Thursday, June 11, 2015

|| हमारे आस्तीनों में ही सांप है || भारत वर्ष विश्व गुरु था है और रहेगा, विश्व के आँगन में सृष्टि की...

|| हमारे आस्तीनों में ही सांप है ||
भारत वर्ष विश्व गुरु था है और रहेगा, विश्व के आँगन में सृष्टि की उत्पत्ति इसी भारत से हुई इस भारत ने अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं,यहाँ तक की इस भारत को मिटाने का प्रयास पश्चिमी देशों का बहुत पहले से ही रहा है | जो भारत को जानी दुश्मन मानते है, भारत ऋषि मुनियों का देश होने के कारण भारत वासियों को धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष, की शिक्षा ऋषि मुनियों ने भारत वासियों को इसके जन्मकाल से देते आये है | 
हमारे ऋषियों ने मानव मात्र को उपदेश देते हुए मानवता का पाठ पढ़ाया है क्यूंकि मानवता का आधार ही धर्म है, धर्म पर आचरण करने वालों का ही नाम मानव है | मानव में और पशु में यही तो भेद है, जो धर्म पर आचरण करता है उसका नाम मानव है, और जिनके लिए धर्म नही है उनका नाम पशु है | कारण मानव एक सामाजिक प्राणी है और मानवों के लिए सामाजिक बंधन है समाज के विरुद्ध अथवा मानवता के विरुद्ध कोई काम मानव करे तो मानव ही उसे टोकते है, की मानवता को तुमने शर्मसार कर दिया | इससे यह ज्ञात हुआ की मानव समाज के बन्धन में बंधे हुए है | यही कारण है समाज विरोधी कोई भी कार्य मानव करने लगे तो समाज के सारे लोग ही उसे कोसते है, दोष देते है और यहाँ तक कहते है की तुम मानव हो कर मानवता विरोधी कार्य करने में या समाज विरुद्ध कार्य करने में या फिर धर्म विरुद्ध कार्य करने में तुम्हे लज्जा नही आई ? 
इससे यह बात स्पष्ट हो गया मानव मात्र का धर्म एक है अनेक नही | सभी मानव अपनी माँ को माँ ही कहते है, जानते और मानते भी है | ठीक पिता को भी उसी तरीके से बहन को भी भाई को ठीक इसी तरीके से जानते और मानते है,यह है सामाजिक बन्धन,धार्मिक आचरण | 
क्या मानव कहलाने वाले कोई भी इसे अस्वीकार कर सकता है ? अगर किसी ने मानव कहला कर अपने माँ को माँ न माने, बहन को बहन न माने, उनके साथ दुराचार और बलात्कार करे तो मानव समाज में यह स्वीकार्य नही है | यही मानव समाज माँ और बहन के साथ दुराचार करने का बहिष्कार भी करते है, यहाँ भी हम मानव मात्र का धर्म एक ही देख रहे है और पा रहेंहै.क्या इसे कोई अस्वीकार कर सकता है ? 
इन्ही विचारों को सामने रख कर हर कोई मानव कहलाने वाले इस पर अमल करें अथवा आचरण में लाये यही मानवता की रक्षा है | किन्तु हम भारत वासियों के लिए यह दुर्भाग्य का कारण बना की आजतक हम मानव कहला कर भी धर्म और अधर्म नही जान पाए,और न ही औरों को जानकारी दे पाए, इसका मूल कारण है हमने अपने पाठ को सही और गलत क्या है आज तक जानने का साहस नही जूटा पाए | और नाहक ही अधर्म को धर्म, असामाजिक को सामाजिक, अमानवता को मानवता समझ कर मानों आस्तीनों में ही सांप पालने लगे | प्रमाण के तौर पर जिस परिवार के 13 आदमी मिलकर एक राजनैतिक पार्टी चलाये उसे हम समाजवादी पार्टी कह रहे है | जहाँ पर भाई-भतीजा वाद, बहु-बेटा वाद का बोल बाला हो उसे समाजवादी कहना क्या यह सत्य है ? 
