युत हो जाना है।

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🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺शौचास्त्वांगजुगुप्सा परैरसंसर्गः ||~~योगदर्शन~साधनपाद~सूत्र~40~~~~~~~पद्य में...

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺शौचास्त्वांगजुगुप्सा परैरसंसर्गः ||~~योगदर्शन~साधनपाद~सूत्र~40~~~~~~~पद्य में भाव~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~जब योगी अंदर बाहर से, शुद्ध विमल हो जाता है| तन से वह सम्बन्ध न रखता, मन ईश्वर में लगाता है| पांच नियम में शुचिता पहला, जिसका फल बतलाया है| निरासक्त जो विचरे जग में, सफल करे निज काया है||👏


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🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺अपरिग्रहस्थैर्ये जन्मकथंतासंबोधः ||~~योगदर्शन~साधनपाद~सूत्र~39~~~~~~~~...

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺अपरिग्रहस्थैर्ये जन्मकथंतासंबोधः ||~~योगदर्शन~साधनपाद~सूत्र~39~~~~~~~~ पद्यानुवाद~~~~~~~~~~~~~~~~ जिनसे हो हानि योगी की अनावश्यक वस्तुऐं, विचार|| दृढ़ता पूर्वक त्यागे उनको, क्या क्यों कैसे उठा विचार| अपरिग्रह को स्थिर कर, जो योगी आगे बढ़ता है| यम की पूर्ण साधना करके, विमल हो मंजिल चढ़ता है||👏


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ओइम् परमात्मने नम:. उपनिषदाें मे बृह्म विद्धया का विस्तार से. वर्णन है ।मह्र्षि व्यास जी ने...

ओइम् परमात्मने नम:. उपनिषदाें मे बृह्म विद्धया का विस्तार से. वर्णन है ।मह्र्षि व्यास जी ने इन्ही उपनिषदाें की संगति लगाने के लिये ही वेदान्त शाष्त्र की रचना की थी । इसी लिये स्वामी दयानंद सरस्सवती जी ने वेदान्त सूत्राें पहले उपनिषदाें के अध्ययन की सलाह दी थी । इनके अध्ययन के पश्चात वेदान्त सूत्र अच्छी पर्कार समझ मे आने लगते है । एक ओर मजेदार बात ? इस काे पढने बाद व्यक्ति खुद समझ जायेगा कि अठारह पुराणाें के रचियता व्यास महर्षि नही हाे सकते ? जैसा कि कुछ मूढ ओर अज्ञानी लाेग समाज मे भृम फैला रहे है । ओर अपने समर्थन मे यह श्लाेक पढकर सुनाते है ? अष्टादश: पुराणेषु व्यास्सय: वचनम द्वयम । पराेपकाराय पुण्याय: ****“आदि- आदि ।


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महिलाओं से 👏 विनती हैं की कृप्या नाराज़ मत होना,, पुरुष का बखान.. पुरुष का श्रृंगार तो स्वयम...

महिलाओं से 👏 विनती हैं की कृप्या नाराज़ मत होना,,

पुरुष का बखान..

पुरुष का श्रृंगार तो स्वयम प्रकृति ने किया है..

स्त्रीया कांच का टुकड़ा है..
जो मेकअप की रौशनी पड़ने पर ही चमकती है..
किन्तु पुरुष हीरा है जो अँधेरे में भी चमकता है और उसे मेकअप की कोई आवश्यकता नहीं होती।

खूबसूरत मोर होता है मोरनी नहीं.. मोर रंग बिरंगा और हरे नीले रंग से सुशोभित..
जबकि मोरनी काली सफ़ेद..
मोर के पंख होते है इसीलिए उन्हें मोरपंख कहते है..
मोरनी के पंख नहीं होते..

दांत हाथी के होते है,हथिनी के नहीं। हांथी के दांत बेशकीमती होते है। नर हाथी मादा हाथी के मुकाबले बहुत खूबसूरत होता है।

कस्तूरी नर हिरन में पायी जाती है। मादा हिरन में नहीं।
नर हिरन मादा हिरन के मुकाबले बहुत सुन्दर होता है।

मणि नाग के पास होती है ,
नागिन के पास नहीं।
नागिन ऐसे नागो की दीवानी होती है जिनके पास मणि होती है।

रत्न महासागर में पाये जाते है, नदियो में नहीं..
और अंत में नदियो को उसी महासागर में गिरना पड़ता है।

वैसे ही मनुष्यो में बुद्धि विवेक और बल मर्दों के पास होता है औरतो के पास नहीं..

संसार की बेशकीमती तत्व इस प्रकृति ने पुरुषो को सौंपे..
प्रकृति ने पुरुष के साथ
अन्याय नहीं किया..
9 महीने स्त्री के गर्भ में रहने के बावजूद भी औलाद का चेहरा स्वाभाव पिता की तरह होना, ये संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य है..
क्योंकि पुरुष का श्रृंगार प्रकृति ने करके भेजा है,
उसे श्रृंगार की आवश्यकता नहीं…

जरूर शेयर करे पहली बार कोई लेख पुरुषो के लिए आया है।
इस मेसेज को भेजने के बाद घर अपनी रिस्क पर जाएं।

हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी की आपको घर पर रोटी मिलेगी या ……
😆😆😆😆😆😆😆


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Wednesday, September 7, 2016

● महर्षि दयानन्द के अनुयायी क्यों बनें ?...

● महर्षि दयानन्द के अनुयायी क्यों बनें ? ●
—————————–

लेखक : डॉ० भवानीलाल भारतीय

१. दयानन्द का सच्चा अनुयायी भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी आदि कल्पित पदार्थों से कभी भयभीत नहीं होता । सच है – ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवे, दयानन्द जब नाम सुनावे’ !

