📢आर्योद्देश्यरत्नमाला 2⃣👉 धर्म🚩व्यख्या2⃣
पक्षपात रहित न्याय सर्वहित करना है अर्थात् किसी भी प्रकार से पक्षपात नही करना चाहिए चाहे हमारा मित्र सम्बन्धी रिश्तेदार दूरका हो वा पास का हो गरीब हो या फिर अमीर हो कैसा भी हो सबके साथ निष्पक्ष हो कर व्यवहार करना ।कोई हम पर ऊंगली न उठा सके कि इस का अपना था तभी तो ऐसा हुआ ।पैसे वाला था कुछ दिया होगा ।हम गरीब है पैसा नही दे सकते। बिना रिश्वत दिए काम होता ही नही ।आम आदमी ऑफिसो मे धक्के खाता रहता है उस का काम नही होता पैसा खिलाने वाले का शीघ्र काम हो जाता है । यज्ञ मे बैठे आहूति दे रहे है ।अपना आया जगह देदी।दूसराआया पैर फैला दिए ।उसकी भी आहूति देने की इच्छा थी न दे पाया । एसा सब जगह समझो आहूति देने वाला भी पक्षपात कर रहा है ये न्यायोचित सर्वहित कर्म नही धर्म नही अधर्म है ।धर्म पर चले ।
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