🎯मदर टेरेसा अधर्म की एजेंट#1, महा भ्रष्ट और ब्लैकमेलर महिला थी। आज़ादी के जद्दोजहद में उपजा नोआखली दंगा, अंग्रेजो का भारतीयों को आर्थिक और मानसिक गरीब और गुलाम बनाने के षड्यंत्र के तहत तैयार मिली भोली भाली, डरी, सहमी और अपनी बुद्धि विवेक खोयी जनता को मदर टेरेसा की ममतामयी भीख लेने के एवज में अपना धर्म छोड़ना कोई बहुत बड़ा लेन देन नहीं लगा। रोम के मिशन ईसाइयत के उद्गार के तहत, नोबल पुरुष्कार विजेता को ज्यादा कठिन और समय नहीं लगा समूचे बंगाल को अपनी बापतिज्मा दिलाने में। केस का निपटारा करना हो, पेट की भूख शांत करना हो, नौकरी लगानी हो, राजनीती करनी हो या राष्ट्रिय स्तर पे छाना हो…मदर टेरेसा सबका ख्याल रख रोटी पका के खिलाती थी। उसकी गरीबो, असहायो की दोगली मदद के फल स्वरुप आज हमारे ही लोग हमारे खिलाफ बन गए है। मदर टेरेसा उस मौकापरस्त बिल्ली से कम नहीं थी जो आपका ध्यान भटकते ही दूध चट कर जाती है। कहते है जिसने अपना धर्म छोड़ा वोह अधर्म में शामिल हो अपना विनाश खुद ही तय कर लेता है! जरुरत है ऐसे विदेशी अधर्मो की चालो को समझने और उनका बोरिया बिस्तर बांध कर वापस रोम भेजने में। कृपया देशहित के लिए ऐसी आयातित हस्तियाँ देश की दुर्गति ना कर दें इसका आगे भी विशेष ध्यान रखा जाये।
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