🌻🌻🌻ओ३म्🌻🌻🌻
🌷मूर्ति-पूजा🌷
भारत की अवनति का मूल और सबसे प्रमुख कारण है ‘मूर्ति-पूजा'।इस विषय में हम बाबू श्री देवेन्द्रनाथ जी मुखोपध्याय के स्वर-म़े-स्वर मिलाकर कहना चाहते हैं:-
“मूर्ति पूजा ने भारत के अकल्याण की जो सामग्री एकत्र की है,उसे लेखनी लिखने म़े असमर्थ है।मूर्ति पूजा ने भारतवासियों का जो अनिष्ट किया है,उसे प्रकट करने म़े हमारी अपूर्ण-विकसित भावप्रकाशक शक्ति अशक्त है।
जो धर्म सम्पूर्ण भाव से आन्तरिक वा आध्यात्मिक था,उसे सम्पूर्ण रुप से वाह्य किसने बनाया?-मूर्ति पूजा ने।काम आदि शत्रुओं के दमन और वैराग्य के साधन के बदले तिलक और त्रिपुण्ड किसने धारण कराया?-मूर्ति पूजा ने।ईश्वर भक्ति,ईश्वर प्रिति,परोपकार और स्वार्थ-त्याग के बदले अंग में गोपी-चन्दन का लेपन,मुख से गंगा लहरी का उच्चारण,,कण्ठ में अनेक प्रकार की मालाओं का धारण किसने कराया?-मूर्ति पूजा ने।संयम,शुद्धता,चित्त की एकाग्रता आदि के साथ में त्रीसीमा(धारणा,ध्यान,समाधि) में प्रवेश न कर केवल दिनविषेश पर खाद्य सामग्री का सेवन न करना,प्रातःकाल,मध्याह्न काल और सांयकाल में अलग-अलग वस्त्रों के पहनने का आयोजन और तिथिविषेश पर मनुष्यविषेश का मुख देखना तो दूर रहा,उसकी छाया तक का स्पर्श न करना,यह सब किसने सिखाया?-मूर्ति पूजा ने।
हिन्दुओं के चित्त से स्वाधीन चिन्तन की शक्ति किसने हरण की?-मूर्ति पूजा ने।
हिन्दुओं के मनोबल,उदारता,पराक्रम और सत्साहस को किसने दूर किया?-मूर्ति पूजा ने।प्रेम,संवेदना और परदुःखानुभूति के बदले घोरतम स्वार्थपरता को हिन्दुओं के चरित्र में कौन लाई?-मूर्ति पूजा।हिन्दुओं को अमानुष,अपितु पशुओं से भी अधम किसने बनाया?-मूर्ति पूजा ने।आर्यावर्त्त के सैकड़ों टुकड़े किसने किये?-मूर्ति पूजा ने।आर्यजाति को सैकड़ों टुकड़ों में किसने बाँटा?-मूर्ति पूजा ने।इस देश को सैकड़ों वर्षों से पराधीनता की बेड़ी में किसने जकडे रखा?-मूर्ति पूजा ने।कौन सा अनर्थ है,जो मूर्ति पूजा द्वारा सम्पादित नहीं हुआ?
सच्ची बात तो ये है कि आप चाहे हाईकोर्ट के न्यायाधीश हों या गवर्नर,आप चाहे बुद्धि में बृहस्पति के तुल्य हो या वाग्मिता में गेटे से भी बढ़कर,चाहे कितने ही बड़े आदमी हों परन्तु यदि किसी अंश में भी आप मूर्ति पूजा का समर्थन करेंगे,तो हमें ये कहने में संकोच नहीं होगा कि आप किसी अंश में भी भारत के मित्र नहीं हो सकते,क्योंकि मूर्ति-पूजा भारत के सारे अनिष्टों का मूल है।”
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