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निरुक्त (यास्काचार्य) के अनुसार,
निम्नलिखित 4 देव कहलाते हैं:
१) दान - जो दान करे
२) दीपन - जो प्रकाश दे
३) द्योतन - जो सत्य उपदेश करे
४) द्युलोकस्थ - जो द्युलोक में स्थित है।
उपर्युक्त 4 गुण जिसमें हो उसे देव कहते है, यदि उसका नाम स्त्रीलिंग है, तो उसे देवी कह देते हैं।
परमात्मा के अनन्त नाम होने से सभी नाम उस एक परमात्मा के भी हैं।
🔥 विष्णु = सूर्य 🔥
पुराणों में विष्णु:
विष्णुपुराण के अध्याय-१५ के अनुसार,
विष्णु, शक्र, अर्यमा, धाता, त्वष्टा, पूषा, विवस्वान्, सविता, मित्र, वरुण, अंश और भग ये 12 नाम सूर्य के हैं।
महाभारत, निघण्टु, वेदों के अनुसार, विष्णु नाम सूर्य का है।
🔥 ब्रह्मा = वायु 🔥
वेदों में विष्णु, रूद्र(शिव) आदि देवता होने से उनकी पूजा होती है, किन्तु ब्रह्मा नाम का किसी मन्त्र का देवता नहीं होने से ब्रह्मा की पूजा नहीं होती।
ब्रह्म, ब्रह्मा का अर्थ महान भी होता है।
स्वायम्भुव मन्वन्तर में (1 अरब 96 करोड़ वर्ष पूर्व) ब्रह्मा नाम के महापुरुष हुए थे जो की चारों वेदों के विद्वान् होने से चतुर्मुख कहलाये।
यज्ञ में भी वेदों के विद्वान् को ब्रह्मा कहते हैं।
भूमि के लगभग 12 योजन ऊपर तक वायु भरा हुआ है। सूर्य की तीक्ष्ण और उष्ण (hot) किरणें जब इस वायु के बीच प्रविष्ट होता है, तब वायु गतिमान होकर इधर-उधर चलने लगता है। इस कारण वायु (ब्रह्मा) को सूर्य (विष्णु) का पुत्र भी कहते हैं। चूँकि सूर्य-किरणों से यह चारों ओर फैलता है, अतः इसे चतुर्मुख भी कहते हैं।
समुद्र आकाश को कहते हैं। विष्णु (सूर्य) आकाश में शयन करता है, सूर्य की किरणें मानो कमलनाल है।
वायु की शक्ति शब्द है, यदि वायु ना हो तो हमें कोई शब्द सुनाई नहीं देगा।
🔥 सरस्वती = शब्द(वाणी) 🔥
वैदिक शब्दकोश निघण्टु (१।११) के अनुसार, श्लोक, गौरी, भारती, सरस्वती आदि 57 नाम वाणी के हैं।
अमरकोश प्रथम काण्ड ६.१ के अनुसार, सरस्वती शब्द वेदों में नदी और वाणी दोनों अर्थों में प्रयुक्त हुआ है।
ऋग्वेद मण्डल-१, सूक्त-१३, मन्त्र-९ के अनुसार, इळा, सरस्वती और मही ये तीन प्रकार की देदीप्यमान वाणी सुख उत्पन्न करने वाली और सरस है।
इनके भेद संगीतशास्त्र से प्रकट होते हैं।अन्य मन्त्रों में मही के स्थान पर प्रायः ‘भारती’ शब्द आता है।
चारों वेदों में 3 प्रकार की वाणियाँ (ऋक्, यजु, साम) हैं।
उच्चारण के मुख्य 3 स्वर उदात्त, अनुदात्त, स्वरित होते हैं। ऐसे 7 स्वर गायन के और 7 स्वर उच्चारण के होते हैं।
-साभार त्रिदेव निर्णय
-लेखक पण्डित शिवशंकर शर्मा
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