🔹नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात!
बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!
🔹पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज!
कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!!
🔹भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास!
बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!
🔹मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश!
बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!!
🔹बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान!
पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!!
🔹पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग!
मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!!
🔹फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर!
पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर!
🔹पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!
भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!
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ये दोहे हरियाणा के प्रसिद्ध दोहाकार श्री रघुविन्द्र यादव जी के हैं जो उनके दोहा संग्रह नागफनी के फूल में 2011 में प्रकाशित हो चुके हैं । एक जिम्मेदारी शहरी होने के नाते या तो आपको उनका नाम लिखना चाहिए या नागफनी के फूल से साभार लिखना चाहिए ।
ReplyDeleteये दोहे हरियाणा के प्रसिद्ध दोहाकार श्री रघुविन्द्र यादव जी के हैं जो उनके दोहा संग्रह नागफनी के फूल में 2011 में प्रकाशित हो चुके हैं । एक जिम्मेदारी शहरी होने के नाते या तो आपको उनका नाम लिखना चाहिए या नागफनी के फूल से साभार लिखना चाहिए ।
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