जहाँ एक परिवार को लेकर लोग चल रहे हो और समाज क्या है उसे नही जाना, धर्म क्या है उसे भी नही जाना, राष्ट्र क्या है उसे भी नही जाना | वही लोग अपने को धर्म निरपेक्ष बता रहे है| धर्म का परिभाषा क्या है, धर्म एक के लिए है अथवा मानव मात्र के लिए है, उसे भी नही जाना | जहाँ एक स्त्री और एक पुरुष से दुनिया बनी है या सृष्टि की रचना हुई है, यह मानते है,मानव होकर दिमाग से विचार करने की जहाँ शक्ति न हो, अनुमति न हो,और यह भी जानने और मानने को तैयार न हो की एक स्त्री और एक पुरुष से सृष्टि की रचना होने पर जहाँ भाई बहनों में विवाह हो यह मान्यता जिनकी है वो लोग क्या जानेगें की धर्म क्या होता है ? यहाँ तक के अपने मुह बोला बेटे की पत्नी से जहाँ स्वसुर शादी रचाए उसे ही लोग धर्म कह रहे हैं | यही मान्यता इस्लाम वालों की है, यह मानते है एक पुरुष आदम और उनकी स्त्री से दुनिया बनी जिनके भाई बहनों में शादी हुई, धर्म का गला घोट कर भी अपने को धार्मिक होने का ढोंग रच कर समाज विरोधी कार्य कर भी, अपने को धार्मिक बताने का दम भर रहे है | ईसाई लोग भी एक स्त्री और एक पुरुष से सृष्टि की रचना हुई मानते है, और भाई बहनों में शादी हुई यह भी मानते हैं | सही में धर्म और अधर्म की परिभाषा को जहाँ पर अंकित न किया गया हो आज वही लोग इस अधर्म रूपी आचरण को मानव समाज में धर्म कहकर अपने को धर्म निरपेक्ष होने का दम भर रहे है | 
यहाँ तक की मानव समाज में धार्मिक उन्माद पैदा कर राष्ट्र विरोधी कार्य करने में भी संकोच नही करते | आदि सृष्टि से भारत एक धर्म प्रधान देश है जिस भारत ने सम्पूर्ण मानव समाज को धार्मिकता का पाठ पढ़ाया मात्र अपने शाहिष्णुता, और पुरी वसुधा को अपना कुटुम्ब मानकर सब को गले लगाने वाली यह भारत मानो आस्तीन में ही सांप पाल लिया हो | यही कारण बना हमने दोस्त और दुश्मन की पहचान भी नहीं कर सके | हमने जिन इसाई और मुस्लमान को अपने राष्ट्र में शरण दे कर उन्हें अपना माना आज वही लोग राष्ट्र विरोधी कार्य कर सम्पूर्ण भारत को अस्थिर करने में नही हिचकते | जिसका परिणाम आज सामने उभर कर आया जो योग प्रधान देश है जिस देश में पातंजलि जैसे ऋषि ने योग की स्थापना की आज उसी योग का विरोध भारत को झेलना पड़ रहा है ऋषि पातंजली को क्या पता था की जिस योग की स्थापना अपने भारत देश में की जा रही है, भारत वासियों को उसी का ही विरोध झेलना पड़ेगा ? भारत का कितना बड़ा दुर्भाग्य है जो लोग भारतीयता को तिलांजली देकर इस्लाम और ईसाइयत को पश्चिमी देश से लाकर भारत को अस्थिर किया भारत के मूल निवासी उन्ही लोगो को नही पहचान पाए, और आज उन्ही लोगों के द्वारा इसी भारत में ही ऋषि मुनियों की परम्परा का विरोध करने में नही थकते | काश ! अगर भारत के मूल निवासी अपने आस्तींनों में सांप न पाले होते, दोस्त और दुश्मन की पहचान किये होते, फिर प्रधान मंत्री द्वारा दिए गये प्रस्ताव का विरोध झेलना नही पढता | अब भी समय है भारत वासियों सांप को दूध पिलाना बन्द करो दोस्त और दुश्मन की पहचान करो और जो भारत में रहकर भारत विरोधी गतिविधि रखते है जो उनपर भी दृष्टि रखो अगर भारत माँ की लाज की रक्षा चाहते तो इस धर्म प्रधान देश को बचा लो वर्ना यह देश धर्म से वन्चित न हो जाये | 
महेन्द्र पाल आर्य ,वैदिक प्रवक्ता (दिल्ली) 8- 6-15


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