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उपनिषदों में काल्पनिक कहानियाँ हैं जो वेदों की मान्यताओं को समझाती हैं ।
एक कहानी में एक बड़ा सेठ मरकर अगला जन्म एक सर्प सूअर या कीड़े का पाता है ।
उसने भगवान से पूछा- हे प्रभु ! मैंने पूरा जीवन गरीबों की मदद की । खूब दान दिया । कोई पाप नहीं किया । तेरी वेद आज्ञा से मैंने पूरा जीवन जिया । फिर मुझे नर्क ऐसे कीड़े के रूप में अगला जन्म क्योंमिल रहा है जो सारा दिन गंदगी खाता है । ( कुछ कीड़े कार्बन लेकर आक्सीजन छोड़ते हैं )
तो उपनिषद का ऋषि इस काल्पनिक कहानी में समझाता है -
प्रभु बोले - वास्तव में ही हे सेठ तूँ एक पुण्य आत्मा है । तूने कोई पाप नहीं किया । तेरा जीवन अनुकरणीय है ।
मगर तूने मल मूत्र आदि से जो गंदगी फैलाई पूरे जीवन में , अपने हिस्से की उस गंदगी के लिए कभी तूने हवन नहीं किया ।
बस तेरा वो कर्ज रह गया है । अभी तुझे एक दो जन्म और मिलेंगे कीड़े-मकोड़ों के । तब तूँ स्वर्ग का अधिकारी बनेगा ।
हे सेठ ! तेरे जीवन कार्यों से मैं अति प्रसन्न हूँ । तूँ मुझे अति प्रिय है मगर न्यायिक विधान को मैं नहीं बदल सकता ।
____________✒ वैदिक
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