🎯 जैनियों की आचार संहिता की झांकी-:
1.जैनियों को बावड़ी, कुआँ, तालाब, नहीं बनवाना चाहिए।(श्राद्ध दिन कृत्य आत्म निंदा भावना पृ.31)
2.तिहुअणा जणम् मरंत दठूण निअंति जेन अप्पणम।
विरमंतिन पाता अघिद्धी धिठत्त्णं ताणम्।।
(प्रक.भा. 2 षष्ठी.सू.109)
अर्थ-जो मृत्यु पर्यन्त दुःख हो तो भी कृषि, व्यापरादि कर्म जैनी लोग न करें क्योंकि ये कर्म नरक में ले जाने वाले हैं।
3.भूंजने, कूटने, पीसने, अन्न पकाने आदि में पाप होता है।(रत्नसार पृ.105)
4.मृतक वस्त्र जैन साधु ले लेवें।(श्राद्ध दिन कृत्य पृ.36)
5.शरीर के मैल को न उतारें और न खुजलावें।(रत्नसार भाग 14.14)
6.जैन मत का साधू लिंगधारी अर्थात् वेशधारी मात्र भी हो तो उसका सत्कार श्रावक लोग करें चाहे साधु शुद्ध चरित्र हो चाहे अशुद्ध चरित्र सब पूजनीय हैं। (विवेकसार पृ.153)
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