🌷🍀🌷🍀ओ३म्🌷🍀🌷🍀
भूपेश आर्य
🌻दहेज मांगना छोड़ो🌻
दहेज की इस कुटिल प्रथा ने अत्याचार किये भारी।
छोड़ो छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर नारी।।
जैसे बंजारे पहले बैलों को खूब चराते हैं।
फिर वे उन्हें बेचने के हित मोल-तोल बतलाते हैं।।
त्यों लड़के के पिता जबकि घर लड़की वाले आते हैं।
शादी से पहले लड़के की कीमत खूब बताते हैं।।
लड़की वाले बहुत गिड़गिड़ाते हैं पांव दबाते हैं।
किन्तु न वे टस से मस होते वज्र ह्रदय बन जाते हैं।।
हो निराश फिर रोते हैं कन्या के पिता व महतारी।
छोड़ो छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर- नारी ।। १।।
कितने जाति सुधारक त्यागी होने का दम भरते हैं।
दहेज लेने के विरोध में सुन्दर भाषण करते हैं।।
पर, उनके लड़के की शादी का जब अवसर आता है।
किसी रुप में दहेज लेने उनका जी ललचाता है।।
कन्या के पिता कहते हैं हम पर श्रीमान दया करिये।
निज सुपुत्र से कन्या का करके विवाह चिन्ता हरिये।।
यथाशक्ति आपकी करेंगे हम सेवक खातिरदारी।
छोड़ो-छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर-नारी।। २ ।।
लड़के के पिता फरमाते यूं सच्ची बात कहेंगे हम।
जाति-सुधारक हैं इस कारण कभी दहेज न लेंगे हम।।
किन्तु हमें अपने लड़के को एम०ए० पास कराना है।
कोई ऊंची डिग्री लेने लन्दन भी भिजवाना है।।
बीस हजार फिर आदिक का व्यय जो सज्जन भर देंगे।
उसकी कन्या से अपने लड़के की शादी कर देंगे।।
होनहार है पुत्र किसी दिन,होगा अफसर अधिकारी।
छोड़ो छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर नारी।। ३ ।।
कभी-कभी तो दृश्य देखने में ऐसे भी आते हैं।
दहेज लेने कितने कन्या के द्वारे डट जाते हैं।।
देख हरकतें जिनकी बेजा,मात मुड़चिरे खाते हैं।
भाँति-भाँति से लड़की वालों को वे खूब डराते हैं।।
लो बिन ब्याहे ही लड़की को हम तो लौटे जाते हैं।
ऐसी धमकी सुन कन्या के मात-पिता घबराते हैं।।
देते मुँहमाँगा दहेज हैं बेच-बाच पूंजी सारी।
छोड़ो-छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर नारी।। ४ ।।
दहेज के कारण कितनी कन्या क्वारी रह जाती हैं।
दहेज के कारण कितनी कन्या कराल विष खाती हैं।।
दहेज के कारण कितनी कन्या अयोग्य वर पाती हैं।
दहेज के कारण कितनी कन्या निज देह जलाती हैं।
दहेज के कारण ही घर बरबाद सैकड़ों होते हैं।
दहेज के कारण कितने हो ऋणी जन्म-भर रोते हैं।।
दहेज के कारण कितनी हो सन्तति अनपढ़ बेचारी।
छोड़ो-छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर-नारी।। ५ ।।
कन्याओं के मात-पिता आदिक पर नेह-निगाह करो।
सब कुछ दिया सुता जिसने दी,मत दहेज की चाह करो।।
वर कन्या अनुकूल देखकर चाहे जहाँ विवाह करो।
कोई कुछ भी कहता हो कहने दो मत परवाह करो।।
हो ‘प्रकाश’ सदभाव परस्पर,मिटे कलह ,कटुता सारी।
छोड़ो-छोड़ो दहेज लेना भारत के हे नर-नारी।। ६ ।।
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