[7/15, 09:20] Swami Santanad: 🙏🙏🙏ॐ प्रजापते न त्वदे तान्यन्यो विश्वाजातानि परिता वभूव| यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्तु वयम् स्याम पतयो रयीणाम्||~~~~ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना मन्त्र के छठें मन्त्र का पद्य में भाव~~~~ प्रजापति हे प्रजा के स्वामी, तुझसे भिन्न न कोई है| सर्वाधार सर्व जग पालक, सर्वोपरि विभु तू ही है| जड़ चेतन सब तेरी रचना, जगी है या फिर सोई है| करें कामना शिवमय तुमसे, तूने सृष्टि संजोई है| हे प्रभु मांग रहे वर तुमसे, पूर्ण कामना कर देना| श्रद्धा,भक्ति, श्री, दौलत से सबकी झोली भर देना||
[7/15, 09:55] +91 94121 17965: वाचा वदामि मधुमत्- अहो! भगवती श्रुति का कैसा सुन्दर उपदेश है कि हम सब परस्पर वाणी से मधुर बोलें। वही वाणी धन्य है कि जो मधुर, प्रिय, सत्य,कल्याणकारी, आवश्यक व परिमित अर्थ वाली हो। वाणी कर्मेन्द्रिय है इसके निग्रह करने का इच्छुक कर्मनिष्ठ प्रात:उठकर प्रतिज्ञा कर लेता है कि अब से लेकर रात्रि तक मेरी भाषा सुरम्य वआकर्षक होगी।वह भगवद्गुणकीर्तन का राग अलापती हुई उसी में लीन होकर मुझे भी अपना आपा भुला देने के लिये विवश कर देगी।विष्णुमित्र वेदार्थी
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