“📢दयानंद उवाच
➡यद्यपि आजकल बहुत से विद्वान् प्रत्येक मतो मे है वे पक्षपात छोड सर्वतन्त्र सिद्धांत अर्थात् जो जो बाते सबके अनुकूल सब मे सत्य है, उनका ग्रहण और जो एक दूसरे से विरुद्ध बाते है, उनका त्याग कर परस्पर प्रीति से वर्ते वर्तावे तो जगत् का पूर्ण हित होवे।(सत्यार्थ प्रकाश भूमिका )”
from Tumblr http://ift.tt/1D1UcsF
via IFTTT
➡यद्यपि आजकल बहुत से विद्वान् प्रत्येक मतो मे है वे पक्षपात छोड सर्वतन्त्र सिद्धांत अर्थात् जो जो बाते सबके अनुकूल सब मे सत्य है, उनका ग्रहण और जो एक दूसरे से विरुद्ध बाते है, उनका त्याग कर परस्पर प्रीति से वर्ते वर्तावे तो जगत् का पूर्ण हित होवे।(सत्यार्थ प्रकाश भूमिका )”
from Tumblr http://ift.tt/1D1UcsF
via IFTTT
No comments:
Post a Comment