Wednesday, March 11, 2015

🔹नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात! बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!! 🔹पानी आँखों का मरा,...

🔹नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात!

बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!

🔹पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज!

कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!!

🔹भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास!

बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!

🔹मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश!

बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!!

🔹बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान!

पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!!

🔹पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग!

मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!!

🔹फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर!

पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर!

🔹पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!

भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!




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2 comments:

  1. ये दोहे हरियाणा के प्रसिद्ध दोहाकार श्री रघुविन्द्र यादव जी के हैं जो उनके दोहा संग्रह नागफनी के फूल में 2011 में प्रकाशित हो चुके हैं । एक जिम्मेदारी शहरी होने के नाते या तो आपको उनका नाम लिखना चाहिए या नागफनी के फूल से साभार लिखना चाहिए ।

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  2. ये दोहे हरियाणा के प्रसिद्ध दोहाकार श्री रघुविन्द्र यादव जी के हैं जो उनके दोहा संग्रह नागफनी के फूल में 2011 में प्रकाशित हो चुके हैं । एक जिम्मेदारी शहरी होने के नाते या तो आपको उनका नाम लिखना चाहिए या नागफनी के फूल से साभार लिखना चाहिए ।

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