२. आप फलित ज्योतिष, जन्मपत्र, मुहूर्त, दिशाशूल, शुभाशुभ ग्रहों के फल, झूठे वास्तु शास्त्र आदि धनापहरण के अनेक मिथ्या जाल से स्वयं को बचा लेंगें ।

३. कोई पाखण्डी साधु, पुजारी, गंगा पुत्र आपको बहका कर आपसे दान-पुण्य के बहाने अपनी जेब गरम नहीं कर सकेगा ।

४. शीतला, भैरव, काली, कराली, शनैश्चर आदि अप-देवता जिनका वस्तुतः कोई अस्तित्व ही नहीं है, आपका कुछ भी अनिष्ट नहीं कर सकेंगे । जब वे हैं ही नहीं तो बेचारे करेंगे क्या ?

५. आप मदिरापान, धूम्रपान, विभिन्न प्रकार के मादक द्रव्यों से बचे रह कर अपने स्वास्थ्य और धन की हानि से बच जायेंगे ।

६. बाल-विवाह, वृद्ध-विवाह, नारी-प्रताडना, पर्दा-प्रथा, अस्पृश्यता आदि सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर सामाजिक सुधार के उदाहरण बन सकेंगे ।

७. जीवन का लक्ष्य सादगी को बनायेंगे और मित व्यवस्था के आदर्श को स्वीकार करने के कारण दहेज, मिलनी, विवाहों में अपव्यय आदि पर अंकुश लगाकर आदर्श उपस्थित करेंगे ।

८. दयानन्द का अनुयायी होने के कारण अपने देश की भाषा, संस्कृति, स्वधर्म तथा स्वदेश के प्रति आपके हृदय में अनन्य प्रेम (आसक्ति) रहेगा ।

९. आप पश्चिम के अन्धानुकरण से स्वयं को तथा अपनी सन्तान को बचायेंगे तथा फैशन परस्ती, फिजूलखर्ची, व्यर्थ के आडम्बर तथा तडक-भडक से दूर रहेंगे ।

१०. आप अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालेंगे ताकि आगे चलकर वे शिष्ट, अनुशासन प्रिय, आज्ञाकारी बनें तथा बडों का सम्मान करें ।

११. आप अपने कार्य, व्यवसाय, नौकरी आदि में समय का पालन, ईमानदारी, कर्त्तव्यपरायणता को महत्त्व देंगे ताकि लोग आपको मिसाल के तौर पर पेश करें ।

१२. वेदादि सद् ग्रन्थों के अध्ययन में आपकी रुचि बढेगी, फलतः आपका बौद्धिक क्षितिज विस्तृत होगा और विश्व-बन्धुता बढेगी ।

१३. जीवन और जगत् के प्रति आपका सोच अधिकाधिक वैज्ञानिक होता चला जायेगा । इसे ही स्वामी दयानन्द ने 'सृष्टिक्रम से अविरुद्ध होना’ कहा है । आप इसी बात को सत्य मानेंगे जो युक्ति, तर्क और विवेक की कसौटी पर खरी उतरती हो । मिथ्या चमत्कारों और ऐसे चमत्कार दिखाने वाले ढोंगी बाबाओं के चक्कर में दयानन्द के अनुयायी कभी नहीं आते ।

१४. दयानन्द की शिक्षा आपको एक परिपूर्ण मानव बना देगी । आप जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति के भेदों से ऊपर उठकर मनुष्य मात्र की एकता के हामी बन जायेंगे ।

१५. निन्दा-स्तुति, हानि-लाभ, सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों को सहन करने की क्षमता आप में अनायास आ जायेगी ।

१६. शैव, शाक्त, कापालिक, वैष्णव, ब्रह्माकुमारी आदि सम्प्रदायों के मिथ्या जाल से हटकर आप एक अद्वितीय सच्चिदानन्द परमात्मा के उपासक बन जायेंगे ।

१७. आपकी गृहस्थी में पंच महायज्ञों का प्रवर्त्तन होगा जिससे आप परमात्मा, सूर्यादि देवगण, माता-पिता आदि पितृगण, अतिथि एवं सामान्य जीवों की सेवा का आदर्श प्रस्तुत करेंगे ।

क्या दयानन्द के अनुयायी बनने से मिलने वाले उपर्युक्त लाभ कोई कम महत्त्व के हैं ? तो फिर देर क्यों ? आज ही दयानन्द के सैनिकों में अपना नाम लिखायें ।

[सन्दर्भ - हिन्दी मासिक 'दयानन्द-सन्देश’ का फरवरी २००३ का अंक, प्रस्तुतकर्ताः भावेश मेरजा]
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|| Free e-Library || यह ई पुस्तकालय है, जिसमें दर्जनों अमूल्य ग्रंथों के PDF सहेजे गए हैं, ताकि यह...

