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🌸 त्रेतायुग में जब रामावतार हुआ था तब वनवास के दौरान श्रीराम को देख रावण की बहन शूर्पणखा उनके रूप पे मोहित हो गई, उनका संग करने के लिए वो सारी मर्यादाओ को लाँघ गई. लेकिन भगवान राम पुरुषोत्तम अवतार के चलते उसे अपना न सके और इस क्रोध में ही शूर्पणखा की नाक गई.
🌸 शूर्पनखा के इस कृत्य के लिए ही वो रावण के वंश नाश का कारण बनी लेकिन रावण की मौत के बाद उसका क्या हुआ ये आपको शायद ही पता होगा.
🌸 रावण के उद्धार के बाद शूर्पनखा और उसकी बहिन कुम्भिनी विभीषण के राज्याभिषेक के बाद कई वर्षो तक वही रही थी पुरे सम्मान के साथ. लेकिन उनकी हरकतों के कारण आखिर में उन्हें समुद्र में डूबो के मार दिया गया या उन्होंने आत्महत्या कर ली दोनों तरह की बातो का उत्तर और अद्भुद रामायण में वर्णन है.
🌸 लेकिन उसके पाप या पुण्य का उसे पूरा सिला मिला उसके अगले जन्म में….
🌸 द्वापर युग आया तो भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में अवतार लिया और इस युग में उन्होंने शूर्पणखा का पिछले जन्म के प्रेम मोह का ऋण चुकाया.
🌸 जब कंस की कृष्ण को मारने की एक कोशिश कामियाब न हुई तो उसने दोनों भाइयो को मथुरा में मल्लयुद्ध (कुश्ती) देखने बुलाया.
🌸 दोनों भाई अपने मित्रो के साथ मथुरा पहुंचे तो कृष्ण को वंहा की एक गली में अद्भुद सुगंध का एहसास हुआ, एक कुबडी औरत जिसके हाथ में इत्र था महल की तरफ बढ़ रही थी. उसका नाम कुब्जा था और वो भी तीन जगहों से टेढ़ी थी, वैसे तो कृष्ण भी टेढ़े थे लेकिन वो उनकी सुंदरता को बढ़ाता था.
🌸 कृष्ण ने उस कुरूप को सुंदरी कह के बुलाया और रोका, पहले तो वो क्रोधित हो गई लेकिन जब उसने कृष्ण को देखा तो उनके रूप पे मोहित हो गई. तब कृष्ण ने कुब्जा से इत्र की मांग की जो वो कंस के लिए ले जा रही थी, हालाँकि इसे देने पर उसे सजा मिल सकती थी लेकिन फिर भी उसने वो कृष्ण को दे दिया.
🌸 तब भगवान कृष्ण ने कुब्जा को इत्र को अपने हाथो से लगाने को कहा, तब कुब्जा ने अपने हाथो से उस इत्र को कृष्ण को लगाया जिससे वो तरोताजा हो गए. बदले में भगवान ने उसके पैरो पे पैर रखे और उसकी गर्दन को पकड़ के ऊपर की और झटका दिया, ये देख देखने वालो के होश उड़ गए.
🌸 भद्दी दिखने वाली कुब्जा अब एक अति सुन्दर महिला बन गई थी, जिसे देख समस्त नगर वाली हैरान रह गए, तब भगवान ने उसे पिछले जन्म का भेद बताया. पिछले जन्म में शूर्पणखा ने जो प्रेम श्रीराम के लिए दिखाया था उसका फल उसे द्वापर में कृष्ण को छूने और उनके द्वारा छू कर सुन्दर बनाये जाने के रूप में मिला.
🌸 कुब्जा की आँखों से अश्रु न रुक रहे थे, वो अब समझ चुकी थी की भगवान को पाने के लिए सुन्दर होना ही बहुत नही है जैसा उसने सुन्दर नारी का रूप धर त्रेतायुग में किया था. अपितु उसके लिए सुन्दर मन की जरुरत होती है जो उसे द्वापर युग में कुब्जा के रूप में मिला.
🌸🌸जय श्री कृष्ण🌸🌸
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