😇 ऐसे ही कहते हैं प्रशाद चढाया , जब कि वास्तव में तो गिराते हें । प्रशाद ऊपर चढता तभी है जब वह अग्नि में डाला जाय और अग्नि देवता उसे सूक्षमीकृत करके ऊपर उठाता है और वायु देवता उसे पूरे ब्रह्मांड में फैला देता है । अग्नि देवता को सौपी वस्तु ऊपर उठकर सब व्यक्तियों को, पशु पक्षियों पेडों पौधों वनस्पतियों को अनायास ही प्राप्त होजाती है, इसी को प्रशाद चढाना कहते है । परजीवियों और मुफ्तखोरों ने मूर्ति के मुँह में थोडा लगाकर बडा भाग अपने लिए निकाल लेते हैं और थोडा वापस करते हैं । मीठा गोला मेवे मोहनभोग हसब कुछ तो अर्पित होता है और पंडे उसे बेच कर धन कमाते हैं । करोडों रूपये सोना चाँदी हीरे जवाहरात सब कुछ तो मूर्तियों पर चढाया जाता है ।
यही पैसा गुरुकुलों अस्पताल मिलिट्री आदि में लगाया जावे तो राष्ट्र का उत्थान होजावे ।
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