🌻🌻ओ३म्🌻🌻
भूपेश आर्य
दमा की अद्भुत दवा:-
(1) धतूरे का १-१ बीज आठ दिन तक प्रातः पानी से निगल लें।दूसरे सप्ताह दो-दो बीज लें।इसी प्रकार प्रति सप्ताह एक-एक बीज बढ़ाते हुए पाँचवें सप्ताह ५-५ बीज प्रतिदिन लें।दमा कितना भी पुराना हो मिट जायेगा।
(2) निर्मली के बत्तीस दानें मिट्टी के बर्तन में पानी में डाल दें।पानी को प्रतिदिन बदल दें।पाँचवे दिन से दो दानें प्रातः और दो दाने सांय लगातार आठ दिन तक सेवन करने से दमा,खाँसी,कालीखाँसी जड़मूल से समाप्त हो जाती हैं।सांस फूलना,खाँसी के कारण रात्रि में नींद न आना,दुर्बलता के कारण चक्कर आना आदि सभी उपद्रव शान्त हो जाते हैं।
नोट-दूध बिल्कुल न पीएँ।
इन बीजों के सेवन से शरीर दिन-पर-दिन स्वस्थ होता जाता है,रक्त शुद्ध होकर नया रक्त बनने लगता है।पेट के कीड़े मर जाते हैं,कब्ज दूर हो जाती है।इन बीजों को चबाकर खाना चाहिये।
(3) मोर के पंखों को जलाकर राख बना लें।इसमें से एक रत्ती (दो ग्रेन) पान में रखकर खिलाया करें।८-१० दिन में रोग का नाम भी नहीं रहेगा।चमत्कारी योग है।
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