|| Free e-Library ||

यह ई पुस्तकालय है, जिसमें दर्जनों अमूल्य ग्रंथों के PDF सहेजे गए हैं, ताकि यह अधिक से अधिक लोगों के काम आ सकें, धर्म और राष्ट्र संबंधी विषय पर PDF में अमूल्य पुस्तकें इन लिंक में संग्रहित हैं, आप विषय देखकर लिंक खोलें तो बहुत सी पुस्तकें मिलेंगी, सभी पुस्तकें आप निशुल्क download कर सकते हैं, इन लिंक्स में सैकड़ों किताबें हैं, जो कई पीढ़ियों की मेहनत का फल हैं, इस हिंद महासागर से मोती चुन लें……..
Swami Dayananda - स्वामी दयानंद रचित :-
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Aadi Shankaracharya - आद्य शंकराचार्य :-
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Sri Aurobindo - श्री अरविंदो :-
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Swami Vivekanand - स्वामी विवेकानन्द :-
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Swami Ramteerth - स्वामी रामतीर्थ :-
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Sitaram Goel - सीताराम गोयल :-
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Veer Savarkar - वीर सावरकर :-
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Swami Shivanand - स्वामी शिवानंद :-
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हिन्दू, राष्ट्र व हिन्दुराष्ट्र :-
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Basic Hinduism -
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Hindutva and India :-
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Islam Postmortem - इस्लाम की जांच पड़ताल :-
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Christianity Postmortem - बाइबिल पर पैनी दृष्टि :-
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Autobiography - आत्मकथाएं :-
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धर्म एवं आध्यात्म -
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यज्ञ Yajna -
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Brahmcharya - ब्रह्मचर्य :-
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Yog - योग :-
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Upanishad - उपनिषद :-
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Geeta - श्रीमद्भगवद्गीता :-
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Manu and pure Manusmriti - महर्षि मनु व शुद्ध मनुस्मृति :-
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Valmeeki and Kamba Ramayan - वाल्मीकि व कम्ब रामायण :-
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Books on Vedas - वेदों पर किताबें :-
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Maharshi Dayananda - महर्षि दयानंद समग्र :-
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————-Complete commentaries on Veda - सम्पूर्ण वेद भाष्य ——–
Introduction to the Commentary on the 4 Vedas - ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका :-
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RigVeda - ऋग्वेद सम्पूर्ण -
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YajurVeda - यजुर्वेद सम्पूर्ण -
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SamaVeda - सामवेद सम्पूर्ण -
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AtharvaVeda - अथर्ववेद सम्पूर्ण -
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झकझोरनेवाली पोस्ट घर के पास ही गुरुद्वारा है जहाँ 24 घण्टो बारह महीना लंगर की सेवा चलती है ! मेंरा...

झकझोरनेवाली पोस्ट

घर के पास ही गुरुद्वारा है जहाँ 24 घण्टो बारह महीना लंगर की सेवा चलती है ! मेंरा एक गैर सिक्ख मित्र है , जो की अक्सर रात बे रात आ धमकता और कहता कि चल गुरूद्वारे में लंगर करने चलना है ! यदि मैं कहता कि यार मैं खाना खा चुका हूँ तब भी उसका आग्रह होता की मैं बेशक ना खाऊँ लेकिन उसके साथ चलू !
उसके आने की दो वजह होती ! एक तो उसे लंगर की राजमा,चने,मूंग की मिक्स डाल पसन्द है दुसरा वह अक्सर मज़ाक में कहता की घरवाली से वह डरे जिसको गुरूद्वारे का रास्ता ना मालूम हो !

यानि जब भी उसकी घरवाली से लड़ाई होती तो वह गुस्से से घर से निकलता और यहाँ लंगर में खाकर घर ऐसे रूठ कर सोता मानो भूखा सोया हो ! :-)

गुरुद्वारे के बड़े से लंगर हाल में दीवारो पर बहुत से फ्रेम लगी है जिसमे सिक्ख गुरुओ पर मुगल शासक द्वारा किये अत्याचार बताये गए है !

मेरा मित्र हमेशा मुझे कहता कि यार यह खून खराबे की ,यातना देती हुई तस्वीरें यहाँ नहीं लगाना चाहिए , खाना खाते हुए इसे देखना बड़ा अजीब लगता है , रोटी गले में ही अटक जाती है !

कही किसी को जलती कढ़ाही में खौलते तेल में डाला जा रहा है तो कही किसी को आरी से कटवाया जा रहा है , कहीं किसी के बच्चे को माँ से छीन कर आग में फेका जा रहा तो कहीं मुग़ल सैनिको के बरछो में सिक्खो के कटे सर टंगे हुए है !

एक दिन इसी तरह लंगर खाते हुए उसने फिर वही शिकायत की !

पास ही बैठे लंगर करते एक बुजुर्ग ने सुनकर कहा , यह इसलिये लगाईं गई है ताकि हर निवाले के साथ यह महसूस हो की यह कितने कष्टो और यातना सहने के बाद अपने धर्म को बचाते हुए रोटी मिल रही है , इसे कभी भूलना नहीं चाहिए ! इन लोगो ने अपने प्राण त्याग दिए लेकिन इस्लाम नहीं कबूल किया और अपना घर परिवार अपनी आँखों के सामने उजड़ते हुए देखा , चाहते तो झुक कर अपनी जान बचा लेते , लेकिन तब वह भी आम हो जाते !

उन्होंने दुसरा रास्ता चुना और हमारे सामने नई मिसाल रखी !

लंगर के पश्चात , जब हम दोनों बर्तन साफ़ कर धो रहे तब वह बड़ा चुपचाप बर्तन साफ़ कर रहा था , मैंने उसे छेड़ते हुए मज़ाक में कहा भी कि ऐसे बर्तन घर पर भी साफ़ किया कर , घर वाली खुश रहेंगी लेकिन वह चुप रहा , हमेशा की तरह पलट कर मुंहजोरी नहीं की !

बाहर निकल कर मैंने फिर पूछा क्या हुआ तब वह बहुत संजीदगी से बोला , “ यार हम भी कितने कमीने हैं , अभी जब आयते पूछ कर पूछ कर लोगो को मारने की खबरे आ रही तो हम कैसे कैसे मजाक करते थे ?? कि दो चार आयाते याद कर लेनी चाहिए या कोई क्रेश कोर्स करना होंगा ??? कितने कायर मानसिकता होती हैं हमारी ??? हम मरने के पहले ही मरे होते हैं !

मैंने उसका दिल रखने के लिए कहा कि चल कोई बात नही यार , वह तो हंसी मज़ाक कि बाते रहती बस !

नहीं, वह बोला ” हम जैसा आगे पीछे सोचते हैं , मुसीबत आने पर व्यवहार भी वैसा ही करते हैं “

अब की बार मेरा चेहरा उतर गया था ! क्या वह कुछ गलत कह रहा था ??


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🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वं सूर्य्य मरोचयः | विश्वकर्मा विश्वदेवो महाँ असि...

