📢आर्योद्देश्यरत्नमाला 8⃣👉विश्वास🚩 जिसका मूल अर्थ और फल निश्चय करके सत्य ही हो, उसका नाम “विश्वास ” है ।
📢 व्याख्या 🔊 🔜िसका मूल अर्थात् नीव (आधार )जिस पर विश्वास रूपी विशाल भवन खडा है उसका मूल =अर्थ और फल निश्चित रूप से सत्य ही होता है ।अर्थात् सत्य भाषण जो छल कपट से रहित शुद्ध अंतःकरण वाला व्यक्ति ही निश्चित रूप से विश्वास पात्र होता है । विश्वास पात्र ही सबके हृदय मे छा जाता है । ऐसे लोगो का सम्मान तो मित्र ही क्या शत्रु भी किया करते है । विश्वास बनाए रखने के कारण व्यक्ति सुख शांति समृद्धि निर्भयता को प्राप्त होता है ।
विष भले दो,विश्वास भले दो परंतु विश्वासघात कभी न करे।
8⃣🚩अविश्वास 👉
जो विश्वास का उलटा है, जिसका तत्व अर्थ न हो, वह “अविश्वास”
कहाता है ।
क्रमशः
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