🌷🌷🌷🌷ओ३म्🌷🌷🌷🌷
🌷सावधान गद्दारों से🌷
अगर जवानों जीना है,तो बन्द शस्त्र झंकार न करना।
कहो देवियों से जेवर और फैशन के संग प्यार न करना।।
पर्वत मालाएं गुंजत है शत्रु की हुंकारों से।
मशीन गन चल रही,बन्दूकें,तोपों की धुआंधारों से।।
महावीर नहीं घबराते कभी बम्ब,तोप,तलवारों से।
सावधान रहना लेकिन इन भारत के गद्दारों से।।
है शत्रु चालाक चोरटा इससे कोई इनकार न करना-।। १ ।।
होशियार रहना शिवाजी अफजल खाँ की चालों से।
पेट फाड़ना बाघनखा से खुद बचना चण्डालों से।।
दूध पिलाकर प्यार किया था,आपने विषधर कालों से।
वरना दुनिया भय माने थी भारत माँ के लालों से।।
एक सूत्र में बन्धकर रहना,अपनों पर प्रहार न करना-।। २ ।।
उलट पलट कर दूं लंका को पढ़ा लखन ऐलान नहीं क्या।
महाभारत में डाला था अर्जुन ने तीर कमान नहीं क्या।।
समरांगण में दिया कृष्ण ने गीता का व्याख्यान नहीं क्या।
कुरूक्षेत्र को करके रख दिया वीरों ने श्मशान नहीं क्या।
चित्तौड़ में जो जल रहे अब तक,ठंड़े वो अंगार न करना-।। ३ ।।
भारतीय वीरों की वीरता दिखा रही आलोक जगत में।
अश्वमेध का घोड़ा छोड़ा पकड़ सका ना कोई जगत में।।
राणा,शिवा,नलवा कर गए सफल मात की कोख जगत में।
सच पूछो तो बदनाम हो गई अब टोपी की नोंक जगत में।।
जवान कायर बनै “भीष्म” कभी तू ऐसा प्रचार न करना-।। ४ ।।
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