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वं सूर्य्य मरोचयः | विश्वकर्मा विश्वदेवो महाँ असि ||~सामवेद~उ0~3~2~22~2~~~~~मन्त्र का पद्यानुवाद~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~सर्व प्रकाशक, सबके शासक, महादेव, सविता महतारी| ज्योतिष्मान् जगत् उजियारे, सूरज में चमके छवि थारी|| आये हैं प्रभु शरण आपकी, हमको जगमग कर देना| विमल वेद की ज्योति द्वारा,रग रग निज से भर देना||👏


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Friday, September 2, 2016

*|७९| ऋषि सन्देश |७९|* “चाहै सौ वर्ष का भी हो परन्तु *जो विद्या, विज्ञानरहित है, वह बालक* और...

*|७९| ऋषि सन्देश |७९|*

“चाहै सौ वर्ष का भी हो परन्तु *जो विद्या, विज्ञानरहित है, वह बालक* और *जो विद्याविज्ञान का दाता है, उस बालक को भी वृध्द मानना* चाहिए | क्योंकि सब शास्त्र, आप्त विद्वान् *अज्ञानी को ‘बालक’ और ज्ञानी को 'पिता’* कहते हैं ||

__[]__ स्वामी दयानन्द सरस्वती [सत्यार्थ प्रकाश समु० १० (मनुस्मृति २/१५३)]


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आज रात लगभग नो बजे। *गौ रक्षा हिन्दू दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेद नागर* को सूचना मिली कि सेनी गाँव...

आज रात लगभग नो बजे। *गौ रक्षा हिन्दू दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेद नागर* को सूचना मिली कि सेनी गाँव (निकट वेदपुरा ग्रेटर नोएडा) मे एक कुआँ जिसकी गहराई लगभग तीस फ़ुट है उसमें एक नन्दी गिर गया है!
वेद नागर ख़ुद पुरी टीम को लेकर तुरन्त मौके पर पहुँचे तथा 100 नम्बर पर सूचना दी और एस.डी.एम महोदय दादरी को अवगत कराया।
तत्काल ही नन्दी को जे.सी.बी मशीन मँगाकर निकालने का प्रयास किया लेकिन कामयाबी नही मिली ना ही प्राधिकरण से कोई सहायता दल आया।
गौ भक्तों ने हेडरा क्रेन मँगाकर लगभग 6 घंटे के कड़े प्रयास से कुआँ मे अन्दर घुसकर नन्दी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
वेद नागर ने कहा प्रशासन की तरफ़ से कोई सहायता गऊ रक्षा हिन्दू दल को न मिली और न ही कभी मिलती। गऊ रक्षा हिन्दू दल निरंतर गौ माता आदि को इसी प्रकार होने वाली रोज़ की दुर्घटनाओं से निकालने का कार्य कर रहा है इसमें शासन प्रशासन को हमारे संगठन में सहयोग करना चाहिये, जिससे संगठन और मज़बूती से मिलकर ऐसे कार्यों को आसानी से सफलता पूर्वक कम समय में अधिक से अधिक कर सके।
वेद नागर ने बताया हम और हमारा संगठन देश मे लोगो को ऐसे सामाजिक कार्य करके जागरुक कर रहा है। रात मे सूचना मिलते ही लगभग सैकड़ों गऊ भक्त मौके पर पहुँच गये तथा ग्रामीणों के सहयोग से नन्दी को निकालने मे कामयाबी मिली।
वेद नागर ने बताया हमारे जिले मे ऐसी घटनाओ मे जिलाअधिकारी व एस.डी.एम महोदय दादरी का सहयोग मिल जाता है लेकिन प्राधिकरण उसके बाद भी कोई सहयोग नही देता।
मौके पर संदीप नागर पाटिल.. जगदीप नागर, मदन मुखिया, लेखराम, विकास, नवीन, एडवोकेट. सुंदर नागर, सोनू नागर, पंकज शर्मा, अजय चौधरी, विकास शर्मा, कमल नागर तथा आदेश मामा इत्यादि मौजूद रहे।


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आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ? # आर्य समाज ये नहीं मानता कि श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, गौएँ चुराते...

आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि श्रीकृष्ण जी माखनचोर थे, गौएँ चुराते थे, गोपियों संग रास रचाते थे, राधा संग प्रेम प्रसंग में लिप्त थे, कुब्जा दासी से समागम किए थे, ईश्वर का अवतार थे ।
बल्कि ये मानता है कि वे जन्म से लेकर ४८ वर्ष तक ब्रह्मचारी थे, केवल एक रुक्मणी से विवाह करके भी उसके साथ विष्णु पर्वत पर उपमन्यु ऋषि के आश्रम में १२ वर्ष ब्रह्मचर्य तप करके अपने समान तेजस्वी पुत्र प्रद्युम्न को पैदा किया, योगेश्वर होने से वे नित्य ईश्वरोपासना, प्राणायाम, संध्या, अग्निहोत्र आदि करते थे, अनेकों प्रकार की युद्ध कलाओं में दक्ष थे, उनका प्रीय शस्त्र सुदर्शन चक्र था, महान विचारक थे, अद्वितीय योद्धा थे, भारतवर्ष के समस्त गणराज्यों को यादवों के संघर्ष तले एक करने वाले महान राजनीतिज्ञ थे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज रामचरितमानस के आधार पर ये नहीं मानता कि हनुमान जी बंदरमुखी थे, न ये मानता है कि उन्होंने पूँछ से लंका दहन किया ।
बल्कि वाल्मिकी रामायण के आधार पर ये मानता है कि कि हनुमान जी दक्षिण भारत की क्षत्रिय शाखा जो वन में बसती है उसमें से अखंड ब्रह्मचारी, महाबली, व्याकरण के धुरंधर विद्वान, वेदों के ज्ञाता थे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज गरुड़, अग्नि, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भागवत आदि १८ नवीन पुराणों को नहीं मानता क्योंकि इनमें परस्पर विरोधाभास, देवी देवताओं के बारे में अभद्र अश्लील कथाएँ वर्णित हैं, अपने अपने देवों की स्तुति और अन्यों की निंदा है, जिन्हें व्यासकृत माना जाता है जब्की वे पक्षपातीयों के द्वारा समय समय पर रचे हुए कपोल कल्पित ग्रंथ हैं ।
बल्की ये मानता है कि चारों वेदों के चार ब्राह्मणग्रंथ ( ऐतरेय, तैत्तरीय, शतपथ, गोपथ ) को ही पुराण कहते हैं । जिनमें आश्वलायन, याज्ञवल्क्य, जैमीनि आदि ऋषियों - ऋषिकाओं का प्रमाणिक इतिहास है ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि हिंदुओं के सारे संस्कृत शास्त्र प्रमाणिक हैं ।
बल्कि ये मानता है कि केवल वेद और वेद के सिद्धांतों के अनुकूल चलने वाले ग्रंथ ( दर्शन, उपनिषद्, अरण्यक, वेदांग, रामायण, मनुस्मृति, महाभारत, कौटिल्य अर्थशास्त्र ) आदि ही प्रमाणिक हैं ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि पत्थर के लिंग पर दूध चढ़ाने से, मूर्ती के आगे माथा टेकने से, हाथ जोड़ने से, धूप अगरबत्ती करने से, मूर्ती को भोग लगाने से, कपड़े पहनाने से, ढोल बाजे बजाने से, और नाचने आदि अँधविश्वास से ईश्वर की भक्ति होती है ।
बल्कि ये मानता है कि पतंजलि ऋषि के योगशास्त्र की उपासना विधि ( यम नियम पालन, प्राणायाम, प्रणवजप, ध्यान आदि ) से ही निराकार सर्वव्यापक परमेश्वर की उपासना होती है । इसी विधी से हमारे पूर्वज ऋषि मुनि दुर्गा, राम, कृष्ण, सीता, सावित्री, शिव, हनुमान आदि उपासना किया करते थे । सो हमें भी ऐसे ही करनी चाहिए ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि तीर्थयात्राएँ करने से, गंगा स्नान से, पंडे पुजारियों को दान देने से, व्यर्थ के पाखंड करके धन, समय, ऊर्जा, आदि व्यर्थ करने से मनोकामना पूरी होती है ।
बल्कि ये मानता है कि ऋषि परम्परा के अनुसार घर में हवन ( अग्निहोत्र ) करने से ३३ कोटी ( ३३ प्रकार के ) देव { ११ रुद्र, ८ वसु, १२ आदित्य मास, इन्द्र ( विद्युत ), } की पुष्टि होती है जिससे कि वृष्टि आदि समय पर होकर औषधीयों का पोषण होता है, फल फूल शाक सब्जी अन्न आदि की वृद्धि और शुद्धता होती है , ऐसा एक यज्ञ करने से हज़ारों मनुष्यों का उपकार होता है जैसा कि गीता में भी कहा है । एक यज्ञ में ही भरपूर पुण्य मिलता है ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं मानता कि मृतक का श्राद्ध करने से, पंडों का पेट भरने से, अस्थियाँ गंगा में बहाने आदि से मृत की आत्मा को शांती मिलती है ।
बल्कि ये मानता है कि व्यक्ति अपने किये कर्मों का स्वयं उत्तरदायी है, शव का दाह संस्कार ( नरमेध यज्ञ ) करने के बाद घर में वायु शुद्धि हेतु हवन करवाना चाहिये, उसके बाद मृतक की अस्थियों को जल में डालने के बजाए किसी खेत में खाद के रूप में प्रयोग करना चाहिये , इसके बाद मृतक के लिये शेष कुछ भी न करना चाहिए ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं चाहता कि करोड़ों, अरबों, खरबों का धन मंदिरों में दान देकर उसे व्यर्थ किया जाये , जिससे कि पंडे पुजारी अपनी तोंद भरने में, अपने बंगले बनाने में, अपने गले में मोटे मोटे सोने की चैन डालकर उस धन पर हराम की कमाई फ्री में खाएँ । और न ही ये चाहता है कि उस धन का ७०% भाग मस्जिदों और चर्चों पर खर्च हो ।
बल्कि ये चाहता है कि इसी अपार धन से हम वैदिक गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाएँ, वैदिक विज्ञान पर शोध हेतु प्रयोगशालाएँ खोलें । जिससे कि हमारा देश शीघ्रता से संस्कृत राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हो और वही प्रचीन आर्यवर्त देश बने, अनाथाश्रम आदि खोले जायें जिससे कि हिंदू बच्चे मदरसों और कानवेंट आदि में न जाकर मुसलमान ईसाई होने से बचें ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज ये नहीं चाहता कि खोखले लोकतंत्र के आधार पर राजनैतिक पारटीयाँ हिंदूओं को जाति में तोड़कर वोट लेती रहें और एक समुदाय विशेष का पोषण करती रहे और बेचार हिंदू केवल झंडा उठाकर हिंदूराष्ट्र का स्वप्न मात्र ही देखता रहे और ये हरामी नेता हिंदुओं को बरगलाकर वोट लेते रहें और शोषण करते रहें ।
बल्कि ये चाहता है कि लोकतंत्र जैसे भ्रष्टतंत्र को उखाड़कर मनुस्मृति के आधार पर राजतंत्र स्थापित किया जए और वैदिक शासन की नींव रख ( सच्चा हिंदुत्व ) स्थापित किया जा सके तांकि हमारा राजा पूरी पृथिवी को एकछत्र वैदिक गणराज्य में लाकर युधिष्ठिर, विक्रमादित्य की भांती खंडित मानवीय शासन के स्थान पर अखंडित वैदिक चक्रवर्ती राज्य स्थापित करे और राजसूय यज्ञ करे ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?

