📢आर्योद्देश्यरत्नमाला 2⃣👉 धर्म🚩जिस का स्वरूप ईश्वर की आज्ञा का यथावत पालन और पक्षपात रहित न्याय सर्वहित करना है ,जो कि प्रत्यक्षादि प्रमाणो से सुपरीक्षित और वेदोक्त
होने से सब मनुष्यो के लिये यही एक मानने योग्य है, उसको धर्म कहते हैं।
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