🌿 संस्कृतवल्लरी
🙏
सुप्रभातम्
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नभोभूषा पूषा कमलवनभूषा मधुकरः।
वचो भूषा सत्यम् वरविभवभूषा वितरणम्।
मनोभूषा मैत्री मधुसमयभूषा मनसिजः।
सदोभूषा सूक्तिः सकलगुणभूषा च विनयम्॥
अर्थः-
🚩नभ( आकाश) की शोभा सूर्यनारायण है।
🚩कमल-पद्मकी शोभा मधुकर अर्थात् भँवरे है।
🚩वाणी की शोभा सत्य-पवित्रता है। 🚩समृद्धिकी शोभा दान-परोपकार है।
🚩 मन-विचारो की शोभा सबके साथ समान मैत्रीभाव है।
🚩समयकी शोभा प्रत्येक पल आन्दित रहना है।
🚩समूह गोष्ठिकी शोभा सत्यपूत वार्तालाप है।
और अंतमे -
🚩सभी गुणोंकी शोभा विनय है॥
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🌸🌸🌸🌸 जय जननी 🌸🌸🌸🌸
🚩🚩🚩 भारतमाता की जय🚩🚩🚩
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