Monday, December 21, 2015

🌹नमस्ते जी 🌹 🌹🌹सुप्रभात 🌹🌹 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 जायेदस्तम् ।ऋ०-३-५३-४ 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 हे ऐश्वर्यशाली पति !...

🌹नमस्ते जी 🌹

🌹🌹सुप्रभात 🌹🌹

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जायेदस्तम् ।ऋ०-३-५३-४
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हे ऐश्वर्यशाली पति ! पत्नी ही घर है ।
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O prosperous husband ! Only Wife is the house .
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ईंट और पत्थर से बने मकान को घर नहीं कहते । पत्नी ही घर है । पत्नी घर को सजाती और सँवारती है ,सुसन्तानों को जन्म देती है ,यथाशक्ति अतिथियों की सेवा करती है ,पंचयज्ञों की व्यवस्था करती है । पत्नी घर की शोभा है ।किसी ने ठीक ही कहा है ->>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>👇👇👇👇👇👇👇👇

माता यस्य गृहे नास्ति ,भार्या च प्रियभाषिणी ,>>>>>>>
अरण्यं तेन गन्तव्यम् ,यथारण्यं तथा गृहम् ।।
अर्थात् जिसके घर में माँ नहीं है और प्रिय बोलने वाली पत्नी नहीं है ,उसे वन में चले जाना चाहिये ,उसके लिये जैसा जंगल है ,वैसा घर है ।
एक कहावत है ,बिन पत्नी घर भूत का डेरा ।
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आज गृहस्थाश्रम नरक बनते जा रहे हैं । कहीं पति अपने आप को राजा समझता है तो कहीं पत्नी अपने को रानी समझती है । कहीं पति अपने को अपमानित समझता है तो कहीं पत्नी । छोटे छोटे पारस्परिक झगड़े विकराल रूप धारण करके तलाक़ तथा अन्य असहनीय ,दु:खद घटनाओं का रूप ले रहे हैं ।
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वेद के अनुसार स्त्री जाति को उच्च स्थान दिया गया है ।उसमें पति पत्नी केलिये दम्पती शब्द का प्रयोग किया गया हैअर्थात् जैसा पति घर का मालिक है ,पत्नी भी उसकी वैसी ही मालिक है । कोई किसी का दास नहीं । धर्म अर्थ काम और मोक्ष में यह अर्द्धांगिनी है न केवल इतना ही ,वेद पढ़ने पढ़ाने के साथ ही अनेक स्त्रियाँ भी लोपामुद्रा आदि वेदमन्त्रों की ऋषिका हुई हैं । जैसी प्रतिष्ठा इनको वैदिक धर्म में प्राप्तहै ,और कहीं नहीं दिखाई देती ।
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अथर्ववेद में कहा है-यो जाम्या अप्रथयस्तद् —–
जो स्त्री जाति को गिराता है वह नीचे गिर जाता है ।
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नारी तुम केवल श्रद्धा हो।
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