🚩हनुमानजी बन्दर नही थे 🚩
मित्रो हनुमान जयंती आने वाली है पहले आप सब को एक महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहता हूँ । हमारे सभी धर्म ग्रन्थ संस्कृत भाषा में है । ये दुनिया की एक मात्र ऐसी भाषा है जो धातुओ(क्रियाओ) पर आधारित है मतलब इसके सारे शब्द क्रिया पर आधारित है जैसे गो शब्द में गम् धातु है जो गमन की सूचक है अब ध्यान दीजिये गो शब्द उन सब वस्तुओ के लिए प्रयोग होगा जो गमन करती हे जेसे गाय पृथ्वी और हमारी इंद्रिया । गाय को भी गो कहते है क्योकि वह चरति(विचरती)है। पृथ्वी भी घूमती है और हमारी इन्द्रिया भी दौड़ती रहती है और जो इन्द्रियों का स्वामी हो उसे गो स्वामी कहते है।
क्या सिद्ध हुआ संस्कृत में क्रिया के आधार पर किसी का नाम होता हे।
इसी प्रकार पवनपुत्र हनुमान जी को वानर इसलिए कहते है क्योकि वो वन में रहने वाले वन नर थे ।और बंदर भी वन के कारण वानर कहाते है।
कपि का अर्थ होता है कम्पन करने वाला बन्दर भी कम्पन्न करते हे और हनुमान जी भी जब चलते थे तो कम्पन्न होता था इसलिये उन्हें कपि भी कहा जाता है।
परन्तु आर्यो (हिन्दुओ)के दुर्भाग्य के कारण महाभारत युद्ध हुआ । उसमे सभी विद्वान लोग भी मारे गए और कोई भी वेदों का सही अर्थ करने वाला विद्वन नही रहा तो जिसके मन में जेसा आया वैसा अर्थ किया वाल्मीकि रामायण में कही भी हनुमान जी को बन्दर नही कहा गया । वाल्मीकि रामायण में लिखा हे जब भगवन राम हनुमानजी से मिले तो उनहोने लक्ष्मण से कहा की बिना वेदों और व्याकरण के कोई मनुंष्य ऐसी संस्कृत बोल ही नही सकता । मेने वाल्मीकि रामायण पड़ी हे और मै आपको उसका चित्र भी भेज रहा हूँ अब सोचिये क्या बन्दर वेद पढ़ते है क्या । मित्रो हम पर हजार साल विदेशियो ने राज किया हे उन्होंने हमारे सारे शास्त्र जलाय और उनमे मिलावट की ताकि हम अपना स्वाभिमान भूल जाये।
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