🌷🌷🌷🌷ओ३म्🌷🌷🌷🌷
भूपेश आर्य
🌷नास्तिक द्वारा ईश्वर की सत्ता में किया गया प्रतिषेध:-
१.प्रतिज्ञा-ईश्वर नहीं है।
२.हेतु-संसार बना-बनाया होने से।
३.उदाहरण-पृथ्वी के समान।
४.उपनय-जैसे पृथ्वी बनी बनाई है,इसको बनते हुए किसी ने नहीं देखा,वैसे ही यह सम्पूर्ण संसार है।
५.निगमन-इसलिए संसार बना बनाया होने से ईश्वर नहीं है।
व्याख्या:-यह दिखाई देने वाला संसार न तो किसी ने बनाया है,और न ही यह अपने आप बना है;न तो इसको कोई नष्ट करेगा,और न ही कभी अपने आप नष्ट होगा।यह अनादि काल से ऐसे ही बना बनाया चला आ रहा है और अनन्त काल तक ऐसे ही चलता रहेगा।इस संसार के बनाने वाले किसी कर्त्ता को ,किसी ने कभी नहीं देखा।यदि देखा होता तो मान भी लेते कि हाँ,इसका कर्त्ता कोई ईश्वर है।इसलिए कर्त्ता न दिखाई देने से यही बात ठीक लगती है कि यह संसार बिना कर्ता के अनादिकाल से ऐसे ही बना बनाया चला आ रहा है और आगे भी अनन्तकाल त चलता रहेगा।
🌷आस्तिक द्वारा ईश्वर की सत्ता में किया गया मण्डन:-
१.प्रतिज्ञा-ईश्वर है।
२.हेतु-संसार का कर्त्ता होने से।
३.उदाहरण-बढई के समान।
४.जैसे बढ़ई मेज-कुर्सी का कर्त्ता होता है,वैसे ही ईश्वर संसार का कर्त्ता है।
५.निगमन-इसलिए संसार का कर्त्ता होने से ईश्वर है।
व्याख्या:-प्रत्येक वस्तु के कर्त्ता का निर्णय केवल प्रत्यक्ष देखकर ही नहीं होता,बल्कि अनुमानादि प्रमाणों से भी कर्त्ता का निर्णय होता है।बाजार से हम प्रतिदिन ऐसी अनेक वस्तुएँ लाते हैं,जिनको कारखानों,फैक्ट्रियों आदि में बनाया जाता है।इन वस्तुओं को बनाते हुए,कारिगरों को हम नहीं देख पाते हैं,तो क्या हम उन सबको बनी-बनाई मान, लेते हैं?जैसे कि पेन,घड़ी,रेड़ियो,टेपरिकार्डर,टेलीविजन,कार आदि।कोई भी विद्वान इन वस्तुओं को बनी बनाई नहीं मानता है।ऐसी अवस्था में पृथ्वी आदि विशाल ग्रह-उपग्रहों को बनाते हुए यदि हमने नहीं देखा तो यह कैसे मान लिया जाए कि ‘ये बने बनाए ही हैं'।जैसे पें,घड़ी,रेड़ियो,कार आदि को बनाने वाले कारीगर कारखानों में इनको बनाते हैं,वैसे ही पृथ्वी आदि पदार्थों को भी कोई न कोई अवश्य बनाता है।जो बनाता है,वही ईश्वर है।
किसी भी व्यक्ति ने अपने शरीर को बनते हुए नहीं देखा तो क्या यह मान लिया जाए कि 'हम सबका शरीर सदा से बना-बनाया है-यह कभी नहीं बना !’
ऐसा तो मानते हुए नहीं बनता।क्योंकि हम प्रतिदिन ही दूसरों के शरीरों को जन्म लेता हुआ देखते हैं और ऐसा अनुमान करते हैं कि जन्म से ९-१० मास पहले यह शरीर नहीं था।इस काल में इस शरीर का निर्माण हुआ है।जबकि हमने शरीर को बनते हुए नहीं देखा,फिर भी इसको बना हुआ मानते हैं।ठीक इसी पसे पृथ्वी आदि पदार्थो को भी यदि बनते हुए न देख पाये,तो इतने मात्र से यह सिद्ध नहीं हो जाता कि पृथ्वी आदि संसार के पदार्थ सदा से बने बनाये है।जैसे हमने अपने शरीरों को बनते हुए नहीं देखा,फिर भी इन्हें बना हुआ मानते हैं,ऐसे ही पृथ्वी आदि पदार्थ भी हमने बनते हुए नहीं देखे,परन्तु ये भी बने हुए हैं,ऐसा ही मानना चाहिए।
'पृथ्वी बनी है’ इसे हम इस प्रकार भी समझ सकते हैं।जो भी वस्तु टूट जाती है,वह वस्तु कभी ना कभी अवश्य ही बनी थी,यह सिद्धान्त है।जैसे गिलास के किनारे पर एक हल्की चोट मारने से गिलास का एक किनारा टूट जाता है और यदि गिलास पर बहुत जोर से चोट मारी जाए,तो पूरा-गिलास चूर-२ हो जाता है।वैसे ही पृथ्वी के एक भाग पर फावले-कुदाल से चोट मारने पर इसके टुकड़े अलग हो जाते हैं,तीव्र विस्फोटकों=(Dynamite) आदि साधनों के द्वारा जोर से चोट करने पर बड़े-२ पहाड़ आदि भी टूट जाते हैं।इसी प्रकार अणु-परमाणु बमों आदि से बहुत जोर से चोट मारी जाए तो तरह पूरी पृथ्वी भी टूट सकती है।इससे सिद्ध हुआ कि गिलास जैसे टूटा था-तब जबकि वह बना था,इसी प्रकार से पृथ्वी भर यदि टूट जाती है,तो वह भी अवश्य ही बनी थी।और इसको बनाने वाला ईश्वर ही है।
विज्ञान का यह सिद्धान्त है कि संसार का सूक्ष्मतम भाग परमाणु ही केवल ऐसा तत्त्व है,जिसको न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।परमाणु से स्थूल संसार के जितने भी पदार्थ हैं,वे छोटे-छोटे परमाणुओं से मिलकर बने हैं।और क्योंकि वे मिलकर बने हैं,इसलिए नष्ट भी हो जाते हैं।इससे सिद्ध होता है कि पृथ्वी भी छोटे-२ परमाणुओं से मिलकर बनी है,वह सदा से बनी-बनाई नहीं है।और जब पृथ्वी बनी है,तो इसका बनाने वाला भी कोई न कोई अवश्य है।"कोई वस्तु अपने आप नहीं बनती"।इसलिए पृथ्वी आदि संसार के सभी पदार्थों को बनाने वाला ईश्वर भी है।
from Tumblr http://ift.tt/1QtxTQw
via IFTTT
No comments:
Post a Comment