🍎🍎मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीरधारी गुरु की आवश्यकता है वा नहीं ? आवश्यकता है ।🍎🍎
प्रश्न = वैदिक धर्म में गुरु बनाने की परम्परा है या नहीं ?
उत्तर = वैदिक धर्म में गुरु बनाने की परम्परा है ।
प्रश्न = गुरु किसको बनाया जाये ?
उत्तर = जिसको गुरु के रूप में स्वीकार किया जाये वह वास्तविक गुरु हो। अर्थात् वास्तविक गुरु में निम्नलिखित लक्षण होने चाहियें।
वास्तविक गुरु के लक्षण –
1- वेद और वेदानुकूल ऋषिकृत ग्रन्थोंके पठन पाठन को मुक्ति का साधन मानने वाला हो ।
2- सत्यमानी, सत्यवादी, सत्यकारी हो।
3- पुत्रैषणा, वित्तैषणा और लोकैषणा का त्यागी
हो।
4- ईश्वर जीव और प्रकृति को पृथक - पृथक्
मानने वाला हो ।
5- स्वयं अष्टांगयोग का अनुष्ठान करने वाला हो।
6- सकाम कर्मों को छोड़कर निष्काम कर्म करने
वाला हो ।
7- अपनी उन्नति के तुल्य प्राणिमात्र की उन्नति
चाहने वाला हो।
8- पक्षपातरहित न्यायकारी हो।
9- मद्य मांसादि अभक्ष्य खान -पान करने वाला न
हो।
10- मोक्ष की प्राप्ति करने - करवाने को मानव
जीवन का मुख्य लक्ष्य मानने वाला हो ।
11- वेद, दर्शन, उपनिषद् आदि ग्रन्थों में वर्णित
योग विद्या का प्रचार- प्रसार करने वाला हो
इत्यादि ।
किसी व्यक्ति में लम्बे काल तक इन गुणों का परीक्षण करना चाहिए । लम्बे परिक्षण के पश्चात् यदि उस व्यक्ति में उपर्युक्त गुण उपलब्ध हों, तभी उसे गुरु बनाना चाहिये 🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎
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