# आर्य समाज विवेकानंद और उसके रामकृष्ण मठ की सकुलर विचरधारा को नहीं मानता । आर्य समाज नहीं मानता कि माँस खाने वाला और दूसरों को माँस खाने का सुझाव देने वाला विवेकानंद कोई सन्यासी था, नहीं मानता कि उसने अमरीका में भाषण देने के सिवाय कभी गौरक्षा पर बात की हो, कभी धर्म परिवर्तन रोकने का प्रयास किया हो, कभी स्वतंत्रता के लिये कुछ किया हो, कभी स्त्री शिक्षा के लिये कुछ किया हो, कभी कानवेंट स्कूल के स्थान पर गुरुकुलीय शिक्षा की बात की हो, कभी किसी मौलवी या पादरी से शास्त्रार्थ करके अपने वैदिक धर्म को श्रेष्ठ सिद्ध किया हो ।
बल्कि ये मानता है कि वेद के आधार पर ब्रह्मचर्य, शाकाहार आदिका पालन और प्रचार करने वाले दयानंद जी ने ही हिंदू समाज का उद्धार किया । गौरक्षा हेतु आंदोलन किया, स्त्री शिक्षा आरंभ करवाई, धर्म परिवर्तन को रोक उलटा शुद्धि चक्र चलाया, स्वतंत्रता हेतु युवा तैयार किए, कानवेंट शिक्षा समाप्त कर वैदिक गुरूकुल खोलने का प्रयास किया, मौलवीयों पादरीयों से शास्त्रार्थ करके उनको धूल चटाई और हिंदुओं के मुर्दा शरीरों में गर्म रक्त का संचार किया ।
………… तो ऐसा मानने से आर्य समाज हिंदू विरोधी कैसे ?


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ओ३म् *🌷ओ३म् का जाप सर्वश्रेष्ठ🌷* ओ३म् का जाप स्मरण शक्ति को तीव्र करता है,इसलिए वेदाध्ययन में...

ओ३म्

*🌷ओ३म् का जाप सर्वश्रेष्ठ🌷*

ओ३म् का जाप स्मरण शक्ति को तीव्र करता है,इसलिए वेदाध्ययन में मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का प्रयोग किया जाता है।
मनुस्मृति में आया है कि ब्रह्मचारी को मन्त्रों के आदि तथा अन्त में ओ३म् शब्द का उच्चारण करना चाहिए।

क्योंकि आदि में ओ३म् शब्द का उच्चारण न करने से अध्ययन धीरे धीरे नष्ट हो जाता है तथा अन्त में ओ३म् शब्द न कहने से वह स्थिर नहीं रहता है। २/७४ ।।

कठोपनिषद में नचिकेता की कथा आती है।नचिकेता ने यम ऋषि से पूछा- हे ऋषि,मुझे यह बताइये कि संसार में सार वस्तु क्या है?
इस पर ऋषि ने उत्तर दिया,सब वेद जिस नाम के संबंध में वर्णन करते हैं,सभी तपस्वी जिसके विषय में कहते हैं,जिसकी प्राप्ति की इच्छा करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं,उस नाम के संबंध में मैं तुझे संक्षेप में बताता हूं-वह ओ३म् नाम(शब्द) ही परमात्मा का श्रेष्ठतम नाम है।
यजुर्वेद में आया है कि मृत्यु को जीतने और मोक्ष को प्राप्त करने के लिए ओ३म् के अतिरिक्त और कोई भी मार्ग नहीं है। यमाचार्य ने तो नचिकेता को ओ३म् का महत्व बताते हुए यहां तक कह दिया है कि यह ओ३म् अक्षर निश्चय ब्रह्म है।यह ही अक्षर ब्रह्म के सब नामों में श्रेष्ठतम है।
इस अक्षर को जान लेने के बाद जापक जो इच्छा करता है उसकी वह इच्छा निश्चयपूर्ण हो जाती है।। कठोपनिषद २/१६ ।।

ऋग्वेद ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा है-हे वीर प्रभो,आपकी मित्रता कठिनाई से नष्ट होने वाली है।अर्थात आपकी मित्रता स्थाई तथा विश्वसनीय है।
आप गाय चाहने वाले के लिए गाय हैं(देने वाले हैं) तथा घोडा चाहने वाले के लिए घोडा है ।।६/४५/२६ ।।

इस प्रकार ओ३म् के जापक को सभी उचित वस्तुएँ सुलभ हो जाती हैं।
प्रश्नोपनिषद् में तो पिप्पलाद ऋषि ने यहां तक कह दिया है कि जो निरन्तर इस तीन मात्राओं वाले ओ३म् अक्षर के द्वारा परब्रह्म का ध्यान करता है वह तेज में सूर्य के समान सम्पन्न हो जाता है ।।५/५ ।।

छान्दोग्य उपनिषद् के अनुसार देवता भी इस अविनाशी ,अमर तथा अभय ओ३म् अक्षर का सहारा लेकर अमर तथा अभय हो गये ।।२/४/४ ।।

गीता में श्रीकृष्ण इस ओ३म् अक्षर का महत्व बताते हुए अर्जुन से कहते हैं- इस एकाक्षर ब्रह्म स्वरुप ओ३म् का स्मरण करता हुआ जो मनुष्य इस शरीर का परित्याग करता है वह परमगति(मोक्ष) को प्राप्त होता है ।।८/१३ ।।

मुण्डकोपनिषद् ओ३म् की महिमा के वर्णन में कहता है-ओ३म् का जाप करने से ह्रदयग्रन्थि (सूक्ष्म शरीर) टूट जाती है।सब प्रकार के संशय नष्ट हो जाते हैं।उसके सब कर्म क्षीण हो जाते हैं।उस इन्द्रियातीत ओ३म् के दर्शन करने मात्र से ही ।। २/२८ ।।

