🌻🌻ओ३म्🌻🌻
भूपेश आर्य
🌷स्वामी श्रद्धानन्द जी🌷
श्रद्धा से ही श्रद्धानन्द ने किया नाम दुनिया में ।
जमाने की जुबां पर है किया जो काम दुनिया में ।
वकालत छोड़ कर अपनी फकीरी पहन कर चोला ।
किनारे गंगा के आकर गुरुकुल कांगड़ी खोला ।
लगे सन्ध्या हवन होने सुबह और शाम दुनिया में ।। 1
इन्द्र जी और हरिशचन्द्र जी पुत्र गुरुकुल में बिठलाए ।
देखकर उनके पुत्रों को सैकड़ों और भी आए ।
सफलता प्राप्त करता है श्रेष्ठ इंतजाम दुनिया में ।। 2
अलीगढ़ आकर सयैद ने बढ़ाई दाड़ी सनकी सी ।
बराबर हो नहीं पायी श्रद्धानन्द के चमन की सी ।
काम है प्यारा,नहीं प्यारा किसी का चाम दुनिया में ।। 3
बना है विश्वविद्यालय कांगड़ी अब जगत भर में ।
श्रद्धा से नाम लेते हैं श्रद्धानन्द आज घर-घर में ।
कांगड़ी नाम से परिचित शहर और गाम दुनिया में ।। 4
ड़टे संगीनों के आगे वीरवर खोल कर सीना ।
बात की बात पर ही था वीर का मरना और जीना ।
किसी के साथ नहीं जाता धरा,धन,धाम दुनिया में ।। 5
देश पर मरने वालों को जमाना याद करता है।
वीर आगे किसी के भी नहीं फरियाद करता है ।
खोल गया द्वार शुद्धि का,बुद्धि से आम दुनिया में ।। 6
🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷
from Tumblr http://ift.tt/1RGYbEs
via IFTTT
No comments:
Post a Comment