💐 ।। वेदामृतम् ।। 💐
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सं गच्छध्वं सं वदध्वं, सं वो मनांसि जानताम् ।
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ।।
- ऋग्. १०.१९१.२
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🌻अन्वय - (हे जना:) सं गच्छध्वम्, सं वदध्वम्, व: मनांसि सं जानताम् । यथा पूर्वे देवा: संजानाना: भागम् उपासते, (तथैव यूयं कुरुत)
☀शब्दार्थ- (हे जना:) हे मनुष्यो, (सं गच्छध्वम्) मिलकर चलो । (सं वदध्वम्) मिलकर बोलो । (वः) तुम्हारे, (मनांसि) मन, (सं जानताम्) एक प्रकार के विचार करे । (यथा) जैसे, (पूर्वे) प्राचीन, (देवा:) देवो या विद्वानों ने, (संजानाना:) एकमत होकर, (भागम्) अपने - अपने भाग को, (उपासते) स्वीकार किया, इसी प्रकार तुम भी एकमत होकर अपना भाग स्वीकार करो ।
☀हिंदी अर्थ- (हे मनुष्यों) मिलकर चलो । मिलकर बोलो । तुम्हारे मन एक प्रकार के विचार करें । जिस प्रकार प्राचीन विद्वान एकमत होकर अपना-अपना भाग ग्रहण करते थे, (उसी प्रकार तुम भी एकमत होकर अपना भाग ग्रहण करो) ।
☀Eng. Tr.- O Men! You should walk together, talk together and think alike. As your predecessors shared their assignments, so you must share your due.
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संगठित हो जाए । संगठन निर्बल को भी बलवान, शक्तिहीन को शक्तिशाली बना देता है ।
नीति का श्लोक है कि -
🎄संहति: श्रेयसी पुंसां सुगुणैरल्पकैरपि ।
तृणैर्गुणत्वमापन्नै: बध्यन्ते मत्तदन्तिन: ।।
सद् गुणयुक्त थोड़े व्यक्ति भी हों तो उनका संगठित होना कल्याणकारी है । तिनके मिलकर रस्सा बनते हैं और उनसे मत्त हाथी भी बांधे जा सकते हैं । संगठन की महिमा अपार है ।
समाज में प्रतिष्ठित रूप से जीवित रहने के लिए संगठन अनिवार्य है ।
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