कठोपनिषद में आगे कहा है-ओ३म् अनित्यों में एक नित्य है।अनेकों में वही एक है।श्रेष्ठ कामनाओं का वही एक पूरक है।जो धीर पुरुष इस ओ३म् को अपनी आत्मा में देखते हैं केवल उन्हें ही परम शान्ति प्राप्त होती है,अन्यों को नहीं ।।५/१३ ।।

आत्मा में विराजमान इस परमात्मा को धीर पुरुष परा विद्या से साक्षात्कार किया करते हैं;क्योंकि यह ओ३म् इन्द्रियातीत है।
वह नित्य,विभु,सर्वव्यापक,सूक्ष्म,अव्यय तथा सब प्राणियों का कारण है।
वह गोत्र,वंश,आंख,कान,हाथ,पांव से रहित है।
वह संसार की बीज शक्ति है।वह अशरीर है।वह नाडी आदि बन्धनों से जकडा नहीं है।वह मलरहित है।
पाप उसको बांध नहीं सकते।कोई स्थान उससे रिक्त नहीं।
उसका कोई उत्पादक नहीं है।
वह सवयं अपना स्वामी है।उसने अपनी सनातन प्रजाओं के लिए पदार्थों का ठीक ठीक रीति से विधान बनाया है। यजु: ४०/८ ।


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Thursday, September 1, 2016

संस्कार या बेड़िया 🙍 एक गृहणी वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी । किचन में आई और...

संस्कार या बेड़िया 🙍

एक गृहणी वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी ।
किचन में आई और चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ाया।
फिर बच्चों को नींद से जगाया ताकि वे स्कूल के लिए तैयार हो सकें ।
कुछ ही पलों मे वो अपने सास ससुर को चाय देकर आयी फिर बच्चों का नाश्ता तैयार किया और इस बीच उसने बच्चों को ड्रेस भी पहनाई।
फिर बच्चों को नाश्ता कराया।
पति के लिए दोपहर का टिफीन बनाना भी जरूरी था।
इस बीच स्कूल की बस आ गयी और वो बच्चों को बस तक छोड़ने चली गई ।
वापस आकर पति का टिफीन बनाया और फिर मेज़ से जूठे बर्तन इकठ्ठा किये ।
इस बीच पतिदेव की आवाज़ आई की मेरे कपङे निकाल दो ।
उनको ऑफिस जाने लिए कपङे निकाल कर दिए।
अभी पति के लिए उनकी पसंद का नाश्ता तैयार करके टेबिल पर लगाया ही था की छोटी ननद आई और ये कहकर ये कहकर गई की भाभी आज मुझे भी कॉलेज जल्दी जाना, मेरा भी नाश्ता लगा देना।
तभी देवर की भी आवाज़ आई की भाभी नाश्ता तैयार हो गया क्या?
अभी लीजिये नाश्ता तैयार है।
पति और देवर ने नाश्ता किया और अखबार पढ़कर अपने अपने ऑफिस के लिए निकल चले ।
उसने मेज़ से खाली बर्तन समेटे और सास ससुर के लिए उनका परहेज़ का नाश्ता तैयार करने लगी ।
दोनों को नाश्ता कराने के बाद फिर बर्तन इकट्ठे किये और उनको भी किचिन में लाकर धोने लगी ।
फिर उसने सारे बर्तन धोये अब बेड की चादरें वगेरा इकट्ठा करने पहुँच गयी और फिर सफाई में जुट गयी ।
अब तक 11 बज चुके थे, अभी वो पूरी तरह काम समेट भी ना पायी थी कि दरवाजे पर खट खट आवाज आयी ।
दरवाज़ा खोला तो सामने बड़ी ननद और उसके पति व बच्चे सामने खड़े थे ।
उसने ख़ुशी ख़ुशी सभी को आदर के साथ घर में बुलाया और उनसे बाते करते करते उनके आने से हुई ख़ुशी का इज़हार करती रही ।
ननद की फ़रमाईश के मुताबिक़ नाश्ता तैयार करने के बाद अभी वो नन्द के पास बेठी ही थी की सास की आवाज़ आई की बहु आज खाने का क्या प्रोग्राम हे ।
उसने घडी पर नज़र डाली तो 12 बज रहे थे ।
उसकी फ़िक्र बढ़ गयी वो जल्दी से फ्रिज की तरफ लपकी और सब्ज़ी निकाली और फिर से दोपहर के खाने की तैयारी में जुट गयी ।
खाना बनाते बनाते अब दोपहर का दो बज चुके थे ।
बच्चे स्कूल से आने वाले थे, लो बच्चे आ गये ।
उसने जल्दी जल्दी बच्चों की ड्रेस उतारी और उनका मुंह हाथ धुलवाकर उनको खाना खिलाया ।
इस बीच छोटी नन्द भी कॉलेज से आगयी और देवर भी आ चुके थे ।
उसने सभी के लिए मेज़ पर खाना लगाया और खुद रोटी बनाने में लग गयी ।
खाना खाकर सब लोग फ्री हुवे तो उसने मेज़ से फिर बर्तन जमा करने शुरू करदिये ।
इस वक़्त तीन बज रहे थे ।
अब उसको खुदको भी भूख का एहसास होने लगा था ।
उसने हॉट पॉट देखा तो उसमे कोई रोटी नहीं बची थी ।
उसने फिर से किचन की और रुख किया तभी पतिदेव घर में दाखिल होते हुये बोले की आज देर हो गयी भूख बहुत लगी हे जल्दी से खाना लगादो ।
उसने जल्दी जल्दी पति के लिए खाना बनाया और मेज़ पर खाना लगा कर पति को किचन से गर्म रोटी बनाकर ला ला कर देने लगी ।
अब तक चार बज चुके थे ।
अभी वो खाना खिला ही रही थी की पतिदेव ने कहा की आजाओ तुमभी खालो ।
उसने हैरत से पति की तरफ देखा तो उसे ख्याल आया की आज मैंने सुबह से कुछ खाया ही नहीं ।
इस ख्याल के आते ही वो पति के साथ खाना खाने बैठ गयी ।
अभी पहला निवाला उसने मुंह में डाला ही था की आँख से आंसू निकल आये पति देव ने उसके आंसू देखे तो फ़ौरन पूछा की तुम क्यों रो रही हो ।
वो खामोश रही और सोचने लगी की इन्हें कैसे बताऊँ की ससुराल में कितनी मेहनत के बाद ये रोटी का निवाला नसीब होता हे और लोग इसे मुफ़्त की रोटी कहते हैं ।
पति के बार बार पूछने पर उसने सिर्फ इतना कहा की कुछ नहीं बस ऐसे ही आंसू आगये ।
पति मुस्कुराये और बोले कि तुम औरते भी बड़ी “बेवक़ूफ़” होती हो, बिना वजह रोना शुरू करदेती हो।

