Tuesday, August 16, 2016

🔴ओ३म्🔴 वह परमात्मा…..( अकाय )अर्थात् वह कभी शरीर धारण वा जन्म नहीं लेता ,जिसमें छिद्र नहीं...

🔴ओ३म्🔴
वह परमात्मा…..( अकाय )अर्थात् वह कभी शरीर धारण वा जन्म नहीं लेता ,जिसमें छिद्र नहीं होता ,नाड़ी आदि के बन्धन में नहीं आता और कभी पापाचरण नहीं करता, जिसमें क्लेश दु: ख अज्ञान कभी नहीं होता ,इत्यादि जिस जिस राग द्वेषादि गुणों से पृथक मानकर परमेश्वर की स्तुति करना है वह निर्गुण स्तुति है ।
सत्यार्थ प्रकाश, सप्तम समुल्लास

जब उपासना करना चाहें तब एकान्त शुद्ध देश में जाकर, आसन लगा, प्राणायाम कर बाह्य विषयों से इन्द्रियों को रोक, मन को नाभिप्रदेश में वा हृदय, कण्ठ, नेत्र , शिखा अथवा पीठ के मध्य हाड़ में किसी स्थान पर स्थिर कर अपने आत्मा और परमात्मा का विवेचन करके परमात्मा में मग्न हो कर संयमी होवें ।
सत्यार्थ प्रकाश ,सप्तम समुल्लास
साभर पं० चिन्तामणि वर्मा


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