📢आर्योद्देश्यरत्नमाला 5⃣👉पाप🚩 जो पुण्य से उलटा और मिथ्या भाषणादि करना है । उसको “पाप कहते है । 6👉सत्यभाषण🚩 जैसा कुछ अपने आत्मा में हो और असंभवादि दोषो से रहित करके सदा वैसा ही बोले, उसको ” सत्यभाषण” कहते है ।
📢व्याख्या 🔊👉
1⃣➡जैसा कुछ अपने आत्मा मे हो अर्थात् मनुष्य का आत्मा सत्यासत्य को जानने वाला होता है इसलिए आत्मा के अनुसार ही हमे बोलना चाहिए तदनुसार अपना आचरण सुधारना चाहिए । तभी हम दूसरो के विश्वास पात्र बन सके गे । विश्वास खोने के बाद विश्वास पात्र बनने मे बहुत परिश्रम करना पडता है । सत्य भाषण से विश्वास बढता है । अतः जैसा कुछ अपने आत्मा मे हो वैसा बोलना लिखना आचरण करना चाहिए । असंभव अर्थात् कपोल कल्पना लोलम पोल छल कपटादि दोषो से रहित बोलना ही सत्यभाषण है । इससे आत्मिक उन्नति होती है ।
7⃣👉मिथ्याभाषण🚩
जो कि सत्यभाषण अर्थात् सत्य बोलने के विरुद्ध है, उसको “मिथ्याभाषण “कहते है । क्रमशः
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