👩 सभी ग्रहणीयों को नमन जिनकी वजह से हमारे घरों में प्यार ममता वात्सल्य की गंगा बहती है, और उनका समर्पण अतुलनीय है।

धन्यवाद.. जय गुरु देव


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🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 ओ३म् इच्छन्तिदेवाः सुंवन्तम् न स्वप्नाय स्पृहयन्ति। यन्ति प्रमाद मतंद्राः।। सामवेद...

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 ओ३म् इच्छन्तिदेवाः सुंवन्तम् न स्वप्नाय स्पृहयन्ति। यन्ति प्रमाद मतंद्राः।। सामवेद ~~ उ0~~ १~२~३~३~~ मंत्र का पद्यानुवाद ~~ हे परमेश्वर आपकी वाणी। कहती सुन लो प्यारे प्राणी।। निद्रा और आलस्य को त्यागो। विषय भोग की ओर न भागो।। चलो सदा मेरे अनुकूल। विमल बनो सुरभित ज्यों फूल।। पुत्र बनो तुम प्यारे प्यारे। पिता तुम्हारा तुम्हें पुकारे।।👏~~~~~~~~विमलेश बंसल आर्या~~~~~~~~~~~शुभ रात्रि आओ जपें गायत्री🙏🙏🙏🙏🙏


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📕📘 *।। ओ३म् ।।* 📙📔 🌎🌍🌏 *।।सर्वे भवन्तु सुखिनः।।* ✝☪🕉☸🔯 ...

📕📘 *।। ओ३म् ।।* 📙📔

🌎🌍🌏
*।।सर्वे भवन्तु सुखिनः।।*
✝☪🕉☸🔯

🎬
📢 *विषेश कार्यक्रम* 🔊

🚩 *ईश्वर का स्वरूप* 🚩

👉🏾 *जानना क्यू जरूरी है ❓*

प्रश्न :👉🏾क्या संसार में गणित विषय में झगड़ा है ?
उत्तर :👉 *नहीं, जैसे 2+2=4 सभी मानते हैं।*

प्रश्न :👉🏾क्या संसार में विज्ञान विषय में झगड़ा है ?
उत्तर :👉 *नहीं, जैसे H2O=Water 💦 सभी मानते हैं।*

प्रश्न :👉🏾क्या संसार में ईश्वर विषय में झगड़ा है ?
उत्तर :👉 *जी हां..! जैसे कि ईश्वर कि सत्ता,नाम,स्थान आकार,लिंग, कर्म, पुस्तक,अवतार,दूत - मसीहा - पैगंबर - को भेजना आदि विषयों में अलग-अलग मत, मान्यताएं हैं।*
*सभी अपनी-अपनी मान्यताओं पर अड़े हुए हैं। तदुपरांत सभी अपनी-अपनी मान्यताओं को दूसरों पर जबरदस्ती थोपने के लिए तुले हुए हैं। इसी कारण आज संसार में युध्द,आतंकवाद,दंगा - फसाद, हल्ला,लडाई,झगड़े आदि होते रहते हैं।*

प्रश्न :👉🏾क्या किसी भी प्रश्न का सही उत्तर एक ही होता है या अनेक ?
उत्तर :👉 *सही उत्तर एक ही होता है।*

प्रश्न :👉🏾क्या ईश्वर विषय में संसार में एक मान्यता नही हो सकती ?
उत्तर :👉 *अवश्य हो सकती है। यदि सभी मत,पंथ, संप्रदाय, मजहब वाले मिलकर चाहे तो बुध्दिमता पूर्वक ईश्वर विषय में चिंतन-मनन करके एक मान्यता हो सकती है।*

प्रश्न :👉🏾बुध्दिमता पूर्वक चिंतन-मनन करके सत्य को कौन जान सकता है ?
उत्तर :👉 *जो व्यक्ति अपनी लोकेषणा, वित्ते़षणा,पुत्रेषणा तथा हठ,जिद्द का त्याग करके बुध्दिमता पूर्वक चिंतन-मनन करता है केवल वही सत्य को जान सकता है।*

🙏


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🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ॐ अर्चत प्रार्चता नरः प्रिय मेधासो अर्चत| अर्चन्तु पुत्रका उत पुरमिद्...

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ॐ अर्चत प्रार्चता नरः प्रिय मेधासो अर्चत| अर्चन्तु पुत्रका उत पुरमिद् धृष्ण्वर्चत||~~~~~~~~सामवेद~पू0~4~2~3~3~~~~मन्त्र का पद्य में भाव~~~~~~~~~~~कृपा सिंधु, करुणामय सिंधु! करते बार बार उपदेश| अपने भक्त जनों पर तो, बरसाते अमृत भर विमलेश| आओ मेरे प्यारे पुत्रो!, पिता तुम्हारा तुम्हें बुलाता| यज्ञ कर्म करने वालों को, हर क्षण निज आनन्द दिलाता| आप्त काम और पूर्ण काम, मैं कामना पूरी करता हूँ| विमल अर्चना, यजन जो करते, बन प्रेमी खुशियाँ भरता हूँ||👏


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