🌞🌞🌞।।ओ३म्।।🌞🌞🌞
समानी व आकूति: समाना ह्रदयानि व:।
समानमस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति।।
अर्थात्- हे सुख समृद्धि और उन्नति के इच्छुक मनुष्यों, तुम्हारा नारा एक सा होना चाहिए, तुम्हारे हृदय के अन्तर्भाव समान होने चाहिए । तुम्हारा चिन्तन और विचार समान हों, तुम्हारा लक्ष्य समान हो, तुम्हारे सभी कार्य, व्यवहार तथा चिन्तन आदि इस प्रकार के होने चाहिए।
ऐसा आचरण करने से तुम्हारा कल्याण होगा।
धन्यवाद 💐💐💐
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हमारे हृदय के अन्तर्भाव समान होने चाहिए । हमारा चिन्तन और विचार समान हो, हमारा लक्ष्य समान हो, हमारे सभी कार्य, तथा चिन्तन आदि इस प्रकार के होने चाहिए; जिससे मानवमात्र आनन्द में रहें ॥
ReplyDeleteआम् 🙏🙏🙏
Delete🙏🏻
ReplyDeleteअति सुन्दर प्रार्थना,जिसमें समस्त मानवजाति के
ReplyDeleteकल्याण तथा मंगल की कामना है।
अर्थ घटाने सही हैं परंतु भाषांतर सही नहीं
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