🌷 अंग्रेज़ी शिक्षा क्यों ? 🌷
डॉ. गौतम श्रीमाली
आज हर व्यक्ति ,चाहे वह धनी हो
निर्धन हो , मजदूर हो , अधिकारी हो,
पुरोहित हो , विद्वान हो या अशिक्षित
हो, सब अपने बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में अंग्रेज़ी शिक्षा के लिए भेजना चाहता है। क्यों ?????
वह इसलिए , क्योंकि जब वह सरकारी स्कूलों में आरक्षण से आए
अध्यापकों को देखता है । वहाँ के पढ़ाने का ढंग देखता है । वहाँ से
निकले छात्रों का भविष्य देखता है कि
किस प्रकार वे वहाँ से अयोग्य बनकर
निकलते हैं तो उसे शिक्षा और शिक्षा
पद्धति से घृणा हो जाती है।
वह प्रतिज्ञा कर लेता है कि भले ही वह
मेहनत मजदूरी करेगा लेकिन अपने
बच्चे को वह सरकारी स्कूल में नहीं
पढ़ाएगा।
आचार्य चाणक्य ने कहा है —-
अर्थकरी च विद्या अर्थात् विद्या
धन देने वाली भी हो। पहले लोग
केवल ज्ञान के लिए पढ़ते थे। अब ज्ञान की परिभाषा बदल गई है। अब ज्ञान वह जो धन दे। जो धन न दे सके
वह विद्या व्यर्थ है।
शिक्षा को क्रियात्मक practical
बनाना चाहिए , चाहे वह सरकारी स्कूल हो , गुरुकुल हो या अन्य कोई
शिक्षण संस्थान , सबका यह प्रथम
कर्तव्य है कि जब कोई छात्र विद्यालय
से निकले तो वह अपनी रोज़ी रोटी
कमा सके उसे इस योग्य अवश्य बनाए।
यदि बाहर निकल कर वह रोटी के लिए भटकने लगा तो यह शिक्षा नहीं है।
आज आरक्षण ने शिक्षा के प्रति लोगों
के मन में घृणा बैठा दी है। हमें इस प्रथा को रोकना होगा। योग्य शिक्षा
तथा योग्य अध्यापकों का प्रबंध करना
होगा। तभी शिक्षा को उसका गौरव
प्राप्त होगा।
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